पितृपक्ष ६ सितंबर से २० सितंबर (भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या) पितरों के लिए श्राद्ध न करने पर उनकी इच्छाएं अतृप्त रहती हैं ।

पितृपक्ष




६ सितंबर से २० सितंबर (भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या)

पितरों के लिए श्राद्ध न करने पर उनकी इच्छाएं अतृप्त रहती हैं । साथ ही, ऐसे पितरों को अनिष्ट शक्तियां अपने नियंत्रण में लेकर दास बना लेती हैं तथा इनके माध्यम से परिजनों को कष्ट दे सकती हैं । श्राद्ध के कारण पितरों की अनिष्ट शक्तियाें से रक्षा होती है, उन्हें गति मिलती है और हमारा जीवन सुसह्य होता है । पितृपक्ष में एक दिन पितरों का श्राद्ध करने पर वे वर्षभर तृप्त रहते हैं ।

पितृपक्ष में दत्तात्रेय देवता (दत्त) का नामजप करने का महत्त्व 
दत्त के नामजप से पूर्वजों को गति मिलने में व उनके कष्टों से रक्षा होने में सहायता मिलती है । अतएव पितृपक्ष में प्रतिदिन दत्त का न्यूनतम ७२ माला (६ घंटे) नामजप करें ।

(अधिक विवेचन हेतु पढें : सनातन के ग्रंथ ‘धार्मिक उत्सव एवं व्रतों का अध्यात्मशास्त्रीय आधार’ एवं ‘श्राद्ध’ संबंधी ग्रंथ तथा जालस्थल पर उपलब्ध लेख)

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Sunil Jhunjhunwala Mar 25, 2020

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