Shailendra Sengar
Shailendra Sengar Sep 2, 2017

वामन एकादशी व्रत कथा | व्रत विधि | महत्व

वामन एकादशी व्रत कथा | व्रत विधि | महत्व

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल एकादशी को वामन एकादशी कहते है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। जबकि कुछ मतों के अनुसार यह पर्व भद्र पद शुक्ल द्वादशी को वामन द्वादशी या वामन जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस एकादशी को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे- परिवर्तिनी एकादशी (Parivartani Ekadashi), पदमा एकादशी (Padma Ekadashi), जलझूलनी एकादशी (Jal Jhulani Ekadashi) एवं डोल ग्यारस (Dol Ekadashi) आदि। कुछ स्थानों पर ये दिन भगवान श्रीकृष्ण की सूरज पूजा (जन्म के बाद होने वाला मांगिलक कार्यक्रम) के रूप में मनाया जाता है।



शिशु के जन्म के बाद जलवा पूजन, सूरज पूजन या कुआं पूजन का विधान है। उसी के बाद अन्य संस्कारों की शुरूआत होती है। यह पर्व उसी का एक रूप माना जा सकता है। शाम के वक्त भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को झांकी के रूप में मन्दिर के नजदीक किसी पवित्र जलस्रोत पर ले जाया जाता है और वहां उन्हें स्नान कराते है एवं वस्त्र धोते है और फिर वापस आकर उनकी पूजा की जाती है। इस दिन व्रत किया जाता है। कई जगह भगवान की इस झांकी को देखने के बाद व्रत खोलने की परम्परा है। झांकी में भगवान को पालकी यानि डोली में ले जाया जाता है इसलिए इसे डोल एकादशी (Dol Ekadashi) भी कहते है। एक मान्यता यह भी है कि भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते है। इस बदलाव के कारण इसे परिवर्तिनी एकादशी (Parivartani Ekadashi) कहते है। देखा जाए तो यह मौसम में बदलाव का भी सूचक होता है।

वामन एकादशी व्रत विधि | Vaman Ekadashi Vrat Vidhi
वामन एकादशी व्रत का नियम पालन दशमी तिथि की रात से ही शुरू करें व ब्रह्मचर्य का पालन करें। एकादशी के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान वामन की प्रतिमा के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन यथासंभव उपवास करें उपवास में अन्न ग्रहण नहीं करें संभव न हो तो एक समय फलाहारी कर सकते हैं।

इसके बाद भगवान वामन की पूजा विधि-विधान से करें (यदि आप पूजन करने में असमर्थ हों तो पूजन किसी योग्य ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं।) भगवान वामन को पंचामृत से स्नान कराएं। स्नान के बाद उनके चरणामृत को व्रती (व्रत करने वाला) अपने और परिवार के सभी सदस्यों के अंगों पर छिड़कें और उस चरणामृत को पीएं। इसके बाद भगवान को गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पूजन सामग्री अर्पित करें।

विष्णु सहस्त्रनाम का जाप एवं भगवान वामन की कथा सुनें। रात को भगवान वामन की मूर्ति के समीप हो सोएं और दूसरे दिन यानी द्वादशी के दिन वेदपाठी ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देकर आशीर्वाद प्राप्त करें जो मनुष्य यत्न के साथ विधिपूर्वक इस व्रत को करते हुए रात्रि जागरण करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट होकर अंत में वे स्वर्गलोक को प्राप्त होते हैं। इस एकादशी की कथा के श्रवणमात्र से वाजपेयी यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

वामन एकादशी व्रत का महत्व | Importance of Vaman Ekadashi
धर्म ग्रंथों के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी पर व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पापियों के पाप नाश के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं है। जो मनुष्य इस एकादशी को भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं। इस व्रत के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर से कहा है कि जो इस दिन कमलनयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं। जिसने भाद्रपद शुक्ल एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों का पूजन किया। अत: हरिवासर अर्थात एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं।

वामन एकादशी व्रत कथा | Vaman Ekadashi Vrat Katha
वामन अवतार भगवान विष्णु का पाँचवा तथा मानव के रूप मेँ उनका पहला अवतार है । इस विषय मे श्री मदभगवदपुराण मेँ एक कथा आती है जिसके अनुसार एक बार देव-दैत्य युद्ध मेँ दैत्य पराजित हुए तथा मृत दैत्योँ को लेकर वे अस्ताचल की ओर चले जाते है । दैत्यराज बलि इन्द्र वज्र से मृत हो जाते है, तब दैत्यगुरू शुक्राचार्य अपनी मृत संजीवनी विद्या से बलि तथा दूसरे दैत्योँ को जीवित तथा स्वस्थ कर देते है । राजा बलि के लिये शुक्राचार्य एक यज्ञ का आयोजन करते है तथा अग्नि से दिव्य बाण तथा अभेद्य कवच पाते है और असुर सेना अमरावती पर आक्रमण कर देती है ।

असुर सेना को आते देख देवराज इन्द्र समझ जाते है कि इस बार वे असुरोँ का सामना नहीँ कर पायेँगे तथा देवता भाग जाते है । स्वर्ग दैत्योँ की राजधानी बन जाता है । तब शुक्राचार्य राजा बलि के अमरावती पर अचल राज्य के लिए सौ अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन करवाते है । इन्द्र को राजा बलि की इच्छा का ज्ञान होता है कि राजा बलि के सौ यज्ञ पूरे होने पर फिर उनकोँ स्वर्ग से कोई नहीँ हिला सकता ।

इसलिये इन्द्र भगवान विष्णु की शरण मेँ जाते हैँ तथा भगवान विष्णु इन्द्र को सहायता करने का आश्वासन देते है तथा भगवान विष्णु वामन रूप मेँ अदिति के गर्भ से उत्पन्न होने का वचन देते हैँ । इधर कश्यप जी के कहने पर माता अदिति पयोव्रत का अनुष्ठान करती है जो कि पुत्र प्राप्ति के लिए होता है । तब भाद्रपद मास की शुकल पक्ष की द्वादशी के दिन प्रभु, माता अदिति के गर्भ से प्रकट हो अवतार लेते है तथा ब्रह्मचारी ब्राह्मण का रूप धारण करते है ।

महर्षि कश्यप ऋषियोँ के साथ उनका उपनयन संस्कार करते है । वामन बटुक को महर्षि पुलक जी यज्ञोपवीत, अगस्त्य जी ने मृगचर्म, मरीचि जी ने पलाशदण्ड, सूर्य जी ने छ्त्र, भृगु जी ने खड़ाऊँ, सरस्वती जी ने रुद्राक्ष माला तथा कुबेर जी ने भिक्षा पात्र दिये । तत्पश्चात भगवान वामन पिता की आज्ञा लेकर बलि के पास जाते है । उस समय राजा बलि नर्मदा नदी के उत्तर तट पर अन्तिम यज्ञ कर रहे होते है । वामन अवतारी श्री विष्णु राजा बलि के पास पहुच जाते है ।

राजा बलि वामन जी को देख कर पूछते है कि आप कौन है । तब वामन जी उत्तर देते है कि हम ब्राह्मण है । फिर बलि ने पूछा कि यहाँ आने से पहले तुम्हारा कहाँ वास रहा है । यह सुनकर वामण जी ने उत्तर दिया कि जो सम्पूर्ण ब्रह्मसृष्टि है वही हमारा निवास है । यह सुनकर राजा बलि ने सोचा कि जैसे सब लोग सृष्टि मेँ रहते है, वैसे ही यह ब्राह्मण भी रहता है । अनन्तर राजा बलि ने पूछा कि तुम्हारा नाथ कौन है । तब वामन जी ने उत्तर दिया कि हम सबके नाथ है तथा हमारा कोई नाथ नहीँ है । राजा बलि ने सोचा कि इसके माता पिता आदि रक्षक छोटेपन मेँ ही नष्ट हो गये है । तब बलि ने प्रश्न किया कि तुम्हारे पिता कौन है । वामन जी ने उत्तर दिया कि पिता का स्मरण नहीँ करते अर्थात हमारा कोई पिता नहीँ, हम ही सबके पिता है ।बलि ने सोचा कि यह कहता है कि छोटेपन से पिता न होने के कारण पिता का स्मरण नहीँ है ।

राजा बलि ने कहा कि तुम क्या चाहते हो । वामन जी ने उत्तर दिया भिक्षा मेँ तीन पग पृथ्वी । तब बलि ने कहा कि हे ब्राह्मण ! ये तो थोड़ी है । वामन जी ने उत्तर दिया कि इतने से हम तीनोँ लोकोँ की भावना करते है अर्थात हम तीन पग मेँ ही त्रिलोकी नाप लेँगे ।

राजा बलि ने समझा कि यह ब्राह्मण कहता है कि तीन पग भूमि ही हमको तीनोँ लोक है, यह बड़ा संतोषी ब्राह्मण है । राजा बलि दैत्यगुरू शुक्राचार्य के मना करने पर भी अपने वचन पर अड़िग रहते हुए प्रभु को तीन पग भूमि लेने को कहता है । वामन जी एक पग मेँ सभी लोक तथा दूसरे पग मेँ पूरी पृथ्वी को नाप लेते है । अब तीसरा पग रखने का कोई स्थान नहीँ रह जाता । बलि के सामने संकट उत्पन्न हो जाता है कि यदि अपना वचन नहीँ निभाया तो अधर्म होगा । इसलिये बलि अपना सिर आगे कर देता है और कहता कि तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिये । भगवान ठीक वैसा ही करते है तथा बलि को सुतल लोक मेँ रहने का आदेश करते है । राजा बलि सहर्ष भगवान की आज्ञा को शिरोधार्य करता है ।

राजा बलि द्वारा वचन पालन से प्रसन्न होकर प्रभु बलि को वर माँगने को कहते है । इस पर राजा बलि दिन-रात भगवान को अपने पास सुतल लोक मेँ रहने का वर माँगता है तथा भगवान विष्णु अपना वचन पालन करते हुए राजा बलि का द्वारपाल बनना स्वीकार करते है । जिन्हे फिर बाद मेँ देवी लक्ष्मी राजा बलि से वर माँग कर मुक्त करवा लेती है ।

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🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *🚩🅿Jai Shree Ganesh🅿🚩* 🌺🙏 *महर्षि पाराशर पंचांग* 🙏🌺 🙏🌺🙏 *अथ पंचांगम्* 🙏🌺🙏 *********ll जय श्री राधे ll********* 🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *दिनाँक -: 26/01/2020,रविवार* द्वितीया, शुक्ल पक्ष माघ """"""""""""""""""(समाप्ति काल) तिथि --------द्वितीया 30:14:58 तक पक्ष ---------------------------शुक्ल नक्षत्र ---------धनिष्ठा 30:47:42 योग --------व्यतापता 26:23:19 करण ----------बालव 17:19:50 करण ---------कौलव 30:14:58 वार -------------------------रविवार माह ---------------------------- माघ चन्द्र राशि -----मकर 17:38:17 चन्द्र राशि --------------------कुम्भ सूर्य राशि --------------------- मकर रितु --------------------------शिशिर आयन --------------------उत्तरायण संवत्सर -------------------- विकारी संवत्सर (उत्तर) ----------परिधावी विक्रम संवत ----------------2076 विक्रम संवत (कर्तक) ----2076 शाका संवत -----------------1941 वृन्दावन सूर्योदय -----------------07:10:00 सूर्यास्त -----------------17:53:31 दिन काल ---------------10:43:30 रात्री काल -------------13:16:07 चंद्रास्त -----------------19:15:55 चंद्रोदय -----------------31:29:12 लग्न ----मकर 11°25' , 281°25' सूर्य नक्षत्र -------------------श्रवण चन्द्र नक्षत्र ------------------धनिष्ठा नक्षत्र पाया ---------------------ताम्र *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* गा ----धनिष्ठा 11:05:41 गी ----धनिष्ठा 17:38:17 गु ----धनिष्ठा 24:12:18 गे ----धनिष्ठा 30:47:42 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================= सूर्य=मकर 11°22 ' श्रवण, 1 खी चन्द्र =मकर 24°23 ' धनिष्ठा' 1 गा बुध = मकर 21°10 ' श्रवण' 4 खो शुक्र= कुम्भ 20°55, पू o भा o ' 1 से मंगल=वृश्चिक 21°30' ज्येष्ठा ' 2 या गुरु=धनु 18°50 ' पू oषाo , 2 धा शनि=धनु 26°43' उ oषा o ' 1 भे राहू=मिथुन 12 °52 ' आर्द्रा , 2 घ केतु=धनु 12 ° 52 ' मूल , 4 भी *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 16:33 - 17:54 अशुभ यम घंटा 12:32 - 13:52 अशुभ गुली काल 15:13 - 16:33 अशुभ अभिजित 12:10 -12:53 शुभ दूर मुहूर्त 16:28 - 17:11 अशुभ 🚩पंचक 17:38 - अहोरात्र अशुभ 💮चोघडिया, दिन उद्वेग 07:10 - 08:30 अशुभ चर 08:30 - 09:51 शुभ लाभ 09:51 - 11:11 शुभ अमृत 11:11 - 12:32 शुभ काल 12:32 - 13:52 अशुभ शुभ 13:52 - 15:13 शुभ रोग 15:13 - 16:33 अशुभ उद्वेग 16:33 - 17:54 अशुभ 🚩चोघडिया, रात शुभ 17:54 - 19:33 शुभ अमृत 19:33 - 21:13 शुभ चर 21:13 - 22:52 शुभ रोग 22:52 - 24:32* अशुभ काल 24:32* - 26:11* अशुभ लाभ 26:11* - 27:51* शुभ उद्वेग 27:51* - 29:30* अशुभ शुभ 29:30* - 31:10* शुभ 💮होरा, दिन सूर्य 07:10 - 08:04 शुक्र 08:04 - 08:57 बुध 08:57 - 09:51 चन्द्र 09:51 - 10:45 शनि 10:45 - 11:38 बृहस्पति 11:38 - 12:32 मंगल 12:32 - 13:25 सूर्य 13:25 - 14:19 शुक्र 14:19 - 15:13 बुध 15:13 - 16:06 चन्द्र 16:06 - 16:59 शनि 16:59 - 17:54 🚩होरा, रात बृहस्पति 17:54 - 18:59 मंगल 18:59 - 20:06 सूर्य 20:06 - 21:13 शुक्र 21:13 - 22:19 बुध 22:19 - 23:25 चन्द्र 23:25 - 24:32 शनि 24:32* - 25:38 बृहस्पति 25:38* - 26:44 मंगल 26:44* - 27:51 सूर्य 27:51* - 28:57 शुक्र 28:57* - 30:03 बुध 30:03* - 31:10 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान-------------पश्चिम* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा चिरौजी खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 2 + 1 + 1 = 4 ÷ 4 = 0 शेष मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 2 + 2 + 5 = 9 ÷ 7 = 2 शेष गौरि सन्निधौ = शुभ कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* * मोहन का भोग ,टोपा,दुशाला धारण राधाबल्लभ जी वृन्दावन * 71 वॉ गणतंत्र दिवस *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* अहो वत ! विचित्राणि चरितानि महात्मनाम् । लक्ष्मी तृणाय मन्यन्ते तद्भारेण नमन्ति च ।। ।चा o नी o।। देखिये क्या आश्चर्य है? बड़े लोग अनोखी बाते करते है. वे पैसे को तो तिनके की तरह मामूली समझते है लेकिन जब वे उसे प्राप्त करते है तो उसके भार से और विनम्र होकर झुक जाते है. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: श्रद्धात्रयविभागयोग अo-17 तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपः क्रियाः।, प्रवर्तन्ते विधानोक्तः सततं ब्रह्मवादिनाम्‌॥, इसलिए वेद-मन्त्रों का उच्चारण करने वाले श्रेष्ठ पुरुषों की शास्त्र विधि से नियत यज्ञ, दान और तपरूप क्रियाएँ सदा 'ॐ' इस परमात्मा के नाम को उच्चारण करके ही आरम्भ होती हैं॥,24॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा लाभदायक रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति हो सकती है। कारोबार फायदेमंद रहेगा। घर-परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। किसी के व्यवहार से हृदय को ठेस पहुंच सकती है। ऐश्वर्य के साधन प्राप्त होंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। 🐂वृष बनते कामों में अवरोध उत्पन्न होगा। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। क्रोध पर नियंत्रण रखें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। घर-परिवार की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। आय बनी रहेगी। दूसरों पर भरोसा न करें। जोखिम न उठाएं। 👫मिथुन व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। बेरोजगारी दूर करने की योजना बनेगी। प्रतिष्ठित व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा। लेनदारी वसूल करने के प्रयास सफल रहेंगे। घर-परिवार की चिंता रहेगी। भाग्य का भरपूर साथ प्राप्त होगा। आय बनी रहेगी। विवाद से बचें। 🦀कर्क किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। व्यवसाय में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। कोई बड़ा काम करने का मन बन सकता है। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। थकान महसूस होगी। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। 🐅सिंह चोट व रोग से बाधा संभव है। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। समाज में मान-सम्मान मिलेगा। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। सुख के साधन प्राप्त होंगे। लभा के अवसर हाथ आएंगे। लेन-देन में सावधानी रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। 🙎कन्या तीर्थयात्रा की योजना बनेगी। अध्यात्म में रुचि बढ़ेगी। कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। विरोध होगा। स्वास्थ्य पर खर्च हो सकता है। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। वस्तुएं संभालकर रखें। ⚖तुला रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। परिवार तथा नजदीकी लोगों के साथ मनोरंजन का समय मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। मनपसंद भोजन का आनंद मिलेगा। जल्दबाजी से बचें। लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। आलस्य हावी रहेगा। 🦂वृश्चिक विवाद से क्लेश संभव है। बुरी खबर मिल सकती है। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। आय में कमी रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। अपेक्षित कार्य समय पर न होने से तनाव रहेगा। खर्च की अधिकता रहेगी। आर्थिक नुकसान हो सकता है। 🏹धनु मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मित्र व संबंधियों का सहयोग मिलेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। किसी बड़ी बाधा का निवारण होगा। काम समय पर पूर्ण होंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। निवेश शुभ रहेगा। 🐊मकर शोक समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। पारिवारिक उलझनें बढ़ सकती हैं। किसी अपने का व्यवहार दिल को ठेस पहुंचा सकता है। दौड़धूप अधिक रहेगी। किसी बड़े निर्णय को लेने में जल्दबाजी न करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। लेन-देन में सावधानी रखें। धैर्य रखें। लाभ होगा। 🍯कुंभ सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मेहनत का फल मिलेगा। पार्टनरों से सहयोग प्राप्त होगा। कार्यसिद्धि होगी। आय में वृद्धि होगी। भाग्य का साथ मिलेगा। कोई बड़ा काम करने की हिम्मत जुटा पाएंगे। बाहर जाने की योजना बनेगी। व्यवसाय में लाभ होगा। जल्दबाजी से बचें। 🐟मीन व्यवसाय लाभदायक रहेगा। घर में मेहमानों का आगमन होगा। उन पर स्वागत-सत्कार में व्यय होगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। कार्यवृद्धि की योजना बनेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। पार्टनरों में मतभेद हो सकता है। संयम बनाए रखें। *🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏* 🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

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vishal Patel Jan 26, 2020

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