🙏शुभ शुक्रवार 🙏जय माता दी 🙏 चैत्र नवरात्रि के तृतीय दिन माँ चंद्रघंटा पूजन की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ *🚩जानिए क्यों मनाई जाती है नवरात्रि और कैसे करें शक्ति की उपासना*🌹🌹 *🚩नवरात्रि के नौ दिनों में देवीतत्त्व अन्य दिनों की तुलना में एक सहस्र गुना अधिक सक्रिय रहता है । इस कालावधि में देवीतत्त्व की अतिसूक्ष्म तरंगें धीरे-धीरे क्रियाशील होती हैं और पूरे ब्रह्मांड में संचारित होती हैं । उस समय ब्रह्मांड में शक्ति के स्तर पर विद्यमान अनिष्ट शक्तियां नष्ट होती हैं और ब्रह्मांड की शुद्धि होने लगती है । देवीतत्त्व की शक्ति का स्तर प्रथम तीन दिनों में सगुण-निर्गुण होता है । उसके उपरांत उसमें निर्गुण तत्त्वकी मात्रा बढ़ती है और नवरात्रि के अंतिम दिन इस निर्गुण तत्त्वकी मात्रा सर्वाधिक होती है । निर्गुण स्तर की शक्ति के साथ सूक्ष्म स्तर पर युद्ध करने के लिए छठे एवं सातवें पाताल की बलवान आसुरी शक्तियों को अर्थात मांत्रिकों को इस युद्ध में प्रत्यक्ष सहभागी होना पड़ता है । उस समय ये शक्तियां उनके पूरे सामर्थ्य के साथ युद्ध करती हैं ।* *इस वर्ष चैत्री नवरात्रि25 मार्च से 2 अप्रैल तक हैं।* *🚩नवरात्रि की कालावधि में महाबलशाली दैत्यों का वध कर देवी दुर्गा महाशक्ति बनी । देवताओं ने उनकी स्तुति की । उस समय देवीमां ने सर्व देवताओं एवं मानवों को अभय का आशीर्वाद देते हुए वचन दिया कि* *इत्थं यदा यदा बाधा दानवोत्था भविष्यति ।* *तदा तदाऽवतीर्याहं करिष्याम्यरिसंक्षयम् ।।* *– मार्कंडेयपुराण 91.51* *🚩इसका अर्थ है, जब-जब दानवोंद्वारा जगत्को बाधा पहुचेगी, तब-तब मैं अवतार धारण कर शत्रुओं का नाश करूंगी ।* *🚩नवरात्र का उत्सव श्रद्धा और सबुरी के रंग में सराबाेर होता है। नवरात्र के दिनों में भक्त देवी माँ के प्रति विशेष उपासना प्रकट करते हैं। नवरात्र के दिनों में लोग कई तरह से माँ की उपासना करते हैं। माता के इस पावन पर्व हर कोई उनकी अनुकंपा पाना चाहता है। नवरात्र का यह पावन त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है। इसका भी एक खास महत्व है। वैसे तो माँ दुर्गा की उपासना के लिए सभी समय एक जैसे हैं और दोनों नवरात्रि का प्रताप भी एक जैसा है। साथ ही दोनों नवरात्र में माँ की पूजा करने वाले भक्तों को उनकी विशेष अनुकंपा भी प्राप्त होती है।* *● एक वर्ष में कितनी बार पड़ते हैं नवरात्रि*🌹🌹 *🚩कम लोगों को ज्ञात होगा कि एक साल में नवरात्र के 4 बार पड़ते हैं। साल के प्रथम मास चैत्र में पहली नवरात्र होती है, फिर चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्र पड़ती है। इसके बाद अश्विन माह में में प्रमुख शारदीय नवरात्र होती है। साल के अंत में माघ माह में गुप्त नवरात्र होते हैं। इन सभी नवरात्रों का जिक्र देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है। हिंदी कैलेंडर के हिसाब से चैत्र माह से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है, और इसी दिन से नवरात्र भी शुरू होते हैं, लेकिन सर्वविदित है कि चारों में चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रमुख माने जाते हैं। एक साल में यह दो नवरात्र मनाए जाने के पीछे की वजह भी अलग-अलग तरह की है। आइए हम आपको नवरात्र का उत्सव साल में दो बार मनाने के पीछे आध्यात्मिक, प्राकृतिक और पौराणिक कारणों के बारे में बताते हैं।* *● क्या है प्राकृतिक कारण*🌹🌹 *🚩नवरात्रि का पर्व दो बार मनाने के पीछे अगर प्राकृतिक कारणों की बात की जाए तो हम पाएंगे कि दोनों नवरात्र के समय ही ऋतु परिवर्तन होता है। गर्मी और शीत के मौसम के प्रारंभ से पूर्व प्रकृति में एक बड़ा परिवर्तन होता है। माना जाता है कि प्रकृति माता की इसी शक्ति के उत्सव को आधार मानते हुए नवरात्रि का पर्व हर्ष, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं ही इन दोनों समय काल पर ही नवरात्रि के उत्सव के लिए तैयार रहती है तभी तो उस समय न मौसम अधिक गर्म न अधिक ठंडा होता है। खुशनुमा मौसम इस पर्व की महत्ता को और बढ़ाता है।* *● ये है भौगोलिक तथ्य*🌹🌹 *🚩अगर भौगोलिक आधार पर गौर किया जाए तो मार्च और अप्रैल के जैसे ही, सितंबर और अक्टूबर के बीच भी दिन और रात की लंबाई के समान होती है। तो इस भौगोलिक समानता की वजह से भी एक साल में इन दोनों नवरात्रि को मनाया जाता है। प्रकृति में आए इन बदलाव के चलते मन तो मन हमारे दिमाग में भी परिवर्तन होते हैं। इस प्रकार नवरात्र के दौरान व्रत रखकर शक्ति की पूजा करने से शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है।* *● यह है पौराणिक मान्यता*🌹🌹 *🚩नवरात्रि का त्योहार साल में दो बार मनाए जाने के पीछे प्राचीन कथाओं का उल्लेख भी पुराणों में मिलता है। माना जाता है कि पहले नवरात्रि सिर्फ चैत्र नवरात्र होते थे जो कि ग्रीष्मकाल के प्रारंभ से पहले मनाए जाते थे, लेकिन जब श्रीराम ने रावण से युद्ध किया और उनकी विजय हुई। विजयी होने के बाद वो माँ का आशीर्वाद लेने के लिए नवरात्रि की प्रतीक्षा नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने एक विशाल दुर्गा पूजा आयोजित की थी। इसके बाद से नवरात्रि का पर्व दो बार मनाते हैं।* *● अध्यात्म कहता है*🌹🌹 *🚩अगर एक साल में दो नवरात्र मनाने के पीछे के आध्यात्मिक पहलू पर प्रकाश डालें तो जहाँ एक नवरात्रि चैत्र मास में गर्मी की शुरुआत में आती है तो वहीं दूसरी सर्दी के प्रारंभ में आती है। गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में आने वाली सौर-ऊर्जा से हम सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि यह फसल पकने की अवधि होती है। मनुष्य को वर्षा, जल, और ठंड से राहत मिलती है। ऐसे जीवनोपयोगी कार्य पूरे होने के कारण दैवीय शक्तियों की आराधना करने के लिए यह समय सबसे अच्छा माना जाता है।* ● रामनवमी से है संबंध*🌹🌹 *🚩मान्यता है कि रावण से युद्ध से पहले भगवान श्रीराम ने माता शक्ति की पूजा रखवाई थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीराम ने रावण के साथ युद्ध पर जाने से पूर्व अपनी विजय की मनोकामना मानते हुए माँ के आशीर्वाद लेने के लिए विशाल पूजा का आयोजन करवाया था। कहा जाता है कि राम देवी के आर्शीवाद के लिए इतना इतंजार नहीं करना चाहते थे और तब से ही प्रतिवर्ष दो बार नवरात्रि का आयोजन होता है। जहाँ शारदीय नवरात्र में यह सत्य की असत्य पर व धर्म की अधर्म पर जीत का स्वरूप माना जाता है, वहीं चैत्रीय नवरात्र में इसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव या रामनवमी के नाम से जानते हैं।* *🚩नवरात्रि का व्रत धन-धान्य प्रदान करनेवाला, आयु एवं आरोग्यवर्धक है। शत्रुओं का दमन व बल की वृद्धि करनेवाला है ।* *🚩इस साल कोरोना वायरस का जिस तरह पूरे देश में प्रकोप चल रहा है, उसको शांत करने के लिए भी माँ आद्यशक्ति जगदंबा की नौ दिन की उपासना सहायता करेगी।*

🙏शुभ शुक्रवार 🙏जय माता दी 🙏
चैत्र नवरात्रि के तृतीय दिन माँ चंद्रघंटा पूजन की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 

*🚩जानिए क्यों मनाई जाती है नवरात्रि और कैसे करें शक्ति की उपासना*🌹🌹

*🚩नवरात्रि के नौ दिनों में देवीतत्त्व अन्य दिनों की तुलना में एक सहस्र गुना अधिक सक्रिय रहता है । इस कालावधि में देवीतत्त्व की अतिसूक्ष्म तरंगें धीरे-धीरे क्रियाशील होती हैं और पूरे ब्रह्मांड में संचारित होती हैं । उस समय ब्रह्मांड में शक्ति के स्तर पर विद्यमान अनिष्ट शक्तियां नष्ट होती हैं और ब्रह्मांड की शुद्धि होने लगती है । देवीतत्त्व की शक्ति का स्तर प्रथम तीन दिनों में सगुण-निर्गुण होता है । उसके उपरांत उसमें निर्गुण तत्त्वकी मात्रा बढ़ती है और नवरात्रि के अंतिम दिन इस निर्गुण तत्त्वकी मात्रा सर्वाधिक होती है । निर्गुण स्तर की शक्ति के साथ सूक्ष्म स्तर पर युद्ध करने के लिए छठे एवं सातवें पाताल की बलवान आसुरी शक्तियों को अर्थात मांत्रिकों को इस युद्ध में प्रत्यक्ष सहभागी होना पड़ता है । उस समय ये शक्तियां उनके पूरे सामर्थ्य के साथ युद्ध करती हैं ।*
*इस वर्ष चैत्री नवरात्रि25 मार्च से 2 अप्रैल तक हैं।*
*🚩नवरात्रि की कालावधि में महाबलशाली दैत्यों का वध कर देवी दुर्गा महाशक्ति बनी । देवताओं ने उनकी स्तुति की । उस समय देवीमां ने सर्व देवताओं एवं मानवों को अभय का आशीर्वाद देते हुए वचन दिया कि*
*इत्थं यदा यदा बाधा दानवोत्था भविष्यति ।*
*तदा तदाऽवतीर्याहं करिष्याम्यरिसंक्षयम् ।।*
*– मार्कंडेयपुराण 91.51*
*🚩इसका अर्थ है, जब-जब दानवोंद्वारा जगत्को बाधा पहुचेगी, तब-तब मैं अवतार धारण कर शत्रुओं का नाश करूंगी ।*
*🚩नवरात्र का उत्सव श्रद्धा और सबुरी के रंग में सराबाेर होता है। नवरात्र के दिनों में भक्त देवी माँ के प्रति विशेष उपासना प्रकट करते हैं। नवरात्र के दिनों में लोग कई तरह से माँ की उपासना करते हैं। माता के इस पावन पर्व हर कोई उनकी अनुकंपा पाना चाहता है। नवरात्र का यह पावन त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है। इसका भी एक खास महत्व है। वैसे तो माँ दुर्गा की उपासना के लिए सभी समय एक जैसे हैं और दोनों नवरात्रि का प्रताप भी एक जैसा है। साथ ही दोनों नवरात्र में माँ की पूजा करने वाले भक्तों को उनकी विशेष अनुकंपा भी प्राप्त होती है।*
*● एक वर्ष में कितनी बार पड़ते हैं नवरात्रि*🌹🌹
*🚩कम लोगों को ज्ञात होगा कि एक साल में नवरात्र के 4 बार पड़ते हैं। साल के प्रथम मास चैत्र में पहली नवरात्र होती है, फिर चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्र पड़ती है। इसके बाद अश्विन माह में में प्रमुख शारदीय नवरात्र होती है। साल के अंत में माघ माह में गुप्त नवरात्र होते हैं। इन सभी नवरात्रों का जिक्र देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है। हिंदी कैलेंडर के हिसाब से चैत्र माह से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है, और इसी दिन से नवरात्र भी शुरू होते हैं, लेकिन सर्वविदित है कि चारों में चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रमुख माने जाते हैं। एक साल में यह दो नवरात्र मनाए जाने के पीछे की वजह भी अलग-अलग तरह की है। आइए हम आपको नवरात्र का उत्सव साल में दो बार मनाने के पीछे आध्यात्मिक, प्राकृतिक और पौराणिक कारणों के बारे में बताते हैं।*
*● क्या है प्राकृतिक कारण*🌹🌹
*🚩नवरात्रि का पर्व दो बार मनाने के पीछे अगर प्राकृतिक कारणों की बात की जाए तो हम पाएंगे कि दोनों नवरात्र के समय ही ऋतु परिवर्तन होता है। गर्मी और शीत के मौसम के प्रारंभ से पूर्व प्रकृति में एक बड़ा परिवर्तन होता है। माना जाता है कि प्रकृति माता की इसी शक्ति के उत्सव को आधार मानते हुए नवरात्रि का पर्व हर्ष, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं ही इन दोनों समय काल पर ही नवरात्रि के उत्सव के लिए तैयार रहती है तभी तो उस समय न मौसम अधिक गर्म न अधिक ठंडा होता है। खुशनुमा मौसम इस पर्व की महत्ता को और बढ़ाता है।*
*● ये है भौगोलिक तथ्य*🌹🌹
*🚩अगर भौगोलिक आधार पर गौर किया जाए तो मार्च और अप्रैल के जैसे ही, सितंबर और अक्टूबर के बीच भी दिन और रात की लंबाई के समान होती है। तो इस भौगोलिक समानता की वजह से भी एक साल में इन दोनों नवरात्रि को मनाया जाता है। प्रकृति में आए इन बदलाव के चलते मन तो मन हमारे दिमाग में भी परिवर्तन होते हैं। इस प्रकार नवरात्र के दौरान व्रत रखकर शक्ति की पूजा करने से शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है।*
*● यह है पौराणिक मान्यता*🌹🌹
*🚩नवरात्रि का त्योहार साल में दो बार मनाए जाने के पीछे प्राचीन कथाओं का उल्लेख भी पुराणों में मिलता है। माना जाता है कि पहले नवरात्रि सिर्फ चैत्र नवरात्र होते थे जो कि ग्रीष्मकाल के प्रारंभ से पहले मनाए जाते थे, लेकिन जब श्रीराम ने रावण से युद्ध किया और उनकी विजय हुई। विजयी होने के बाद वो माँ का आशीर्वाद लेने के लिए नवरात्रि की प्रतीक्षा नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने एक विशाल दुर्गा पूजा आयोजित की थी। इसके बाद से नवरात्रि का पर्व दो बार मनाते हैं।*
*● अध्यात्म कहता है*🌹🌹
*🚩अगर एक साल में दो नवरात्र मनाने के पीछे के आध्यात्मिक पहलू पर प्रकाश डालें तो जहाँ एक नवरात्रि चैत्र मास में गर्मी की शुरुआत में आती है तो वहीं दूसरी सर्दी के प्रारंभ में आती है। गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में आने वाली सौर-ऊर्जा से हम सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि यह फसल पकने की अवधि होती है। मनुष्य को वर्षा, जल, और ठंड से राहत मिलती है। ऐसे जीवनोपयोगी कार्य पूरे होने के कारण दैवीय शक्तियों की आराधना करने के लिए यह समय सबसे अच्छा माना जाता है।*
● रामनवमी से है संबंध*🌹🌹
*🚩मान्यता है कि रावण से युद्ध से पहले भगवान श्रीराम ने माता शक्ति की पूजा रखवाई थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीराम ने रावण के साथ युद्ध पर जाने से पूर्व अपनी विजय की मनोकामना मानते हुए माँ के आशीर्वाद लेने के लिए विशाल पूजा का आयोजन करवाया था। कहा जाता है कि राम देवी के आर्शीवाद के लिए इतना इतंजार नहीं करना चाहते थे और तब से ही प्रतिवर्ष दो बार नवरात्रि का आयोजन होता है। जहाँ शारदीय नवरात्र में यह सत्य की असत्य पर व धर्म की अधर्म पर जीत का स्वरूप माना जाता है, वहीं चैत्रीय नवरात्र में इसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव या रामनवमी के नाम से जानते हैं।*
*🚩नवरात्रि का व्रत धन-धान्य प्रदान करनेवाला, आयु एवं आरोग्यवर्धक है। शत्रुओं का दमन व बल की वृद्धि करनेवाला है ।*
*🚩इस साल कोरोना वायरस का जिस तरह पूरे देश में प्रकोप चल रहा है, उसको शांत करने के लिए भी माँ आद्यशक्ति जगदंबा की नौ दिन की उपासना सहायता करेगी।*

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कामेंट्स

Vinod Agrawal Mar 27, 2020
🌷Jai Mata Di Jai Maa Ambey Maharani Jai Maa Chandraghanta Devi Maa🌷

Dr.ratan Singh Mar 27, 2020
🔔🚩ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः 🚩🔔 🙏🌻 सुप्रभात वंदन भाई🌻🙏 या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। 👣आप और आपके पूरे परिवार पर माँ चन्द्र घंटा देवी की आशिर्वाद निरंतर बनी और सभी मनोकमनाएं पूर्ण हो जी🙏 🎎आपका शुक्रवार नवरात्रि का दिन शुभ ममतामय शांतिमय और मंगलमय हो जी🙏 🙏🦁🔔🚩जय माता दी🚩🔔🦁

Sumitra Soni Mar 27, 2020
जय माता दी 🙏🏻🌹भाई माता रानी का आशीर्वाद आप पर आपके परिवार पर सदैव बना रहे आप सदैव स्वस्थ रहें खुश रहें सदा सुखी रहे भाई आपका हर पल शुभ हो🙏🏻🌹

Don.mir Mar 27, 2020
Jay Mata ji Ane Vala Har Pal Apka khusiuo se bhara Rahe Apka din Shub Rahe Nice post GooD Morning Rajkumar Bhai ji 👌👌👌🌹🌹🌹🙏🙏🙏

Venkatesh (ವೆಂಕಟೇಶ್ ) Mar 27, 2020
🙏🙏🙏🌺🌺🌷jai sri radha krishna sri maha lakshmi sri mata parvathi ki krupa aap aur aapki parivar sada bani rahe🌺 subha dopar aap ka din subha aur mangal aur hamesa kush rahe vandan brother ji 🌷🌹🌹

Ansouya Ansouya Mar 27, 2020
जय माता दी शुभ दोपहर वनदन भाई आप का दिन शुभ और मंगलमय हो चंद्रघंटा माता रानी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे जी जय हो 💐🌷🌷🙏🙏

🚩SHREYA RAJPUT🚩 Mar 27, 2020
Jai Mata Di Bhai Ji aap or apki family pr Mata Rani Di kripa Bna rhe Good Evening Bhai Ji 🙏🙏🌹🌹

Shivsanker Shukala Mar 27, 2020
जय माता दी शुभ संध्या भैया जी जय माता दी

Poonam Aggarwal Mar 27, 2020
🚩 जय माता दी जय मां चंद्रघंटा 🚩🔔🙏 माता रानी की कृपा से आप के घर परिवार में सुख शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहे शुभ मंगलमय हो 👣🐾 शुभ संध्या वंदन भाई जी ❇️🌹 प्रेम से बोलो जय माता दी 🌹❇️

🙋🅰️️NJALI️️🌹Ⓜ️ISH®️A🙏 Mar 27, 2020
🙏जय माता दी 🚩भाई जी 🙏माता रानी की कृपा दृष्टि सदा आप और आपके संपूर्ण परिवार पर बनी रहे मेरे भाई जी 🙏आप सभी हमेशा स्वस्थ रहें सुखी रहें,इसी शुभकामना के साथ 🙏 शुभ रात्रि वंदन भाई जी 🌷🌷🌷🌷🙏🙏

Vijay Pandey Mar 27, 2020
🙏🌷🌷🚩 जय माता दी ‌🚩🌷🌷 शुभ रात्रि की शुभ मंगल कामनाएं, मां चंद्रघंटा देवी जी की असीम कृपा से आपके घर परिवार में सुख शांति समृद्धि और आरोग्यता हमेशा बनी रहे, आप सपरिवार सदा स्वस्थ एवं सुखी रहें ‌🌷🙌 आप और आपके परिवार की समस्त अभिलाषायें पूर्णं हों !🌷🙌🌷🙌

Dr. Seema Soni Mar 27, 2020
जो जलता है वो बुझता जरूर है। जो चलता है वो रुकता जरूर है। जो बहता है वो थमता जरूर है। संयम रखें ये एक वायरस है।ये भी एक दिन बुझेगा, रुकेगा,थमेगा जरूर।मता रानी हम सभी को सदा स्वस्थ और प्रसन्न रखेंगी।🙏🌹🙏जय माता दी गुड नाइट भैयाजी 🙏

Ansouya Ansouya Mar 27, 2020
जय माता दी शुभ रात्रि वनदन भइया जी चंद्रघंटा माता रानी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे भैया सदा जय हो जी 🙏🙏🙏🙏🙏

Mamta Chauhan Mar 27, 2020
Jai mata di shubh ratri vabdan bhai ji aapka har pal mangalmay ho 🌷🌿🙏🌷🌿🙏🌷🌿

दिनकर महाराज लटपटे Mar 27, 2020
राम राम जी🙏🙏. जय माता दी🙏🙏 भगवती चन्द्रघंटा माता की कृपा आप और आपके परिवारपर सदैव बनी रहे 🌷आपका हर पल सभी खुशीयोंसे भरा हो🌷शुभ रात्री वंदन🙏🙏🌷🌷

9⃣5⃣7⃣4⃣4⃣2⃣2⃣4⃣2⃣2⃣🔐 Mar 27, 2020
जय माता जी शुभ प्रभात स्नेह वंदन धन्यवाद अति सुन्दर 🌹🙏🏻🙏🏻👌👌👌👌🕉🌞

माता रानी चली आपके द्वार जगत जननी के देखो 16 श्रंगार जीवन में आपको कभी ना मिले हार सुख और समृद्ध रहे आपका परिवार नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा का दिन होता है। बता दें कि ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां का ये रूप अपने भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। शास्त्रों में ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानि तप का आचरण करने वाली बताया गया है। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं। चलिए जानते हैं इनका कथा के बारे में- मान्यता है कि पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। मां भगवती को नवरात्र के दूसरे दिन चीनी का भोग लगाना चाहिए मां को शक्कर का भोग प्रिय है। ब्राह्मण को दान में भी चीनी ही देनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्य दीर्घायु होता है। इनकी उपासना करने से मनुष्य में तप, त्याग, सदाचार आदि की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा विधि देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और प्रार्थना करते हुए नीचे लिखा मंत्र बोलें। श्लोक दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा || ध्यान मंत् वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें। देवी को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाएं। इसके अलावा कमल का फूल भी देवी मां को चढ़ाएं और इन मंत्रों से प्रार्थना करें। 1. या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 2. दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। इसके बाद देवी मां को प्रसाद चढ़ाएं और आचमन करवाएं। प्रसाद के बाद पान सुपारी भेंट करें और प्रदक्षिणा करें यानी 3 बार अपनी ही जगह खड़े होकर घूमें। प्रदक्षिणा के बाद घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। इन सबके बाद क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांट दें। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए। या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं।

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Rammurti Gond Mar 27, 2020

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Naresh Jain Mar 27, 2020

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Radha behan Mar 27, 2020

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