prakash patel
prakash patel Apr 17, 2021

☘️ *_मितली (उल्टी) होने पर अपनाए ये उपाय शर्तिया होगा लाभ मिलेगा आराम_* 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ *उल्टी होने पर अपनाएं ये 8 घरेलू उपाय* 1 नीबू के रस में काला नमक और काली मिर्च डालकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है। 2 पेट में गर्मी बढ़ने के कारण भी उल्टी की समस्या होती है। ऐसे में छाछ में भुना हुआ जीरा और सेंधा नमक डालकर पीने से बहुत जल्दी फायदा होता है। 3 नीबू को काटकर उस पर चीनी डालकर चूसने से इस समस्या में बहुत लाभ होता है। इससे चूसने से पेट के भीतर अन्न विकार खत्म हो जाता है और उल्टी आना रूक जाता है। 4 गर्भवती स्त्री को सुबह शाम हल्के गुनगुने पानी में नीबू का रस देने पर उल्टी में लाभ होगा। 5 तुलसी के रस को शहद के साथ मिलाकर पीड़ि‍त को देने पर उल्टियां बंद हो जाती है। 6 इसके अलावा नमक और शक्कर के घोल में नीबू डालकर पीने से भी लाभ होता है। 💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ 7 चने को भूनकर सत्तू बनाकर खाने से भी उल्टी आना बंद होता है। 8 इसके अलावा गर्भवती स्त्री के पेट पर पानी की गीली पट्टी रखने से भी उल्टियां आना बंद हो जाता है। ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए 📞👉 +91 9974592157 🌀 MSG 👉 +91 7016609049 हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये।

☘️ *_मितली (उल्टी) होने पर अपनाए ये उपाय शर्तिया होगा लाभ मिलेगा आराम_*

🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। 
https://www.facebook.com/groups/367351564605027/


*उल्टी होने पर अपनाएं ये 8 घरेलू उपाय* 
 
1 नीबू के रस में काला नमक और काली मिर्च डालकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।

2 पेट में गर्मी बढ़ने के कारण भी उल्टी की समस्या होती है। ऐसे में छाछ में भुना हुआ जीरा और सेंधा नमक डालकर पीने से बहुत जल्दी फायदा होता है।

3 नीबू को काटकर उस पर चीनी डालकर चूसने से इस समस्या में बहुत लाभ होता है। इससे चूसने से पेट के भीतर अन्न विकार खत्म हो जाता है और उल्टी आना रूक जाता है।

4 गर्भवती स्त्री को सुबह शाम हल्के गुनगुने पानी में नीबू का रस देने पर उल्टी में लाभ होगा।

5 तुलसी के रस को शहद के साथ मिलाकर पीड़ि‍त को देने पर उल्टियां बंद हो जाती है।

6 इसके अलावा नमक और शक्कर के घोल में नीबू डालकर पीने से भी लाभ होता है।
💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के  एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए   हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। 
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7 चने को भूनकर सत्तू बनाकर खाने से भी उल्टी आना बंद होता है।

8 इसके अलावा गर्भवती स्त्री के पेट पर पानी की गीली पट्टी रखने से भी उल्टियां आना बंद हो जाता है।

☘️सभी जानकारी,  घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 
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prakash patel May 6, 2021

💎 काली हल्दी के फायदे.... . पौधे का परिचय श्रेणी : सगंधीय समूह : वनज वनस्पति का प्रकार : शाकीय वैज्ञानिक नाम : कुरकुमा केसिया रोक्स्ब सामान्य नाम : काली हल्दी पौधे की जानकारी उपयोग : काली हल्दी मजबूत एंटीबायोटिक गुणों के साथ चिकित्सा में जडी़ - बूटी के रूप में उपयोग की जाती हैं। इसका प्रयोग घाव, मोच, त्वचा, पाचन तथा लीवर की समस्याओं के निराकरण के लिए किया जाता है । यह शाक कोलस्ट्राँल को कम करने में मदद करती है।🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ चीनी चिकित्सा में कैंसर के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है। इसमें सुंगधित वाष्पशील तेल पाया जाता है जो रक्त से अत्यधिक लिपिड निकालने के लिए, प्लेटलेट्रस के एकत्रीकरण को कम करने और सूजन को कम करने में मदद करता है। उपयोगी भाग : राइजोम्स उत्पादन क्षमता : 5000 कि.ग्रा./हेक्टेयर शुष्क राइजोम्स उत्पति और वितरण : यह मूल रूप से भारत में पाई जाती है। भारत में इसे पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, ओडिशा, उत्तर-पूर्व और उत्तरप्रदेश में उगाया जाता है। वितरण : समान्यत: इसे ब्लेक हल्दी के नाम से जाना जाता है। यह एक महत्वपूर्ण खुशबूदार शाक (जड़ी – बूटी) है जो भूमिगत राइजोम के रूप में पाई जाती है। यह औषधीय और सुगंधित दोनों के लिए प्रयोग की जाती है। और विभिन्न बीमारियों के उपचार में व्यापक रूप से इसका उपयोग किया जाता है। वर्गीकरण विज्ञान, वर्गीकृत कुल : जिन्जीबिरेसी आर्डर : जिन्जीबरलेस प्रजातियां : सी. एरोमेटिका वितरण : समान्यत: इसे ब्लेक हल्दी के नाम से जाना जाता है। यह एक महत्वपूर्ण खुशबूदार शाक (जड़ी – बूटी) है जो भूमिगत राइजोम के रूप में पाई जाती है। यह औषधीय और सुगंधित दोनों के लिए प्रयोग की जाती है। और विभिन्न बीमारियों के उपचार में व्यापक रूप से इसका उपयोग किया जाता है। आकृति विज्ञान, बाह्रय स्वरूप स्वरूप : यह एक सदाबहार शाक है। इसका डंठल 8 से 10 इंच तक की लंबाई कर बढ़ता है। पत्तिंया : यह सरल पत्तियों के साथ एक सदाबहार पौधा है। पत्तियाँ एक दूसरे के सामने की ओर होती है।💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ पत्तियाँ बडी, बहुत सजावटी, अण्डाकार, 3-4 फुट लंबी और 20 से.मी. चौड़ी होती है। फूल : फूल कीप के आकार के और सफेद होते है। फूल काटों के साथ होते है। परिपक्व ऊँचाई : पूर्ण विकास में पौधा लगभग 3 फुट की ऊँचाई तक पहुंच सकता है। ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए 📞👉 +91 9974592157 🌀 MSG 👉 +91 7016609049 हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये।

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prakash patel May 4, 2021

*हिचकी रोकने के घरेलू उपाय 〰️〰️🌸〰️〰️🌸https://www.facebook.com/groups/367351564605027/permalink/480501873289995/ 〰️〰️ हिचकी आने के कई कारण हो सकते हैं इनमें जल्दी-जल्दी भोजन निगलने, अधिक मिर्च वाला खाना खाने, शराब पीना आदि शामिल है। हिचकी को रोकने के लिए आप कई ऐसे उपायों को अपना सकते हैं जो पूरी तरह सुरक्षित और आसान भी है। लेकिन अगर यह सामान्य उपायों के बाद भी हिचकी ना रुक रही हो, तो डॉक्टर से राय कर लेना ही ठीक है। 💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ मयूरचन्दिका भस्म - 250 मि. ग्राम, जहरमोहराखताई पिष्टी - 250 मि. ग्राम रसादि रस - 1 गोली सभी मिलाकर देने अच्छा लाभ होता है । सुबह - शाम ले। 1) नींबू और शहद :- हिचकी को रोकने में नींबू बहुत लाभदायक होता है। यदि हिचकी आती हो एक चम्मच नींबू का ताजा रस निकालें। अब इसमें एक चम्मच शहद डालें। दोनों को मिलाएं और चाट लें। ऐसा करने से हिचकी बंद हो जाएगी। 2) अपनी सांसों को रोके :- एक लंबी सांस लें और उसे कुछ सेकेंड के लिये रोक कर रखें। एक्सपर्ट कहते हैं कि जब फेफड़ों में जमा कार्बन डाइऑक्साइड भर जाएगा और डायफ्राम उसे निकालेगा तो हिचकी आना बंद हो जाएगी। 3) काली मिर्च :- तीन काली मिर्च थोडी सी चीनी या मिश्री का एक टुकडा मुंह में रखकर चबायें,और उसका रस चूंसते रहे,चाहे तो एक घूंट पानी पी सकते है,तत्काल हिचकी बन्द हो जायेगी। यह उपाय पूरी तरह सुरक्षित भी है। 4) चीनी :- आपके घर में चीनी हमेशा मौजूद रहती है ऐसे में हिचकी आने पर तुरंत एक चम्मच चीनी का सेवन करें। इससे थोड़ी देर में ही हिचकी आना बंद हो जाएगी। यह हिचकी आने के कारणों को खत्म करने में कारगर माना जाता है। 5) सिरका :- सिरका का प्रयोग कई सारे बीमारियों में किया जाता है। एक चम्मच सिरके का सेवन हिचकी की समस्या से तुरंत राहत दिला सकता है। इसका खट्टा स्वाद हिचकी बंद करने में मदद करता है। 6) पीनट बटर :- जब हिचकी आए तो एक चम्मच पीनट बटर लें और उसे अच्छे से स्वाद लेकर खाएं। इस प्रक्रिया के दौरान दांत और जीभ दोनों की मदद लें। इससे सांस लेने की प्रक्रिया में बदलाव होगा और हिचकी बंद हो जाएगी। 7) नमक पानी :- थोड़े से नमक को पानी में मिलाकर एक या दो घूंट पीएं। इससे.हिचकी की समस्या में तुरंत आराम मिलेगा। इसके साथ ही धीरे-धीरे सांस लें इससे आपको आराम मिलेगा। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ धीरे खाएं :- कभी-कभी कुछ कारणों से हम अपना ठीक से नहीं चबा पाते हैं जिसकी वजह से हिचकियां आना शुरु हो जाती हैं। खाने के टुकड़ों के बीच में हवा आ जाने के कारण हिचकी आने की समस्या शुरु हो जाती है। धीरे खाना खाने आप उसे अच्छे से चबा सकते हैं। ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए 📞👉 +91 9974592157 🌀 MSG 👉 +91 7016609049 हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये।

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kamlesh kumari May 7, 2021

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पानी से जुड़ी बुरी आदतें आपके लिए बन सकती हैं जहर 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। कहते हैं शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दिनभर में कम से कम आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। पानी पीना फायदेमंद तो होता ही है लेकिन तब जब सही मात्रा में और सही तरीके से पीया जाए। अगर पानी को गलत तरीके से पीया जाए या गलत समय में अधिक मात्रा में पीया जाए तो वह शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, ऐसा आयुर्वेद में वर्णित है। आयुर्वेद को जीवन का विज्ञान माना जाता है,भोजन से लेकर जीवनशैली तक की चर्चाएं इस शास्त्र में समाहित हैं। आज हम आयुर्वेदिक ग्रन्थ अष्टांग संग्रह (वाग्भट्ट) में बताए गए पानी पीने के कुछ कायदों से आपको रूबरू कराने का प्रयास करते हैं। चलिए जानते हैं पानी कब, कैसे और कितना पीना चाहिए…… 1. भक्तस्यादौ जलं पीतमग्निसादं कृशा अङ्गताम!! खाना खाने से पहले यदि पानी पिया जाए तो यह जल अग्निमांद (पाचन क्रिया का मंद हो जाना) यानी डायजेशन में दिक्कत पैदा करता है।* 2. अन्ते करोति स्थूल्त्वमूध्र्वएचामाशयात कफम! खाना खाने के बाद पानी पीने से शरीर में भारीपन और आमाशय के ऊपरी भाग में कफ की बढ़ोतरी होती है। सरल शब्दों में कहा जाए तो खाने के तुरंत बाद अधिक मात्रा में पानी पीने से मोटापा बढ़ता है व कफ संबंधी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं। 3. प्रयातिपित्तश्लेष्मत्वम्ज्वरितस्य विशेषत:!! आयुर्वेद के अनुसार बुखार से पीड़ित व्यक्ति प्यास लगने पर ज्यादा मात्रा में पानी पीने से बेहोशी, बदहजमी, अंगों में भारीपन, मितली, सांस व जुकाम जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। 4. आमविष्टबध्यो :कोश्नम निष्पिपासोह्यप्यप: पिबेत! आमदोष के कारण होने वाली समस्याओं जैसे अजीर्ण और कब्ज जैसी स्थितियों में प्यास न लगने पर भी गुनगुना) पानी पीते रहना चाहिए। 5. मध्येमध्यान्ग्तामसाम्यं धातूनाम जरणम सुखम!! खाने के बीच में थोड़ी मात्रा में पानी पीना शरीर के लिए अच्छा होता है। आयुर्वेद के अनुसार खाने के बीच में पानी पीने से शरीर की धातुओं में समानता आती है और खाना बेहतर ढंग से पचता है। 6. अतियोगेसलिलं तृषय्तोपि प्रयोजितम! प्यास लगने पर एकदम ज्यादा मात्रा में पानी पीना भी शरीर के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। ऐसा करने से पित्त और कफ दोष से संबंधित बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। 7. यावत्य: क्लेदयन्त्यन्नमतिक्लेदोह्य ग्निनाशन:!! पानी उतना ही पीना चाहिए जो अन्न का पाचन करने में जरूरी हो, दरअसल अधिक पानी पीने से भी डायजेशन धीमा हो जाता है। इसलिए खाने की मात्रा के अनुसार ही पानी पीना शरीर के लिए उचित रहता है। 8. बिबद्ध : कफ वाताभ्याममुक्तामाशाया बंधन:! *पच्यत* क्षिप्रमाहार:कोष्णतोयद्रवी कृत:!! कफ और वायु के कारण जो भोजन नहीं पचा है उसे शरीर से बाहर कर देता है। गुनगुना पानी उसे आसानी से पचा देता है। (सभी सन्दर्भ सूत्र अष्टांग संग्रह अध्याय 6 के 41-42,33-34 एवं 36-37 से लिए गए हैं) 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰

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