विश्व 🌎का ऐसा मंदिर जहां महादेव महिला के रुप मे विराजे हैं मथुरा और वंदावन का नाम आते ही लोगों के मन में श्री कृष्णा का नाम जुबान पर आता है. लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जो वृंदावन में स्थित हैं और वो श्री कृष्ण का नहीं बल्कि महादेव का मंदिर है. जहां उन्हें महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार किया जाता है. कहा जाता है कि ये विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां महादेव महिला के रूप में विराजे हैं. दूर-दूर से भक्त यहां महादेव के गोपी रूप के दर्शन करने आते हैं. इन्हें गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है.कहा जाता है कि यहां मौजूद शिवलिंग की स्थापना भगवान श्री कृष्ण के पोते वज्रनाभ ने की थी. ये है पौराणिक कथा- कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज की गोपियों के साथ महारास किया था. इस मनोहर दृश्य का साक्षी हर देवी देवता बनना चाहता था. महादेव जो भगवान विष्णु को अपना आराध्य मानते हैं, वे उनके महारास को देखने के लिए पृथ्वी लोक में आए तो उन्हें गोपियों ने शामिल नहीं होने दिया. उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए. इसके बाद इस रूप में कृष्ण भगवान ने उन्हें पहचान लिया और महारास के बाद स्वयं अपने आराध्य महादेव की पूजा की और उनसे इस रूप में ब्रज में रहने का आग्रह किया. तब राधारानी ने कहा कि महादेव के गोपी के रूप को गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाएगा. तब से लेकर आज तक गोपेश्वर महादेव के मंदिर में उनका महिला की तरह सोलह श्रंगार किया जाता है, इसके बाद ही पूजा अर्चना होती है. महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में भक्तों की खासी भीड़ जुटती है. उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए. ॐ नम:शिवाय ॐ गं गणपतये नमः 👏 जय श्री माता पार्वती की जय श्री कृष्ण राधे राधे 🙏 🌹👏🚩शुभ 🌅 शुभ बुधवार ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री गणेश जी जय श्री राम 🌹 👏 🚩

विश्व 🌎का ऐसा मंदिर जहां महादेव महिला के रुप मे विराजे हैं 


मथुरा और वंदावन का नाम आते ही लोगों के मन में श्री कृष्णा का नाम जुबान पर आता है. लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जो वृंदावन में स्थित हैं और वो श्री कृष्ण का नहीं बल्कि महादेव का मंदिर है. जहां उन्हें महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार किया जाता है.

कहा जाता है कि ये विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां महादेव महिला के रूप में विराजे हैं. दूर-दूर से भक्त यहां महादेव के गोपी रूप के दर्शन करने आते हैं. इन्हें गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है.कहा जाता है कि यहां मौजूद शिवलिंग की स्थापना भगवान श्री कृष्ण के पोते वज्रनाभ ने की थी.

ये है पौराणिक कथा-
कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज की गोपियों के साथ महारास किया था. इस मनोहर दृश्य का साक्षी हर देवी देवता बनना चाहता था. महादेव जो भगवान विष्णु को अपना आराध्य मानते हैं, वे उनके महारास को देखने के लिए पृथ्वी लोक में आए तो उन्हें गोपियों ने शामिल नहीं होने दिया.

उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए.

इसके बाद इस रूप में कृष्ण भगवान ने उन्हें पहचान लिया और महारास के बाद स्वयं अपने आराध्य महादेव की पूजा की और उनसे इस रूप में ब्रज में रहने का आग्रह किया. तब राधारानी ने कहा कि महादेव के गोपी के रूप को गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाएगा. तब से लेकर आज तक गोपेश्वर महादेव के मंदिर में उनका महिला की तरह सोलह श्रंगार किया जाता है, इसके बाद ही पूजा अर्चना होती है. महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में भक्तों की खासी भीड़ जुटती है.

उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए.

ॐ नम:शिवाय ॐ गं गणपतये नमः 👏 जय श्री माता पार्वती की जय श्री कृष्ण राधे राधे 🙏 🌹👏🚩शुभ 🌅 शुभ बुधवार ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री गणेश जी जय श्री राम 🌹 👏 🚩
विश्व 🌎का ऐसा मंदिर जहां महादेव महिला के रुप मे विराजे हैं 


मथुरा और वंदावन का नाम आते ही लोगों के मन में श्री कृष्णा का नाम जुबान पर आता है. लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जो वृंदावन में स्थित हैं और वो श्री कृष्ण का नहीं बल्कि महादेव का मंदिर है. जहां उन्हें महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार किया जाता है.

कहा जाता है कि ये विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां महादेव महिला के रूप में विराजे हैं. दूर-दूर से भक्त यहां महादेव के गोपी रूप के दर्शन करने आते हैं. इन्हें गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है.कहा जाता है कि यहां मौजूद शिवलिंग की स्थापना भगवान श्री कृष्ण के पोते वज्रनाभ ने की थी.

ये है पौराणिक कथा-
कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज की गोपियों के साथ महारास किया था. इस मनोहर दृश्य का साक्षी हर देवी देवता बनना चाहता था. महादेव जो भगवान विष्णु को अपना आराध्य मानते हैं, वे उनके महारास को देखने के लिए पृथ्वी लोक में आए तो उन्हें गोपियों ने शामिल नहीं होने दिया.

उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए.

इसके बाद इस रूप में कृष्ण भगवान ने उन्हें पहचान लिया और महारास के बाद स्वयं अपने आराध्य महादेव की पूजा की और उनसे इस रूप में ब्रज में रहने का आग्रह किया. तब राधारानी ने कहा कि महादेव के गोपी के रूप को गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाएगा. तब से लेकर आज तक गोपेश्वर महादेव के मंदिर में उनका महिला की तरह सोलह श्रंगार किया जाता है, इसके बाद ही पूजा अर्चना होती है. महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में भक्तों की खासी भीड़ जुटती है.

उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए.

ॐ नम:शिवाय ॐ गं गणपतये नमः 👏 जय श्री माता पार्वती की जय श्री कृष्ण राधे राधे 🙏 🌹👏🚩शुभ 🌅 शुभ बुधवार ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री गणेश जी जय श्री राम 🌹 👏 🚩
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मथुरा और वंदावन का नाम आते ही लोगों के मन में श्री कृष्णा का नाम जुबान पर आता है. लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जो वृंदावन में स्थित हैं और वो श्री कृष्ण का नहीं बल्कि महादेव का मंदिर है. जहां उन्हें महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार किया जाता है.

कहा जाता है कि ये विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां महादेव महिला के रूप में विराजे हैं. दूर-दूर से भक्त यहां महादेव के गोपी रूप के दर्शन करने आते हैं. इन्हें गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है.कहा जाता है कि यहां मौजूद शिवलिंग की स्थापना भगवान श्री कृष्ण के पोते वज्रनाभ ने की थी.

ये है पौराणिक कथा-
कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज की गोपियों के साथ महारास किया था. इस मनोहर दृश्य का साक्षी हर देवी देवता बनना चाहता था. महादेव जो भगवान विष्णु को अपना आराध्य मानते हैं, वे उनके महारास को देखने के लिए पृथ्वी लोक में आए तो उन्हें गोपियों ने शामिल नहीं होने दिया.

उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए.

इसके बाद इस रूप में कृष्ण भगवान ने उन्हें पहचान लिया और महारास के बाद स्वयं अपने आराध्य महादेव की पूजा की और उनसे इस रूप में ब्रज में रहने का आग्रह किया. तब राधारानी ने कहा कि महादेव के गोपी के रूप को गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाएगा. तब से लेकर आज तक गोपेश्वर महादेव के मंदिर में उनका महिला की तरह सोलह श्रंगार किया जाता है, इसके बाद ही पूजा अर्चना होती है. महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में भक्तों की खासी भीड़ जुटती है.

उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए.

ॐ नम:शिवाय ॐ गं गणपतये नमः 👏 जय श्री माता पार्वती की जय श्री कृष्ण राधे राधे 🙏 🌹👏🚩शुभ 🌅 शुभ बुधवार ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री गणेश जी जय श्री राम 🌹 👏 🚩
विश्व 🌎का ऐसा मंदिर जहां महादेव महिला के रुप मे विराजे हैं 


मथुरा और वंदावन का नाम आते ही लोगों के मन में श्री कृष्णा का नाम जुबान पर आता है. लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जो वृंदावन में स्थित हैं और वो श्री कृष्ण का नहीं बल्कि महादेव का मंदिर है. जहां उन्हें महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार किया जाता है.

कहा जाता है कि ये विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां महादेव महिला के रूप में विराजे हैं. दूर-दूर से भक्त यहां महादेव के गोपी रूप के दर्शन करने आते हैं. इन्हें गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है.कहा जाता है कि यहां मौजूद शिवलिंग की स्थापना भगवान श्री कृष्ण के पोते वज्रनाभ ने की थी.

ये है पौराणिक कथा-
कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज की गोपियों के साथ महारास किया था. इस मनोहर दृश्य का साक्षी हर देवी देवता बनना चाहता था. महादेव जो भगवान विष्णु को अपना आराध्य मानते हैं, वे उनके महारास को देखने के लिए पृथ्वी लोक में आए तो उन्हें गोपियों ने शामिल नहीं होने दिया.

उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए.

इसके बाद इस रूप में कृष्ण भगवान ने उन्हें पहचान लिया और महारास के बाद स्वयं अपने आराध्य महादेव की पूजा की और उनसे इस रूप में ब्रज में रहने का आग्रह किया. तब राधारानी ने कहा कि महादेव के गोपी के रूप को गोपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाएगा. तब से लेकर आज तक गोपेश्वर महादेव के मंदिर में उनका महिला की तरह सोलह श्रंगार किया जाता है, इसके बाद ही पूजा अर्चना होती है. महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में भक्तों की खासी भीड़ जुटती है.

उन्होंने कहा कि इस महारास में सिर्फ महिलाएं ही शामिल हो सकती हैं. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें सुझाव दिया कि वो गोपी के रूप में महारास में शामिल हों और इसके लिए यमुना जी की मदद लें. यमुना जी ने महादेव के आग्रह पर उनका गोपी के रूप में श्रृंगार किया. इसके बाद महादेव गोपी रूप में महारास में शामिल हुए.

ॐ नम:शिवाय ॐ गं गणपतये नमः 👏 जय श्री माता पार्वती की जय श्री कृष्ण राधे राधे 🙏 🌹👏🚩शुभ 🌅 शुभ बुधवार ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री गणेश जी जय श्री राम 🌹 👏 🚩

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कामेंट्स

Brajesh Sharma Mar 3, 2021
जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ हर हर महादेव

शामराव ठोंबरे पाटील Mar 3, 2021
@brajeshsharma1 नमस्कार ब्रिजेश भाई जी जय माता महाकाली की जय हो भोलेनाथ ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव जय महाकाल जी जय श्री गणेश जी ॐ गं गणपतये नमः 👏 🚩 नमस्कार 🙏 शुभ संध्या वंदन 🌹 👏 🚩

Anita Sharma Apr 16, 2021

((((( संगति, परिवेश और भाव ))))) . एक राजा अपनी प्रजा का भरपूर ख्याल रखता था. राज्य में अचानक चोरी की शिकायतें बहुत आने लगीं. कोशिश करने से भी चोर पकड़ा नहीं गया. . हारकर राजा ने ढींढोरा पिटवा दिया कि जो चोरी करते पकडा जाएगा उसे मृत्युदंड दिया जाएगा. सभी स्थानों पर सैनिक तैनात कर दिए गए. घोषणा के बाद तीन-चार दिनों तक चोरी की कोई शिकायत नही आई. . उस राज्य में एक चोर था जिसे चोरी के सिवा कोई काम आता ही नहीं था. उसने सोचा मेरा तो काम ही चोरी करना है. मैं अगर ऐसे डरता रहा तो भूखा मर जाउंगा. चोरी करते पकडा गया तो भी मरुंगा, भूखे मरने से बेहतर है चोरी की जाए. . वह उस रात को एक घर में चोरी करने घुसा. घर के लोग जाग गए. शोर मचाने लगे तो चोर भागा. पहरे पर तैनात सैनिकों ने उसका पीछा किया. चोर जान बचाने के लिए नगर के बाहर भागा. . उसने मुडके देखा तो पाया कि कई सैनिक उसका पीछा कर रहे हैं. उन सबको चमका देकर भाग पाना संभव नहीं होगा. भागने से तो जान नहीं बचने वाली, युक्ति सोचनी होगी. . चोर नगर से बाहर एक तालाब किनारे पहुंचा. सारे कपडे उतारकर तालाब मे फेंक दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर एक बरगद के पेड के नीचे पहुंचा. . बरगद पर बगुलों का वास था. बरगद की जड़ों के पास बगुलों की बीट पड़ी थी. चोर ने बीट उठाकर उसका तिलक लगा लिया ओर आंख मूंदकर ऐसे स्वांग करने बैठा जैसे साधना में लीन हो. . खोजते-खोजते थोडी देर मे सैनिक भी वहां पहुंच गए पर उनको चोर कहीं नजर नहीं आ रहा था. खोजते खोजते उजाला हो रहा था ओर उनकी नजर बाबा बने चोर पर पडी. . सैनिकों ने पूछा- बाबा इधर किसी को आते देखा है. पर ढोंगी बाबा तो समाधि लगाए बैठा था. वह जानता था कि बोलूंगा तो पकडा जाउंगा सो मौनी बाबा बन गया और समाधि का स्वांग करता रहा. . सैनिकों को कुछ शंका तो हुई पर क्या करें. कही सही में कोई संत निकला तो ? आखिरकार उन्होंने छुपकर उसपर नजर रखना जारी रखा. यह बात चोर भांप गया. जान बचाने के लिए वह भी चुपचाप बैठा रहा. . एक दिन, दो दिन, तीन दिन बीत गए बाबा बैठा रहा. नगर में चर्चा शुरू हो गई की कोई सिद्ध संत पता नही कितने समय से बिना खाए-पीए समाधि लगाए बैठै हैं. सैनिकों को तो उनके अचानक दर्शऩ हुए हैं. . नगर से लोग उस बाबा के दर्शन को पहुंचने लगे. भक्तों की अच्छी खासी भीड़ जमा होने लगी. राजा तक यह बात पहुंच गई. राजा स्वयं दर्शन करने पहुंचे. राजा ने विनती की आप नगर मे पधारें और हमें सेवा का सौभाग्य दें. . चोर ने सोचा बचने का यही मौका है. वह राजकीय अतिथि बनने को तैयार हो गया. सब लोग जयघोष करते हुए नगर में लेजा कर उसकी सेवा सत्कार करने लगे. . लोगों का प्रेम और श्रद्धा भाव देखकर ढोंगी का मन परिवर्तित हुआ. उसे आभास हुआ कि यदि नकली में इतना मान-संम्मान है तो सही में संत होने पर कितना सम्मान होगा. उसका मन पूरी तरह परिवर्तित हो गया और चोरी त्यागकर संन्यासी हो गया. . संगति, परिवेश और भाव इंसान में अभूतपूर्व बदलाव ला सकता है. रत्नाकर डाकू को गुरू मिल गए तो प्रेरणा मिली और वह आदिकवि हो गए. असंत भी संत बन सकता है, यदि उसे राह दिखाने वाला मिल जाए. . अपनी संगति को शुद्ध रखिए, विकारों का स्वतः पलायन आरंभ हो जाएगा.

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Anita Sharma Apr 15, 2021

एक राजा का नित्य का नियम था कि जब भी वह प्रात: भ्रमण पर निकलता तो दरवाजे पर खड़े पहले याचक की मुंहमांगी सहायता करता। एक दिन एक अजीब घटना घट गई। राजा जैसे ही ड्यौढ़ी से बाहर आया, उसे एक वीतरागी ब्राह्मण दिखाई दिया।नियम के अनुसार राजा ने ब्राह्मण से कहा, मैं आपकी क्या सेवा या सहायता करूं? ब्राह्मण ने कहा,जो आपकी इच्छा। नहीं नहीं, जो आप मांगेंगे, वही दूंगा, राजा ने कहा। ब्राह्मण ने राजा से कहा,आप भ्रमण से वापस आजाओ,तबतक मैं मांगने के लिए सोच लेता हूं। अब ब्राह्मण सोच में पड़ गया कि राजा से क्या मांगा जाए, ऐसा सोचते सोचते उसके मन में लोभ आ गया और राजा के वापस आने पर वीतरागी ब्राह्मण ने पूरा राज्य मांग लिया । राजा ने जैसे ही ब्राह्मण की मांग सुनी,वह तत्क्षण पूरा राज्य देने को तैयार हो गया और बोला-"विप्रवर! मैं तो बहुत दिनों से प्रतीक्षा में था कि इस राज्यभार से कब मुक्त हो जाऊं। मैं राज्यभार सौंपने का प्रबंध करता हूं,तबतक आप यहीं ठहरें , इतना कहकर राजा अंदर महल में गया कि वीतरागी ब्राह्मण चिंता में डूब गया।उसे भी आशा नहीं थी कि इतनी सरलता से राजा राजपाट सौंप देगा। ब्राह्मण ने सोचा-यह तो वास्तव में वीतरागी है, मैं तो कोरा दिखावा कर रहा था।यह तो वास्तव में निर्लिप्त है। सर्वस्व त्याग का आदर्श लेकर चलने वाले ब्राह्मण को इस घटना से वास्तविकता का बोध हुआ। पछताया कि वीतरागी कहलाने वाले ब्राह्मण का मन इतना लोलुप। जब तक राजा मंत्री को लेकर आया,तबतक ब्राह्मण का ब्राह्मणत्व जाग चुका था और वह वहां से जा चुका था।

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#मूर्ख_व्यक्ति_के_सात_लक्षण 🙅 विदुर नीति में मुर्ख व्यक्ति को पहचानने के 7 लक्षण बताए गए हैं, 1- जो व्यक्ति बिना ज्ञान के ही हमेशा घमंड में चूर रहता है और बिना परिश्रम किए धनवान बनने की इच्छा रखता है. ऐसे व्यक्ति को मूर्ख कहा जाता है. 2- जो व्यक्ति अपना काम छोड़ दूसरों के कर्तव्य पालन में लगा रहता है और मित्रों के साथ संलग्र रह हमेशा गलत काम करता है ऐसा व्यक्ति मुर्ख होता है. 3- जो मनुष्य अपनी जरूरत से ज्यादा इच्छा करता है और अपने से शक्तिशाली लोगों से दुश्मनी मोल लेता है. उस व्यक्ति को मुर्ख माना जाता है. 4- जो मनुष्य अपने शत्रु को मित्र बना लेता है और अपने मित्रों को छोड़ गलत संगत अपना लेता है, ऐसा व्यक्ति मूर्ख कहलाता है. 5- जो मनुष्य बिना बुलाए ही किसी स्थान पर पहुंच जाता है और अपने आप को ऊंचा दिखाने की कोशिश करता है उसे मुर्ख कहते हैं. 6- जो मनुष्य स्वयं गलती कर दूसरों पर आरोप लगा देता है और हमेशा अपनी गलतियों को छुपाता है अपनाता नहीं है ऐसा व्यक्ति मूर्ख कहलाता है. 7- जो मनुष्य पितरों का श्राद्ध नहीं करता तथा अज्ञानी लोगों के प्रति श्रद्धा रखता है. ऐसा व्यक्ति मूर्ख कहलाता है.

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पैठण हे तेथील संत एकनाथांची समाधी, जायकवाडी धरण, ज्ञानेश्वर उद्यान तसेच पैठणी साडी यांच्यासाठी प्रसिद्ध आहे. औरंगाबादेपासून ५० किलोमीटर अंतरावर गोदावरीकाठी ते वसले आहे.  हे गाव प्राचीन कालापासून 'दक्षिण काशी' म्हणून ओळखले जाते. पैठण गावात जे नाथांचं मंदिर आहे, त्यांच्या देवघरात सर्वात वर तुळशीचं माळ घातलेली पांडुरंगाची मूर्ती आहे ती सदैव फुल वस्त्र अलंकाराने झाकलेली असते त्यामुळे मूर्तीचे फक्त मुखकमल दर्शन होत असते. वास्तविक या मूर्तीचे एक वेगळे वैशिष्ट्य आहे. आपण सहसा पांडुरंगाची मूर्ती दोन्ही हात कमरेवर ठेवून उभा असलेला पांडुरंग पाहतो पण या मूर्तीत पांडुरंगाचा डावा हात कमरेवर आहे तर उजवा हात कमरेच्या खाली आहे पण समोरच्या बाजूला उघडणारा तळवा किंवा तळहात दिसतो. म्हणून त्याला" विजयी पांडुरंग" असे म्हणतात. या विजयी पांडुरंग कसा याची एक सुंदर आख्यायिका आहे, हा भगवंत नाथांना प्रासादिक रुपाने मिळालेला आहे. ही मूर्ती दिडफुट उंचीची आणि अडीच किलो वजनाची पंचधातूंपासून बनवलेली मूर्ती आहे. कर्नाटकातील राजा रामदेवराय हा पंढरपूरच्या पांडुरंगाचा उपासक होता त्यामुळं त्यांनी मंदिर बांधलं आणि सोनारकरवी पंचधातूंची मूर्ती बनवून घेतली आणि त्याची प्राणप्रतिष्ठा करणार तोच पांडुरंग दृष्टांत देऊन त्यांना म्हणाला "माझी ही मूर्ती तू इथे स्थापलीस तर मी इथे राहणार नाही आणि माझ्या इच्छे विरुद्ध तू तसं केलंस तर तुझा निर्वंश होईल. "मग राजाने विचारले की या मूर्ती चे काय करू तेव्हा पांडुरंग म्हणाला की पैठणच्या नाथ महाराजांना नेऊन दे.  त्यानंतर राजाने ती मूर्ती वाजत गाजत पैठणला आणली तेव्हा नाथ महाराज मंदिरात असलेल्या खांबाला टेकून प्रवचन सांगत होते. ते ज्या खांबाला टेकून पुराण सांगायचे. त्या खांबाला पुराण खांब असे म्हणतात. राजा रामदेवराय नाथांचे प्रवचन संपेपर्यंत थांबले आणि त्यांनी ही मूर्ती तुमच्याकडे कशी किंवा का आणली हे सर्व नाथांना सांगितले आणि त्यामुळे भगवंतांना तुमच्याकडे ठेवून घ्या असे सांगितले.  त्यावर नाथांनी मूर्तीला नमस्कार केला आणि म्हणाले की तू राजाच्या घरी राहणारा आहेस माझ्याकडे तुझी रहायची इच्छा आहे पण राजा सारखे पंचपक्वान्न माझ्याकडे तुला मिळणार नाहीत तेव्हा या भगवंताच्या पायाखालच्या विटेवर अक्षरं उमटली "दास जेवू घाला न.. घाला" म्हणजे हे नाथ महाराज मी तुझ्याकडे दास म्हणून आलोय तू जेवायला दे अथवा न दे मी तुझ्याजवळ राहणार आहे.  हे ही या मूर्तीच एक वैशिष्ट्य सांगता येते की विटेवर अजूनही ही उमटलेली अक्षरे आहेत. प्रत्यक्ष भगवंत घरी आले म्हणल्यावर पूर्वी पाहुणचार म्हणून कोणी बाहेरून आले की गुळ पाणी दिले जायचे पण प्रत्यक्ष भगवंत आलेत म्हणल्यावर त्यांनी आपल्या पत्नीला आवाज दिला त्यांचे नाव गिरीजाबाई होते त्यांचा पाहुणचार म्हणून बाईंनी चांदीच्या वाटीत लोणी आणि खडीसाखर आणलं नि नाथांच्या समोर धरलं. हे लोणी घेण्यासाठी म्हणून भगवंतांनी आपला उजवा हात कमरेवरचा काढून पुढे केला नि लोणी चाटले नंतर तो हात लोणचट म्हणजेच थोडा लोणी लागलेला असल्याने परत कमरेवर ठेवताना हात व्यवस्थित कमरेवर ठेवला नाही म्हणून त्या मूर्तीचा हात असा आहे आणि या मूर्तीच दुसरं वैशिष्ट्य असं आहे की आजही प्रत्येक एकादशीला अभिषेकासाठी मूर्ती खाली घेतली जाते तेव्हा संपूर्ण अभिषेकानंतर मूर्तीला पिढीसाखरेने स्वच्छ पुसलं जातं तेव्हा हाताला ही पुसलं जातं तेव्हा त्या हातावरून हात फिरवला तर आजही लोण्याचा चिकटपणा जाणवतो. एकनाथांची विठ्ठलभक्ती एवढी श्रेष्ठ होती की साक्षात पांढुरंग श्रीखंड्याच्या रूपाने पाण्याच्या कावडी एकनाथांच्या घरी आणत असत अशी श्रद्धा आहे. पाण्याचा तो हौदही या वाड्यात अजून आहे. याच भगवंतांनी नाथांच्या घरी कावडीने पाणी वाहीले. मूर्तीच्या खांद्यावर पाणी वाहिल्याचे घट्टे आजही दिसतात. अशा तीन वैशिष्ठ्याने नटलेली ही विजयी पांडुरंगाची मूर्ती आहे. जय श्री हरी विठ्ठल जय श्री संत एकनाथ महाराज 👑 👏 🚩 जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 शुभ रात्री वंदन जय श्री गुरुदेव 👣 🌹 👏 जय श्री हरी विठ्ठल रुक्मिणी माता की 💐 👏 🐚 🚩

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