Rakesh Kumar Gupta
Rakesh Kumar Gupta Jun 6, 2018

Live Vedeo ( Insaan , Bhagwan & Reality of Life ) Pl enjoy the Bhajan from Samrat Sriman Vinod Aggarwal

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M.S.Chauhan Feb 26, 2021

*शुभ रात्रि वंदन* *जय श्रीकृष्ण गोविंद* *जय श्री राधे राधे* *आपका हर पल शुभ हो* *बहुत सुन्दर पोस्ट है* *एक बार जरूर पढ़ें जी* *भागवत रहस्य- गोपी* *गोपियों के दो मुख्य भेद बताये हैं* - *(१) नित्यसिध्धा गोपियाँ और (२) साधनसिध्धा गोपियाँ।* 👉 *(१) नित्यसिध्धा गोपियाँ* वह हैं, जो श्रीकृष्ण के साथ गोलोक से आईं हैं... ललिता, विशाखा,चंपकलता,चित्रा,रंगदेवी, सुदेवी, इंदुलेखा, तुंगविद्या इत्यादि... 👉 *(२) साधनसिध्धा गोपियाँ* के कई भेद हैं - 💞 *(१) श्रुतिरूपा गोपियाँ -* वेद के मन्त्र गोपी बनकर आये हैं। वेदों ने ईश्वर का वर्णन तो बहुत किया है फिर भी उन्हें अनुभव नहीं हो पाया। ईश्वर केवल वाणी का नहीं... स्मरण,चिंतन का विषय है... संसार का विस्मरण हुए बिना ईश्वर से साक्षात्कार नहीं हो पाता । तभी तो वेदभिमानी रुचायें गोकुल में गोपी बनकर आईं हैं। 💞 *(२)ऋषिरूपा गोपियाँ -* जीव का सबसे बड़ा शत्रु काम है। काम से लोभ या क्रोध उत्पन्न होता है। ऋषियों ने वर्षो तक तपश्चर्या की - फिर भी मन में से काम नहीं गया। इस काम को श्रीकृष्ण को अर्पण करने के पश्चात गोपियों का रूप लेकर आये हैं। दंडकारण्य के ऋषियों ने गोपी बनकर आये... भगवान श्रीराम जी ने दंडकारण्य के ऋषियों को ये वरदान दिया था कि- त्रेतायुग में मैं एक पत्नीव्रत धारी हुं...द्वापर युग में हम सब मिलेंगें... तब मैं सबको प्रेमदान दुंगा... 💞 *(३)संकीर्णरूपा गोपियाँ -* ईश्वर के मनोहर स्वरुप को निहारने और उन्हें पाने की इच्छा वाली स्त्रियाँ गोपियाँ बनकर आई हैं। ये भी बहुत बडे भक्त हैं...जनकपुर के नारीयां जो श्रीराम जी को देखते ही सुधबुध खो बैठे...मन ही मन पाने की इच्छा रखने वाली नारीयां गोपी बनकर आयीं...कुछ देवकन्याएं भी गोपी बन कर आयीं... जो श्रीकृष्ण भक्ति किये थे... 💞 *(४)अन्यपूर्वा गोपियाँ -* संसार के सुख भुगतने के बाद जब संसार सुख से विरक्त हो गये और प्रभु को पाने की इच्छा जाग्रत हुआ,और श्रीकृष्ण का भक्ति निष्काम भाव से करने वाले भक्तगण गोपियाँ बनकर आई हैं। 💞 *(५) अनन्यपूर्वा गोपियाँ -* जन्म से ही प्रभु से प्रेम,पूर्ण वैरागी भक्त गोपियाँ बनकर आये हैं। अनेक भोग भुगतने के पश्चात भी श्रीकृष्ण निष्काम हैं - उन्हें भोगो में तनिक भी आसक्ति नहीं है। वो तो आसक्ति मिटाने वाले हैं। श्रीकृष्ण का ध्यान करने वाला व्यक्ति स्वयं निष्काम हो जाता है। कामभाव से भी जो श्रीकृष्ण का चिंतन करता है... भक्ति करता है... परिणाम स्वरूप वह भी निष्कामी बनता है। *चीरहरण लीला के समय श्रीकृष्ण ने गोपियों से प्रतिज्ञा किया था कि योग्य समय आने पर वे रासलीला में मिलेंगे*। *जिसे भगवान अपनाते हैं, अंगीकार करते हैं उसे ही रासलीला में प्रवेश मिलता है*। *गोकुल की सभी गोपियाँ रासलीला में गई नहीं हैं। जो अधिकारी थे, उनको रासलीला में प्रवेश मिला... शरदपूर्णिमा ही वो रात्रि थी,जब गोपीयों को महारास रस मिला...प्रेमदान मिला... इसमें भगवान शंकर जी... माता पार्वती जी भी गोपी बनकर महारास रस प्राप्त किये..*. *राधे राधे*🙏🚩 🌷💐🌿🙏🌿💐🌷

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RAJ RATHOD Feb 26, 2021

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jatan kurveti Feb 26, 2021

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