Vivek Singh
Vivek Singh Jul 5, 2017

Brahma ka panchwa sir !!

#महादेव #ज्ञानवर्षा
Brahma ka panchwa sir !!

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कामेंट्स

Ajay Raj Khetra Nov 25, 2020

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Kumarpal Shah Nov 25, 2020

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Nishi Ahuja Nov 25, 2020

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Kumarpal Shah Nov 25, 2020

🕉️ namah shivay 🙏 @ *How can I train my brain to stay focused?* This state of awakening is the need for focus. There is a story related with it. In ancient India there was a King called Janaka, who was also a sage. One day Janaka was taking a nap on his flower-strewn bed with his servants fanning him and his soldiers standing guard outside his door. As he dozed off, he had a dream in which a neighboring King defeated him in battle, took him prisoner, and had him tortured. As soon as the torture began, Janaka woke with a start to find himself lying on his flower-strewn bed with his servants fanning him and his soldiers on guard. Once again he dozed off and had the same dream. And once again he woke up to find himself safe and comfortable in his palace. Now Janaka began to be disturbed by several thoughts: While he was asleep, the world of his dreams had seemed so real. Now that he was awake, the world of the senses seemed real. Which of these two worlds is the real one, he wanted to know. None of the philosophers, scholars, and seers he consulted could give him an answer. And for many years he searched in vain, till one day a man called Ashtavakra knocked at the door of the palace. Now, Ashtavakra means " eight (ashta) deformed or crooked parts of body," and he got that name because that is exactly what his body had been from birth. At first the King was not disposed to take this man seriously. "How can a misshapen man like you be the carrier of a wisdom denied to my seers and scholars?" he asked. "Right from my childhood, all avenues have been closed to me - so I avidly pursued the path of wisdom," was Ashtavakra's reply. "Speak, then," said the King. So this is what Ashtavakra said: "O King, neither the waking state nor the dream state is real. When you are awake, the world of dreams does not exist and when you dream the world of the senses does not exist. Therefore, neither is real." "If both the waking and the dream states are unreal, then what is real?" asked the King. "There is a state beyond these two. Discover that. It alone is real."

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Kumarpal Shah Nov 25, 2020

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Kumarpal Shah Nov 25, 2020

🕉️ namah shivay 🙏 @ *बच्चों के पढ़ने का कमरा वास्तु शास्त्र अनुसार* यहाँ पर हम आपको बच्चो के कमरे के वास्तु टिप्स बता रहे जिन्हे अपनाकर आप अपने बच्चो के भविष्य में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते है: ☀️हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी सन्तान बहुत ही योग्य हो, खूब पढ़े लिखे और उसके वंश का नाम रौशन करें, इसके लिए वह हर तरह से कोशिश करता है। ☀️शास्त्रों के अनुसार बच्चो के भविष्य, उनके उत्तम विकास के लिए वास्तु के नियमों की बिलकुल भी अनदेखी नहीं करनी चाहिए । ☀️किसी भी घर में बच्चों के कमरे का वास्तु का उतना ही महत्व है जितना घर के मुखिया के लिए बैड रूम का । ☀️ बच्चो का कमरा वास्तु के अनुरूप होगा तो उनका शरीर, मन और मस्तिष्क स्वस्थ रहेगा वह ना केवल किसी भी कार्य में पूरे जोश से बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे वरन उन्हें अपनी मेहनत चाहे वह शिक्षा में , खेल में , किसी भी ललित कलाओं में कहीं भी वह अपनी भागेदारी करें उन्हें उत्कर्ष परिणाम प्राप्त करने में आसानी होगी । ☀️घर में बच्चों का कमरा उसकी अपनी छोटी दुनिया होती है उसका कमरा उसके विकास, हर्ष-उल्लास, सृजन और उसके सपनो का केंद्र होता है। इसलिए अगर आप चाहते है की आपका बच्चा आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरे, अपनी उम्र के बच्चो में अपनी कक्षा में आगे रहे तो आपके भवन में बच्चे के कमरे का स्थान बिलकुल सही होना चाहिए । वह जिस कमरे में रहता है जहाँ पर पढ़ता है, अपना समय बिताता है वहाँ पर अवश्य ही ध्यान दीजिये । ☀️भवन में बच्चों का कमरा ईशान (ne) , पूर्व(east),(north)उत्तर, पश्चिम(वेस्ट) या वायव्य दिशा (नोर्थ west)में होना शुभ माना गया है। वैसे पश्चिम दिशा बच्चो के कमरे के लिए सबसे उपयुक्त मानी गयी है। लेकिन आग्नेय, दक्षिण अथवा नैऋत्य कोण में बच्चों का कमरा नहीं होना चाहिए। ☀️बच्चों के कमरे का interior पूरी तरह से उनके अनुकूल ही होनी चाहिए तभी वे श्रेष्ठ परिणाम दे पाएंगे, उनका समुचित विकास हो पायेगा और वह अच्छे संस्कार ग्रहण कर पाएंगे । ☀️बच्चो के कमरे में उनका बेड कमरे के दक्षिण-पश्चिम कोने / पश्चिम अथवा दक्षिण में रखें और सोते समय उनका सर पूर्वी या दक्षिणी दिशा में रहे। ☀️पूर्व दिशा की तरफ सर होने से बच्चो की बुद्धि तेज होती है और वह आसानी से ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं । ☀️बच्चे के कमरे में उसका बेड ,उसकी स्टडी टेबल, उस कमरे का रंग, उसके कमरे में दीवारो पर चित्र, घडी, कमरे में रौशनी की व्यवस्था, खिड़कियां, दरवाजे आदि की दिशा बिलकुल सही होनी चाहिए । ☀️बच्चो की पढ़ने की कुर्सी-मेज़ ईशान, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए। ☀️बच्चा पढ़ते समय इस तरह से बैठे की उसका मुंह ईशान कोण या पूर्व दिशा की ओर तथा पीठ पश्चिम दिशा की तरफ हो । ☀️अध्ययन कक्ष में भोजन करने से बचना चाहिए। अगर इस कमरे में खाना-पीना करना ही हो तो ध्यान रखें खाने के बाद जूठे बर्तन तुरंत बाहर रख दे ☀️ विद्यार्थियों को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व का कोना) की ओर मुंह करके पढ़ाई करनी चाहिए। यदि इस दिशा में पढ़ाई करना संभव न हो तो पूर्व या उत्तर या पश्चिम दिशा में मुंह करके पढ़ाई कर सकते हैं। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके पढ़ाई करना शुभ नहीं माना गया है। ☀️स्टडी रूम में पूर्व-उत्तर की ओर खिड़की होगी तो श्रेष्ठ रहता है। ☀️इस कमरे की छत पिरामिड के आकार वाली हो तो सर्वश्रेष्ठ रहता है। ऐसे कमरे में की गई पढ़ाई लंबे समय तक याद रहती है। ☀️बच्चों की स्टडी टेबल पर छोटा सा पिरामिड भी रख सकते हैं। ☀️पढ़ाई करते समय अपने आस-पास का वातावरण शुद्ध और सुगंधित होना चाहिए, कमरे में दुर्गंध नहीं होनी चाहिए। ☀️पढ़ाई की टेबल पर आवश्यक सामग्री ही होनी चाहिए। अनावश्यक किताब को तुरंत हटा देना चाहिए ☀️books को कभी भी pileup करके ना रखे ☀️ब्रह्म मुहूर्त पढ़ने का समय सबसे अच्छा समय होता है। सूर्योदय से पहले यानी सुबह 4.30 बजे से सुबह 10 बजे तक पढ़ाई करना लाभदायक रहता है। ☀️अध्ययन कक्ष में माता सरस्वती, गणेशजी या अपने प्रिय देवी-देवता की फोटो लगा सकते हैं। इस कमरे में सिर्फ प्रेरक फोटो लगानी चाहिए।

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Master ji Nov 24, 2020

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