anita sharma
anita sharma Jul 6, 2017

. *बहुत ही सुंदर कथा* (एक बार अवश्य पढे़) ******************** .

. *बहुत ही सुंदर कथा*
(एक बार अवश्य पढे़)
********************

. 🙏 जय श्री #कृष्ण 🙏🏼

एक बार की बात है। महाभारत के युद्ध के बाद भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन द्वारिका गये पर इस बार रथ अर्जुन चला कर के ले गये।

द्वारिका पहुँचकर अर्जुन बहुत
थक गये इसलिए विश्राम करने के लिए अतिथि भवन में चले गये।
शाम के समय रूक्मणी जी ने कृष्ण को भोजन परोसा तो कृष्ण बोले: "घर में अतिथि आये हुए हैं। हम उनके बिना भोजन कैसे कर लें।"

रूक्मणी जी ने कहा: "भगवन! आप आरंभ करिये, मैं अर्जुन को बुलाकर लाती हूँ।"

जैसे ही रूक्मणी जी वहाँ पहुँची तो उन्होंने देखा, कि अर्जुन
सोये हुए हैं। और उनके रोम-रोम से "कृष्ण" नाम की ध्वनि प्रस्फुटित हो रही है। तो ये जगाना तो भूल गयीं और मन्द-मन्द स्वर में ताली बजाने लगी।

इधर नारद जी ने कृष्ण से कहा: "भगवान भोग ठण्डा हो रहा है।"
कृष्ण बोले: "अतिथि के बिना
हम नहीं करेंगे।"

नारद जी बोले: "मैं बुलाकर लाता हूँ।" नारद जी ने वहां का नजारा देखा, तो ये भी जगाना भूल गये और इन्होंने वीणा बजाना शुरू कर दिया।

इधर सत्यभामा जी बोली,"प्रभु! भोग ठण्डा हो रहा है आप प्रारंभ तो करिये।" भगवान बोले: "हम अतिथि के बिना नहीं कर सकते।"

सत्यभामाजी बोली: "मैं बुला कर लाती हूँ।"

ये वहाँ पहुँची तो इन्होंने देखा कि अर्जुन सोये हुए हैं और उनका रोम-रोम कृष्ण नाम का कीर्तन कर रहा है। और रूक्मनीजी ताली बजा रही हैं। नारदजी वीणा बजा रहे हैं। तो ये भी जगाना भूल गयीं और इन्होंने नाचना शुरू कर दिया। इधर भगवान बोले "सब बोल के जाते हैं। भोग ठण्डा हो रहा है पर हमारी चिन्ता किसी को नहीं है। चलकर देखता हूँ वहाँ ऐसा क्या हो रहा है जो सब हम को ही भूल गये।"

प्रभु ने वहाँ जाकर के देखा तो वहाँ तो स्वर लहरी चल रही है । अर्जुन सोते-सोते कीर्तन कर रहे हैं, रूक्मनीजी ताली बजा रही हैं। नारदजी वीणा बजा रहे हैं। और सत्यभामा जी नृत्य कर रही हैं।

ये देखकर भगवान के नेत्र सजल हो गये, और मेरे प्रभु ने अर्जुन के चरण दबाना शुरू कर दिया।

जैसे ही प्रभु के नेत्रों से प्रेमाश्रुओं की बूँदें अर्जुन के चरणों पर पड़ी, तो अर्जून छटपटा के उठे और बोले "प्रभु! ये क्या हो रहा है।"

भगवान बोले, "हे अर्जुन! तुमने मुझे रोम-रोम में बसा रखा है। इसीलिए तो तुम मुझे सबसे अधिक प्रिय हो।"

और गोविन्द न अर्जुने को गले से लगा लिया।

लीलाधारी तेरी लीला,
भक्त भी तू,
भगवान भी तू,
करने वाला भी तू,
कराने वाला भी तू,
बोलिये भक्त और भगवान की जय।

प्यार से बोलो जय श्री कृष्ण।

🙏🏼जय श्रीराधे..जय निताई.. 🙇🏻🙏

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कामेंट्स

Vanita Goyal Jul 6, 2017
बहुत सुंदर दृष्टांत 🙏🙏 जय श्री कृष्ण🌷🌷

Niranjan Singh Rathore Jul 10, 2017
जय श्री कृष्णा भक्त और भगवान की जय

आकाश May 22, 2019

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ASHOK SHARMA May 21, 2019

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. 🌹 "#सिन्दूरी_शिला (#गोवर्धन)" 🌹 ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ हम सब यह तो जानते हैं कि विवाहित स्त्री मांग में सिन्दूर लगाती है। लेकिन यहाँ एक स्थान पर कुँआरी लड़कियां भी सिन्दूर लगाती हैं। है न अचरज की बात, लेकिन सत्य है। पूरे देश से लड़कियां सिन्दूर लगाने आती हैं। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में सिन्दूरी शिलामथुरा के गोवर्धन पर्वत पर परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले प्रत्येक स्थान से कृष्ण की कथाएँ जुड़ी हैं। मार्ग में एक विशालकाय शिला पड़ती है। यह कोई साधारण शिला नहीं है। इसका नाम सिन्दूरी शिला है। यह कृष्ण कालीन शिला है। राधा को भरनी थी माँग, शिला को बनाया सिन्दूरी पद्म पुराण में कहा गया है कि समस्त गोपियों में राधाजी, श्री कृष्ण को सर्वाधिक प्रिय हैं। वे उनकी प्राणवल्लभा हैं। गोवर्धन मार्ग पर श्रीकृष्ण के साथ श्री राधिका अपनी सखियों के साथ रास रचाने के लिए आतुर थीं। वे बरसाना से सोलह श्रृंगार करके कन्हैया के पास आई। राधा रानी बोलीं, प्रभु बताओ तो मेरा श्रृंगार कैसा लग रहा है। तब भगवान ने कहा, "हे राधे ! तुम अपनी मांग में सिन्दूर भरके नहीं आई हो।" तब राधा जी ने कहा- "हे प्रभु ! अब मैं बरसाना वापस जाऊँगी तो लौट कर आने में विलम्ब हो जायेगा। ऐसे में मांग कैसे भरूं ?" तब श्रीकृष्ण ने राधाजी से कहा- "हे राधे ! तुम जिस शिला को श्री कृष्णा शरणम् नमः कह कर रगड़ोगी, वही शिला सिन्दूरी हो जाएगी।" ऐसा ही हुआ। राधाजी ने जिस शिला को रगड़कर अपनी मांग भरी, उस शिला का नाम सिन्दूरी शिला पड़ गया। सिन्दूरी शिला को आज भी घिसते हैं तो सिन्दूर निकलता है। इसी सिन्दूर को सुहागिनें अपनी मांग में भरती हैं। कुंआरी लड़कियां बिन्दी के रूप में लगाती हैं। ऐसा माना जाता है कि सिन्दूर लगाने से महिला अखंड सौभाग्यवती हो जाती है। कुँआरी लड़कियां इस सिन्दूर की बिंदी अपने माथे पर इसलिए लगाती हैं कि राधा और कृष्ण के प्रेम का प्रतीक यह सिन्दूर आने वाले जीवन को खुशियों से भर दे। "जय जय श्री राधे राधे" 🌹🌹🌹🌹🌹

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