Sudarshan Bhardwaj
Sudarshan Bhardwaj Apr 14, 2019

🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 जय माता दी 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

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कामेंट्स

Dr. Ratan Singh Apr 14, 2019
🚩🌿जय श्री रामवन्दन जी🌿🚩 🐯🚩जय माँ सिद्धिदात्री देवी🚩🐯 🚩🌞ॐ सूर्यदेवाय नमः🌞🚩 👣या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता ।💠 🌹नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।💐 👏आप और आपके पूरे परिवार🍥 💠को रामजन्मोत्सव एवं राम 🌹 🌋नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं🌷🙏एवं ढेर सारे बधाई🙏 🎎प्रभु श्री राम और माँ सिध्दिदात्री🌹 🌞व सूर्यदेव भगवान की कृपाआप🎡🌸सभी पर हमेसा बनी रहे 🎎 👏आपका दिन शुभअतिसुन्दर शुभ🏵 🙏खूबसूरतऔर मंगलमय हो 🙏 🌲हमेसा खुश एवं स्वास्थ्य रहे🌲 🚩🐯जय माता दी🐯🚩 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

RAMA Apr 14, 2019
शुभ दोपहर प्रणाम राम राम दीदी जय माता दी🌺🚩

sheela Sharma Apr 14, 2019
Jai Shri radhe krishna ji good afternoon sister ji mata rani की kirpa aap aur aapki family par bani rahe sister ji aap hamesha khush raho sister जी

Savita Apr 14, 2019
jai mata di 🌹🌺 MAA bhavani apki sabhi manokamna Puri Kare 💠💠 MAA ambe apke liye apar khushiya v sukh samridhi laye 🌷🌷

dheeraj patel Apr 14, 2019
🚩🌹जय माता दी🌹🚩 🚩🌹जय माता दी🌹🚩 🔔🌹🙏🌹🔔

Sandhya Nagar Apr 14, 2019
🌸मेरे कान्हा का गुस्सा🌸 . कल सुबह मेरे कान्हा ने मेरे साथ एक लीला करी . कुछ दिन पहले हम दोनों बेटे के पास बच्चों से मिलने गए हुए थे.. वापसी पर हमारी पोत्री ने अपनी दादी को जिद करके रख लिया.. . श्रीमतीजी ने कहा कि घर में पहुंचकर बाकी जो मर्जी करो लेकिन सुबह मेरे मंदिर में जोत जरूर चलनी चाहिए.. . मैंने कहा ठीक है भाई जलेगी.. और शाम को जब मैं घर पहुंचा, सुबह उठकर मैंने जोत जगा दी और सारा दिन अपने काम में लगा रहा। . रात हुई मंदिर में गया वहां पर जोत का सामान उठाया, एक गढ़वी में पानी भी रखती है, उस गढवी को उठाया और रसोई घर में ले आया। . जोत को और गढ़वी को साफ-सुथरा करके मैंने रसोई में ही एक साफ कपड़े पर सूखने के लिए रख दिया और फिर रात को सो गया। . सुबह नहा धोकर रसोई में जोत का सामान लेने गया.. जोत रखने वाली प्लेट तथा बाकी सामान उठाया.. . जैसे ही मेरी नजर पानी वाली गढ़वी पर पड़ी तो मेरे को याद आया कि श्रीमती जी ने बोला था कि गढ़वी को पानी से भरकर रात को कान्हा जी के पास जरूर रखना। . मैंने पूछा था क्यों..? तो बोली थी कि रात को कान्हा जी को प्यास लगे तो वह पानी पी लेते हैं। . लेकिन मैं तो गढ़वी में पानी रखना भूल ही गया.. और मेरे कान्हा जी तो बहुत नाराज हुए होंगे.. . प्यास से उनका बुरा हाल हुआ होगा.. मन में बहुत मैं डर गया.. क्या अब मैं कान्हा जी से नजर मिला लूंगा..!! . मैंने जल्दी-जल्दी गढ़वी में पानी भरा और थाली में जोत तथा धूपधानी को रखकर डरते डरते घर में मंदिर की ओर चल पड़ा। . लेकिन मन के किसी कोने में यह डर लग रहा था कि आज तो मेरी खैर नहीं.. . आज तो कान्हा जी बहुत नाराज हुए बैठे होंगे.. और डरते डरते जैसे ही मैंने अपने मंदिर का जो पर्दा होता है उसको खोला.. . उसी समय मेरा हाथ हिल गया... गढवी के ऊपर थाली रखी थी.. हाथ हिलते ही थाली नीचे फर्शपर गिर पड़ी.. और गढ़वी से थोड़ा सा पानी भी नीचे फर्श पर गिर गया.. . जैसे ही मेरी नजर कान्हा जी भर पड़ी.. तो मुझे ऐसा महसूस हुआ कि कान्हा जी गुस्से में अपने नथुने फुला रहे हैं.. और आंखें लाल किए मेरी ओर देख रहे हैं.. . मैं डर गया.. मैंने उसी समय कान्हा जी से माफी मांगी.. कान्हा जी यह क्या किया आप ही मुझको रात को याद दिला देते तो मैं पानी रख देता, मेरा क्या कसूर है..!! . मैं तो अभी नया नया सेवा में लगा हूं.. मुझको क्या पता कैसे करना पड़ता है..!! . लेकिन मैं कान्हा जी से नजर नहीं मिला पा रहा था.. वह मेरे को बहुत ही गुस्से में लग रहे थे.. . तब मैंने किसी तरीके से नाक रगड़ कर माफी मांगी, कान पकड़े और सारा कुछ साफ करके दोबारा से लेकर आया और कान्हा जी के पास पानी रखा। . लेकिन अभी भी मेरे को लग रहा था कि कान्हा जी मुझे घूर घूर कर देख रहे हैं। . उसके बाद जब जोत जलाने लगा.. तो थाली में जोत तो थी, लेकिन वह धूपदानी मेरे को नहीं मिल रही थी.. . फिर मैंने कान्हा जी से पूछा कि वह कहां है भाई.. कहां छुपा रक्खी है..?? तो मेरे को लगा कि अभी भी गुस्से में है.. . मैंने फिर नाक कान पकड़े और माफी मांगी और कान्हा जी को बोला कि कन्हैया अब गुस्सा छोड़ दो.. मेरे से गलती हो गई.. . लेकिन मेरे को क्या पता.. आप ही याद करवा देते... . फिर उसके बाद मन के अंदर से आवाज आई कि तुम टार्च से लेकर ढूंढो.. कहीं मंदिर के नीचे ही मिल सकती है। . मैंने अपने मोबाइल को लेकर उसकी टार्च जलाई तो वहीं पर एक टेबल के नीचे धूपदानी पड़ी थी। . मैंने उसको उठाया साफ करके रखा और जोत जलाई.. उसके बाद भी मैं कान्हा जी से नजर नहीं मिला पा रहा था.. . बड़ी मुश्किल से रसोई में जाकर दूध लेकर आया, गिलास से कान्हा जी को भोग लगाया.. मनाया और उसके बाद कहीं जाकर मुझे लगा कि अब कान्हा जी का चेहरा कुछ शांत हुआ है.. . लेकिन मेरा मन बहुत उदास रहा कि यह गलती मेरे से हुई तो कैसे हुई। . तो ऐसे हैं मेरे कान्हा जी यदि उनकी सेवा में कहीं कुछ भूल चूक हो जाए तो वह गुस्सा भी करते हैं.. तो आगे से कान्हा जी मैं इसका ख्याल रखूंगा. राधे राधे बोलना पड़ेगा 😀 जय हो मेरे गोपाल जी की 🙏🙏

सरला शर्मा Apr 14, 2019
जै माता त्रिकूट निवासिनि जै मां भक्त हितकारिण की।

प्रमोद धींगरा Apr 14, 2019
जय माता दी बहन🙏 तेरा सहारा अम्बे माँ मुझे तेरा सहारा👌बहुत प्यारा भजन है👌माता रानी की कृपा और आशीर्वाद आप और आपके परिवार पर सदा बरसता रहे आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो🙏शुभ संध्या वंदन जी🙏🙏

Shashi Apr 14, 2019
🚩 जय माता दी 🚩🙏 माता रानी आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी करें दी 🙌 आपका हर पल मंगलमय हो ! शुभ संध्या स्नेह वंदन दी 🌹🙏

विशाल जान Apr 14, 2019
जय माता दी बहेना सुभ रात्री सुभ वंदन माता दी की असीम कृपा आप पर हमेशा बनी रहे और आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें जय भोले जय महाकालेश्वर 🌷🌷🌷

Babita Sharma Apr 14, 2019
शुभ रात्रि वंदन भाई 🙏 जय माता दी 🚩 मातारानी आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें 🙏

sheela Sharma Apr 15, 2019
Jai Shri radhe krishna ji good morning sister ji shree महादेव जी ki kirpa aap aur aapki family par bani rahe sister ji aap hamesha khush raho sister जी

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|| औरत ही मकान को घर बनाती है ; चाहे तो नाश कर दे या सर्वनाश ||📚🕉️ एक गांव में एक जमींदार था। उसके कई नौकरों में जग्गू भी था। गांव से लगी बस्ती में, बाकी मजदूरों के साथ जग्गू भी अपने पांच लड़कों के साथ रहता था। जग्गू की पत्नी बहुत पहले गुजर गई थी। एक झोंपड़े में वह बच्चों को पाल रहा था। बच्चे बड़े होते गये और जमींदार के घर नौकरी में लगते गये। सब मजदूरों को शाम को मजूरी मिलती। जग्गू और उसके लड़के चना और गुड़ लेते थे। चना भून कर गुड़ के साथ खा लेते थे। बस्ती वालों ने जग्गू को बड़े लड़के की शादी कर देने की सलाह दी।उसकी शादी हो गई और कुछ दिन बाद गौना भी आ गया। उस दिन जग्गू की झोंपड़ी के सामने बड़ी बमचक मची। बहुत लोग इकठ्ठा हुये नई बहू देखने को। फिर धीरे धीरे भीड़ छंटी। आदमी काम पर चले गये। औरतें अपने अपने घर। जाते जाते एक बुढ़िया बहू से कहती गई – पास ही घर है। किसी चीज की जरूरत हो तो संकोच मत करना, आ जाना लेने। सबके जाने के बाद बहू ने घूंघट उठा कर अपनी ससुराल को देखा तो उसका कलेजा मुंह को आ गया।जर्जर सी झोंपड़ी, खूंटी पर टंगी कुछ पोटलियां और झोंपड़ी के बाहर बने छः चूल्हे (जग्गू और उसके सभी बच्चे अलग अलग चना भूनते थे)। बहू का मन हुआ कि उठे और सरपट अपने गांव भाग चले। पर अचानक उसे सोच कर धचका लगा– वहां कौन से नूर गड़े हैं। मां है नहीं। भाई भौजाई के राज में नौकरानी जैसी जिंदगी ही तो गुजारनी होगी। यह सोचते हुये वह बुक्का फाड़ रोने लगी। रोते-रोते थक कर शान्त हुई। मन में कुछ सोचा। पड़ोसन के घर जा कर पूछा –अम्मां एक झाड़ू मिलेगा? बुढ़िया अम्मा ने झाड़ू, गोबर और मिट्टी दी।साथ मेंअपनी पोती को भेज दिया।वापस आ कर बहू ने एक चूल्हा छोड़ बाकी फोड़ दिये।सफाई कर गोबर-मिट्टी से झोंपड़ीऔर दुआर लीपा। फिर उसने सभी पोटलियों के चने एक साथ किये और अम्मा के घर जा कर चना पीसा।अम्मा ने उसे सागऔर चटनी भी दी। वापस आ कर बहू ने चने के आटे की रोटियां बनाई और इन्तजार करने लगी। जग्गू और उसके लड़के जब लौटे तो एक ही चूल्हा देख भड़क गये।चिल्लाने लगे कि इसने तो आते ही सत्यानाश कर दिया। अपने आदमी का छोड़ बाकी सब का चूल्हा फोड़ दिया। झगड़े की आवाज सुन बहू झोंपड़ी से निकली। बोली –आप लोग हाथ मुंह धो कर बैठिये, मैं खाना निकालती हूं। सब अचकचा गये! हाथ मुंह धो कर बैठे। बहू ने पत्तल पर खाना परोसा – रोटी, साग, चटनी। मुद्दत बाद उन्हें ऐसा खाना मिला था। खा कर अपनी अपनी कथरी ले वे सोने चले गये। सुबह काम पर जाते समय बहू ने उन्हें एक एक रोटी और गुड़ दिया।चलते समय जग्गू से उसने पूछा – बाबूजी, मालिक आप लोगों को चना और गुड़ ही देता है क्या ? जग्गू ने बताया कि मिलता तो सभी अन्न है पर वे चना-गुड़ ही लेते हैं।आसान रहता है खाने में। बहू ने समझाया कि सब अलग अलग प्रकार का अनाज लिया करें। देवर ने बताया कि उसका काम लकड़ी चीरना है। बहू ने उसे घर के ईंधन के लिये भी कुछ लकड़ी लाने को कहा।बहू सब की मजदूरी के अनाज से एक- एक मुठ्ठी अन्न अलग रखती। उससे बनिये की दुकान से बाकी जरूरत की चीजें लाती। जग्गू की गृहस्थी धड़ल्ले से चल पड़ी। एक दिन सभी भाइयों और बाप ने तालाब की मिट्टी से झोंपड़ी के आगे बाड़ बनाया। बहू के गुण गांव में चर्चित होने लगे।जमींदार तक यह बात पंहुची। वह कभी कभी बस्ती में आया करता था। आज वह जग्गू के घर उसकी बहू को आशीर्वाद देने आया। बहू ने पैर छू प्रणाम किया तो जमींदार ने उसे एक हार दिया। हार माथे से लगा बहू ने कहा कि मालिक यह हमारे किस काम आयेगा। इससे अच्छा होता कि मालिक हमें चार लाठी जमीन दिये होते झोंपड़ी के दायें - बायें,तो एक कोठरी बन जाती। बहू की चतुराई पर जमींदार हंस पड़ा। बोला –ठीक, जमीन तो जग्गू को मिलेगी ही। यह हार तो तुम्हारा हुआ। –औरत चाहे घर को स्वर्ग बना दे, चाहे नर्क! हमे लगता है कि देश, समाज, और घर को औरत ही गढ़ती है।📚🕉️

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Sheetal Patel May 20, 2019

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neeta trivedi May 20, 2019

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