Aneeta bajpai
Aneeta bajpai Aug 31, 2017

जनेऊ क्या है ?

जनेऊ क्या है ?

जनेऊ क्या है : आपने देखा होगा कि बहुत से लोग बाएं कांधे से दाएं बाजू की ओर एक कच्चा धागा लपेटे रहते हैं। इस धागे को जनेऊ कहते हैं। जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है। यह सूत से बना पवित्र धागा होता है, जिसे व्यक्ति बाएं कंधे के ऊपरतथा दाईं भुजा के नीचे पहनता है। अर्थात इसे गले में इस तरह डाला जाता है कि वह बाएं कंधे के ऊपर रहे।तीन सूत्र क्यों : जनेऊ में मुख्यरूप से तीन धागे होते हैं। प्रथम यह तीन सूत्र त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक होते हैं। द्वितीय यह तीन सूत्र देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक होते हैं और तृतीय यह सत्व, रज और तम का प्रतीक है। चतुर्थ यह गायत्री मंत्र के तीन चरणों का प्रतीक है। पंचम यह तीन आश्रमों का प्रतीक है। संन्यास आश्रम में यज्ञोपवीत को उतार दिया जाता है।नौ तार : यज्ञोपवीत के एक-एक तार में तीन-तीन तार होते हैं। इस तरह कुल तारों की संख्या नौ होती है। एक मुख, दो नासिका, दो आंख, दो कान, मल और मूत्र के दो द्वारा मिलाकर कुल नौ होते हैं। हम मुख से अच्छा बोले और खाएं, आंखों से अच्छा देंखे और कानों से अच्छा सुने।पांच गांठ : यज्ञोपवीत में पांच गांठ लगाई जाती है जो ब्रह्म, धर्म, अर्ध, काम और मोक्ष का प्रतीक है। यह पांच यज्ञों, पांच ज्ञानेद्रियों और पंच कर्मों का भी प्रतीक भी है।जनेऊ की लंबाई : यज्ञोपवीत की लंबाई 96 अंगुल होती है। इसका अभिप्राय यह है कि जनेऊ धारण करने वाले को 64 कलाओं और 32 विद्याओं को सीखने का प्रयास करना चाहिए। चार वेद, चार उपवेद, छह अंग, छह दर्शन, तीन सूत्रग्रंथ, नौ अरण्यक मिलाकर कुल 32 विद्याएं होती है। 64 कलाओं में जैसे- वास्तु निर्माण, व्यंजन कला, चित्रकारी, साहित्य कला, दस्तकारी, भाषा, यंत्र निर्माण, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, दस्तकारी, आभूषण निर्माण, कृषि ज्ञान आदि।जनेऊ धारण वस्त्र : जनेऊ धारण करते वक्त बालक के हाथ में एक दंड होता है। वह बगैर सिला एक ही वस्त्र पहनता है। गले में पीले रंग का दुपट्टा होता है। मुंडन करके उसके शिखा रखी जाती है। पैर में खड़ाऊ होती है। मेखला और कोपीन पहनी जाती है।मेखला, कोपीन, दंड : मेखला और कोपीन संयुक्त रूप से दी जाती है। कमर में बांधने योग्य नाड़े जैसे सूत्र को मेखला कहते हैं। मेखला को मुंज और करधनी भी कहते हैं। कपड़े की सिली हुई सूत की डोरी, कलावे के लम्बे टुकड़े से मेखला बनती है। कोपीनलगभग 4 इंच चौड़ी डेढ़ फुट लम्बी लंगोटी होती है। इसे मेखला के साथ टांक कर भी रखा जा सकता है। दंड के लिए लाठी या ब्रह्म दंड जैसा रोल भी रखा जा सकता है। यज्ञोपवीत को पीले रंग में रंगकर रखा जाता है।जनेऊ धारण : बगैर सिले वस्त्र पहनकर, हाथ में एक दंड लेकर, कोपीन और पीला दुपट्टा पहनकर विधि-विधान से जनेऊ धारण की जाती है। जनेऊ धारण करने के लिए एक यज्ञ होता है, जिसमें जनेऊ धारण करने वाला लड़का अपने संपूर्ण परिवार के साथ भाग लेता है। यज्ञ द्वारा संस्कार किए गए विशिष्ट सूत्र को विशेष विधि से ग्रन्थित करके बनाया जाता है। तीन सूत्रों वाले इस यज्ञोपवीत को गुरु दीक्षा के बाद हमेशा धारण किया जाता है। अपवित्र होने पर यज्ञोपवीत बदल लिया जाता है।गायत्री मंत्र : यज्ञोपवीत गायत्री मंत्र से शुरू होता है। गायत्री- उपवीत का सम्मिलन ही द्विजत्व है। यज्ञोपवीत में तीन तार हैं, गायत्री में तीन चरण हैं। ‘तत्सवितुर्वरेण्यं’ प्रथम चरण, ‘भर्गोदेवस्य धीमहि’ द्वितीय चरण, ‘धियो यो न: प्रचोदयात्’ तृतीय चरण है। गायत्री महामंत्र की प्रतिमा- यज्ञोपवीत, जिसमें 9 शब्द, तीन चरण, सहित तीन व्याहृतियां समाहित हैं।यज्ञोपवीत धारण करने का मन्त्र है-यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात् ।आयुष्यमग्रं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।

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कामेंट्स

Bheem Nirola Aug 31, 2017
ॐ सत्यं परम धीमहि।। धियो यो न: प्रचोदयात्।।

PP Aug 31, 2017
इन्सान का जन्म ईश्वर से प्रेम करने को हुआ है। पर वोह ईश्वर तक पहुचता ही नही। क्युकी पुरी जिंदगी वोह केवल प्रतिको को पुजते हुए ही बिताता है। इस कारण वोह ईश्वर (आत्मा-परमात्मा) का अनुभव नही कर पाता। यहा एक कहानी बताना चाहूंगा। जब गुरू नानक देव छोटे बच्चे थे, तब एक दिन उन के पिताजी ने उन्हे जन्हाऊ पहनाया। नानक देव ने अपनी पिताजी से पुछा की, ये मै क्यू पहनू? तब पिताजी ने कहा की हम ब्रान्हन है। इसे पहन रखना ये तुम्हारी रक्षा करेगा। नानक देव रात भर सोचते रहे। सुबह वोह अपनी पिताजी के पास गये और जन्हेऊ उतार के उनके पास दे दिया। और कहा की, " अगर मै स्नान करने जाऊंगा तो यह भिग जायेगा, और जल्द ही कमकुवत होके तुट जायेगा। अगर मै इसे अग्नी के पास ले जाऊ तो अग्नी इसे जला देगा। अगर ये धागा जिसे आप और ना जाने कीतने पंडित जन जन्हेऊ कहते है, यह खुद की रक्षा नही कर सकता वोह मेरी रक्षा कैसे कर पायेगा। उस से बेहतर वोह परम अविनाशी ईश्वर को मै अपने ह्रदय मै बिठाकर उस का नाम अपने होठें पर रखुंगा। वोह ही मेरी रक्षा करेंगे।" और एक बात ना ही हमे हिन्दु बनना है, ना ही मुसलमान बनना है सबसे पहले हमे एक अच्छा इन्सान बनना है। राम कृष्ण हरी

Bheem Nirola Aug 31, 2017
सत्यमेव है ।पुर्ण सत्य। सबसे पहले ऋग्वेद काल आदेश ,,,मनुर्भव ।।।। मनुष्य बनो।। फिर।।उतिष्ठत जाग्रत ।। चरैवेति चरैवेति ।। ।।असतो मा सत् गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय।। मृत्यु र्मा अमृतं गमय ।

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