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Malti Bansal Nov 22, 2020
जय श्री राधे राधे🙏🌹🙏

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Mendeep Sharma Jan 26, 2021

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RP SINGH Jan 26, 2021

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Malti Bansal Jan 26, 2021

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GOVIND CHOUHAN Jan 26, 2021

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Shalini Chaudhary Jan 26, 2021

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Ajit sinh Parmar Jan 26, 2021

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🚩ईश्वर पर हमेशा भरोसा रखें🚩 एक अमीर व्यक्ति था। उसने समुद्र में अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई और छुट्टी के दिन वह नाव लेकर अकेले समुद्र की सैर करने निकल पड़ा। वह समुद्र में थोङा आगे पहुंचा ही था कि अचानक एक जोरदार तूफान आ गया। उसकी नांव पुरी तरह से तहस-नहस हो गइ लेकिन वह लाइफ जैकेट के साथ समुद्र में कूद गया। जब तूफान शान्त हुआ तब वह तैरता-तैरता एक टापु पर जा पहुंचा। मगर वहां भी कोई नहीं था। टापु के चारों ओर समुद्र के अलावा क़ुछ भी नजर नहीं आ रहा था। उस आदमी ने सोचा कि जब मैंने पूरी जिंदगी में किसी का कभी बुरा नहीं किया तो मेरे साथ बुरा नहीं होगा। उसको लगा कि ईश्वर ने मौत से बचाया है तो आगे का रास्ता भी वही दिखाएगा। धीरे-धीरे वह वहां पर उगे झाङ-फल-पत्ते खाकर दिन बिताने लगा। मगर अब धीरे-धीरे उसे लगने लगा था कि वह इस टापू पर फंस गया है। मगर अब भी ईश्वर पर उसका भरोसा कायम था। उसने सोचा इतने दिनों से मैं इस टापू पर मारा-मारा फिर रहा हूं, क्यों न यहां एक झोपड़ी बना लूं। पता नहीं अभी और कितने दिन यहां बिताने पड़ें। पूरे दिन लकडि़यां और पत्ते वगैरह इकट्ठा कर उसने झोंपड़ी बनानी शुरू की। रात होते-होते उसकी झोंपड़ी बनकर तैयार हो गई थी। अभी वह झोंपड़ी के बाहर खड़ा होकर उसे देखते हुए सोच रहा था कि आज से झोंपडी में सोने को मिलेगा। मगर अचानक से मौसम बदला और बिजली जोर-जोर से कड़कने लगी और एक बिजली उसकी झोंपड़ी पर गिर गई। उसके देखते ही देखते झोंपड़ी जलकर खाक हो गई। यह देखकर वह व्यक्ति टुट गया। उसने आसमान की तरफ देखकर बोला, हे ईश्वर ये तेरा कैसा इंसाफ है। तूने मुझ पर अपनी रहम की नजर क्यों नहीं की? मैंने हमेशा तुझ पर विश्वास बनाए रखा। फिर वह इंसान हताश और निराश होकर सर पर हाथ रखकर रोने लगा। अचानक ही एक नाव टापू के पास आई। नाव से उतर कर दो आदमी बाहर आए और बोले कि हम तुम्हें बचाने आए हैं। दुर से इस वीरान टापू में जलता हूआ झोंपड़ा देखा तो लगा की कोई उस टापू पर मुसीबत में है। अगर तुम अपनी झोंपडी नहीं जलाते तो हमें पता नहीं चलता कि टापू पर कोई हैं। उस आदमी की आंखों से आंसू गिरने लगे। उसने ईश्वर से माफी मांगी और बोला कि हे ईश्वर मुझे क्या पता था कि तूने मुझे बचाने के लिए मेरी झोंपडी जलाई थी। यकिनन तू अपने बंदों का हमेशा ख्याल रखता है। तूने मेरे सब्र का इम्तेहान लिया, लेकिन मैं उसमे फेल हो गया। मुझे माफ कर दे। इस कहानी से यही सीख मिलती है कि--दिन चाहे सुख के हों या दुःख के, भगवान अपने बन्दों के साथ हमेशा रहते हैं। हां हम एक बार ईश्वर से रूठ सकते हैं, लेकिन ईश्वर हमसे कभी नहीं रूठता। वह हमेशा अच्छा ही करता है। अक्सर हमारे साथ भी ऐसे हालत बन जाते हैं, हम पूरी तरह निराश हो जाते हैं और अपने ईश्वर या नियति से रूठ जाते हैं और विश्वास खो देते हैं जिससे हमारे यानी आत्म विश्वास में भी गिरावट होती है। लेकिन फिर बाद में हमें पता लगता है कि परमात्मा ने जो किया वह अच्छा ही किया था, नहीं तो आज मैं यहां न होता। इसलिए मुसीबत या दुःख के समय हार मानने की बजाय लगातार अपने कर्तव्य करते रहिए, और बाकी अपने परम पिता परमेश्वर छोड़ दीजिए,, क्योंकि वह जो करेंगे निश्चित अच्छा ही करेंगे....!

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