माता मातृरूपेण नामों नमः

माता मातृरूपेण नामों नमः
माता मातृरूपेण नामों नमः

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Dheerendra Gupta Aug 9, 2020

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Anuradha Tiwari Aug 9, 2020

मां वैष्णोदेवी के भक्त 16 अगस्त से कर सकते हैं मां के दर्शन कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण सारे धर्मस्थल को बंद कर दिया गया था. लेकिन अब कई नियमों के साथ करीब-करीब सारे धर्मस्थलों को खोल दिया गया है. परंतु हिंदू आस्था का दुनिया भर का प्रतीक कही जाने वाली मां वैष्णोदेवी का मंदिर अभी भी बंद हैं. लेकिन जब अब देश में जब अनलॉक शुरू हो गया है. 16 अगस्त से मां वैष्णोदेवी का मंदिर फिर से खुलने जा रहा है. ऐसे में हर आदमी उनके दर्शन के लिए आतुर है. सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने बताया कि 16 अगस्त से सभी देवस्थानों को खोल दिया जाएगा, लेकिन एसओपी का पालन करना पड़ेगा. बता दें कि 17 मार्च को अंतिम बार भक्तों को माता के भवन के लिए भेजा गया था. इसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गये थे. इन शर्तों के साथ मिलेगा प्रवेश माता वैष्णो देवी का दर्शन करने जाने के लिए केवल जम्मू-कश्मीर के लोगों को ही अनुमति मिलेगी. फिलहाल बाहरी राज्यों के लोगों को यहां आने की अनुमति नहीं होगी. बाहर से जो लोग भी आएंगे उनका कोरोना टेस्ट कराया जाएगा. उसके बाद ही भक्तों को दईशन करने जाने दिया जाएगा. इस यात्रा के लिए श्राइन बोर्ड ने पूरी तैयारी कर ली है. एक दिन में कितने लोग दर्शन करेंगे इसके बारे में भी जल्द ही फैसला हो सकता है. क्या है वैष्णो देवी महिमा की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार करीबन 700 साल पहले मां वैष्णोदेवी मंदिर का निर्माण हुआ था. यहां एक ब्राह्मण पुजारी थे. वे गरीब थे लेकिन उन्हें मां के प्रति सच्ची श्रद्धा भक्ति थी. श्रीधर का एक सपना था कि वो एक दिन वैष्णोदेवी को समर्पित कर भंडारा करे. एक बार उनसे गांव के लोगों से सामग्री एकत्र कर भंडारे का आयोजन किया, लेकिन भंडारे के लिए सामग्री बहुत कम मिली और आदमी ज्यादा आने लगे, इस बात को लेकर वह परेशान था.ऐसे में उसको देवी मां कि आस थी और इसके लिए श्रीगंगाधर ने अपनी झोपड़ी के बाहर आकर पूजा शुरू कर दी. दोपहर से ही लोग अधिक आ रहे थे, जिसके कारण गंगाधर इस बात को लेकर परेशान था कि वह लोगों को भोजन कैसे कराएगा. इसी वक्त उसने एक छोटी लड़की को अपनी झोपड़ी से बाहर आते देखा. इसका नाम वैष्णवी था. वह बच्ची सभी को बड़े ही प्यार से भोजन करा रही थी. भगवान की कृपा से भंडारा अच्छे से संपन्न हो गया. जैसे ही भंडारा खत्म हुआ गंगाधर बच्ची से मिलने के लिए बेहद आतुर था. लेकिन अचानक ही वो बच्ची गायब हो गई. फिर कुछ दिनों बाद श्रीधर के सपने में वही बच्ची आई. तब उसे समझ आया कि वह मां वैष्णोदेवी थी. माता रानी के रूप में श्रीधर के सपने में आई लड़की ने उसे एक गुफा के बारे में बताया. इसे चार बेटों का वरदान भी दिया और आशीर्वाद दिया. इसके बाद गंगाधर मां की गुफा की तलाश में निकल पड़ा. जब उसे वह गुफा मिली तब उसने निर्णय किया कि वो अपना सारा जीवन मां की सेवा करेगा. बहुत ही कम समय में यह पवित्र गुफा प्रसिद्ध हो गई. आज इसमें पूरी दुनिया में वैष्णव देवी धाम के नाम से जाना जाता है.

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Manoj Kumar dhawan Aug 9, 2020

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sanjay snehi Aug 9, 2020

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