श्रीकृष्ण जन्माष्टमी निर्णय

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी निर्णय

अर्द्धरात्रि व्यापिनी तिथि के अनुसार #जन्माष्टमी पर्व दिनांक– १४/०८/२०१७, दिन– सोमवार को मनाना ही शास्त्र सम्मत है; क्योंकि कलानिधि भगवान बालकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को अर्द्धरात्रिकाल में हुआ था। रात्रि में जन्म होने के कारण यह पर्व चन्द्र प्रधान है; क्योंकि रात्रि का स्वामी चन्द्रमा होने के कारण ही चन्द्रमा को राकेश कहा जाता है। होराशास्त्र के अनुसार १४/०८/२०१७ को सप्तमी तिथि का भोग्यकाल रात्रि ०७:४५ बजे तक ही है, तदोपरान्त अष्टमी तिथि उदय हो जाएगी, चन्द्रोदय रात्रि ११:०६ बजे होगा। अतः अर्द्धरात्रि में जब भगवान का जन्म होगा तब चंद्रोदयकालीन अष्टमी व तत्कालव्यापिनी अष्टमी विद्यमान होगी; जोकि जन्माष्टमी के लिए उपयुक्त व शास्त्र सम्मत भी है। दिनांक– १५/०८/२०१७, दिन– मंगलवार को अष्टमी का भोग्यकाल शायं ०५:३९ तक ही है, जो न तो चन्द्रोदय तक ही रहेगी और न ही अर्द्धरात्रि तक। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी १४/०८/२०१७, सोमवार को ही मनाएँ। जय श्री कृष्ण।

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Raj sharma Aug 12, 2017
सही लिखा आचार्य जी आपने

Virtual Temple Apr 9, 2020

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Sunita Pawar Apr 9, 2020

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Virtual Temple Apr 9, 2020

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gopal jalan Apr 9, 2020

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Sandeep Kumar Apr 9, 2020

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Jitu Bhati Apr 9, 2020

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