Babita Sharma
Babita Sharma Sep 20, 2017

सारा जहाँ है जिसकी शरण में। नमन है उस मां के चरण में।

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Reena Dwivedi Oct 18, 2020

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NARENDR PATEL Oct 17, 2020

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Anilkumar Tailor Oct 18, 2020

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PRABHAT KUMAR Oct 18, 2020

🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 🔮🔮🔮🔮🔮 *#जय_माता_दी* 🔮🔮🔮🔮🔮 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_शुभ_संध्या_वंदन* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *आज नवरात्र का दूसरा दिन है और आज का दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। जैसा कि माँ के नाम में ही शोभित है, ब्रह्मचारिणी यानी कि ब्रह्मचर्य का पालन करने वाली देवी। माँ ब्रह्मचारिणी के हाथों में अक्षमाला और कमंडल सुसज्जित हैं। माँ यह स्‍वरूप आपको ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए प्रेरित करता है। मान्‍यता है कि माँ ब्रह्मचारिणी की सच्‍चे मन से पूजा करने से भक्‍त को सदाचार, एकाग्रता, धैर्य, संयम और सहनशीलता प्राप्‍त होती है।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#माता_का_स्वरूप* *देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ मे जप की माला है, बाएं हाथ में कमंडल है। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप है अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप है। ये देवी भगवती दुर्गा, शिवस्वरूपा, गणेशजननी, नारायनी, विष्णुमाया तथा पूर्ण ब्रह्मस्वरूपिणी के नाम से प्रसिद्ध है।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#मंत्र* *या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।* *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।* *दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।* *देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।* *ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#ध्यान_मंत्र* *वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।* *जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥* *गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।* *धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम्॥* *परम वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन।* *पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#स्त्रोत* *तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।* *ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥* *शङ्करप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।* *शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#कवच_मंत्र* *त्रिपुरा में हृदयम् पातु ललाटे पातु शङ्करभामिनी।* *अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥* *पञ्चदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी॥* *षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो।* *अङ्ग प्रत्यङ्ग सतत पातु ब्रह्मचारिणी॥* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#माँ_ब्रह्मचारिणी_को_ये_लगाए_भोग* *शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी का पूजा की जाती है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि यह भोग लगाने से चिरायु का वरदान प्राप्त होता है।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#माँ_ब्रह्मचारिणी_कथा* *माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया।* *जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया।* *एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।* *कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं।* *इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।* *कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा -हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की।* *यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं।* *जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता है. देवी का दूसरा स्वरूप योग साधक को साधना के केन्द्र के उस सूक्ष्मतम अंश से साक्षात्कार करा देता है।* *जिसके पश्चात व्यक्ति की ऐन्द्रियां अपने नियंत्रण में रहती है और साधक मोक्ष का भागी बनता है। माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा की पंचोपचार सहित पूजा करके जो साधक स्वाधिष्ठान चक्र में मन को स्थापित करता है उसकी साधना सफल हो जाती है और व्यक्ति की कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाती है।* *जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#माँ_ब्रह्मचारिणी_की_पावन_आरती* *जय अम्बे ब्रह्माचारिणी माता।* *जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।* *ब्रह्मा जी के मन भाती हो।* *ज्ञान सभी को सिखलाती हो।* *ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।* *जिसको जपे सकल संसारा।* *जय गायत्री वेद की माता।* *जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।* *कमी कोई रहने न पाए।* *कोई भी दुख सहने न पाए।* *उसकी विरति रहे ठिकाने।* *जो ​तेरी महिमा को जाने।* *रुद्राक्ष की माला ले कर।* *जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।* *आलस छोड़ करे गुणगाना।* *माँ तुम उसको सुख पहुंचाना।* *ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।* *पूर्ण करो सब मेरे काम।* *भक्त तेरे चरणों का पुजारी।* *रखना लाज मेरी महतारी।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️

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Anilkumar Tailor Oct 17, 2020

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PRABHAT KUMAR Oct 17, 2020

*#सभी_आदरणीय_साथियों_को_नवरात्रि_की_हार्दिक_शुभकामनाएं 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 🔮🔮🔮🔮🔮*#जय_माता_दी* 🔮🔮🔮🔮🔮 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_शुभ_संध्या_वंदन* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है। शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं। इसी वजह से माँ के इस स्वरूप को शैलपुत्री कहा जाता है। इनकी आराधना से हम सभी मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। माँ शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए यह ध्यान मंत्र जपना चाहिए। इसके प्रभाव से माता जल्दी ही प्रसन्न होती हैं और भक्त की सभी कामनाएं पूर्ण करती हैं।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#ऐसा_है_माँ_शैलपुत्री_का_स्वरुप* *आदि शक्ति ने अपने इस रूप में शैलपुत्र हिमालय के घर जन्म लिया था, इसी कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। शैलपुत्री नंदी नाम के वृषभ पर सवार होती हैं और इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है।* देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में 'शैलपुत्री' के नाम से जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#स्तोत्र_पाठ* *प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।* *धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥* *त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।* *सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥* *चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।* *मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#शैलपुत्री_माता_मंत्र* *ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।* *ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।* *वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌।* *वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌॥* *ॐ या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।* *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥* *ॐ शैलपुत्रै नमः।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#माता_की_उपासना_के_लिए_मंत्र* *वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम।* *वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम॥* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#माँ_शैलपुत्री_को_ये_लगाएं_भोग* *माँ शैलपुत्री के चरणों में गाय का घी अर्पित करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है और उनका मन एवं शरीर दोनों ही निरोगी रहता है।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#माँ_शैलपुत्री #पहले_नवरात्र_की_व्रत_कथा* *एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहां जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।* *अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं। अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहां जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।'* *शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ। पिता का यज्ञ देखने, वहां जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहां जाने की अनुमति दे दी।* *सती ने पिता के घर पहुंचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुंह फेरे हुए हैं। केवल उनकी माता ने ही स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे।* *परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत कष्ट पहुंचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहां चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से भर उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहां आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है।* *वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को उसी समय वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दु:खद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध हो अपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णत: विध्वंस करा दिया।* *सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वे 'शैलपुत्री' नाम से विख्यात हुर्ईं। पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮*#शैलपुत्री_माता_की_आरती* *शैलपुत्री मां बैल पर सवार। करें देवता जय जयकार।* *शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।* *पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।* *ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।* *सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।* *उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।* *घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।* *श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।* *जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।* *मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।* 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *#नोट उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 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*🌷॥ॐ॥🌷* *जय श्री राधे...👏* 🚩॥जय हिन्द🇮🇳जय नमो॥👏 ************************** *🚩॥ॐ श्री दुर्गाय नमः॥👏* ************************** *नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं...* 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *हे माँ हम सबका हर पल मंगलमय करें और अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें🙏* ************************** *नवदुर्गा – माँ शैलपुत्री – कथा, मंत्र, स्तुति* *माता शैलपुत्री – माँ दुर्गा का पहला स्वरूप* 🌺🌺🌺🙏🙏🌺🌺🌺 वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्॥ माँ दुर्गा अपने पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से जानी जाती हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा था। शैल का अर्थ होता है – पहाड़, पर्वत। शैलपुत्री – पर्वतराज हिमालय की पुत्री यही नव दुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। शैलपुत्री दुर्गा का महत्त्व और शक्तियाँ अनन्त हैं। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। *👉माता शैलपुत्री की कथा* देवी शैलपुत्री पूर्वजन्म में प्रजापति दक्षकी कन्या सती देवी शैलपुत्री सती के नाम से भी जानी जाती हैं। अपने पूर्वजन्म मे ये प्रजापति दक्षकी कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं। तब इनका नाम सती था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था। एक बार प्रजापति दक्षने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। यज्ञमें उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया। किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञमें निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक विशाल यज्ञ कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा। अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकर जी को बतायी। सारी बातों पर विचार करने के बाद शंकरजी ने कहा कि – सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है, उन्हें नहीं। ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है। किन्तु सती का प्रबल आग्रह देखकर शंकरजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती ने पिताके घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बात नहीं कर रहा है। केवल उनकी माता ने ही स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे। उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ भगवान शंकर के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमान जनक वचन भी कहे। परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा। उनका हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से सन्तप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान् शंकरजी की बात न मानकर, यहाँ आकर उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। वह अपने पति भगवान् शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। इस दारुण दुःखद घटना को सुनकर शंकर जी ने क्रुद्ध हो अपने गणोंको भेजकर दक्षके उस यज्ञका पूर्णतः विध्वंस करा दिया। सतीने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्मकर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वह शैलपुत्री नाम से विख्यात हुईं। *👉देवी शैलपुत्री* सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं। शैलपुत्री देवी का विवाह भी शंकर जी से ही हुआ। पूर्वजन्म की भाँति इस जन्म में भी वह शिवजी की अर्धांगिनी बनीं। पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद की एक कथा के अनुसार इन्हीं हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था। *👉माँ शैलपुत्री का स्वरुप* देवी शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बायें हाथ में कमल सुशोभित है। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। *👉माँ शैलपुत्री की उपासना* नवरात्र पूजनमें प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थिर करते हैं। यहीं से उनकी योगसाधना का प्रारम्भ होता है। नव दुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री दुर्गा का महत्त्व और उनकी शक्तियाँ अनन्त हैं। *👉माँ शैलपुत्री का मंत्र* वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्॥ *👉माता शैलपुत्री की स्तुति* जय माँ शैलपुत्री प्रथम, दक्ष की हो संतान। नवरात्री के पहले दिन, करे आपका ध्यान॥ अग्नि कुण्ड में जा कूदी, पति का हुआ अपमान। अगले जनम में पा लिया, शिव के पास स्थान॥ जय माँ शैलपुत्री, जय माँ शैलपुत्री॥ राजा हिमाचल से मिला, पुत्री बन सम्मान। उमा नाम से पा लिया, देवों का वरदान॥ सजा है दाये हाथ में, संहारक त्रिशूल। बाए हाथ में ले लिया, खिला कमल का फूल॥ जय माँ शैलपुत्री, जय माँ शैलपुत्री॥ बैल है वाहन आपका, जपती हो शिव नाम। दर्शन से आनंद मिले, अम्बे तुम्हे प्रणाम॥ नवरात्रों की माँ, कृपा कर दो माँ। जय माँ शैलपुत्री, जय माँ शैलपुत्री॥ जय माँ शैलपुत्री प्रथम, दक्ष की हो संतान। नवरात्री के पहले दिन, करे आपका ध्यान॥ 🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷 अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥ तेरे भक्त जनों पे माता, भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पडो माँ, करके सिंह सवारी॥ सौ सौ सिंहों से तु बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली। दुष्टों को पल में संहारती, ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥ माँ बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता। पूत कपूत सूने हैं पर, ना माता सुनी कुमाता॥ सब पे करुणा बरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली। दुखियों के दुखडे निवारती, ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥ नहीं मांगते धन और दौलत, ना चाँदी, ना सोना। हम तो मांगे माँ तेरे मन में, इक छोटा सा कोना॥ सबकी बिगडी बनाने वाली, लाज बचाने वाली। सतियों के सत को संवारती, ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥ ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥ ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥ 🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷 🔱🙏🌺👏🌺🙏🔱

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