Krishna Singh
Krishna Singh Oct 25, 2017

क्या आप जानते हैं कि सर्जरी के सर्जक जनक हमारे ऋषि मुनि है

क्या आप जानते हैं कि सर्जरी के सर्जक जनक  हमारे ऋषि मुनि है

कया आप जानते हैं कि सर्जरी के सर्जक जनक हम है
प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली अपने समय में अपने समयानुसार अति उन्नत अवस्था में थी। भारतीय चिकित्सा के मूलतः तीन अनुशासन थे --
१. काय चिकित्सा (मेडीसिन) -- जिसके मुख्य प्रतिपादक ऋषि - चरक ,अत्रि, हारीति व अग्निवेश आदि थे ।
२. शल्य चिकित्सा -- मुख्य शल्यक थे- धन्वन्तरि, सुश्रुत, औपधेनव, पुषकलावति।
३. स्त्री एवम बाल रोग -- जिसके मुख्य ऋषि कश्यप थे।
डा ह्रिश्च बर्ग ( जर्मनी) का कथन है -- “ The whole plastic surgery in Europe had taken its new flight when these cunning devices of Indian workers became known to us. The transplaats of sensible skin flaps is also Indian method.” डा ह्वीलोट का कथन है - “vaccination was known to a physician’ Dhanvantari”, who flourished before Hippocrates.” इन से ज्ञात होती है, भारतीय चिकित्सा शास्त्र के स्वर्णिम काल की गाथा।
रोगी को शल्य-परामर्श के लिये उचित प्रकार से भेजा जाता था। एसे रोगियों से काय –चिकित्सक कहा करते थे -- “अत्र धन्वंतरिनाम अधिकारस्य क्रियाविधि।“-- अब शल्य चिकित्सक इस रोगी को अपने क्रियाविधि में ले।
सुश्रुत के समय प्रयोग होने वाली शल्य –क्रिया विधियां --
१. आहार्य -- ठोस वस्तुओंको शरीर से निकालना( Extraction-foren bodies).
२. भेद्य -- काटकर निकालना (Excising).
३. छेद्य -- चीरना (incising)
४. एश्य -- शलाका डालना आदि (Probing)
५. लेख्य -- स्कार, टेटू आदि बनाना (Scarifying)
६. सिव्य -- सिलाई आदि करना (suturing)
७. वेध्य -- छेदना आदि (puncturing etc)
८. विस्रवनिया -- जलीय अप-पदार्थों को निकालना (Tapping body fluids)
शल्य क्रिया पूर्व कर्म (प्री-आपरेटिव क्रिया) -- रात्रि को हलका खाना, पेट, मुख, मलद्वार की सफ़ाई, ईश-प्रार्थना, सुगन्धित पौधे, बत्तियां –नीम, कपूर. लोबान आदि जलाना ताकि कीटाणु की रोकथाम हो।
शल्योपरान्त कर्म -- रोगी को छोडने से पूर्व ईश-प्रार्थना, पुल्टिस लगाकर घाव को पट्टी करना, प्रतिदिन नियमित रूप से पट्टी बदलना जब तक घाव भर न जाय, अधिक दर्द होने पर गुनुगुने घी में भीगा कपडा घाव पर रखा जाता था।
सुश्रुत के समय प्रयुक्त शल्य-क्रिया के यन्त्र व शस्त्र -- (Instuments & Equppements) -- कुल १२५ औज़ारों का सुश्रुत ने वर्णन किया है-- (देखिये संलग्न- चित्र-१,२,३)
(अ) -- यन्त्र -- (अप्लायन्स) -- १०५ -- स्वास्तिक (फ़ोर्सेप्स)२४ प्रकार; सन्डसीज़ (टोन्ग्स)-दो प्रकार; ताल यन्त्र (एकस्ट्रेक्सन फ़ोर्सेप्स)-दो प्रकार; नाडी यन्त्र(केथेटर आदि)-२० प्रकार; शलाक्य (बूझी आदि)-३० प्रकार; उपयन्त्र –मरहम पट्टी आदि का सामान;--कुल १०४ यन्त्र; १०५ वां यन्त्र शल्यक का हाथ।
(ब) -- शस्त्र- (इन्सट्रूमेन्ट्स) -- २० -- चित्रानुसार।
इन्स्ट्रूमेन्ट्स सभी परिष्क्रत लोह (स्टील के बने होते थे। किनारे तेज, धार-युक्त होते थे , वे लकडी के बक्से में ,अलग-अलग भाग बनाकर सुरक्षित रखे जाते थे।
अनुशस्त्र -- (सब्स्टीच्यूड शस्त्र) -- बम्बू, क्रस्टल ग्लास, कोटरी, नेल, हेयर, उन्गली आदि भी घाव खोलने में प्रयुक्त करते थे।
निश्चेतना (एनास्थीसिया) -- बेहोशी के लिये सम्मोहिनी नामक औषधियां व बेहोशी दूर करने के लिये संजीवनी नामक औषधियां प्रयोग की जाती थीं।
शमन- औषधि द्वारा चिकित्सा,
इसकी परिधि बहुत व्याप्त थी। आठ
प्रकार की चिकित्साएं बताई गई हैं।
(१) काय चिकित्सा-सामान्य चिकित्सा
(२) कौमार भृत्यम्-बालरोग चिकित्सा
(३) भूत विद्या- मनोरोग चिकित्सा
(४) शालाक्य तंत्र- उर्ध्वांग अर्थात् नाक,
कान, गला आदि की चिकित्सा
(५) शल्य तंत्र-शल्य चिकित्सा
(६) अगद तंत्र-विष चिकित्सा
(७) रसायन-रसायन चिकित्सा
(८) बाजीकरण-पुरुषत्व वर्धन
औषधियां:- चरक ने कहा, जो जहां रहता है,
उसी के आसपास प्रकृति नेरोगों की औषधियां दे रखी हैं। अत: वे अपनेआसपास के पौधों,
वनस्पतियों का निरीक्षण व प्रयोग करनेका आग्रह करते थे। एक समय विश्व के अनेक
आचार्य एकत्रित हुए, विचार-विमर्श हुआऔर उसकी फलश्रुति आगे चलकर ‘चरक
संहिता‘ के रूप में सामने आई। इस संहिता मेंऔषधि की दृष्टि से ३४१ वनस्पतिजन्य,१७७ प्राणिजन्य, ६४ खनिज द्रव्यों का उल्लेख है। इसी प्रकार सुश्रुतसंहिता में ३८५ वनस्पतिजन्य, ५७प्राणिजन्य तथा ६४ खनिज द्रव्यों से
औषधीय प्रयोग व विधियों का वर्णन है।इनसे चूर्ण, आसव, काढ़ा, अवलेह आदि अनेक में
रूपों औषधियां तैयार होती थीं। इससे पूर्वकाल में भी ग्रंथों में कुछ अद्भुत
औषधियों का वर्णन मिलता है। जैसेबाल्मीकी रामायण में राम-रावण युद्ध केसमय जब लक्ष्मण पर प्राणांतक आघात हुआ
और वे मूर्छित हो गए, उस समय इलाज हेतुजामवन्त ने हनुमान जी के पास हिमालय में
प्राप्त होने वाली चार दुर्लभ औषधियों का वर्णन किया।मृत संजीवनी चैव विशल्यकरणीमपि।
सुवर्णकरणीं चैव सन्धानी च महौषधीम्॥युद्धकाण्ड ७४-३३
(१) विशल्यकरणी-शरीर में घुसे अस्त्रनिकालने वाली
(२) सन्धानी- घाव भरने वाली
(३) सुवर्णकरणी-त्वचा का रंग ठीक रखने वाली
(४) मृतसंजीवनी-पुनर्जीवन देने वाली चरक के बाद बौद्धकाल में नागार्जुन,
वाग्भट्ट आदि अनेक लोगों के प्रयत्न से रस शास्त्र विकसित हुआ। इसमें पारे को शुद्ध
कर उसका औषधीय उपयोग अत्यंत परिणामकारक रहा। इसके अतिरिक्त
धातुओं, यथा-लौह, ताम्र, स्वर्ण, रजत, जस्त को विविध रसों में डालना और गरम करना-
इस प्रक्रिया से उन्हें भस्म में परिवर्तित करने की विद्या विकसित हुई। यह भस्म और पादपजन्य औषधियां भी रोग निदान में
काम आती हैं।
शल्य चिकित्सा- कुछ वर्षों पूर्व इंग्लैण्ड के शल्य चिकित्सकों के विश्व प्रसिद्ध संगठन
ने एक कैलेण्डर निकाला, उसमें विश्व के अब तक के श्रेष्ठ शल्य चिकित्सकों (सर्जन) के
चित्र दिए गए थे। उसमें पहला चित्र आचार्य सुश्रुत का था तथा उन्हें विश्व का पहला शल्य चिकित्सक
बताया गया था।
वैसे भारतीय परम्परा में शल्य चिकित्सा का इतिहास बहुत प्राचीन है।
भारतीय चिकित्सा के देवता धन्वंतरि को शल्य
क्रिया का भी जनक माना जाता है।
प्राचीनकाल में इस क्षेत्र में हमारे देश के चिकित्सकों ने अच्छी प्रगति की थी। अनेक
ग्रंथ रचे गए। ऐसे ग्रंथों के रचनाकारों में सुश्रुत, पुष्कलावत, गोपरक्षित, भोज,
विदेह, निमि, कंकायन, गार्ग्य, गालव, जीवक, पर्वतक, हिरण्याक्ष, कश्यप आदि के
नाम विशेष उल्लेखनीय हैं।
इन रचनाकारों के अलावा अनेक प्राचीन ग्रंथों से इस क्षेत्र में
भारतीयों की प्रगति का ज्ञान होता है। ऋग्वेद तथा अथर्ववेद में दिल, पेट
तथा वृक्कों के विकारों का विवरण है। इसी तरह शरीर में नवद्वारों तथा दस
छिद्रों का विवरण दिया गया है।
वैदिक काल के शल्य चिकित्सक मस्तिष्क की शल्य क्रिया में निपुण थे। ऋग्वेद (८-८६-२) के
अनुसार जब विमना और विश्वक ऋषि उद्भ्रान्त हो गए थे, तब शल्य
क्रिया द्वारा उनका रोग दूरकिया गया। इसी ग्रंथ में नार्षद ऋषि का भी विवरण है।
जब वे पूर्ण रूप से बधिर हो गए तब अश्विनी कुमारों ने उपचार करके उनकी श्रवण शक्ति वापस
लौटा दी थी। नेत्र जैसे कोमल अंग की चिकित्सा तत्कालीन चिकित्सक कुशलता से कर लेते थे।
ऋग्वेद (१-११६-११) में शल्य क्रिया द्वारा वन्दन ऋषि की ज्योति वापस लाने का उल्लेख
मिलता है।
हमारे पुराणों में भी शल्य क्रिया के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई। ‘शिव पुराण‘के अनुसार
जब शिव जी ने दक्ष का सर काट दिया थाn तब अश्विनी कुमारों ने उनको नया सर लगाया था। इसी तरह गणेश
जी का मस्तक कट जाने पर उनके धड़ पर हाथी का सर जोड़ा गया था।
रामायण‘ तथा ‘महाभारत‘ में भी ऐसे कुछ उदाहरण मिलते हैं। ‘रामायण‘ में एक स्थान पर कहा है कि ‘याजमाने स्वके नेत्रे उद्धृत्याविमना ददौ।‘ अर्थात् आवश्यकता पड़ने पर एक मनुष्य की आंख
निकालकर दूसरे को लगा दी जाती थी।
सुश्रुत द्वारा वर्णित शल्य क्रियाओं के नाम इस प्रकार हैं
१) छेद्य (छेदन हेतु) (२) भेद्य (भेदन हेतु) (३) लेख्य (अलग करने हेतु) (४) वेध्य
(शरीर में हानिकारक द्रव्य निकालने के लिए) (५) ऐष्य (नाड़ी में घाव ढूंढने के लिए)
(६) अहार्य (हानिकारक उत्पत्तियों को निकालने के लिए) (७)विश्रव्य (द्रव निकालने के लिए)
(८) सीव्य (घाव सिलने के लिए)
सुश्रुत संहिता में शस्त्र क्रियाओं के लिए आवश्यक यंत्रों (साधनों) तथा शस्त्रों (उपकरणों) का भी विस्तार से
वर्णन किया गया है। आजकल की शल्यक्रिया में ‘फौरसेप्स‘ तथा ‘संदस‘ यंत्र
फौरसेप्स तथा टोंग से मिलते-जुलते हैं।
सुश्रुत के महान ग्रन्थ में २४ प्रकार के स्वास्तिकों, २ प्रकार के संदसों, २८
प्रकार की शलाकाओं तथा २० प्रकार की नाड़ियों (नलिका) का उल्लेख हुआ है।
इनके अतिरिक्त शरीर के प्रत्येक अंग की शस्त्र-क्रिया के लिए बीस प्रकार के
शस्त्रों (उपकरणों) का भी वर्णन किया गया है। पूर्व में जिन आठ प्रकार
की शल्य क्रियाओं का संदर्भ आया है, वे विभिन्न साधनों व उपकरणों से
की जाती थीं। उपकरणों (शस्त्रों) के नाम इस प्रकार हैं-
अर्द्धआधार, अतिमुख, अरा, बदिशा, दंत
शंकु, एषणी, कर-पत्र, कृतारिका,
कुथारिका, कुश-पात्र, मण्डलाग्र,
मुद्रिका, नख शस्त्र, शरारिमुख, सूचि,
त्रिकुर्चकर, उत्पल पत्र, वृध-पत्र, वृहिमुख
तथा वेतस-पत्र।
आज से कम से कम तीन हजार वर्ष पूर्व सुश्रुत ने सर्वोत्कृष्ट इस्पात के उपकरण
बनाये जाने की आवश्यकता बताई। आचार्य ने इस पर भी बल दिया है कि उपकरण तेज
धार वाले हों तथा इतने पैने कि उनसे बाल को भी दो हिस्सों में काटा जा सके।
शल्यक्रिया से पहले व बाद में वातावरण व उपकरणों की शुद्धता (रोग-
प्रतिरोधी वातावरण) पर सुश्रुत ने इतना जोर दिया है तथा इसके लिए ऐसे
साधनों का वर्णन किया है कि आज के शल्य चिकित्सक भी दंग रह जाएं। शल्य
चिकित्सा (सर्जरी) से पहले रोगी को संज्ञा-शून्य करने (एनेस्थेशिया)
की विधि व इसकी आवश्यकता भी बताई गई है। ‘भोज प्रबंध‘ (९२७ ईस्वी) में
बताया गया है कि राजा भोज को कपाल की शल्य-क्रिया के पूर्व ‘सम्मोहिनी‘
नामक चूर्ण सुंघाकर अचेत किया गया था।
चौदह प्रकार की पट्टियां- इन उपकरणों के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर
बांस, स्फटिक तथा कुछ विशेष प्रकार के प्रस्तर खण्डों का उपयोग भी शल्य
क्रिया में किया जाता था। शल्य क्रिया के मर्मज्ञ महर्षि सुश्रुत ने १४
प्रकार की पट्टियों का विवरण किया है। उन्होंने हड्डियों के खिसकने के छह
प्रकारों तथा अस्थि-भंग के १२ प्रकारों की विवेचना की है। यही नहीं,
उनके ग्रंथ में कान संबंधी बीमारियों के २८ प्रकार तथा नेत्र-रोगों के २६ प्रकार
बताए गए हैं।
सुश्रुत संहिता में मनुष्य की आंतों में कर्कट रोग (कैंसर) के कारण उत्पन्न हानिकर
तन्तुओं (टिश्युओं) को शल्य क्रिया से हटा देने का विवरण है।
शल्यक्रिया द्वारा शिशु-जन्म (सीजेरियन) की विधियों का वर्णन किया गया है।
‘न्यूरो-सर्जरी‘ अर्थात् रोग-मुक्ति के लिए नाड़ियों पर शल्य-क्रिया का उल्लेख है
तथा आधुनिक काल की सर्वाधिक पेचीदी क्रिया ‘प्लास्टिक सर्जरी‘
का सविस्तार वर्णन सुश्रुत के ग्रन्थ में है। आधुनिकतम विधियों का भी उल्लेख इसमें है।
कई विधियां तो ऐसी भी हैं जिनके सम्बंध में आज का चिकित्सा शास्त्र भी अनभिज्ञ है।
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि प्राचीन भारत में शल्य क्रिया अत्यंत उन्नत अवस्था में थी, जबकि शेष विश्व इस विद्या से बिल्कुल अनभिज्ञ था।
``जय सनातन´´
``जय भारत´´

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Shakti Aug 7, 2020

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Babita Gupta Aug 7, 2020

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🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇👇* *!! किसान की घड़ी !!* ----------------------------------------------------- एक बार एक किसान की घड़ी कहीं खो गयी. वैसे तो घडी कीमती नहीं थी पर किसान उससे भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस पाना चाहता था. उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास किया, कभी कमरे में खोजता तो कभी बाड़े तो कभी अनाज के ढेर में ….पर तामाम कोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली. उसने निश्चय किया की वो इस काम में बच्चों की मदद लेगा और उसने आवाज लगाई , ” सुनो बच्चों , तुममे से जो कोई भी मेरी खोई घडी खोज देगा उसे मैं 100 रुपये इनाम में दूंगा.” फिर क्या था, सभी बच्चे जोर-शोर से इस काम में लग गए…वे हर जगह की ख़ाक छानने लगे, ऊपर-नीचे, बाहर, आँगन में ..हर जगह…पर घंटो बीत जाने पर भी घडी नहीं मिली. अब लगभग सभी बच्चे हार मान चुके थे और किसान को भी यही लगा की घड़ी नहीं मिलेगी, तभी एक लड़का उसके पास आया और बोला, ” काका मुझे एक मौका और दीजिये, पर इस बार मैं ये काम अकेले ही करना चाहूँगा.” किसान का क्या जा रहा था, उसे तो घडी चाहिए थी, उसने तुरंत हाँ कर दी. लड़का एक-एक कर के घर के कमरों में जाने लगा…और जब वह किसान के शयन कक्ष से निकला तो घड़ी उसके हाथ में थी. किसान घड़ी देख प्रसन्न हो गया और अचरज से पूछा,” बेटा, कहाँ थी ये घड़ी, और जहाँ हम सभी असफल हो गए तुमने इसे कैसे ढूंढ निकाला ?” लड़का बोला,” काका मैंने कुछ नहीं किया बस मैं कमरे में गया और चुप-चाप बैठ गया, और घड़ी की आवाज़ पर ध्यान केन्द्रित करने लगा, कमरे में शांति होने के कारण मुझे घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे गयी , जिससे मैंने उसकी दिशा का अंदाजा लगा लिया और आलमारी के पीछे गिरी ये घड़ी खोज निकाली.” *शिक्षा :-* *जिस तरह कमरे की शांति, घड़ी ढूढने में मददगार साबित हुई उसी प्रकार मन की शांति हमें Life की ज़रूरी चीजें समझने में मददगार होती है. हर दिन हमें अपने लिए थोडा वक़्त निकालना चाहिए, जसमे हम बिलकुल अकेले हों, जिसमे हम शांति से बैठ कर खुद से बात कर सकें और अपने भीतर की आवाज़ को सुन सकें, तभी हम Life को और अच्छे ढंग से जी पायेंगे। : 🛑🛑🛑🛑 *मैं कौन हूँ*🛑🛑🛑🛑 *एक था भिखारी ! रेल सफ़र में भीख़ माँगने के दौरान एक सूट बूट पहने सेठ जी उसे दिखे। उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है, इससे भीख़ माँगने पर यह मुझे जरूर अच्छे पैसे देगा। वह उस सेठ से भीख़ माँगने लगा।* भिख़ारी को देखकर उस सेठ ने कहा, “तुम हमेशा मांगते ही हो, क्या कभी किसी को कुछ देते भी हो?” *भिख़ारी बोला, “साहब मैं तो भिख़ारी हूँ, हमेशा लोगों से मांगता ही रहता हूँ, मेरी इतनी औकात कहाँ कि किसी को कुछ दे सकूँ?”* सेठ:- जब किसी को कुछ दे नहीं सकते तो तुम्हें मांगने का भी कोई हक़ नहीं है। मैं एक व्यापारी हूँ और लेन-देन में ही विश्वास करता हूँ, अगर तुम्हारे पास मुझे कुछ देने को हो तभी मैं तुम्हे बदले में कुछ दे सकता हूँ। *तभी वह स्टेशन आ गया जहाँ पर उस सेठ को उतरना था, वह ट्रेन से उतरा और चला गया।* इधर भिख़ारी सेठ की कही गई बात के बारे में सोचने लगा। सेठ के द्वारा कही गयीं बात उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह सोचने लगा कि शायद मुझे भीख में अधिक पैसा इसीलिए नहीं मिलता क्योकि मैं उसके बदले में किसी को कुछ दे नहीं पाता हूँ। लेकिन मैं तो भिखारी हूँ, किसी को कुछ देने लायक भी नहीं हूँ।लेकिन कब तक मैं लोगों को बिना कुछ दिए केवल मांगता ही रहूँगा। *बहुत सोचने के बाद भिख़ारी ने निर्णय किया कि जो भी व्यक्ति उसे भीख देगा तो उसके बदले मे वह भी उस व्यक्ति को कुछ जरूर देगा। लेकिन अब उसके दिमाग में यह प्रश्न चल रहा था कि वह खुद भिख़ारी है तो भीख के बदले में वह दूसरों को क्या दे सकता है?* इस बात को सोचते हुए दिनभर गुजरा लेकिन उसे अपने प्रश्न का कोई उत्तर नहीं मिला। *दुसरे दिन जब वह स्टेशन के पास बैठा हुआ था तभी उसकी नजर कुछ फूलों पर पड़ी जो स्टेशन के आस-पास के पौधों पर खिल रहे थे, उसने सोचा, क्यों न मैं लोगों को भीख़ के बदले कुछ फूल दे दिया करूँ। उसको अपना यह विचार अच्छा लगा और उसने वहां से कुछ फूल तोड़ लिए।* वह ट्रेन में भीख मांगने पहुंचा। जब भी कोई उसे भीख देता तो उसके बदले में वह भीख देने वाले को कुछ फूल दे देता। उन फूलों को लोग खुश होकर अपने पास रख लेते थे। अब भिख़ारी रोज फूल तोड़ता और भीख के बदले में उन फूलों को लोगों में बांट देता था। *कुछ ही दिनों में उसने महसूस किया कि अब उसे बहुत अधिक लोग भीख देने लगे हैं। वह स्टेशन के पास के सभी फूलों को तोड़ लाता था। जब तक उसके पास फूल रहते थे तब तक उसे बहुत से लोग भीख देते थे। लेकिन जब फूल बांटते बांटते ख़त्म हो जाते तो उसे भीख भी नहीं मिलती थी,अब रोज ऐसा ही चलता रहा। एक दिन जब वह भीख मांग रहा था तो उसने देखा कि वही सेठ ट्रेन में बैठे है जिसकी वजह से उसे भीख के बदले फूल देने की प्रेरणा मिली थी। *वह तुरंत उस व्यक्ति के पास पहुंच गया और भीख मांगते हुए बोला, आज मेरे पास आपको देने के लिए कुछ फूल हैं, आप मुझे भीख दीजिये बदले में मैं आपको कुछ फूल दूंगा।* सेठ ने उसे भीख के रूप में कुछ पैसे दे दिए और भिख़ारी ने कुछ फूल उसे दे दिए। उस सेठ को यह बात बहुत पसंद आयी। *सेठ:- वाह क्या बात है..? आज तुम भी मेरी तरह एक व्यापारी बन गए हो, इतना कहकर फूल लेकर वह सेठ स्टेशन पर उतर गया।* लेकिन उस सेठ द्वारा कही गई बात एक बार फिर से उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह बार-बार उस सेठ के द्वारा कही गई बात के बारे में सोचने लगा और बहुत खुश होने लगा। उसकी आँखे अब चमकने लगीं, उसे लगने लगा कि अब उसके हाथ सफलता की वह चाबी लग गई है जिसके द्वारा वह अपने जीवन को बदल सकता है। *वह तुरंत ट्रेन से नीचे उतरा और उत्साहित होकर बहुत तेज आवाज में ऊपर आसमान की ओर देखकर बोला, “मैं भिखारी नहीं हूँ, मैं तो एक व्यापारी हूँ..* मैं भी उस सेठ जैसा बन सकता हूँ.. मैं भी अमीर बन सकता हूँ! *लोगों ने उसे देखा तो सोचा कि शायद यह भिख़ारी पागल हो गया है, अगले दिन से वह भिख़ारी उस स्टेशन पर फिर कभी नहीं दिखा।* एक वर्ष बाद इसी स्टेशन पर दो व्यक्ति सूट बूट पहने हुए यात्रा कर रहे थे। दोनों ने एक दूसरे को देखा तो उनमे से एक ने दूसरे को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और कहा, “क्या आपने मुझे पहचाना?” सेठ:- “नहीं तो ! शायद हम लोग पहली बार मिल रहे हैं। *भिखारी:- सेठ जी.. आप याद कीजिए, हम पहली बार नहीं बल्कि तीसरी बार मिल रहे हैं।* सेठ:- मुझे याद नहीं आ रहा, वैसे हम पहले दो बार कब मिले थे? अब पहला व्यक्ति मुस्कुराया और बोला: हम पहले भी दो बार इसी ट्रेन में मिले थे, मैं वही भिख़ारी हूँ जिसको आपने पहली मुलाकात में बताया कि मुझे जीवन में क्या करना चाहिए और दूसरी मुलाकात में बताया कि मैं वास्तव में कौन हूँ। *नतीजा यह निकला कि आज मैं फूलों का एक बहुत बड़ा व्यापारी हूँ और इसी व्यापार के काम से दूसरे शहर जा रहा हूँ।* आपने मुझे पहली मुलाकात में प्रकृति का नियम बताया था... जिसके अनुसार हमें तभी कुछ मिलता है, जब हम कुछ देते हैं। लेन देन का यह नियम वास्तव में काम करता है, मैंने यह बहुत अच्छी तरह महसूस किया है, लेकिन मैं खुद को हमेशा भिख़ारी ही समझता रहा, इससे ऊपर उठकर मैंने कभी सोचा ही नहीं था और जब आपसे मेरी दूसरी मुलाकात हुई तब आपने मुझे बताया कि मैं एक व्यापारी बन चुका हूँ। अब मैं समझ चुका था कि मैं वास्तव में एक भिखारी नहीं बल्कि व्यापारी बन चुका हूँ। *भारतीय मनीषियों ने संभवतः इसीलिए स्वयं को जानने पर सबसे अधिक जोर दिया और फिर कहा -* सोऽहं शिवोहम !! समझ की ही तो बात है... *भिखारी ने स्वयं को जब तक भिखारी समझा, वह भिखारी रहा | उसने स्वयं को व्यापारी मान लिया, व्यापारी बन गया |* जिस दिन हम समझ लेंगे कि मैं कौन हूँ... *अर्थात मैं भगवान का अंश हूॅ।* फिर जानने समझने को रह ही क्या जाएगा ? 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Swami Lokeshanand Aug 7, 2020

तुलसीदासजी ने विचित्र चौपाइयाँ लिखीं। "मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा" और "भवन एक पुनि दीख सुहावा" एक विभीषण के ही घर को घर कहा, रावण सहित शेष राक्षसों के घरों को घर नहीं कहा, मंदिर कह दिया। और जब लंका में आग लग गयी, तब तुलसीदास जी ने लिखा- "जारा नगर निमिष एक माहीं। एक विभीषण कर गृह नाहीं॥" वह "घर" तो छूट गया, "मंदिर" सभी जल गए? विचार करें, आपका मंदिर वहाँ है जहाँ आपकी प्रीति का केन्द्र है। भवन उपयोग के लिए है, रहने के लिए है, प्रीत लगाने के लिए नहीं है। भवन से प्रीत लगाने वाला ही तो प्रेत बनता है। जिसे भवन से प्रीत है, उसे घर में ही आसक्ति है, गृहासक्ति है, तो घर ही उसके जीवन का लक्ष्य हो गया, मंदिर हो गया। जबकि विभीषण जिस घर में रहता है, विभीषण को उस घर में आसक्ति नहीं है। मंदिर तो वहाँ भी है, पर अलग से बना है- "हरि मंदिर तहँ भिन्न बनावा" इसे समझें, मंदिर दो प्रकार के हैं, देव मंदिर और देह मंदिर। विभीषण के मंदिर में देव पूजा होती है, वहाँ श्रीसीतारामजी विराजते हैं, वह तो देव मंदिर है। शेष सबमें देह की पूजा होती थी, वे देह मंदिर हैं। देखो, देह संभालो, पर उसे भी तो देखो जिससे यह जीवित है, उसी से इसकी कीमत है। हिसाब लगाओ! कितने टिन तेल, साबुन, पाउडर, क्रीम इस पर मले, कितना घी, गेहूँ, चावल, दाल, फल, सब्जी, मिठाइयाँ, पापड़, पकोड़े, अचार, चटनी, मुरब्बे इसे खिलाए, इसकी पूजा का कोई अंत है? देव को न जाने, देह को ही पूजे, इसी के सुख के लिए जीवन बिता दे, कमाना खाना और पैखाना ही जिसके जीवन का लक्ष्य है, वही तो असली राक्षस है। लोकेशानन्द कहता है कि अ दुनियावालों! इस देह की कितनी ही पूजा कर लो, सज़ा लो, संवार लो, इसे तो जलना ही पड़ेगा, जलना ही पड़ेगा। अब यह विडियो देखें- हनुमानजी ने देह मंदिरों में आग लगा दी- https://youtu.be/_DW_XzDxzQk

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🪔🪔🪔🪔🪔 *दीप प्रज्वलन मंत्र...* दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:। दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।। शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां। शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।। *मंत्र का अर्थ :* दीपक की ज्योति ही ब्रह्मा व परमेश्वर है। पाप का नाश करने वाली दीपक की ज्योति को मेरा नमस्कार। कल्याण करने वाले शत्रु के भय को खत्म करने और घर में सुख समृद्धि का वास करने वाली ज्योति को मेरा प्रणाम। 🔥🔥🔥🔥🔥 *मंत्रोच्चारण कर दीपक जलाने के लाभ :* मंत्रोच्चारण कर दीपक जलाने के कई लाभ है जिसमें से कुछ हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं जो इस प्रकार हैं - 👉दीपक से अंधकार का नाश होता ही है, साथ ही घर में उपस्थित नकारात्मक शक्ति का भी अंत होता है 👉घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार 👉घर में रहने वाले लोगों की बुद्धि में अच्छे विचार जन्म लेते हैं 👉घर में सुख समृद्धि का वास होता है *देश के प्रधानमंत्री ने जनता से की अपील...* *आओ मिल के दीप जलाएँ...* 👉 बुधवार 👉 5 अगस्त 2020 👉 संध्याकालीन 7बजे 👉 आओ मिल के दीप जलाएँ... 🌹🌷🚩 जय श्री राम जय हनुमान🌹🌷🚩 जय हिंद जय भारत वंदे मातरम🌹🌷🚩🌹 मैं दीप अवश्य जलाऊँगा एक दीप आशा का एक विश्वास का एक ज्ञान का एक प्रकाश का एक तम में उजाले का एक भूखे के निवाले का , एक बेसहारे के सहारे का एक डूबते के किनारे का | एक जन-जन की वाणी का , एक मानव की नादानी का | स्नेह मानवता का लाऊँगा, हाँ ! मैं दीया अवश्य जलाऊँगा| 🌹🌷🚩 जय श्री राम जय हनुमान🌹🌷🚩 जय हिंद जय भारत वंदे मातरम्🌹🌷🚩🌹 दीप जलाकर दें सखे,राष्ट्र भक्ति संदेश। जीवन का उजियार ये,जीवन का उपदेश।। 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 👉सामान्य दूरी बनाए रखें.... ************************************************* *जानिए क्‍यों खास है पांच अगस्‍त को अयोध्‍या में शिलान्‍यास* 🌾🍁🏯👏👏👏👏👏🏯🍁🌾 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 *अयोध्‍या में भगवान श्रीराम मंदिर के शिलान्यास की तिथि निश्चित हो चुकी है। यह स्वर्णिम दिवस है भाद्रपद कृष्ण द्वितीया संवत 2077, तदनुसार पांच अगस्त सन 2020। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों द्वारा यह ऐतिहासिक शिलान्यास मध्यान्ह 12:15 बजे अभिजित मुहूर्त में होगा। *लेकिन पूरे देश के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि पांच अगस्‍त को ही मुहूर्त क्‍यों हो रहा है। इसके पीछे क्‍या कारण है और यदि इस दिन मुहूर्त होता है तो देश को इसका क्‍या लाभ मिलने वाला है ? *इसका विश्‍लेषण किया है। जानिए पांच अगस्‍त को शिलान्‍यास क्‍यों खास है और इसका क्‍या लाभ मिलने जा रहा है। ज्‍योतिषीय दृष्‍टिकोण से यह मुहूर्त बहुत ही शुभ है। -चर संज्ञक लग्न तुला है जो पर्यटन की दृष्‍टि से अति उत्‍तम है। -दशम भाव में बुधादित्य योग बन रहा है जो प्रशासनिक एवं इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। -इस दिन चतुर्थ भाव में स्वराशि के शनि हैं जो पंचमहापुरुष योग बना रहे हैं। यह पुरातात्त्विक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्धता प्रदान करने वाला है। -इस दिन तृतीय भाव में धनु राशि में स्वराशि के गुरु एवं केतु हैं जो विश्व में आध्यात्मिक क्षेत्र में परम प्रसिद्धि योग बना रहे हैं। -बुधवार को शतभिषा नक्षत्र रहेगा जो मित्र एवं मानस योग निर्मित कर रहा है। -इस दिन अभिजित मुहुर्त है जिसे ज्‍योतिष में मौजूद समस्‍त मुहूर्तों में सर्वश्रेष्‍ठ मुहूर्त माना जाता है। -इस दिन मुहूर्त के समय सभी ग्रह स्वराशि या मित्र राशि में दृश्यमान रहेंगे। *ऐसे शुभ एवं उत्तम योगों में रखी गई नींव (शिलान्यास) हजारों वर्षों तक भारतीय संस्कृति एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को विश्व में जीवित रखेंगी। *ऐसा शुभ मुहूर्त केवल श्रीराम मंदिर के लिए ही शुभ नहीं है बल्कि जन सामान्य लोगों के लिए भी गृह निर्माण, गृह प्रवेश एवं अन्य शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम मुहुर्त है। 'राम राज्य बैठे त्रिलोका। हर्षित भयऊ गयऊ सब सोका।' *रामचरितमानस की इस चौपाई की प्रामाणिकता के आधार पर जब भी भगवान राम से संबंधित जो भी अनुष्ठान एवं निर्माण आरंभ होता है तो राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि एवं विकास को गति मिलती है। वैसे भी ऐसे शुभ योग में मन्दिर निर्माण होने से देश की प्रगति से विश्व में यशोगान के योग बन रहे हैं। भारत विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ *जय श्री सियाराम*🙏🚩🚩 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾 *अयोध्या मे किसका मंदिर बन रहा है ?* क्या भगवान राम का ? नही, क्यूँकि वे अजन्मा हैं, शाश्वत हैं, परमात्म स्वरूप हैं, ब्रह्म हैं, सारा जगत ही उनका मंदिर है, वे सब जगह विराजमान हैं, चन्द्र तारों में सूर्य में पृथ्वी जल आकाश अंतरिक्ष मनुष्य पशु प्राणियों फूल पत्तियों और जगत के कण कण में हैं, सम्पूर्ण अयोध्या और वहाँ के अन्य मंदिरों में तो वे हैं हीं, इसलिए उन्हें मंदिर की जरूरत नही है। क्या राजा रामचन्द्र जी का ? नही राजा राम चन्द्र जी का नहीं क्यूँकि पृथ्वी पर कई राजा आये और गए, बड़े बड़े सम्राट आये और गए, सब अपने आलीशान आलीशान महलों किलों इमारतों को यहीं छोड़के चले गए जिनके कुछ अवशेष अभी भी खंडहरों के रूप में मौजूद हैं या फिर जमीनों के अंदर दफन हैं। अब उन पर सरकारों का कब्जा है और वे पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं हैं। क्या भाजपा के जय श्री राम का ? नही क्यूँकि इस मंदिर के लिए पिछले 500 सालों से अब तक लाखों लोगों ने लड़ाइयां लड़ी हैं और अपनी जानें गंवाई है, आज भी विश्वभर में करोड़ों करोड़ों गैर राजनीतिक हिंदू भी इस मंदिर को बनाने के लिए अपना अपना योगदान दे रहे हैं। और इसका बन जाने का पूर्ण हृदय से इंतजार कर रहे हैं जिसका सपना वो कई वर्षों से देखते आ रहे हैं। तो फिर ये मंदिर बन किसका रहा है ? यह मंदिर बन रहा है हिंदू अस्मिता का जिसे सैकड़ो वर्षों से रौंदा जा रहा था, हिंदू आत्म सम्मान का जिसे लगातार ठेस पहुंचाई जा रही थी, उदार हिंदुओं की गरिमा और गौरव का जिसे आतताइयों ने बेरहमी से कुचला था कभी। *यह मंदिर हिंदू पुनर्जागरण का प्रतीक है, हिंदू पुनरुत्थान की उद्घोषणा है।* हिंदू आत्म विश्वास के पुनः उठ खड़े होने का सूचक है । प्राचीन अस्त हिंदू सभ्यता के उदय होने का शंखनाद है । लाखों हिंदू -सिक्ख -जैन - बौद्ध बलिदानियों के लिए श्रद्धांजलि है ये मंदिर। ये मंदिर उन परमपिता परमेश्वर श्री राम का मंदिर है जो प्रत्येक हिंदू के हृदय में इस श्रद्धा विश्वास के रूप में विधमान थे कि एक दिन उनका भी दिन आएगा और वे पुनः अपनी खोई हुई शक्ति दर्प और स्वाभिमान को वापस प्राप्त कर लेंगे। सभी श्री राम भक्त हिंदुओं से अपील है कि वे भूमि पूजन के दिन अपने अपने घरों में रामायण का पाठ करें, धूप अगरबत्ती व दिए जलाएं, शंखनाद करें, घंटियाँ बजाएं, कीर्तन भजन करें ढोलक मृदंग चिमटा खड़ताल डमरू इत्यादि जो कुछ भी जिसके पास हो वह बजाएं। पूरी दुनियां को संदेश जाना चाहिए कि हिंदू जाग गए हैं, हिंदुओं के एक नए युग का श्री गणेश हुआ है भारत में। *राम राज बैठे त्रैलोका,* *हर्षित भये गए सब शोका* *बयरु न कर काहू सम कोई,* *राम प्रताप विषमता खोई।* *जय जय श्री सीताराम* 🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩 "!!अत्यंत ज्ञानवर्धक!!" 🌾🍁🏯👏👏👏👏👏🏯🍁🌾 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 तुलसी दास जी ने जब राम चरित मानस की रचना की,तब उनसे किसी ने पूंछा कि बाबा! आप ने इसका नाम रामायण क्यों नहीं रखा? क्योकि इसका नाम रामायण ही है.बस आगे पीछे नाम लगा देते है, वाल्मीकि रामायण,आध्यात्मिक रामायण.आपने राम चरित मानस ही क्यों नाम रखा? बाबा ने कहा - क्योकि रामायण और राम चरित मानस में एक बहुत बड़ा अंतर है.रामायण का अर्थ है राम का मंदिर, राम का घर,जब हम मंदिर जाते है तो एक समय पर जाना होता है, मंदिर जाने के लिए नहाना पडता है,जब मंदिर जाते है तो खाली हाथ नहीं जाते कुछ फूल,फल साथ लेकर जाना होता है.मंदिर जाने कि शर्त होती है,मंदिर साफ सुथरा होकर जाया जाता है. और मानस अर्थात सरोवर, सरोवर में ऐसी कोई शर्त नहीं होती,समय की पाबंधी नहीं होती,जाती का भेद नहीं होता कि केवल हिंदू ही सरोवर में स्नान कर सकता है,कोई भी हो ,कैसा भी हो? और व्यक्ति जब मैला होता है, गन्दा होता है तभी सरोवर में स्नान करने जाता है.माँ की गोद में कभी भी कैसे भी बैठा जा सकता है. रामचरितमानस की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है। इन मंत्रो का जीवन में प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्रीराम आप के जीवन को सुखमय बना देगे। 1. *रक्षा के लिए* मामभिरक्षक रघुकुल नायक | घृत वर चाप रुचिर कर सायक || 2. *विपत्ति दूर करने के लिए* राजिव नयन धरे धनु सायक | भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक || 3. *सहायता के लिए* मोरे हित हरि सम नहि कोऊ | एहि अवसर सहाय सोई होऊ || 4. *सब काम बनाने के लिए* वंदौ बाल रुप सोई रामू | सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू || 5. *वश मे करने के लिए* सुमिर पवन सुत पावन नामू | अपने वश कर राखे राम || 6. *संकट से बचने के लिए* दीन दयालु विरद संभारी | हरहु नाथ मम संकट भारी || 7. *विघ्न विनाश के लिए* सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही | राम सुकृपा बिलोकहि जेहि || 8. *रोग विनाश के लिए* राम कृपा नाशहि सव रोगा | जो यहि भाँति बनहि संयोगा || 9. *ज्वार ताप दूर करने के लिए* दैहिक दैविक भोतिक तापा | राम राज्य नहि काहुहि व्यापा || 10. *दुःख नाश के लिए* राम भक्ति मणि उस बस जाके | दुःख लवलेस न सपनेहु ताके || 11. *खोई चीज पाने के लिए* गई बहोरि गरीब नेवाजू | सरल सबल साहिब रघुराजू || 12. *अनुराग बढाने के लिए* सीता राम चरण रत मोरे | अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे || 13. *घर मे सुख लाने के लिए* जै सकाम नर सुनहि जे गावहि | सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं || 14. *सुधार करने के लिए* मोहि सुधारहि सोई सब भाँती | जासु कृपा नहि कृपा अघाती || 15. *विद्या पाने के लिए* गुरू गृह पढन गए रघुराई | अल्प काल विधा सब आई || 16. *सरस्वती निवास के लिए* जेहि पर कृपा करहि जन जानी | कवि उर अजिर नचावहि बानी || 17. *निर्मल बुद्धि के लिए* ताके युग पदं कमल मनाऊँ | जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ || 18. *मोह नाश के लिए* होय विवेक मोह भ्रम भागा | तब रघुनाथ चरण अनुरागा || 19. *प्रेम बढाने के लिए* सब नर करहिं परस्पर प्रीती | चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती || 20. *प्रीति बढाने के लिए* बैर न कर काह सन कोई | जासन बैर प्रीति कर सोई || 21. *सुख प्रप्ति के लिए* अनुजन संयुत भोजन करही | देखि सकल जननी सुख भरहीं || 22. *भाई का प्रेम पाने के लिए* सेवाहि सानुकूल सब भाई | राम चरण रति अति अधिकाई || 23. *बैर दूर करने के लिए* बैर न कर काहू सन कोई | राम प्रताप विषमता खोई || 24. *मेल कराने के लिए* गरल सुधा रिपु करही मिलाई | गोपद सिंधु अनल सितलाई || 25. *शत्रु नाश के लिए* जाके सुमिरन ते रिपु नासा | नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा || 26. *रोजगार पाने के लिए* विश्व भरण पोषण करि जोई | ताकर नाम भरत अस होई || 27. *इच्छा पूरी करने के लिए* राम सदा सेवक रूचि राखी | वेद पुराण साधु सुर साखी || 28. *पाप विनाश के लिए* पापी जाकर नाम सुमिरहीं | अति अपार भव भवसागर तरहीं || 29. *अल्प मृत्यु न होने के लिए* अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा | सब सुन्दर सब निरूज शरीरा || 30. *दरिद्रता दूर के लिए* नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना | नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना || 31. *प्रभु दर्शन पाने के लिए* अतिशय प्रीति देख रघुवीरा | प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा || 32. *शोक दूर करने के लिए* नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी | आए जन्म फल होहिं विशोकी || 33. *क्षमा माँगने के लिए* अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता | क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता || इसलिए जो शुद्ध हो चुके है वे रामायण में चले जाए और जो शुद्ध होना चाहते है वे राम चरित मानस में आ जाए.राम कथा जीवन के दोष मिटाती है *"रामचरित मानस एहिनामा, सुनत श्रवन पाइअ विश्रामा"* राम चरित मानस तुलसीदास जी ने जब किताब पर ये शब्द लिखे तो आड़े (horizontal) में रामचरितमानस ऐसा नहीं लिखा, खड़े में लिखा (vertical) रामचरित मानस। किसी ने गोस्वामी जी से पूंछा आपने खड़े में क्यों लिखा तो गोस्वामी जी कहते है रामचरित मानस राम दर्शन की ,राम मिलन की सीढी है ,जिस प्रकार हम घर में कलर कराते है तो एक लकड़ी की सीढी लगाते है, जिसे हमारे यहाँ नसेनी कहते है,जिसमे डंडे लगे होते है,गोस्वामी जी कहते है रामचरित मानस भी राम मिलन की सीढी है जिसके प्रथम डंडे पर पैर रखते ही श्रीराम चन्द्र जी के दर्शन होने लगते है,अर्थात यदि कोई बाल काण्ड ही पढ़ ले, तो उसे राम जी का दर्शन हो जायेगा। *सत्य है शिव है सुन्दर है* 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾

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Sunita Pawar Aug 6, 2020

आइए जानते हैं इस दिव्य वृक्ष पारिजात के बारे में जिसे आज माननीय प्रधानमंत्री जी ने भूमि पूजन से पहले अयोध्या की पावन भूमि पर लगाया और भगवान रामजी से क्या संबंध हैं इस वृक्ष का सुगंधित पुष्प को हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है बता दें कि पारिजात का पेड़ बहुत खूबसूरत होता है। पारिजात के फूल को भगवान हरि के श्रृंगार और पूजन में प्रयोग किया जाता है, इसलिए इस मनमोहक और सुगंधित पुष्प को हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में इस वृक्ष का बहुत महत्व माना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि पारिजात को छूने मात्र से ही व्यक्ति की थकान मिट जाती है। इसमें बहुत बड़ी मात्रा में फूल लगते हैं पारिजात का वृक्ष ऊंचाई में दस से पच्चीस फीट तक का होता है। इसके इस वृक्ष की एक खास बात ये भी है कि इसमें बहुत बड़ी मात्रा में फूल लगते हैं। एक दिन में इसके कितने भी फूल तोड़े जाएं, अगले दिन इस फिर बड़ी मात्रा में फूल खिल जाते हैं। यह वृक्ष खासतौर से मध्य भारत और हिमालय की नीची तराइयों में अधिक उगता है। सिर्फ पांच प्रजातियां पाई जाती हैं ये फूल रात में ही खिलता है और सुबह होते ही इसके सारे फूल झड़ जाते हैं। इसलिए इसे रात की रानी भी कहा जाता है। हरसिंगार का फूल पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प भी है। दुनिया भर में इसकी सिर्फ पांच प्रजातियां पाई जाती हैं। पूजा के लिए इस वृक्ष से फूल तोड़ना पूरी तरह से निषिद्ध कहा जाता है कि धन की देवी लक्ष्मी को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं। पूजा-पाठ के दौरान मां लक्ष्मी को ये फूल चढ़ाने से वो प्रसन्न होती हैं। खास बात ये है कि पूजा-पाठ में पारिजात के वे ही फूल इस्तेमाल किए जाते हैं जो वृक्ष से टूटकर गिर जाते हैं। पूजा के लिए इस वृक्ष से फूल तोड़ना पूरी तरह से निषिद्ध है। ऐसा कहा या माना जाता है क‍ि 14 साल के वनवास के दौरान सीता माता हरसिंगार के फूलों से ही अपना श्रृंगार करती थीं। महाभारतकालीन पारिजात वृक्ष बाराबंकी जिले के पारिजात वृक्ष को महाभारतकालीन माना जाता है जो लगभग 45 फीट ऊंचा है। मान्यता है कि परिजात वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी, जिसे इन्द्र ने अपनी वाटिका में लगाया था। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान माता कुंती ने पारिजात पुष्प से शिव पूजन करने की इच्छा जाहिर की थी। माता की इच्छा पूरी करने के लिए अर्जुन ने स्वर्ग से इस वृक्ष को लाकर यहां स्थापित कर दिया था। तभी से इस वृक्ष की पूजा अर्चना की जाती रही है। पारिजात को कल्पवृक्ष भी कहा गया है हरिवंश पुराण में पारिजात को कल्पवृक्ष भी कहा गया है। मान्यता है कि स्वर्गलोक में इसको स्पर्श करने का अधिकार सिर्फ उर्वशी नाम की अप्सरा को था। इस वृक्ष के स्पर्श मात्र से ही उर्वशी की सारी थकान मिट जाती थी। आज भी लोग मानते हैं कि इसकी छाया में बैठने से सारी थकावट दूर हो जाती है। फूलों के रस के सेवन से हृदय रोग से बचा जा सकता है पारिजात अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। हर दिन इसके एक बीज के सेवन से बवासीर रोग ठीक हो जाता है। इसके फूल हृदय के लिए भी उत्तम माने जाते हैं। इनके फूलों के रस के सेवन से हृदय रोग से बचा जा सकता है। इतना ही नहीं पारिजात की पत्तियों को पीस कर शहद में मिलाकर खाने से सूखी खांसी भी ठीक हो जाती है। पारिजात की पत्तियों से त्वचा संबंधित रोग ठीक हो जाते हैं।🙏

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Madan Kaushik Aug 7, 2020

****अपना पोस्ट*** **नक्षत्रवाणी** *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻*  गजाननं भूतगनादि सेवितम, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम। उमासुतं शोकविनाशकारकम, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम।। श्रीमते रघुवीराय सेतूल्लङ्घितसिन्धवे। जितराक्षसराजाय रणधीराय मङ्गलम्।। भुजगतल्पगतं घनसुन्दरं गरुडवाहनमम्बुजलोचनम् । नलिनचक्रगदाकरमव्ययं भजत रे मनुजाः कमलापतिम् ।।  क्यों भटके मन बावरा, दर-दर ठोकर खाये...! शरण श्याम की ले ले प्यारे, जनम सफल हो जाये...!! 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मित्रों...! सबसे पहले तो नक्षत्रवाणी की पोस्टिंग में व्यस्तत्तम शेड्यूल के चलते ना चाहते हुए भी होने वाले विलंब के लिए आप सभी से हृदयपूर्वक क्षमा प्रार्थना सहित.....🙏🙏 आप सभी परम प्रिय धर्मपारायण, ज्योतिषविद्या प्रेमी विद्वतजनों को आचार्य/पं.मदन तुलसीराम जी कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले) की ओर से सादर-सप्रेम 🌸 जय गणेश 🌸 जय अंबे 🌸 *जय श्री कृष्ण*🌷मंगल प्रभात🌷इसी के साथ आप सभी सनातनी, धर्म व उत्सवप्रेमी, रामभक्त तथा परम राष्ट्रप्रेमी मित्र-बंन्धुओं को आज संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, बहुला चतुर्थी व्रत, जीवंतिका पूजन उत्सव एवं राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की भी बहुत-2 हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं...!!!** 💐 ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ आइये...! अब चलें आपके प्रिय पोस्ट 'नक्षत्रवाणी' के अंतर्गत आज कुछ विशेष महत्वपूर्ण जानकारी, दृकपंचांग, चन्द्र राशिफल' एवं 'आरोग्य मंत्र' की ज्ञानयात्रा पर...🙏 ```༺⊰🕉⊱༻ ``` *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻* ☘️🌸!! ॐ श्री गणेशाय नमः!! 🌸☘️ ****************************** 𴀽𴀊🕉श्री हरिहरौविजयतेतराम्🕉 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :- आज दिनांक *07 अगस्त 2020 ईस्वी* शुक्रवार/फ्राइडे प्रस्तुत है ««« *आज का दृकपंचांग:««« (यहाँ दिये गए तिथि, नक्षत्र,योग आदि के समय इनके समाप्ति काल हैं। सूर्योदयास्त व चंद्रोदय सहित इनका गणना स्थल मुंबई हैं)। कलियुगाब्द......5122 विक्रम संवत्.....2077 (प्रमादी नाम) शक संवत्......1942 🌤मास.......भाद्रपद/भादवो/भादों 🌓पक्ष........कृष्ण/बदी/अंधेर पछ/लागतो भादवो​ **तिथि........चतुर्थी/चौथ** रात्रि 02.06 पर्यंत पश्चात पंचमी **वार/दिन......भृगुवासर/शुक्रवार*** **नक्षत्र..............पूर्वाभाद्रपद** दोप 01.34 पर्यंत पश्चात उत्तराभाद्रपद योग..........सुकर्मा दुसरे दिन प्रातः 05.50 पर्यंत पश्चात धृति करण...........बव दोप 01.09 पर्यंत पश्चात बालव ऋतु (वैदिक)...वर्षा ऋतु (दृक)......वर्षा सूर्य (गोल)......उत्तर सूर्य (अयन)...दक्षिण सूर्योदय......प्रातः 06.21.00 पर। सूर्यास्त......संध्या 07.07.00 पर। चंद्रोदय.......रात्रि 09.52 बजे। **सूर्य राशि...कर्क** **चन्द्र राशि...कुंभ (प्रातः 06.57 तक पश्चात मीन)** **गुरु राशि....धनु (वक्री, उदय पश्चिम दिशा में)** 🚦 *दिशाशूल :-* पश्चिम दिशा - यदि अति आवश्यक हो तो घी/काजु या जौ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें। ☸ शुभ अंक......7 🔯 शुभ रंग.......श्वेत/नीला आसमानी *अभिजीत मुहूर्त :-* मध्याह्न 12.19 से 13.10 तक 👁‍🗨 *राहुकाल (अशुभ) :-* पूर्वाह्न 11.08 से 12.44 तक । 👁‍🗨 *गुलिक काल :-* प्रात: 07.57 से 09.33 तक । ************************** 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त -* *कर्क* 04:28:18 06:44:27 *सिंह* 06:44:27 08:56:18 *कन्या* 08:56:18 11:06:57 *तुला* 11:06:57 13:21:35 *वृश्चिक* 13:21:35 15:37:45 *धनु* 15:37:45 17:43:24 *मकर* 17:43:24 19:30:32 *कुम्भ* 19:30:32 21:04:06 *मीन* 21:04:06 22:35:17 *मेष* 22:35:17 24:16:00 *वृषभ* 24:16:00 26:14:37 *मिथुन* 26:14:37 28:28:18 ✡ *चौघडिया :-* प्रात: 07.40 से 09.17 तक लाभ प्रात: 09.17 से 10.54 तक अमृत दोप. 12.31 से 02.08 तक शुभ सायं 05.22 से 06.59 तक चंचल रात्रि 09.45 से 11.08 तक लाभ । ✍ आज के विशेष योगायोग/युति संयोग, वेध, ग्रहचार (ग्रहचाल), व्रत/पर्व/प्रकटोत्सव, जयंती/जन्मोत्सव व मोक्ष दिवस/स्मृतिदिवस/पुण्यतिथि आदि 🙏👇:- 👉 **आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष शुक्रवार को 👉 वर्ष का 136/एक सौ छत्तीसर्वाँ दिन, भाद्रपद बदी/कृष्ण चतुर्थी 26:06 तक पश्चात् पंचमी शुरु, संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, बहुला चतुर्थी व्रत, बुध अस्त पूर्व में 14:53 पर, सर्वार्थसिद्धियोग/कार्यसिद्धियोग सूर्योदय से 13:33 तक, पंचक जारी, श्रवण तप पूर्ण, जीवंतिका पूजन, श्री रवींद्र नाथ टैगोर जी स्मृति दिवस, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस व विश्व स्तनपान सप्ताह समाप्त।** 🏡वास्तु टिप्स🏡 कृषिवास्तु के अनुसार कभी भी अनाज को ढोकर ईशान कोण की ओर से मंड़ी में ना लेकर जाएं। इससे फसल के उचित दाम नहीं मिलते। यदि अनाज बेचने के लिए ले जाना हो तो पूर्व या पश्चिमी वायव्य की ओर से ले जाने पर अच्छे दाम भी मिलते हैं तथा इससे कृषक/भूस्वामी को अन्य सभी प्रकार के शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। 🙏 💥 **विशेष ध्यातव्य 👉 चतुर्थी यानि चौथ को मूली का किसी भी रूप में सेवन करना या दान करना पूर्णतः वर्जित है। यह धन व बुद्धिनाशक माना गया है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34।** 📿 *आज का आराधना/उपासना मंत्र* *🐚 🕉️ द्रां द्रींं द्रौं स: शुक्राय नमः ‼️🚩* *🚩🕉 महालक्ष्म्यै नमः ‼️ 🎪 🚩* * ॥ ॐ लम्बकर्णाय नम: ॥ ****************************** ⚜ 👉🙏 🚩 ☸ *तिथि विशेष :* 🚩 *तिथि विशेष :-* **संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी, बहुला चतुर्थी/चौथ व्रत।** *************************** 📢 *संस्कृत सुभाषितानि -* ऐश्वर्यतिमिरो चक्षुः पश्यन्नपि न पश्यति । तस्य निर्मलतायां तु दारिद्र्यं परमौषधम् ॥ अर्थात :- ऐश्वर्य से अंध बनी हुई आँख, देखने के बावजुद कुछ देखती नहीं । वैसी आँखों को निर्मल बनाने के लिए दारिद्र्य परम् औषधि है । 🍃 *आरोग्य मंत्र :-* मुनक्का (बड़ी दाख) के औषधीय उपयोग इस प्रकार हैं- - शाम को सोते समय लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन मुनक्कों को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा मुनक्का खाने से खून साफ होता है और नाक से बहने वाला खून भी बंद हो जाता है। मुनक्का का सेवन 2 से 4 हफ्ते तक करना चाहिए। - 250 ग्राम दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड मिलाकर सुबह पीएं। इससे वीर्य के विकार दूर होते हैं। इसके उपयोग से हृदय, आंतों और खून के विकार दूर हो जाते हैं। यह कब्जनाशक है। ****************************** ⚜ *आज का चन्द्र राशिफल* ⚜ 👉 🙏 एक निवेदन 🙏 👇:- मित्रों आपकी इस परमप्रिय ज्ञानवर्धक 'अपना पोस्ट' *नक्षत्रवाणी* को आप जितना हो सकता हो उतना लाइक व शेयर/फॉरवर्ड तो करें ही, आलस्य त्याग कर कृपया इसपर अपनी बुद्धि व विवेक के अनुसार अपने सही-सही कमैंट्स भी अवश्य करें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप मुझे निराश नहीं करेंगे और अपने फीडबैक से व लाइक/सराहना करके भी अवश्य ही मेरा उत्साहवर्धन करेंगे। नक्षत्रवाणी के संदर्भ में आप सभी के बहुमूल्य सुझाव भी सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद...!!! 💐💐 *************************** 🙏 👉,**एक शुभ सूचना:👇** ** मित्रों हमारे 'ऐस्ट्रो वर्ल्ड' के दिव्य कोष में शुद्ध केसर (काश्मीरी व ईरानी A तथा B दोनों ग्रेड की), पारिजात, चम्पा, अनन्त, पुन्नाग, श्वेत/सफ़ेद ऊद, केसर, खस, भीना गुलाब व असली चंदन जैसे दिव्य इत्रों की पूरी रेंज, भीमसेनी कर्पूर, उत्तम क्वालिटी की शुद्ध गुग्गल व शुद्ध लोबान, शुद्ध राशि रत्न-उपरत्न, असली नेपाली रुद्राक्ष रत्न व गण्डकी नदी से प्राप्त असली शालग्राम जी भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा हमारे इस संग्रहालय में और भी कई दिव्य व चमत्कारिक वस्तुएं उपलब्ध हैं। ये सभी दिव्य वस्तुएं हम अपने ज्योतिष-वास्तु एवं वैदिक पूजा-अनुष्ठानों के नियमित यजमानों के लिए बहुत ही सही रेट पर और कम मार्जिन पर देते हैं तथा इनके असली होने की मनी बैक गारंटी के साथ भी। तो आप 'नक्षत्रवाणी' के सभी पाठक भी हमारे परम प्रिय होने से इसका लाभ निःसन्देह ले सकते हैं। इसके लिए आप हमें इसी नम्बर पर व्हाट्सएप्प करें। जल्दी रिप्लाई ना मिलने पर आप कॉल भी कर सकते हैं। धन्यवाद।।।** ***************************** 🐏 *राशि फलादेश मेष :-* *(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)* कार्यक्षमता एवं कार्यकुशलता बढ़ेगी। कर्म के प्रति पूर्ण समर्पण व उत्साह रखें। व्यापार में नई योजनाओं से लाभ होगा। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। मान-सम्मान मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। स्वास्थ्य के प्रति सावधानी रखें। 🐂 *राशि फलादेश वृष :-* *(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)* प्रियजनों से पूरी मदद मिलेगी। धन प्राप्ति के योग हैं। स्वयं के सामर्थ्य से ही भाग्योन्नति के अवसर आएँगे। संतान के कार्यों में उन्नति के योग हैं। दिन प्रेमभरा गुजरेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रुका हुआ धन मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें। 👫🏻 *राशि फलादेश मिथुन :-* *(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)* प्रयास में आलस्य व विलंब नहीं करना चाहिए। रुके हुए काम समय पर होने की संभावना है। विरोधी परास्त होंगे। यात्रा कष्टप्रद हो सकती है। धैर्य एवं संयम बना रहेगा। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। व्ययवृद्धि होगी। तनाव रहेगा। अपरिचितों पर विश्वास न करें। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* *(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)* सत्कार्य में रुचि बढ़ेगी। प्रियजनों का पूर्ण सहयोग मिलेगा। व्यावसायिक चिंताएँ दूर होंगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बेरोजगारी दूर होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। जोखिम न लें। क्रोध एवं उत्तेजना पर संयम रखें। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* *(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)* परिवार में प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। व्यापार के कार्य से बाहर जाना पड़ सकता है। कार्यपद्धति में विश्वसनीयता बनाएँ रखें। धनार्जन होगा। रोमांस में समय बीतेगा। मेहनत का फल मिलेगा। कार्यसिद्धि से प्रसन्नता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। 🙎🏻‍♀️ *राशि फलादेश कन्या :-* *(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)* संतान की प्रगति संभव है। भूमि व संपत्ति संबंधी कार्य होंगे। पूर्व कर्म फलीभूत होंगे। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। व्यापार में इच्छित लाभ होगा। अतिथियों का आवागमन रहेगा। उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। स्वाभिमान बना रहेगा। नई योजनाओं की शुरुआत होगी। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* *(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)* संतान के व्यवहार से कष्ट होगा। सहयोगी मदद नहीं करेंगे। व्ययों में कटौती करने का प्रयास करें। वाहन चलाते समय सावधानी रखें। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। शत्रु सक्रिय रहेंगे। शोक समाचार मिल सकता है। थकान महसूस होगी। व्यावसायिक चिंता रहेगी। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* *(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)* सामाजिक एवं राजकीय ख्याति में अभिवृद्धि होगी। आर्थिक अनुकूलता रहेगी। रुका धन मिलने से धन संग्रह होगा। राज्यपक्ष से लाभ के योग हैं। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। विवाद न करें। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* *(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)* कार्य के विस्तार की योजनाएँ बनेंगी। रोजगार में उन्नति एवं लाभ की संभावना है। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। लाभदायक समाचार मिलेंगे। भूमि व भवन संबंधी कार्य लाभ देंगे। रोजगार मिलेगा। शत्रु भय रहेगा। निवेश व नौकरी लाभ देंगे। व्यापार अच्छा चलेगा। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* *(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)* रुके हुए काम समय पर पूरे होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। परिवार की समस्याओं का समाधान हो सकेगा। व्यापार में नई योजनाएँ बनेंगी। व्यापार अच्छा चलेगा। राजकीय बाधा दूर होकर लाभ होगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। क्रोध पर नियंत्रण रखें। लाभ होगा। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* *(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)* स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें। आवास संबंधी समस्या हल होगी। आलस्य न करें। सोचे काम समय पर नहीं हो पाएँगे। चोट, चोरी व विवाद से हानि संभव है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। कुसंगति से हानि होगी। अपने काम से काम रखें। 🐋 *राशि फलादेश मीन :-* *(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)* व्यवसाय ठीक चलेगा। झंझटों में न पड़ें। उधार दिया धन मिलने से राहत हो सकती है। जीवनसाथी का सहयोग उलझे मामले सुलझाने में सहायक हो सकेगा। वाहन सावधानी से चलाएँ। कोर्ट-कचहरी में अनुकूलता रहेगी। पूजा-पाठ में मन लगेगा। **************************** *👉 🙏मित्रों Covid-19 महामारी के कारण आज की अमूलचूल रूप से बदली हुई इन वैश्विक परिस्थितियों के फलस्वरूप यह राशिफल किसी भी जातक विशेष पर यानि आप या आपकी राशि पर पूरी तरह सटीक बैठे यह आवश्यक नहीं है। कारण आप समझते ही हैं कि हम में से अधिकांश लोग घर पर ही बैठे हैं और कोई कार्य नहीं कर रहे और फ़िलहाल कुछ नहीं करना ही सब्से उत्तम कार्य है क्योंकि कहावत भी है ना कि 'जान बची तो लाखों पाए'। इसलिए वास्तव में तो इस समय सभी १२ राशियों का एक ही राशिफल है कि शासन-प्रशासन के निर्देशों का पालन कीजिये, केवल और केवल अपने-अपने घरों में रहें। बार-बार साबुन, sanitizer, फिटकरी या डेटोलयुक्त पानी से अपने हाथ धोते रहें। एक-दूसरे से आवश्यक शारीरिक दूरी मतलब सोशल distancing बनाए रहें (हाँ मन से सभी एक बने रहें) तथा अनुशासन भी बनाये रखेें...! विश्वास करें कि हम पर ईश्वर की कृपा अवश्य होगी और हम हमारे बैरियों के बुरे इरादे नाकाम करते हुए यह लड़ाई जीत लेंगे यानि निश्चित रूप से कोरोना को समूल उखाड़ फैंकेंगें। धन्यवाद...!!! *🏆कोरोना को जड़ से उखाड़ने के लिए "बस अपने घर पर पैर जमाए रहिये -सुरक्षित रहिये"।* ****************************************** *🎊🎉🎁 आज जिनका जन्मदिवस या विवाह की वर्षगांठ हैं, उन सभी प्रिय मित्रो को कोटिशः शुभकामनायें🎁🎊🎉* ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ और ज़रा इन बातों पर भी ज़रूर ध्यान दें मित्रों...! अगर...??? 1) खूब मेहनत के बाद भी या व्यापार-व्यवसाय में पर्याप्त इन्वेस्टमेंट करने के बाद भी आप अकारण आर्थिक दृष्टी से निरंतर पिछड़ते ही जा रहे हैं....? 2) एक ही नौकरी में लम्बे समय तक कार्य नहीं कर पाते हैं या वहां दिल से काम करते हुए भी आपको कोई पूछता ही नहीं है...? आपकी प्रमोशन ड्यू है कब से लेकिन आप बस दूसरों को आगे बढ़ते देख कर अपने नसीब को कोस रहे हैं...? आपके प्रतिद्वंदी अलग से परेशान करते रहते हैं...? 3) आपस में निरंतर अकारण क्लेश होता रहता है..? 4) शेयर मार्किट से कमाना चाहते हैं पर हर बार नुकसान उठा बैठते हैं...? 5) बिमारी आपको छोड़ ही रही है...? घर का हरएक व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से त्रस्त है...? आमदनी का एक बड़ा हिस्सा हमेशां इसी पर खर्च हो जाता है...? 6) अकारण ही विवाह योग्य बच्चों के विवाह में दिक्कतें आ रही हैं...? 7) शत्रुओं ने आपकी रात की नींद और दिन का चैन हराम किया हुआ है...? 8) पैतृक सम्पति विवाद सुलझ ही नहीं रहा है...? और संपति केवास्तविक हकदार आप हैं तथा आप इसे अपने हक में सुलझना चाहते हैं...? 9) विदेश यात्रा या विदेश में सेटलमेंट को लेकर बहुत समय से परेशान हैं...? 10) आपको डरावने सपने आते हैं..? सपने में सांप या भूत-प्रेत या ऐसे ही नींद उड़ाने वाले दृश्य दीखते हैं...? 11) फिल्म या मीडिया में बहुत समय से संघर्ष के बाद भी सफलता​ नहीं मिल रही...? 12) राजनीति को ही आप अपना कैरियर बनाना चाहते हैं पर आपको कुछ भी समझ नहीं आ रहा...? यदि हाँ...??? तो यह सब अकारण ही नहीं है...! इसके पीछे बहुत ठोस कारण हैं जो कि आपकी जन्म कुंडली या आपके घर-आफिस का वास्तु देखकर या आपकी जन्मकुंडली भी ना होने की स्थिति में हमारे दीर्घ अध्ययन और प्रैक्टिकल ज्योतिषीय अनुभव के आधार पर अन्य विधियों से जाने जा सकते हैं...? तो अब आप और देरी ना करें और तुरंत हमें फोन करें...! आपकी उन्नति निश्चित है और आपकी मंजिल अब दूर नहीं...! ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ प्रस्तुति: आचार्य मदन टी.कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले, मूल निकास: गौड़ बंगाल एवं तत्पश्चात ढाणी भालोट-झुंझनूँ-राज.) (चयनित/Appointed/) ज्योतिष एवं वास्तु शोध वैज्ञानिक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष: TARF, Dadar-Mumbai साभार: बाँके बिहारी (धुरंधर वैदिक विद्वानों का अद्वितीय वैश्विकमंच) कार्यकारी अध्यक्ष: एस्ट्रो-वर्ल्ड मुंबई व सिरसा (सभी दैहिक दैविक भौतिक समस्याओं का एक ही जगह सटीक निदान व स्थायी समाधान) अध्यक्ष: सातफेरे डॉट कॉम मुंबई व सिरसा (आपके अपनों के दिव्य एवं सुसंस्कारी वैवाहिक जीवन की झटपट शुरूआत हेतु अनूठा संस्थान) नोट: हमारी या हमारे संस्थान 'एस्ट्रो-वर्ल्ड' तथा आपके अपनों के वैवाहिक जीवन सम्बन्धी सभी समस्याओं का एकमात्र हल एवं विश्व के इस सबसे अनूठे मंच 'सातफेरे डॉट कॉम' मुंबई या सिरसा की किसी भी प्रकार की गरिमापूर्ण सेवा जैसे वैज्ञानिकतापूर्ण ज्योतिष-वास्तु मार्गदर्शन, सभी प्रकार के मुहूर्त शोधन, नामकरण संस्कार, विवाह संस्कार या अन्य कोई भी वैदिक पूजा-अनुष्ठान आयोजित करवाने, रत्न अभिमन्त्रण, सभी राशिरत्न-उपरत्न, मणि-माणिक्य, सियारसिंगी, हत्थाजोड़ी, नागकेसर, विविध प्रकार के वास्तु पिरामिडज एवं अन्य कई प्रकार की सौभाग्यवर्धक वस्तुओं की प्राप्ति हेतु हमारे... सम्पर्क सूत्र: 9987815015 / 9991610514 ईमेल आई डी: [email protected] 🌺आपका दिन आदि वैद्य (भगवान धन्वंतरि जी) की कृपा से परम मंगलमय हो मित्रो! *🚩जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम🚩* 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩 ।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।। ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※

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