Krishna Singh
Krishna Singh Oct 25, 2017

क्या आप जानते हैं कि सर्जरी के सर्जक जनक हमारे ऋषि मुनि है

क्या आप जानते हैं कि सर्जरी के सर्जक जनक  हमारे ऋषि मुनि है

कया आप जानते हैं कि सर्जरी के सर्जक जनक हम है
प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली अपने समय में अपने समयानुसार अति उन्नत अवस्था में थी। भारतीय चिकित्सा के मूलतः तीन अनुशासन थे --
१. काय चिकित्सा (मेडीसिन) -- जिसके मुख्य प्रतिपादक ऋषि - चरक ,अत्रि, हारीति व अग्निवेश आदि थे ।
२. शल्य चिकित्सा -- मुख्य शल्यक थे- धन्वन्तरि, सुश्रुत, औपधेनव, पुषकलावति।
३. स्त्री एवम बाल रोग -- जिसके मुख्य ऋषि कश्यप थे।
डा ह्रिश्च बर्ग ( जर्मनी) का कथन है -- “ The whole plastic surgery in Europe had taken its new flight when these cunning devices of Indian workers became known to us. The transplaats of sensible skin flaps is also Indian method.” डा ह्वीलोट का कथन है - “vaccination was known to a physician’ Dhanvantari”, who flourished before Hippocrates.” इन से ज्ञात होती है, भारतीय चिकित्सा शास्त्र के स्वर्णिम काल की गाथा।
रोगी को शल्य-परामर्श के लिये उचित प्रकार से भेजा जाता था। एसे रोगियों से काय –चिकित्सक कहा करते थे -- “अत्र धन्वंतरिनाम अधिकारस्य क्रियाविधि।“-- अब शल्य चिकित्सक इस रोगी को अपने क्रियाविधि में ले।
सुश्रुत के समय प्रयोग होने वाली शल्य –क्रिया विधियां --
१. आहार्य -- ठोस वस्तुओंको शरीर से निकालना( Extraction-foren bodies).
२. भेद्य -- काटकर निकालना (Excising).
३. छेद्य -- चीरना (incising)
४. एश्य -- शलाका डालना आदि (Probing)
५. लेख्य -- स्कार, टेटू आदि बनाना (Scarifying)
६. सिव्य -- सिलाई आदि करना (suturing)
७. वेध्य -- छेदना आदि (puncturing etc)
८. विस्रवनिया -- जलीय अप-पदार्थों को निकालना (Tapping body fluids)
शल्य क्रिया पूर्व कर्म (प्री-आपरेटिव क्रिया) -- रात्रि को हलका खाना, पेट, मुख, मलद्वार की सफ़ाई, ईश-प्रार्थना, सुगन्धित पौधे, बत्तियां –नीम, कपूर. लोबान आदि जलाना ताकि कीटाणु की रोकथाम हो।
शल्योपरान्त कर्म -- रोगी को छोडने से पूर्व ईश-प्रार्थना, पुल्टिस लगाकर घाव को पट्टी करना, प्रतिदिन नियमित रूप से पट्टी बदलना जब तक घाव भर न जाय, अधिक दर्द होने पर गुनुगुने घी में भीगा कपडा घाव पर रखा जाता था।
सुश्रुत के समय प्रयुक्त शल्य-क्रिया के यन्त्र व शस्त्र -- (Instuments & Equppements) -- कुल १२५ औज़ारों का सुश्रुत ने वर्णन किया है-- (देखिये संलग्न- चित्र-१,२,३)
(अ) -- यन्त्र -- (अप्लायन्स) -- १०५ -- स्वास्तिक (फ़ोर्सेप्स)२४ प्रकार; सन्डसीज़ (टोन्ग्स)-दो प्रकार; ताल यन्त्र (एकस्ट्रेक्सन फ़ोर्सेप्स)-दो प्रकार; नाडी यन्त्र(केथेटर आदि)-२० प्रकार; शलाक्य (बूझी आदि)-३० प्रकार; उपयन्त्र –मरहम पट्टी आदि का सामान;--कुल १०४ यन्त्र; १०५ वां यन्त्र शल्यक का हाथ।
(ब) -- शस्त्र- (इन्सट्रूमेन्ट्स) -- २० -- चित्रानुसार।
इन्स्ट्रूमेन्ट्स सभी परिष्क्रत लोह (स्टील के बने होते थे। किनारे तेज, धार-युक्त होते थे , वे लकडी के बक्से में ,अलग-अलग भाग बनाकर सुरक्षित रखे जाते थे।
अनुशस्त्र -- (सब्स्टीच्यूड शस्त्र) -- बम्बू, क्रस्टल ग्लास, कोटरी, नेल, हेयर, उन्गली आदि भी घाव खोलने में प्रयुक्त करते थे।
निश्चेतना (एनास्थीसिया) -- बेहोशी के लिये सम्मोहिनी नामक औषधियां व बेहोशी दूर करने के लिये संजीवनी नामक औषधियां प्रयोग की जाती थीं।
शमन- औषधि द्वारा चिकित्सा,
इसकी परिधि बहुत व्याप्त थी। आठ
प्रकार की चिकित्साएं बताई गई हैं।
(१) काय चिकित्सा-सामान्य चिकित्सा
(२) कौमार भृत्यम्-बालरोग चिकित्सा
(३) भूत विद्या- मनोरोग चिकित्सा
(४) शालाक्य तंत्र- उर्ध्वांग अर्थात् नाक,
कान, गला आदि की चिकित्सा
(५) शल्य तंत्र-शल्य चिकित्सा
(६) अगद तंत्र-विष चिकित्सा
(७) रसायन-रसायन चिकित्सा
(८) बाजीकरण-पुरुषत्व वर्धन
औषधियां:- चरक ने कहा, जो जहां रहता है,
उसी के आसपास प्रकृति नेरोगों की औषधियां दे रखी हैं। अत: वे अपनेआसपास के पौधों,
वनस्पतियों का निरीक्षण व प्रयोग करनेका आग्रह करते थे। एक समय विश्व के अनेक
आचार्य एकत्रित हुए, विचार-विमर्श हुआऔर उसकी फलश्रुति आगे चलकर ‘चरक
संहिता‘ के रूप में सामने आई। इस संहिता मेंऔषधि की दृष्टि से ३४१ वनस्पतिजन्य,१७७ प्राणिजन्य, ६४ खनिज द्रव्यों का उल्लेख है। इसी प्रकार सुश्रुतसंहिता में ३८५ वनस्पतिजन्य, ५७प्राणिजन्य तथा ६४ खनिज द्रव्यों से
औषधीय प्रयोग व विधियों का वर्णन है।इनसे चूर्ण, आसव, काढ़ा, अवलेह आदि अनेक में
रूपों औषधियां तैयार होती थीं। इससे पूर्वकाल में भी ग्रंथों में कुछ अद्भुत
औषधियों का वर्णन मिलता है। जैसेबाल्मीकी रामायण में राम-रावण युद्ध केसमय जब लक्ष्मण पर प्राणांतक आघात हुआ
और वे मूर्छित हो गए, उस समय इलाज हेतुजामवन्त ने हनुमान जी के पास हिमालय में
प्राप्त होने वाली चार दुर्लभ औषधियों का वर्णन किया।मृत संजीवनी चैव विशल्यकरणीमपि।
सुवर्णकरणीं चैव सन्धानी च महौषधीम्॥युद्धकाण्ड ७४-३३
(१) विशल्यकरणी-शरीर में घुसे अस्त्रनिकालने वाली
(२) सन्धानी- घाव भरने वाली
(३) सुवर्णकरणी-त्वचा का रंग ठीक रखने वाली
(४) मृतसंजीवनी-पुनर्जीवन देने वाली चरक के बाद बौद्धकाल में नागार्जुन,
वाग्भट्ट आदि अनेक लोगों के प्रयत्न से रस शास्त्र विकसित हुआ। इसमें पारे को शुद्ध
कर उसका औषधीय उपयोग अत्यंत परिणामकारक रहा। इसके अतिरिक्त
धातुओं, यथा-लौह, ताम्र, स्वर्ण, रजत, जस्त को विविध रसों में डालना और गरम करना-
इस प्रक्रिया से उन्हें भस्म में परिवर्तित करने की विद्या विकसित हुई। यह भस्म और पादपजन्य औषधियां भी रोग निदान में
काम आती हैं।
शल्य चिकित्सा- कुछ वर्षों पूर्व इंग्लैण्ड के शल्य चिकित्सकों के विश्व प्रसिद्ध संगठन
ने एक कैलेण्डर निकाला, उसमें विश्व के अब तक के श्रेष्ठ शल्य चिकित्सकों (सर्जन) के
चित्र दिए गए थे। उसमें पहला चित्र आचार्य सुश्रुत का था तथा उन्हें विश्व का पहला शल्य चिकित्सक
बताया गया था।
वैसे भारतीय परम्परा में शल्य चिकित्सा का इतिहास बहुत प्राचीन है।
भारतीय चिकित्सा के देवता धन्वंतरि को शल्य
क्रिया का भी जनक माना जाता है।
प्राचीनकाल में इस क्षेत्र में हमारे देश के चिकित्सकों ने अच्छी प्रगति की थी। अनेक
ग्रंथ रचे गए। ऐसे ग्रंथों के रचनाकारों में सुश्रुत, पुष्कलावत, गोपरक्षित, भोज,
विदेह, निमि, कंकायन, गार्ग्य, गालव, जीवक, पर्वतक, हिरण्याक्ष, कश्यप आदि के
नाम विशेष उल्लेखनीय हैं।
इन रचनाकारों के अलावा अनेक प्राचीन ग्रंथों से इस क्षेत्र में
भारतीयों की प्रगति का ज्ञान होता है। ऋग्वेद तथा अथर्ववेद में दिल, पेट
तथा वृक्कों के विकारों का विवरण है। इसी तरह शरीर में नवद्वारों तथा दस
छिद्रों का विवरण दिया गया है।
वैदिक काल के शल्य चिकित्सक मस्तिष्क की शल्य क्रिया में निपुण थे। ऋग्वेद (८-८६-२) के
अनुसार जब विमना और विश्वक ऋषि उद्भ्रान्त हो गए थे, तब शल्य
क्रिया द्वारा उनका रोग दूरकिया गया। इसी ग्रंथ में नार्षद ऋषि का भी विवरण है।
जब वे पूर्ण रूप से बधिर हो गए तब अश्विनी कुमारों ने उपचार करके उनकी श्रवण शक्ति वापस
लौटा दी थी। नेत्र जैसे कोमल अंग की चिकित्सा तत्कालीन चिकित्सक कुशलता से कर लेते थे।
ऋग्वेद (१-११६-११) में शल्य क्रिया द्वारा वन्दन ऋषि की ज्योति वापस लाने का उल्लेख
मिलता है।
हमारे पुराणों में भी शल्य क्रिया के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई। ‘शिव पुराण‘के अनुसार
जब शिव जी ने दक्ष का सर काट दिया थाn तब अश्विनी कुमारों ने उनको नया सर लगाया था। इसी तरह गणेश
जी का मस्तक कट जाने पर उनके धड़ पर हाथी का सर जोड़ा गया था।
रामायण‘ तथा ‘महाभारत‘ में भी ऐसे कुछ उदाहरण मिलते हैं। ‘रामायण‘ में एक स्थान पर कहा है कि ‘याजमाने स्वके नेत्रे उद्धृत्याविमना ददौ।‘ अर्थात् आवश्यकता पड़ने पर एक मनुष्य की आंख
निकालकर दूसरे को लगा दी जाती थी।
सुश्रुत द्वारा वर्णित शल्य क्रियाओं के नाम इस प्रकार हैं
१) छेद्य (छेदन हेतु) (२) भेद्य (भेदन हेतु) (३) लेख्य (अलग करने हेतु) (४) वेध्य
(शरीर में हानिकारक द्रव्य निकालने के लिए) (५) ऐष्य (नाड़ी में घाव ढूंढने के लिए)
(६) अहार्य (हानिकारक उत्पत्तियों को निकालने के लिए) (७)विश्रव्य (द्रव निकालने के लिए)
(८) सीव्य (घाव सिलने के लिए)
सुश्रुत संहिता में शस्त्र क्रियाओं के लिए आवश्यक यंत्रों (साधनों) तथा शस्त्रों (उपकरणों) का भी विस्तार से
वर्णन किया गया है। आजकल की शल्यक्रिया में ‘फौरसेप्स‘ तथा ‘संदस‘ यंत्र
फौरसेप्स तथा टोंग से मिलते-जुलते हैं।
सुश्रुत के महान ग्रन्थ में २४ प्रकार के स्वास्तिकों, २ प्रकार के संदसों, २८
प्रकार की शलाकाओं तथा २० प्रकार की नाड़ियों (नलिका) का उल्लेख हुआ है।
इनके अतिरिक्त शरीर के प्रत्येक अंग की शस्त्र-क्रिया के लिए बीस प्रकार के
शस्त्रों (उपकरणों) का भी वर्णन किया गया है। पूर्व में जिन आठ प्रकार
की शल्य क्रियाओं का संदर्भ आया है, वे विभिन्न साधनों व उपकरणों से
की जाती थीं। उपकरणों (शस्त्रों) के नाम इस प्रकार हैं-
अर्द्धआधार, अतिमुख, अरा, बदिशा, दंत
शंकु, एषणी, कर-पत्र, कृतारिका,
कुथारिका, कुश-पात्र, मण्डलाग्र,
मुद्रिका, नख शस्त्र, शरारिमुख, सूचि,
त्रिकुर्चकर, उत्पल पत्र, वृध-पत्र, वृहिमुख
तथा वेतस-पत्र।
आज से कम से कम तीन हजार वर्ष पूर्व सुश्रुत ने सर्वोत्कृष्ट इस्पात के उपकरण
बनाये जाने की आवश्यकता बताई। आचार्य ने इस पर भी बल दिया है कि उपकरण तेज
धार वाले हों तथा इतने पैने कि उनसे बाल को भी दो हिस्सों में काटा जा सके।
शल्यक्रिया से पहले व बाद में वातावरण व उपकरणों की शुद्धता (रोग-
प्रतिरोधी वातावरण) पर सुश्रुत ने इतना जोर दिया है तथा इसके लिए ऐसे
साधनों का वर्णन किया है कि आज के शल्य चिकित्सक भी दंग रह जाएं। शल्य
चिकित्सा (सर्जरी) से पहले रोगी को संज्ञा-शून्य करने (एनेस्थेशिया)
की विधि व इसकी आवश्यकता भी बताई गई है। ‘भोज प्रबंध‘ (९२७ ईस्वी) में
बताया गया है कि राजा भोज को कपाल की शल्य-क्रिया के पूर्व ‘सम्मोहिनी‘
नामक चूर्ण सुंघाकर अचेत किया गया था।
चौदह प्रकार की पट्टियां- इन उपकरणों के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर
बांस, स्फटिक तथा कुछ विशेष प्रकार के प्रस्तर खण्डों का उपयोग भी शल्य
क्रिया में किया जाता था। शल्य क्रिया के मर्मज्ञ महर्षि सुश्रुत ने १४
प्रकार की पट्टियों का विवरण किया है। उन्होंने हड्डियों के खिसकने के छह
प्रकारों तथा अस्थि-भंग के १२ प्रकारों की विवेचना की है। यही नहीं,
उनके ग्रंथ में कान संबंधी बीमारियों के २८ प्रकार तथा नेत्र-रोगों के २६ प्रकार
बताए गए हैं।
सुश्रुत संहिता में मनुष्य की आंतों में कर्कट रोग (कैंसर) के कारण उत्पन्न हानिकर
तन्तुओं (टिश्युओं) को शल्य क्रिया से हटा देने का विवरण है।
शल्यक्रिया द्वारा शिशु-जन्म (सीजेरियन) की विधियों का वर्णन किया गया है।
‘न्यूरो-सर्जरी‘ अर्थात् रोग-मुक्ति के लिए नाड़ियों पर शल्य-क्रिया का उल्लेख है
तथा आधुनिक काल की सर्वाधिक पेचीदी क्रिया ‘प्लास्टिक सर्जरी‘
का सविस्तार वर्णन सुश्रुत के ग्रन्थ में है। आधुनिकतम विधियों का भी उल्लेख इसमें है।
कई विधियां तो ऐसी भी हैं जिनके सम्बंध में आज का चिकित्सा शास्त्र भी अनभिज्ञ है।
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि प्राचीन भारत में शल्य क्रिया अत्यंत उन्नत अवस्था में थी, जबकि शेष विश्व इस विद्या से बिल्कुल अनभिज्ञ था।
``जय सनातन´´
``जय भारत´´

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🚩🙏🏻*जय श्री राम*🙏🏻🚩 #हनुमान_चालीसा_का_अद्भ़ुत_रहस्य ! भगवान को अगर किसी युग में आसानी से प्राप्त किया जा सकता है तो वह युग है कलयुग। इस कथन को सत्य करता एक दोहा रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने लिखा है नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू॥ कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू॥ #अर्थ :- कलियुग में न कर्म है, न भक्ति है और न ज्ञान ही है, राम नाम ही एक आधार है। कपट की खान कलियुग रूपी कालनेमि के (मारने के) लिए राम नाम ही बुद्धिमान और समर्थ श्री हनुमान्‌जी हैं॥ जिसका अर्थ है की कलयुग में मोक्ष प्राप्त करने का एक ही लक्ष्य है वो है भगवान का नाम स्मरण। ऐसा माना जाता है कि कलयुग में हनुमान जी सबसे जल्दी प्रसन्न हो जाने वाले भगवान हैं। उन्होंने हनुमान जी की स्तुति में कई रचनाएँ रची जिनमें हनुमान बाहुक, हनुमानाष्टक और हनुमान चालीसा प्रमुख हैं। हनुमान चालीसा की रचना के पीछे एक बहुत जी रोचक कहानी है जिसकी जानकारी शायद ही किसी को हो। आइये जानते हैं हनुमान चालीसा की रचना की कहानी :- ये बात उस समय की है जब भारत पर मुग़ल सम्राट अकबर का राज्य था। सुबह का समय था एक महिला ने पूजा से लौटते हुए तुलसीदास जी के पैर छुए। तुलसीदास जी ने नियमानुसार उसे सौभाग्यशाली होने का आशीर्वाद दिया। आशीर्वाद मिलते ही वो महिला फूट-फूट कर रोने लगी और रोते हुए उसने बताया कि अभी-अभी उसके पति की मृत्यु हो गई है। इस बात का पता चलने पर भी तुलसीदास जी जरा भी विचलित न हुए और वे अपने आशीर्वाद को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थे। क्योंकि उन्हें इस बात का ज्ञान भली भाँति था कि भगवान राम बिगड़ी बात संभाल लेंगे और उनका आशीर्वाद खाली नहीं जाएगा। उन्होंने उस औरत सहित सभी को राम नाम का जाप करने को कहा। वहां उपस्थित सभी लोगों ने ऐसा ही किया और वह मरा हुआ व्यक्ति राम नाम के जाप आरंभ होते ही जीवित हो उठा। यह बात पूरे राज्य में जंगल की आग की तरह फैल गयी। जब यह बात बादशाह अकबर के कानों तक पहुंची तो उसने अपने महल में तुलसीदास को बुलाया और भरी सभा में उनकी परीक्षा लेने के लिए कहा कि कोई चमत्कार दिखाएँ। ये सब सुन कर तुलसीदास जी ने अकबर से बिना डरे उसे बताया की वो कोई चमत्कारी बाबा नहीं हैं, सिर्फ श्री राम जी के भक्त हैं। अकबर इतना सुनते ही क्रोध में आ गया और उसने उसी समय सिपाहियों से कह कर तुलसीदास जी को कारागार में डलवा दिया। तुलसीदास जी ने तनिक भी प्रतिक्रिया नहीं दी और राम का नाम जपते हुए कारागार में चले गए। उन्होंने कारागार में भी अपनी आस्था बनाए रखी और वहां रह कर ही हनुमान चालीसा की रचना की और लगातार 40 दिन तक उसका निरंतर पाठ किया। चालीसवें दिन एक चमत्कार हुआ। हजारों बंदरों ने एक साथ अकबर के राज्य पर हमला बोल दिया। अचानक हुए इस हमले से सब अचंभित हो गए। अकबर एक सूझवान बादशाह था इसलिए इसका कारण समझते देर न लगी। उसे भक्ति की महिमा समझ में आ गई। उसने उसी क्षण तुलसीदास जी से क्षमा मांग कर कारागार से मुक्त किया और आदर सहित उन्हें विदा किया। इतना ही नहीं अकबर ने उस दिन के बाद तुलसीदास जी से जीवनभर मित्रता निभाई। इस तरह तुलसीदास जी ने एक व्यक्ति को कठिनाई की घड़ी से निकलने के लिए हनुमान चालीसा के रूप में एक ऐसा रास्ता दिया है। जिस पर चल कर हम किसी भी मंजिल को प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह हमें भी भगवान में अपनी आस्था को बरक़रार रखना चाहिए। ये दुनिया एक उम्मीद पर टिकी है। अगर विश्वास ही न हो तो हम दुनिया का कोई भी काम नहीं कर सकते। बिनु बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु। राम कृपा बिनु सपनेहुँ जीव न लह बिश्रामु॥ #अर्थ :- बिना विश्वास के भक्ति नहीं होती, भक्ति के बिना श्री रामजी नहीं होते और श्री रामजी की कृपा के बिना जीव स्वप्न में भी शांति नहीं पाता॥ ।। जय श्री हनुमान।।

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prakash patel Nov 25, 2020

⭐️ એલર્જીથી થતી શરદી મટી શકે. ⭐️ જ્યારે નાનો-મોટો કોઈ રોગ વારંવાર ઈલાજ કરવા છતાં પણ ફરીફરીને થવા લાગે, ત્યારે રોગની શારીરિક વ્યથા ઉપરાંત રોગ કેમ મટતો જ નથી તે વિશે ચિંતા સતાવવા લાગે છે. એલર્જીને કારણે થતી વિવિધ તકલીફો પણ જ્યારે વારંવાર થવા લાગે ત્યારે રોગી તેનાથી છુટવું શક્ય જ નથી કે શું ? એવા પ્રશ્નો પૂછે છે. એલર્જીને કારણે વારંવાર શરદી થવાને કારણે નાકમાંથી પાણી પડવું, છીંકો આવવી, માથું દુઃખવું, આંખો લાલ થવી, આંખ-કાન-નાક-ગળાની અંત:ત્વચામાં ખંજવાળ આવવી – ઇરીટેશન થવાની સાથે-સાથે રોગી અશક્તિ, થાક, કંટાળો, આળસ પણ અનુભવે છે. આ બધી શારીરિક-માનસિક વ્યથાના પરિણામે રોજબરોજના કામ, વ્યવસાય પર પણ તેની આડઅસર થાય છે. શરદીનું કારણ એલર્જી છે તેવું જાણ્યા પછી દર્દી જાતે જ એન્ટીએલર્જિક દવાઓ લઇ અને કામચલાઉ શાંતી મેળવી લેતા હોય છે. પરંતુ દવાઓથી ગળા-મ્હોંમાં લુખ્ખાશનો અનુભવ, ઉંઘ આવવી જેવી આડઅસર પણ ભોગવવી પડતી હોવાથી રોગી પરમેનન્ટ સોલ્યુશન મેળવવા સતત ઝંખે છે. ⭐️ એલર્જી એટલે શું ? એલર્જી (Allergy) Allos અને Ergon બે શબ્દોનું જોડાણ છે. તેનો અર્થ બિનજરૂરી ઉત્પન્ન થતું બીજું કાર્ય એવો થાય શરીરની કુદરતી રક્ષણાત્મક શક્તિ-ઇમ્યુનીટી એક વિશિષ્ટ ક્રિયા-પ્રતિક્રિયા દ્વારા રોગ માટે જવાબદાર કારણોનો સામનો કરે છે. શરીરને નુકશાનકારક બહારનું તત્વ શરીર સાથે સંપર્કમાં આવે, પ્રવેશે ત્યારે કુદરતી રીતે શરીર પ્રતિજન (Antigen) અને પ્રતિજન સામે રક્ષણાત્મક પ્રતિક્રિયા કરવા માટે પ્રતિદ્રવ્યો (Antibodies) પેદા કરે છે. પ્રતિજન-પ્રતિદ્રવ્યની શરીર માટેની રક્ષણાત્મક પ્રક્રિયા દરમ્યાન કોષોને વધુ નુકશાન થતાં, વિશિષ્ટ લક્ષણો થાય છે જેને એલર્જીક રિએક્શન કહે છે. ⭐️ એલર્જીથી થતી શરદી માટે સંભવિત કારણો-તકલીફ. સૌથી વિશેષ કારણ તો શરીરની વ્યાધિક્ષમતાની નબળાઈ છે. આયુર્વેદાનુસાર શરીરને નુકશાનકર્તા જીવાણું-વિષાણુ, બહારના તત્વ સામે પ્રતિકાર કરવાનું બળ પ્રાકૃતકફ, ઓજમાંથી મળે છે. કારણવિશિષ્ટતાને પરિણામે જ્યારે પ્રાકૃતકફ (કફ તત્વ)નું રક્ષણાત્મક કામ યોગ્ય રીતે ન થાય ત્યારે ધૂળ, પોલન, ધૂમાડો, વાસ-સુગંધ, જીવાણું, અતિશય ઠંડી-ગરમ-લુખ્ખી હવા, રૂવાંટી-વાળ શ્વાસ દ્વારા નાકની અંત:ત્વચાના સંપર્કમાં આવવાથી ખંજવાળ, ખૂબ છીંકો આવવી, નાકમાંથી પાણી પડવું, આંખમાં આંસુ-ખંજવાળ આવવી, વારંવાર છીંકો ખાવાથી ગળામાં-માથામાં દુખાવો થવો, અશક્તિ, આળસ જેવી તકલીફ થાય છે. ⭐️ આયુર્વેદ શું સૂચવે છે ? ➡️ સ્વબચાવ – એલર્જીક રિએકશન માટે જવાબદાર ધૂળ, ધૂમાડો, ઠંડી હવા જેવાં કારણોથી બચવા માટે પ્રયત્ન કરવો. ➡️ વ્યાધિક્ષમત્વ – ઓજ જાળવવા માટે જરૂરી સૂચનો. ➡️ ભૂખ, ઉંઘ, થાક, તરસ, મળ-મૂત્ર પ્રવૃત્તિ માટેના સંવેદનો જેવા શરીર દ્વારા સૂચવાતા કુદરતી સંકેતોને અવગણવા નહીં. ➡️ કફ તત્વ વધુ મજબૂત બને તે બાબતને અનુલક્ષીને પૌષ્ટિક, તાજું, ગરમ ભોજન, તરલ પદાર્થો, ગાયનું ઘી, સૂંઠ-અજમો-હીંગ-મરી-મેથી-લસણ-આદું, જેવા પાચનક્રિયામાં મદદ કરે તેવા પદાર્થોથી બનેલું ખાવું. ભોજન નિયમિત સમયે, નિયમિત અંતરે ખાવું જોઈએ. દહીં, મલાઈ, ઠંડા પીણા, ફ્રોઝન ફૂડ્સ ન ખાવા. ➡️ કફતત્વની કાર્યક્ષમતા યોગ્ય રીતે જળવાય રહે તે માટે સૂંઠ, આદું, અરડૂસી, હળદર, તુલસી જેવા કુદરતી દ્રવ્યો નિયમિત ધોરણે ઘરગથ્થુ ઉપચાર માટે અપનાવવા. ➡️ આદુંનો રસ, તુલસીનો રસ ૧-૧ ચમચી ભેળવી, તેમાં ૧ ચમચી હળદરનું ચૂર્ણ ઉમેરી સવારના નાસ્તા સમયે લઇ શકાય. ➡️ ૧ ચમચી આંબળાનું ચૂર્ણ નવશેકા પાણી અથવા મધ સાથે નિયમિત લેવું. ➡️ ત્રિકટુ ચૂર્ણ અને યષ્ટી મધુ ચૂર્ણ સરખાભાગે ભેળવી જમ્યા પછી મધમાં ચાટવાથી ફાયદો થાય છે. ➡️ ગાયના ઘી અથવા ષડબિંદુ તેલનું નિયમિત નસ્ય કરવાથી વધુ પડતી છીંકો આવવામાં આરામ મળે છે. ⭐️ ઔષધો :- એલર્જીથી થતી શરદીને આયુર્વેદિય દ્રષ્ટિએ વાતકફથી થતી શરદી (પ્રતિશ્યાય)નો ઈલાજ કરવાથી ફાયદો થાય છે. આથી નારદિયલક્ષ્મી વિલાસરસ, ત્રિભુવન કીર્તિરસ, દશમૂલારીષ્ટ, વાતચિંતામણી રસ જેવી રસૌષધિઓ અને યષ્ટીમધુ, વાસા, હરિદ્રા, ત્રિફળા, પંચનીંબ જેવી વનસ્પતિના ચૂર્ણો જેવા અનેક વાત-કફની વિકૃતી દૂર કરે તેવા ઔષધોથી ઈલાજ થઇ શકે છે. પરંતુ ત્રિફળા, કડુ, ભારંગી જેવા લીવરનું કાર્ય સુધારે, શરીરની વ્યાધિક્ષમતાને યોગ્ય કરવા માટે લિમ્ફેટિક સર્ક્યુલેશન સક્રિય કરી શકે તેવા સાદા ઔષધો નિયમિત લેવાથી વિશેષ મદદ મળે છે. અહીં ખૂબ જ સંક્ષેપમાં સામાન્ય માહિતી આપી છે. ત્રિદોષ સિદ્ધાંતને ધ્યાનમાં રાખી પ્રકૃતિને અનુરૂપ ખૂબ જ સામાન્ય ઔષધો અને વાયુનાશક તેલનાં માલિશ, નાકથી વરાળ લેવી, નસ્ય કરવા જેવી સામાન્ય ક્રિયાઓથી પણ વૈદ ખૂબ જ અસરકારક ઉપચાર કરી શકે છે. પ્રત્યેક રોગીને અનુરૂપ અપાતી ખાન-પાન વિશેની માહિતી એ આયુર્વેદનું સબળ અને સક્ષમ પાસું છે. 👉 દરેક જાતની તકલીફ માટે અલગ-અલગ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ હોય છે. તમને જે રોગ હોય તેના એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ ની વિસ્તારથી સમજૂતી આપવામાં આવશે જેથી તમે એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ જાતે લઈ ને સ્વસ્થ બની શકો. માહિતી માટે મેસેજ કરો What's App 👉 +91 7016609049 👉 તમારો એક મેસેજ તમને રોગ મુક્ત બનાવી શકે છે.. .. 👉દવા વગર લોકોને રોગ મુક્ત કરવા એ જ અમારો ઘ્યેય છે. 🏥 हर गंभीर बिमारी ऐक्युप्रेशर थेरापीसे मिटाये। 🏥 100% सही इलाज દરેક ગંભીર રોગો એક્યુપ્રેશર થેરાપીથી મટાડો. 🏥 ऐक्युप्रेशर 🌞 No Medicine 🌞 No Surgery 🌞 No Strict Diet 🌞 No Hard Exercise 🏥 ऐक्युप्रेशर थेरापी स्वस्थ & स्लीम बनने में बेहद कारगर हैं.. एवम् पूरी तरह से रोग नियंत्रित किया जा सकता है। ऐक्युप्रेशर थेरापी केलीये.... 🏥 AUM HEALTH CARE 🏥 (Acupressure Clinic) What's App 👉 આ નંબર ઉપર ફક્ત મેસેજ કરવા +91 7016609049 📞👉આ નંબર ઉપર જ ફોન કરવો +91 9974592157 🌸 Face Book group 🌸 🏥 એક્યુપ્રેશર અને ઘરેલુ ઉપચાર.. https://www.facebook.com/groups/367351564605027/?ref=share 🌸 Face Book Page 🌸 એક્યુપ્રેશર પ્લેનેટ https://www.facebook.com/%E0%AA%8F%E0%AA%95%E0%AB%8D%E0%AA%AF%E0%AB%81%E0%AA%AA%E0%AB%8D%E0%AA%B0%E0%AB%87%E0%AA%B6%E0%AA%B0-%E0%AA%AA%E0%AB%8D%E0%AA%B2%E0%AB%87%E0%AA%A8%E0%AB%87%E0%AA%9F-101139925132263/ 🌸 you tube 🌸 https://youtu.be/kHGftI3VsTE

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Anilkumar Tailor Nov 25, 2020

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anoop 8655017727 Nov 25, 2020

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prakash patel Nov 25, 2020

💊 સોજા 💊 ▪️ આદુનો રસ, લીંબુનો રસ અને સીંધવ એકત્ર કરી ભોજનની શરુઆતમાં લેવાથી સોજા મટે છે. ▪️ મીઠું અને ખટાશ નાખ્યા વગરનું ગાજરનું શાક રોજ ખાવાથી અને ગળપણ ત્યજી દેવાથી સોજાના રોગીને બહુ ફાયદો થાય છે. માત્ર ગાજરના રસ પર પણ રહી શકાય. ▪️સોજા પર તાંદળજાના પાનની પોટીસ બનાવી લેપ કરવાથી લોહી વીખરાઈ જઈ સોજો મટે છે. ▪️ એક ચમચી લીંડીપીપરનું ચુર્ણ મધ સાથે દીવસમાં બેત્રણ વાર લેવાથી શરીરે ચડેલ મેદ-સોજા મટે છે. ▪️ ધાણાને જવના લોટની સાથે વાટી તેની પોટીસ બાંધવાથી શરીર પરનો સોજો ઉતરી જાય છે. ▪️ મુળા અને તલ ખાવાથી ચામડી નીચે એકત્ર થયેલું પાણી શોષાઈને સોજો મટે છે. ▪️ મુળાના પાનનો ૨૫-૫૦ ગ્રામ રસ પીવાથી સોજો જલદીથી ઉતરે છે. ▪️ રાઈ અને સંચળ વાટીને લેપ કરવાથી સોજો ઉતરે છે. ▪️ લવીંગ વાટી તેનો લેપ કરવાથી શરીરના કોઈ પણ ભાગમાં આવેલો સોજો ઉતરે છે. ▪️ શરીરના સોજા વાળા ભાગ પર મુલતાની માટીનો રાત્રે લેપ કરી સવારે ઉઠી ધોઈ લેવાથી થોડા દીવસમાં સોજા ઉતરી જાય છે. ▪️ પુનર્નવા એટલે સાટોડી, દારુહળદર, હળદર, સુંઠ, હરડે, ગળો, ચીત્રક, ભારંગમુળ અને દેવદાર સરખા ભાગે ખાંડી અધકચરો ભુકો કરવો. બે ચમચી ભુકો બે ગ્લાસ પાણીમાં એક ગ્લાસ બાકી રહે ત્યાં સુધી ઉકાળી, ગાળીને ઠંડુ કરી પંદરેક દીવસ સવાર-સાંજ પીવાથી હાથ-પગ અને પેટનો સોજો મટે છે. સમગ્ર શરીરમાં કે શરીરના કોઈ પણ ભાગમાં સોજો ચડ્યો હોય તેમાં આ ઉકાળો લાભપ્રદ છે. નમક-મીઠું બંધ કરવું. આ ઉકાળામાં મુખ્ય ઔષધ સાટોડી એટલે પુનર્નવા છે, બાકીનાં આઠ એનાં સહાયક ઔષધ છે. આથી એને પુનર્નવાદી ક્વાથ કહે છે. સાટોડી સોજાનું ઉત્તમ તેમ જ એટલું જ નીર્દોષ ઔષધ છે. ▪️ શરીરમાં વીવીધ પ્રકારના નબળાઈના સોજામાં ગાજર બહુ અકસીર છે. દરરોજ દીવસમાં બે વખત ગાજરનો રસ ૨૫૦ ગ્રામ જેટલો નીયમીત લેવો. ગાજરનું કચુંબર અને હલવો પણ ખાઈ શકાય તેટલો દરરોજ લેવો. ▪️ તુલસીનાં પાન વાટી ચોપડવાથી સોજો ઉતરે છે. ▪️ લીમડાનાં પાન બાફી સોજાવાળા ભાગ પર લગાડવાથી ફાયદો થાય છે. 👉 દરેક જાતની તકલીફ માટે અલગ-અલગ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ હોય છે. તમને જે રોગ હોય તેના એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ ની વિસ્તારથી સમજૂતી આપવામાં આવશે જેથી તમે એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ જાતે લઈ ને સ્વસ્થ બની શકો. માહિતી માટે મેસેજ કરો What's App 👉 +91 7016609049 👉 તમારો એક મેસેજ તમને રોગ મુક્ત બનાવી શકે છે.. .. 👉દવા વગર લોકોને રોગ મુક્ત કરવા એ જ અમારો ઘ્યેય છે. 🏥 हर गंभीर बिमारी ऐक्युप्रेशर थेरापीसे मिटाये। 🏥 100% सही इलाज દરેક ગંભીર રોગો એક્યુપ્રેશર થેરાપીથી મટાડો. 🏥 ऐक्युप्रेशर 🌞 No Medicine 🌞 No Surgery 🌞 No Strict Diet 🌞 No Hard Exercise 🏥 ऐक्युप्रेशर थेरापी स्वस्थ & स्लीम बनने में बेहद कारगर हैं.. एवम् पूरी तरह से रोग नियंत्रित किया जा सकता है। ऐक्युप्रेशर थेरापी केलीये.... 🏥 AUM HEALTH CARE 🏥 (Acupressure Clinic) What's App 👉 આ નંબર ઉપર ફક્ત મેસેજ કરવા +91 7016609049 📞👉આ નંબર ઉપર જ ફોન કરવો +91 9974592157 🌸 Face Book group 🌸 🏥 એક્યુપ્રેશર અને ઘરેલુ ઉપચાર.. https://www.facebook.com/groups/367351564605027/?ref=share 🌸 Face Book Page 🌸 એક્યુપ્રેશર પ્લેનેટ https://www.facebook.com/%E0%AA%8F%E0%AA%95%E0%AB%8D%E0%AA%AF%E0%AB%81%E0%AA%AA%E0%AB%8D%E0%AA%B0%E0%AB%87%E0%AA%B6%E0%AA%B0-%E0%AA%AA%E0%AB%8D%E0%AA%B2%E0%AB%87%E0%AA%A8%E0%AB%87%E0%AA%9F-101139925132263/ 🌸 you tube 🌸 https://youtu.be/kHGftI3VsTE

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***अपना पोस्ट*** **नक्षत्रवाणी** *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻*  गजाननं भूतगनादि सेवितम, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम। उमासुतं शोकविनाशकारकम, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम।। श्रीमते रघुवीराय सेतूल्लङ्घितसिन्धवे। जितराक्षसराजाय रणधीराय मङ्गलम्।। भुजगतल्पगतं घनसुन्दरं गरुडवाहनमम्बुजलोचनम् । नलिनचक्रगदाकरमव्ययं भजत रे मनुजाः कमलापतिम् ।।  क्यों भटके मन बावरा, दर-दर ठोकर खाये...! शरण श्याम की ले ले प्यारे, जनम सफल हो जाये...!! 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मित्रों...! सबसे पहले तो नक्षत्रवाणी की पोस्टिंग में व्यस्तत्तम शेड्यूल के चलते ना चाहते हुए भी होने वाले विलंब के लिए आप सभी से हृदयपूर्वक क्षमा प्रार्थना सहित.....🙏🙏 आप सभी परम प्रिय धर्मपारायण, ज्योतिषविद्या प्रेमी विद्वतजनों को आचार्य/पं.मदन तुलसीराम जी कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले) की ओर से सादर-सप्रेम 🌸 जय गणेश 🌸 जय अंबे 🌸 *जय श्री कृष्ण*🌷मंगल प्रभात🌷इसी के साथ आप सभी सनातनी, धर्म-उत्सवप्रेमी, राम-कृष्ण-हरि-शिवभक्त, शक्ति उपासक व राष्ट्रप्रेमी मित्र-बंन्धुओं को **आज परम पवित्र दामोदर (कार्तिक) मास शुक्ल/सुदी एकादशी की, हरिप्रबोधिनी/देवोत्थानी एकादशी व्रत/पर्व की (स्मार्त/गृहस्थी जनों का), तुलसी विवाह उत्सव की (ईख/गन्ना/इक्षुरस प्राशन विधान), पँचदिवसीय भीष्मपंचक व्रत पर्व एवं मतस्योत्सव (अलवर-राज.)** प्रारम्भ होने की भी बहुत-बहुत हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं...!!!** ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ आइये...! अब चलें आपके प्रिय पोस्ट 'नक्षत्रवाणी' के अंतर्गत आज कुछ विशेष महत्वपूर्ण जानकारी, दृकपंचांग, चन्द्र राशिफल' एवं 'आरोग्य मंत्र' की ज्ञानयात्रा पर...🙏 ```༺⊰🕉⊱༻ ``` *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻* ☘️🌸!! ॐ श्री गणेशाय नमः!! 🌸☘️ ****************************** 𴀽𴀊🕉श्री हरिहरौविजयतेतराम्🕉 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :- आज दिनांक *25 नवंबर 2020 बुधवार/वेडनेसडे* 🇮🇳 राष्ट्रीय सौर *दिनांक ०४ कार्तिक *(अग्रहायण) १९४२* प्रस्तुत है ««« *आज का दृकपंचांग:««« 👉 ध्यान दें **यहाँ दिये गए तिथि, नक्षत्र, योग व करण आदि के समय इनके समाप्ति काल हैं और सूर्योदयास्त व चंद्रोदय का गणना स्थल मुंबई हैं।** कलियुगाब्द......5122 ( ५१२२ ) विक्रम संवत्.....2077 (प्रमादी नाम) शक संवत्......1942 🌤मास......कार्तिक/कातेक/कत्त्तक 🌓पक्ष.......शुक्ल/सुदी/चानण पछ/उतरतो कातक **तिथि......एकादशी/ग्यारस** दुसरे दिन प्रातः 05.10 पर्यंत पश्चात द्वादशी *वार/दिन...बुधवार* **नक्षत्र......उत्तराभाद्रपद** संध्या 06.21 पर्यंत पश्चात रेवती योग..........सिद्धि दुसरे दिन प्रातः 07.27 पर्यंत पश्चात व्यतिपात करण........वणिज दोप 03.55 पर्यंत पश्चात विष्टि सूर्योदय.........प्रातः 06.56.00 पर सूर्यास्त.........संध्या 05.55.00 पर चंद्रोदय....... .(दिन)15.02.00 पर रवि(अयन )...दक्षिणायन **ऋतु (दृक)...हेमंत** **वैदिक........शरद** **गुरु राशि.....मकर (पश्चिम में उदित, मार्गी)** **सूर्य राशि.....वृश्चिक** **चन्द्र राशि....मीन** 🚦 *दिशाशूल* :- उत्तर दिशा - यदि बहुत ही आवश्यक हो तो पिस्ता/पान या तिल का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें। ☸ शुभ अंक.....7 🔯 शुभ रंग......हरित/हरा/पिस्तावर्णी ⚜ *अभिजीत मुहूर्त :-* आज मान्य नहीं होगा। 👁‍🗨 *राहुकाल* :- मध्याह्न,/दोप 12.26 से 01.48 तक । 👁‍🗨 *गुलिक काल :-* पूर्वान्ह 11.03 से 12.26 तक ************************* 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त :-* *वृश्चिक* 06:12:25 08:31:24 *धनु* 08:31:24 10:35:44 *मकर* 10:35:44 12:18:20 *कुम्भ* 12:18:20 13:46:03 *मीन* 13:46:03 15:11:14 *मेष* 15:11:14 16:46:42 *वृषभ* 16:46:42 18:42:32 *मिथुन* 18:42:32 20:57:30 *कर्क* 20:57:30 23:18:13 *सिंह* 23:18:13 25:35:53 *कन्या* 25:35:53 27:52:33 *तुला* 27:52:33 30:12:25 ⚜ *चौघडिया :-* प्रात: 08.10 से 09.31 तक अमृत प्रात: 10.52 से 12.12 तक शुभ दोप 02.54 से 04.15 तक चंचल सायं 04.15 से 05.36 तक लाभ रात्रि 07.15 से 08.54 तक शुभ । *********************** ✍ आज के विशेष योगायोग/युति संयोग, वेध, ग्रहचार (ग्रहचाल), व्रत/पर्व/प्रकटोत्सव, जयंती/जन्मोत्सव व मोक्ष दिवस/स्मृतिदिवस/पुण्यतिथि आदि 🙏👇:- 👉 **आज कार्तिक शुक्ल पक्ष बुधवार को 👉 वर्ष का 246 दो छियालीसवाँ दिन, कार्तिक शुक्ल/सुदी एकादशी 29:10 तक पश्चात् द्वादशी शुरु, हरिप्रबोधिनी/देवोत्थानी एकादशी व्रत (स्मार्त/गृहस्थी जनों का), तुलसी विवाह, ईख/गन्ना/इक्षुरस प्राशन, द्विदल दान, विघ्नकारक भद्रा 15:56 से 29:11 तक, पंचक जारी, भीष्म पंचक प्रारम्भ, मूल संज्ञक नक्षत्र 18:20 पर, चातुर्मास व्रत - नियमादि समाप्त, श्री विष्णु त्रिरात्र समाप्त, हरिवासर 29:11 से, मतस्योत्सव प्रारम्भ (अलवर), श्री बिप्लब कुमार देब जन्म दिवस, श्री यशवंतराव बलवंतराव चह्वाण स्मृति दिवस, मेजर श्री रामास्वामी परमेस्वरन शहीदी दिवस (परमवीर चक्र से सम्मानित), विश्व मांसाहार निषेध दिवस व विश्व महिला हिंसा उन्मूलन दिवस।** 🏡 *वास्तु टिप्स*🏡 1) **यदि आपके घर में किसी को मानसिक उच्चाटन है तो पलंग पर काले मृग का चर्म बिछा कर लिटाने से स्वास्थ्य ठीक हो जाता है।** 2) आपके घर से अगर अकारण ही बरकत जा रही है या आपको नेगेटिव एनर्जी दिख रही है या परिवार में निरंतर कलह रहता है, तो कपूर और फिटकरी को पीस के गौझारण (गौमूत्र) जो बहुत ही आसानी से मिल जाता है (अन्यथा पतंजलि आदि का ले लें), इससे घर मे पोछा लगाने वाले क्लीनर या पानी मे मिला लें और रोज़ सुबह-शाम घर मे पोछा लगाये और गंगाजल का पूजा-आरती के बाद छिड़काव भी करें फिर चमत्कारिक परिवर्तन देखें। 🙏 💥 **विशेष ध्यातव्य 👉 एकादशी/ग्यारस को चावल व साबूदाना का सेवन करना महापापप्रद माना गया है, इसलिए आज के दिन यह सर्वथा त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34।** 📿 *आज का ग्रह जप बीजमंत्र* **🕉 ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः ‼️ 🎪🚩** आज का वाराधिपति आराधना (बीज) मंत्र *🚩 🎪 ‼️ 🕉 ॐ गं गणपतये नम: ‼️ 🎪 🚩* 📿 *आज का उपासना मंत्र :-* || ॐ गणनायकाय नम: || ****************************** ⚜ 👉🙏 🚩 ☸ *तिथि/पर्व विशेष :* 🚩 **कार्तिक (दामोदर मास) ज़ारी (इसमें नियमित रूप से तुलसी अर्चन यानि तुलसीदल से भगवान श्रीविष्णु पूजन का विधान है), कार्तिक कार्तिक शुक्ल/सुदी एकादशी/ग्यारस, हरिप्रबोधिनी/देवोत्थानी एकादशी व्रत/पर्व (स्मार्त/गृहस्थी जनों का), तुलसी विवाह उत्सव (ईख/गन्ना/इक्षुरस प्राशन विधान), पँचदिवसीय भीष्मपंचक प्रारम्भ एवं पर्व परम पवित्र कार्तिक स्नान रुपी महापर्व ज़ारी।** ********************* 🙏 👉 ** आप धर्मप्रेमी गण किसी भी मुहूर्त, व्रत/पर्व व उत्सव विशेष पर पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए हमसे निःसंकोच संपर्क कर सकते हैं और उसका सम्पूर्ण विधिविधान हमसे पूरी तरह से निःशुल्क जान सकते हैं और इसके लिए आपको हमें व्हाट्सएप्प message भर करना हैं। हमारे मोबाइल नम्बर्ज़ हैं: 9987815015/9991610514. ध्यान रखें कृपया सीधा कॉल ना करके पहले आप हमें व्हाट्सएप्प मैसेज ही करें...!!! **जो भी मातृभक्त/शक्तिउपासक महिलाएं प्रोफेशनल्ज यानि कामकाजी होने के चलते या अन्य कारणों से षष्टम नवरात्र से शास्त्रोक्त 'कात्यायनी साधना' प्रारंभ ना कर सकी हों वे सौभाग्यकांक्षिणियाँ 'सर्वसिद्ध कात्यायनी महायंत्र' प्रयोग के द्वारा अपने मनवांछित वर की प्राप्ति के लिए हमसे तुरंत संपर्क करें। धन्यवाद...!!** *************** ⚜ *तिथी/पर्व/व्रत विशेष महात्म्य :-* 🚩 *देव प्रबोधनी एकादशी/देवउठनी/देउठनी ग्यारस व्रत :-* कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी आदि नामों से भी जाना जाता है । शास्त्रों में कार्तिक मास को श्रेष्ठ मास माना गया है। मासों में कार्तिक मास, देवताओं में भगवान विष्णु और तीर्थों में नारायण तीर्थ बद्रिकाश्रम श्रेष्ठ है। ये तीनों कलियुग में अत्यंत दुर्लभ हैं। अर्थात्‌ कार्तिक मास के समान कोई भी मास नहीं है। पुराण में वर्णित है कि यह मास धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष को देने वाला है। विशेष रूप से स्नान दान एवं तुलसी की पूजा इस मास में विशेष फलदायी है। कार्तिक मास में दीपदान करने से पाप नष्ट होते हैं। स्कंद पुराण में वर्णित है कि इस मास में जो व्यक्ति देवालय, नदी के किनारे, तुलसी के समक्ष एवं शयन कक्ष में दीपक जलाता है उसे सर्व सुख प्राप्त होते हैं। इस मास में भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी के निकट दीपक जलाने से अमिट फल प्राप्त होते हैं। इस मास में की गई भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की उपासना असीमित फलदायी होती है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी की तिथि को देव शयन करते हैं और इस कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन उठते हैं। इसीलिए इसे *देवोत्थान (देवउठनी) एकादशी* कहा जाता है। ⚜ *चातुर्मास पूर्ण :-* देवशयनी एकादशी से प्रारंभ हुआ चातुर्यामास व्रत आज पूर्ण होता है | इस व्रत को करने वाले सूर्य जैसे दीप्तिमान होकर विमान पर बैठकर स्वर्ग को जाते हैं। जो स्त्री या पुरुष पवित्र होकर शुद्धता से इस व्रत को करते हैं, वे सब पापों से छूट जाते हैं। 📯 *संस्कृत सुभाषितानि :-* दाता प्रतिगृहीता च शुद्धि र्देयं च धर्मयुक् । देशकालौ च दानानाम ङ्गन्येतानि षड् विदुः ॥ अर्थात :- दाता, लेनेवाला, पावित्र्य, देय वस्तु, देश, और काल – ये छे दान के अंग हैं । 🍃 *आरोग्य मंत्र:*- -विषाक्त भोजन (फूड प्वाइजनिंग) के लिए घरेलू उपचार - *3. नींबू -* नींबू में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीवायरल, और जीवाणुरोधी गुण आपको बहुत राहत दे सकते हैं। नींबू में एसिड बैक्टीरिया को मारने में मदद करता है जो खाद्य विषाक्तता या फूड प्वाइजनिंग का कारण बनता है। केवल एक चम्मच नींबू के रस में एक चुटकी चीनी जोड़ें और दिन में दो से तीन बार पीएं। आप अपने सिस्टम को साफ करने के लिए नींबू के रस के साथ गर्म पानी का सेवन कीजिए। ⚜ **अब आज का संभावित चन्द्र राशिफल** ⚜ 👉लेकिन पहले सबसे एक करबद्ध निवेदन 🙏👇:- मित्रों सर्वप्रथम तो कुछ तकनीकी कारणों से आपको आपकी प्रिय पोस्ट नक्षत्रवानी विलंब से मिल पाती है इसके लिए मैं आप सभी से क्षमा प्रार्थी हूँ। ततपश्चात मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि आपकी इस परमप्रिय ज्ञानवर्धक 'अपना पोस्ट' *नक्षत्रवाणी* को आप जितना हो सकता हो उतना लाइक व शेयर/फॉरवर्ड तो करें ही, आलस्य त्याग कर कृपया इसपर अपनी बुद्धि व विवेक के अनुसार अपने सही-सही कमैंट्स भी अवश्य करें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप मुझे निराश नहीं करेंगे और अपने फीडबैक से व लाइक/सराहना करके भी अवश्य ही मेरा उत्साहवर्धन करेंगे। नक्षत्रवाणी के संदर्भ में आप सभी के बहुमूल्य सुझाव भी सदैव सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद...!!! 💐💐 **ख़ुशख़बर।। आज की सबसे बड़ी ख़ुशख़बर।।**👇 प्रियवरों गणेशोत्सव के अंतर्गत और भाद्रपद मास के अंतिम सोमवार के शुभावसर पर त्रिगुणात्मक भगवान महाकालेश्वर शिव जो कि एकादश रुद्र रूपों में भी प्रस्फुटित होते हैं, उनके साक्षत स्वरूप व कृपाप्रसाद *'रुद्राक्ष रत्न*" जिसे रुद्र के अक्ष या भगवान शिव के अक्ष के रूप में जाना जाता है, को पहली बार अब हम विधिवत **अभिमंत्रित** करके आपको आपके सभी दैहिक-दैविक-भौतिक कष्टों से मुक्ति दिलाने हेतु, विषेषतः इस **कोरोना काल** में बहुत अधिक बढ़ चुके मानसिक संताप (Mental stress/depression) को पूर्ण रूप से दूर करने के लिए, आपकी आर्थिक तँगीं की स्थिति को समझते हुए **केवल मात्र 111₹** में आप शिवभक्त सुधि पाठकों के लिए उपलब्ध करवाना प्रारंभ किया है। जिसे भी यह दिव्य सर्वसिद्ध **रुद्राक्ष रत्न** चाहिए, वे कृपया हमें इसी नम्बर पर व्हाट्सएप्प करें। ध्यान रखें यह योजना सीमित समय के लिए ही है, इसलिए इस सुनहरे अवसर को आप चूकें नहीं। 🙏 👉 **एक विशेष व अति शुभ सूचना:👇** **मित्रों हमारे 'ऐस्ट्रो वर्ल्ड' के दिव्य कोष में शुद्ध केसर (काश्मीरी व ईरानी A तथा B दोनों ग्रेड की), पारिजात, चम्पा, अनन्त, पुन्नाग, श्वेत/सफ़ेद ऊद, केसर, खस, भीना गुलाब व असली चंदन जैसे दिव्य इत्रों की पूरी रेंज, भीमसेनी कर्पूर, उत्तम क्वालिटी की शुद्ध गुग्गल व शुद्ध लोबान, शुद्ध राशि रत्न-उपरत्न, असली नेपाली रुद्राक्ष रत्न व गण्डकी नदी से प्राप्त असली शालग्राम जी भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा हमारे इस संग्रहालय में और भी कई दिव्य व चमत्कारिक वस्तुएं उपलब्ध हैं। ये सभी दिव्य वस्तुएं हम अपने ज्योतिष-वास्तु एवं वैदिक पूजा-अनुष्ठानों के नियमित यजमानों के लिए बहुत ही सही रेट पर और कम मार्जिन पर देते हैं तथा इनके असली होने की मनी बैक गारंटी के साथ भी। तो आप 'नक्षत्रवाणी' के सभी पाठक भी हमारे परम प्रिय होने से इसका लाभ निःसन्देह ले सकते हैं। इसके लिए आप हमें इसी नम्बर पर व्हाट्सएप्प करें। जल्दी रिप्लाई ना मिलने पर आप कॉल भी कर सकते हैं। धन्यवाद...!!!** **देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत।।** 🐏 *राशि फलादेश मेष :-* (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ) किसी दुविधा से निर्णय लेने की क्षमता कम होगी। बुद्धि का प्रयोग करें। प्रमाद न करें। कोर्ट-कचहरी तथा सरकारी कार्यालयों में अटके काम पूरे हो सकते हैं तथा स्थिति सुधरेगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। घर में व्यय होगा। आय में वृद्धि होगी। कारोबार लाभदायक रहेगा। 🐂 *राशि फलादेश वृष :-* (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) किसी लंबे कारोबारी प्रवास की योजना बन सकती है। स्थायी संपत्ति में वृद्धि के योग हैं। कोई कारोबारी बड़ा सौदा हो सकता है। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। नौकरी में चैन रहेगा। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। समय की अनुकूलता का लाभ लें। प्रसन्नता रहेगी। 👫🏻 *राशि फलादेश मिथुन :-* (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह) किसी मनोरंजक यात्रा का कार्यक्रम बन सकता है। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। नौकरी में कोई नया कार्य कर पाएंगे। उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग अपने कार्य में सफलता हासिल करेगा। अध्ययन आदि में एकाग्रता रहेगी। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) कारोबार में लाभ होगा। आय होगी। धैर्य रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। दौड़धूप अधिक होगी। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। बनते काम बिगड़ सकते हैं। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) निवेश शुभ फल देंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। घर-बाहर प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। जल्दबाजी न करें। प्रयास सफल रहेंगे। कार्य की प्रशंसा होगी। नौकरी में कार्यभार रहेगा। अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। 🙎🏻‍♀️ *राशि फलादेश कन्या :-* (ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। दूर से उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगा। विवाद को बढ़ावा न दें। निवेश में जल्दबाजी न करें। आय बनी रहेगी। उत्साह से काम कर पाएंगे। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) कारोबार अच्‍छा चलेगा। उत्साह बना रहेगा। प्रसन्नता रहेगी। प्रमाद न करें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। आय में वृद्धि होगी। कोई बड़ा रुका हुआ कार्य पूर्ण होने के योग हैं। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) कारोबार ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। चिंता तथा तनाव रहेंगे। फालतू खर्च होगा। किसी बड़ी समस्या से सामना हो सकता है। विवाद को बढ़ावा न दें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। ईर्ष्यालु व्यक्तियों से सावधान रहें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे) कारोबार अच्‍छा चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। जीवन सु्‍खमय रहेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। काम में मन लगेगा। घर-बाहर प्रसन्नता का वातावरण बनेगा। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी) निवेशादि लाभदायक रहेंगे। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। प्रभावशाली लोगों का सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कार्यकारी नए काम मिल सकते हैं। योजना फलीभूत होगी। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) बेकार बातों पर ध्यान न दें। स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। प्रमाद न करें। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। नौकरी में चैन रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। विवाद से बचें। अध्यात्म में रुचि रहेगी। किसी संत-महात्मा का आशीर्वाद मिल सकता है। 🐋 *राशि फलादेश मीन :-* (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) कारोबार लाभदायक रहेगा। नौकरी में कार्यभार रहेगा। प्रमाद न करें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। नकारात्मकता रहेगी। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। विवाद से क्लेश हो सकता है *************************** *🎊🎉🎁 आज जिनका जन्मदिवस या विवाह की वर्षगांठ हैं, उन सभी प्रिय मित्रो को कोटिशः शुभकामनायें🎁🎊🎉* ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ और ज़रा इन बातों पर भी ज़रूर ध्यान दें मित्रों...! अगर...??? 1) खूब मेहनत के बाद भी या व्यापार-व्यवसाय में पर्याप्त इन्वेस्टमेंट करने के बाद भी आप अकारण आर्थिक दृष्टी से निरंतर पिछड़ते ही जा रहे हैं....? 2) एक ही नौकरी में लम्बे समय तक कार्य नहीं कर पाते हैं या वहां दिल से काम करते हुए भी आपको कोई पूछता ही नहीं है...? आपकी प्रमोशन ड्यू है कब से लेकिन आप बस दूसरों को आगे बढ़ते देख कर अपने नसीब को कोस रहे हैं...? आपके प्रतिद्वंदी अलग से परेशान करते रहते हैं...? 3) आपस में निरंतर अकारण क्लेश होता रहता है..? 4) शेयर मार्किट से कमाना चाहते हैं पर हर बार नुकसान उठा बैठते हैं...? 5) बिमारी आपको छोड़ ही रही है...? घर का हरएक व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से त्रस्त है...? आमदनी का एक बड़ा हिस्सा हमेशां इसी पर खर्च हो जाता है...? 6) अकारण ही विवाह योग्य बच्चों के विवाह में दिक्कतें आ रही हैं...? 7) शत्रुओं ने आपकी रात की नींद और दिन का चैन हराम किया हुआ है...? 8) पैतृक सम्पति विवाद सुलझ ही नहीं रहा है...? और संपति केवास्तविक हकदार आप हैं तथा आप इसे अपने हक में सुलझना चाहते हैं...? 9) विदेश यात्रा या विदेश में सेटलमेंट को लेकर बहुत समय से परेशान हैं...? 10) आपको डरावने सपने आते हैं..? सपने में सांप या भूत-प्रेत या ऐसे ही नींद उड़ाने वाले दृश्य दीखते हैं...? 11) फिल्म या मीडिया में बहुत समय से संघर्ष के बाद भी सफलता​ नहीं मिल रही...? 12) राजनीति को ही आप अपना कैरियर बनाना चाहते हैं पर आपको कुछ भी समझ नहीं आ रहा...? यदि हाँ...??? तो यह सब अकारण ही नहीं है...! इसके पीछे बहुत ठोस कारण हैं जो कि आपकी जन्म कुंडली या आपके घर-आफिस का वास्तु देखकर या आपकी जन्मकुंडली भी ना होने की स्थिति में हमारे दीर्घ अध्ययन और प्रैक्टिकल ज्योतिषीय अनुभव के आधार पर अन्य विधियों से जाने जा सकते हैं...? तो अब आप और देरी ना करें और तुरंत हमें फोन करें...! आपकी उन्नति निश्चित है और आपकी मंजिल अब दूर नहीं...! ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ प्रस्तुति: आचार्य मदन टी.कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले, मूल निकास: गौड़ बंगाल एवं तत्पश्चात ढाणी भालोट-झुंझनूँ-राज.) (चयनित/Appointed/) ज्योतिष एवं वास्तु शोध वैज्ञानिक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष: TARF, Dadar-Mumbai साभार: बाँके बिहारी (धुरंधर वैदिक विद्वानों का अद्वितीय वैश्विकमंच) कार्यकारी अध्यक्ष: एस्ट्रो-वर्ल्ड मुंबई व सिरसा (सभी दैहिक दैविक भौतिक समस्याओं का एक ही जगह सटीक निदान व स्थायी समाधान) अध्यक्ष: सातफेरे डॉट कॉम मुंबई व सिरसा (आपके अपनों के दिव्य एवं सुसंस्कारी वैवाहिक जीवन की झटपट शुरूआत हेतु अनूठा संस्थान) नोट: हमारी या हमारे संस्थान 'एस्ट्रो-वर्ल्ड' तथा आपके अपनों के वैवाहिक जीवन सम्बन्धी सभी समस्याओं का एकमात्र हल एवं विश्व के इस सबसे अनूठे मंच 'सातफेरे डॉट कॉम' मुंबई या सिरसा की किसी भी प्रकार की गरिमापूर्ण सेवा जैसे वैज्ञानिकतापूर्ण ज्योतिष-वास्तु मार्गदर्शन, सभी प्रकार के मुहूर्त शोधन, नामकरण संस्कार, विवाह संस्कार या अन्य कोई भी वैदिक पूजा-अनुष्ठान आयोजित करवाने, रत्न अभिमन्त्रण, सभी राशिरत्न-उपरत्न, मणि-माणिक्य, दक्षिणावर्ती शँख (जो कि घर में विधिवत रखने मात्र से ही बदल दे आपका भाग्य हमेशां-2 के लिए...!), सियारसिंगी, भुजयुग्म (हत्थाजोड़ी, जो तिज़ोरी आपकी कभी ख़ाली ना होने दे), नागकेसर, विविध प्रकार के वास्तु पिरामिडज एवं अन्य कई प्रकार की सौभाग्यवर्धक वस्तुओं की प्राप्ति हेतु हमारे... सम्पर्क सूत्र: 9987815015 / 9991610514 ईमेल आई डी: [email protected] 🌺आपका दिन आदि वैद्य (भगवान धन्वंतरि जी) की कृपा से परम मंगलमय हो मित्रो! *🚩जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम🚩* 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩 ।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।। ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※

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Vijay Jaiswal Nov 25, 2020

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