**जय श्री राधे कृष्णा जी** **शुभरात्रि वंदन** *शाश्वत सबंध* एक समय की बात है एक सेठ जी थे वे बड़े ही अमीर व्यक्ति थे। *उनकी भगवान में बहुत श्रद्धा थी। *उनकी कोई संतान नहीं थी।* लोगों ने उन्हें सुझाव दिया कि वो एक बालक को गोद ले ले ताकि अंत समय में उन्हें अग्नि देने के लिए उनका बेटा हो। हिन्दू रीति के अनुसार बेटा ही पिता को अग्नि देता है। *सेठ जी* ने ये सुझाव सुनने के बाद कहा कि, मुझे शारीरिक बेटे की आवश्यकता नहीं है। *कृष्ण ही मेरे बेटे हैं*। सेठ जी के पास *कुंजबिहारी जी विग्रह रूप में थे* जिन्हें वो प्यार से कुंजी बुलाते थे क्योंकि वो उन्हें अपना बेटा मानते थे। कुछ वर्षों बाद *सेठ जी का अंतिम समय आ गया और उन्होंने शरीर छोड़ दिया।* जब उन्हें अग्नि देने का समय आया तो लोग आपस में *एक-दूसरे से पुछने लगे कि, सेठ जी को अग्नि कौन देगा?* तभी वहां एक बालक आया। *उसने पीले रंग के वस्त्र पहने हुए थे।* उसने कहा कि, सेठ जी को अग्नि वो देगा। सभी उसे अग्नि देनी की सहमति दे देते हैं। अग्नि देने के बाद स्नान 🚿करना होता है तो *बालक वस्त्र पहन कर ही नदी में गोता लगाने कूद जाता है।* जब सभी लोग सेठ जी के घर आते हैं तो *वो देखते हैं कि, सेठ जी के कुंजबिहारी जी के वस्त्र भी पीले रंग के हैं जैसे वस्त्र वो बालक पहनकर आया था।* कुंज बिहारी जी के वस्त्र भी गीले हैं क्योंकि वो बालक भी वस्त्र पहनकर नदी में स्नान करने गया था तो *सब समझ जाते हैं कि कुंजबिहारी जी ही सेठ जी को अग्नि देने स्वयं आये थे।* *जब हमारा कृष्ण से शाश्वत सबंध स्थापित हो जाता है तब अन्य किसी सबंध की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है।* ‌ ‌ जय श्री कुंजबिहारी ‌ 🌷जय श्री राधे राधे।🌷 🙏🙏

**जय श्री राधे कृष्णा जी**
**शुभरात्रि वंदन**

*शाश्वत सबंध*

एक समय की बात है एक सेठ जी थे वे बड़े ही अमीर व्यक्ति थे। *उनकी भगवान में बहुत श्रद्धा थी। *उनकी कोई संतान नहीं थी।*

लोगों ने उन्हें सुझाव दिया कि वो एक बालक को गोद ले ले ताकि अंत समय में उन्हें अग्नि देने के लिए उनका बेटा हो। हिन्दू रीति के अनुसार बेटा ही पिता को अग्नि देता है।

*सेठ जी* ने ये सुझाव सुनने के बाद कहा कि, मुझे शारीरिक बेटे की आवश्यकता नहीं है। *कृष्ण ही मेरे बेटे हैं*। 

सेठ जी के पास *कुंजबिहारी जी विग्रह रूप में थे* जिन्हें वो प्यार से कुंजी बुलाते थे क्योंकि वो उन्हें अपना बेटा मानते थे। 

कुछ वर्षों बाद *सेठ जी का अंतिम समय आ गया और उन्होंने शरीर छोड़ दिया।* जब उन्हें अग्नि देने का समय आया तो लोग आपस में *एक-दूसरे से पुछने लगे कि, सेठ जी को अग्नि कौन देगा?* तभी वहां एक बालक आया। *उसने पीले रंग के वस्त्र पहने हुए थे।* उसने कहा कि, सेठ जी को अग्नि वो देगा। 

सभी उसे अग्नि देनी की सहमति दे देते हैं।

अग्नि देने के बाद स्नान 🚿करना होता है तो *बालक वस्त्र पहन कर ही नदी में गोता लगाने कूद जाता है।*

जब सभी लोग सेठ जी के घर आते हैं तो *वो देखते हैं कि, सेठ जी के कुंजबिहारी जी के वस्त्र भी पीले रंग के हैं जैसे वस्त्र वो बालक पहनकर आया था।* कुंज बिहारी जी के वस्त्र भी गीले हैं क्योंकि वो बालक भी वस्त्र पहनकर नदी में स्नान करने गया था तो *सब समझ जाते हैं कि कुंजबिहारी जी ही सेठ जी को अग्नि देने स्वयं आये थे।*

*जब हमारा कृष्ण से शाश्वत सबंध स्थापित हो जाता है तब अन्य किसी सबंध की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है।*

‌ ‌ 
जय श्री कुंजबिहारी
‌ 🌷जय श्री राधे राधे।🌷
🙏🙏

+165 प्रतिक्रिया 34 कॉमेंट्स • 280 शेयर

कामेंट्स

Ashwinrchauhan Jan 20, 2021
राधे राधे बहना जी राधारानी की कृपा आप पर आप के पुरे परिवार पर सदेव बनी रहे मेरी आदरणीय बहना जी आप का हर पल मंगल एवं शुभ रहे भगवान श्री कृष्णा जी आप की हर मनोकामना पूरी करे आप का आने वाला दिन शुभ रहे गुड नाईट बहना जी

Arvid bhai Jan 20, 2021
jay shri radhe krisna subh ratri vandan radhe radhe nmskar bhenji

Rajesh Lakhani Jan 20, 2021
JAI SHREE KRISHNA RADHE RADHE SHUBH RATRI BEHENA THAKOR JI KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA AANE WALA HAR PAL SHUBH OR MANGALMAYE HO BEHENA JAI SHREE KRISHNA

Brajesh Sharma Jan 20, 2021
जय गोविंद जय गोपाल जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे कृष्णा जी

शान्ति पाठक Jan 20, 2021
@meera362 🌷🙏जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏शुभ रात्रि वंदन जी🌷आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो 🌷आप एवं आपके परिवार पर ठाकुर जी की कृपा सदैव बनी रहे🌷🙏🌷

शान्ति पाठक Jan 20, 2021
@bachchansingh1 🌷🙏जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏शुभ रात्रि वंदन जी🌷आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो 🌷आप एवं आपके परिवार पर ठाकुर जी की कृपा सदैव बनी रहे🌷🙏🌷

keerti Ballabh Jan 20, 2021
jai shri Radhe Krishna ji 🙏🥀🙏🥀🙏🥀🙏🥀🙏🥀 shubh Ratri vandana 🙏🌺

k l तिवारी Jan 25, 2021
तुम्हारी भाभी की पूजा अर्चना हो गई

k l तिवारी Jan 25, 2021
कल वो स्लोगन लिखा देखा अच्छा सा लगा तो भेज दिया

Jai Mata Di Mar 8, 2021

+56 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 99 शेयर
Jai Mata Di Mar 8, 2021

+53 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 70 शेयर
anju Mar 8, 2021

+14 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 48 शेयर
Anuradha Tiwary Mar 8, 2021

+8 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 11 शेयर

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* एक बार राजा भोज के दरबार में एक सवाल उठा कि ' ऐसा कौन सा कुआं है जिसमें गिरने के बाद आदमी बाहर नहीं निकल पाता?' इस प्रश्न का उत्तर कोई नहीं दे पाया। आखिर में राजा भोज ने राज पंडित से कहा कि इस प्रश्न का उत्तर सात दिनों के अंदर लेकर आओ, वरना आपको अभी तक जो इनाम धन आदि दिया गया है,वापस ले लिए जायेंगे तथा इस नगरी को छोड़कर दूसरी जगह जाना होगा। छः दिन बीत चुके थे।राज पंडित को जबाव नहीं मिला था।निराश होकर वह जंगल की तरफ गया। वहां उसकी भेंट एक गड़रिए से हुई। गड़रिए ने पूछा -" आप तो राजपंडित हैं, राजा के दुलारे हो फिर चेहरे पर इतनी उदासी क्यों? यह गड़रिया मेरा क्या मार्गदर्शन करेगा?सोचकर पंडित ने कुछ नहीं कहा।इसपर गडरिए ने पुनः उदासी का कारण पूछते हुए कहा -" पंडित जी हम भी सत्संगी हैं,हो सकता है आपके प्रश्न का जवाब मेरे पास हो, अतः नि:संकोच कहिए।" राज पंडित ने प्रश्न बता दिया और कहा कि अगर कलतक प्रश्न का जवाब नहीं मिला तो राजा नगर से निकाल देगा। गड़रिया बोला -" मेरे पास पारस है उससे खूब सोना बनाओ। एक भोज क्या लाखों भोज तेरे पीछे घूमेंगे।बस,पारस देने से पहले मेरी एक शर्त माननी होगी कि तुझे मेरा चेला बनना पड़ेगा।" राज पंडित के अंदर पहले तो अहंकार जागा कि दो कौड़ी के गड़रिए का चेला बनूं? लेकिन स्वार्थ पूर्ति हेतु चेला बनने के लिए तैयार हो गया। गड़रिया बोला -" *पहले भेड़ का दूध पीओ फिर चेले बनो। राजपंडित ने कहा कि यदि ब्राह्मण भेड़ का दूध पीयेगा तो उसकी बुद्धि मारी जायेगी। मैं दूध नहीं पीऊंगा। तो जाओ, मैं पारस नहीं दूंगा - गड़रिया बोला। राज पंडित बोला -" ठीक है,दूध पीने को तैयार हूं,आगे क्या करना है?" गड़रिया बोला-" अब तो पहले मैं दूध को झूठा करूंगा फिर तुम्हें पीना पड़ेगा। राजपंडित ने कहा -" तू तो हद करता है! ब्राह्मण को झूठा पिलायेगा?" तो जाओ, गड़रिया बोला। राज पंडित बोला -" मैं तैयार हूं झूठा दूध पीने को ।" गड़रिया बोला-" वह बात गयी।अब तो सामने जो मरे हुए इंसान की खोपड़ी का कंकाल पड़ा है, उसमें मैं दूध दोहूंगा,उसको झूठा करूंगा, कुत्ते को चटवाऊंगा फिर तुम्हें पिलाऊंगा।तब मिलेगा पारस। नहीं तो अपना रास्ता लीजिए।" राजपंडित ने खूब विचार कर कहा-" है तो बड़ा कठिन लेकिन मैं तैयार हूं। गड़रिया बोला-" मिल गया जवाब। यही तो कुआं है!लोभ का, तृष्णा का जिसमें आदमी गिरता जाता है और फिर कभी नहीं निकलता। जैसे कि तुम पारस को पाने के लिए इस लोभ रूपी कुएं में गिरते चले गए। जय श्री कृष्णा जी 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

+200 प्रतिक्रिया 40 कॉमेंट्स • 399 शेयर
Sanjay Awasthi Mar 7, 2021

+203 प्रतिक्रिया 41 कॉमेंट्स • 58 शेयर

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* !! प्रारंभ !! 〰️🔸〰️ एक पुरानी कथा का स्मरण आता है, कि एक फकीर सत्य की खोज में था। उसने अपने गुरु से पूछा, कि सत्य कहां मिलेगा? उसके गुरु ने कहा, सत्य? सत्य वहां मिलेगा, जहां दुनिया का अंत होता है। तो उस दिन से वह फकीर दुनिया का अंत खोजने निकल गया। कहानी बड़ी मधुर है। वर्षों चलने के बाद, भटकने के बाद, आखिर उस जगह पहुंच गया, जहां आखिरी गांव समाप्त हो जाता है, तो उसने गांव के लोगों से पूछा कि दुनिया का अंत कितनी दूर है? उन्होंने कहा, ज्यादा दूर नहीं है। बस यह आखिरी गांव है। थोड़ी ही दूर जाकर वह पत्थर लगा है, जिस पर लिखा है कि यहां दुनिया समाप्त होती है। लेकिन गांव के लोगों ने यह भी कहा कि उधर जाओ मत, खतरा बहुत है वहां। वह फकीर हंसा। उसने कहा, हम उसी की तो खोज में निकले हैं। लोगों ने कहा, वहां बहुत भयभीत हो जाओगे। जहां दुनिया अंत होती है, उस गङ्ढ को तुम देख न सकोगे। मगर फकीर तो उसी की खोज में था, सारा जीवन गंवा दिया था। उसने कहा, हम तो उसी की खोज में हैं और गुरु ने कहा है, जब तक दुनिया के अंत को न पा लोगे, तब तक सत्य न मिलेगा। तो जाना ही पड़ेगा। कहते हैं, फकीर गया। गांव के लोगों की उसने सुनी नहीं। वह उस जगह पहुंच गया जहां आखिरी तख्ती लगी थी, कि यहां दुनिया समाप्त होती है। उसने एक आंख भरकर उस जगह को देखा, शून्य था वहां। कोई तलहटी न थी उस खड्ड में। आगे कुछ था ही नहीं। आप उसकी घबराहट समझ सकते हो। वह जो लौटकर भागा, तो जो यह यात्रा उसने पूरे जनम में पूरी की थी, वह कहते हैं, कि वापिसी में कुछ ही दिनों में पूरी हो गई। वह जो भागा, तो रुका ही नहीं। वह जाकर गुरु के चरणों में ही गिरा। तब भी वह कांप रहा था। तब भी वह बोल नहीं पा रहा था। बामुश्किल, उसको गुरु ने पूछा कि मामला क्या है? हुआ क्या? असल में वह फकीर गूंगे जैसा हो गया था। सिर्फ इशारा करता था पीछे की तरफ, क्योंकि जो देखा था, वह बहुत घबराने वाला था। गुरु ने कहा, नासमझ; मैं समझ गया! लगता है, तू दुनिया के अंत तक पहुंच गया था और तुझे तख्ती मिली होगी जिस पर लिखा होगा कि यहां दुनिया का अंत होता है? उसने कहा, कि बिलकुल ठीक, मिली थी वह तख्ती। तो तूने दूसरी तरफ तख्ती के देखा कि क्या लिखा था? उसने कहा कि दूसरी तरफ? उस तरफ खाली शून्य था। मैं तो उस खड्ड देखकर एक आंख और जो भागा हूं तो रुका ही नहीं कहीं। पानी के लिए भी नहीं, भूख के लिए भी नहीं। उस तरफ तो मैंने नहीं देखा, हिम्मत ही नहीं हुई। उसने कहा, बस, वही तो भूल हो गई। अगर तू दूसरी तरफ तख्ती के देख लेता, तो जहां इस तरफ लिखा था कि यहां दुनिया का अंत होता है तो उस दूसरी तरफ लिखा होगा कि यहां से परमात्मा का प्रारंभ होता है। असल में एक सीमा पूरी होती है तब दूसरी सीमा शुरू होती है। परमात्मा निराकार है। शून्य में उसी निराकार के करीब आप पहुंचोगे। यह कहानी बड़ी अच्छी है, बड़ी कीमती है। ऐसा दुनिया में कहीं है नहीं। निकल मत जाना खोजने उस जगह को जहां तख्ती लगी हो। असल में यह भीतर की बात है। जहां दुनिया समाप्त होती है, इसका मतलब, जहां राग-रंग समाप्त होता है, जहां दुनिया समाप्त होती है, इसका मतलब, जहां जीवन का खेल–खिलौने समाप्त होते हैं, आखिरी पड़ाव आ जाता है। देख लिया सब, जान लिया सब, हो गया दो कौड़ी का, कुछ सार न पाया। सब बुदबुदे टूट गए, फूट गए, सब रंग बेरंग हो गए। दुनिया के अंत होने का अर्थ है, जहां वासना समाप्त हो गई। वासना ही दुनिया है। महत्वाकांक्षा का विस्तार ही संसार है। लेकिन वहां आते ही घबड़ाहट होगी। क्योंकि वहां फिर शून्य साक्षात खड़ा हो जाता है। जहां महत्वाकांक्षा मिटती है, वहां शून्य रह जाता है। जय श्री कृष्णा 🌷🙏🙏🌷

+162 प्रतिक्रिया 36 कॉमेंट्स • 268 शेयर
Jai Mata Di Mar 6, 2021

+112 प्रतिक्रिया 26 कॉमेंट्स • 137 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB