Sarika Seth
Sarika Seth Jun 9, 2018

Kya aapne kar liye purushottam mass me punya ke upaye??? Ek baar iss video ko zaroor dekhe aur apne hindu bhaiyo aur beheno ki sahayta kare.

Hamne ye video badi mahnat se banaya hai.
Apka ek like ya support hume himmat aur hausla deta hai ki hum apki aur madad kar sake. Hum hindu bhaiyo ko hi ek durse ki madad karni hogi aur apne sanskriti ko aur failana hoga
Har jagah hame apni dharm ko failana hai

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https://youtu.be/4Zs07TX0N2Q

Dhanyavad

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S.C Pathak Jun 9, 2018
S C Pathak jai shri radhe good afternoon

Sarika Seth Jun 10, 2018
RadheRadhe aapne hamare video ko like kiya ye mera saubhagya h dhanyabad

पाणी से जलता यहां दिपक हमारा भारत देश, आस्थाओं और विभिन्न रहस्यों से भरा हुआ देश है। यहां हर आधे किलोमीटर पर आपको धर्मस्थल मिल जाएंगे और हर धर्मस्थल के साथ ही एक कहानी भी। वहीं, हमारे देश में कुछ मंदिर से इतने रहस्यमयी है कि उनके रहस्यों के बारे मे आज तक कोई जान भी नहीं पाया है. आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश में स्थित है. ये मंदिर देशभर में अद्भुत चमत्कार के मशहूर है. इस मंदिर में एक दिया वर्षों से जलता आ रहा है, लेकिन ये दिव्य ज्योत, तेल या घी से नहीं बल्कि पानी से जलती है. आज तक कई वैज्ञानिकों ने इस मंदिर का रहस्य समझने की कोशिश की, लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिली.   यह मंदिर, मध्य प्रदेश के काली सिंध नदी के किनारे बसे आगर-मालवा जिले के अंतर्गत आने वाले नलखेड़ा गांव से लगभग 15 किमी दूर गाड़िया गांव के पास मौजूद है. इस मंदिर को गड़ियाघाट वाली माताजी के नाम से जाना जाता है. मंदिर के पुजारी के अनुसार, पहले इस मंदिर में हमेशा तेल का दीपक जलता था, लेकिन लगभग पांच साल पहले उन्हें मातारानी ने सपने में दर्शन देकर पानी से दीपक जलाने के लिए कहा. इसे मातारानी का आदेश मानते हुए पुजारी ने सुबह उठकर जब उन्होंने पास बह रही काली सिंध नदी से पानी भरा और उसे दीए में डाल दिया. दीपक में पानी डालने के बाद जैसे ही उसमे रखी हुई ज्योत के पास जलती हुई माचिस ले जाई गई, वैसे ही ज्योत जल उठी. यह देखकर पुजारी खुद भी अचंभित रह गए और लगभग दो महीने तक उन्होंने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया. बाद में उन्होंने इस बारे में कुछ ग्रामीणों को बताया तो उन्होंने भी पहले विश्वास नहीं किया, मगर जब उन्होंने भी दीए में पानी डालकर ज्योति जलाने की कोशिश की, तो ज्योति जल उठी. बताया जाता है कि उसके बाद इस चमत्कार की बात आग की तरह पूरे गांव में फैल गई. तब से लेकर आज तक इस मंदिर में काली सिंध नदी के पानी से ही ज्योत प्रजलवित की जाती है . बताया जाता है कि जब दीपक में पानी डाला जाता है, तो वह चिपचिपे तरल पदार्थ में तब्दील हो जाता है और ज्योत जल उठती है. स्‍थानीय न‍िवास‍ियों के अनुसार, हालांकि पानी से जलने वाली यह ज्‍योत वर्षा ऋतू में नहीं जलती है. क्योंकि बरसात के मौसम में काली सिंध नदी का जल स्तर बढ़ने के चलते यह मंदिर पानी में डूब जाता है, जिससे यहां पूजा करना संभव नहीं होता।  लेकिन शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना के साथ ज्योत दोबारा प्रज्जवलित कर दी जाती है, जो अगले साल बार‍िश के मौसम तक निरंतर जलती रहती है. जय श्री जगदंबे माता की जय हो भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की 🌅 नमस्कार शुभप्रभात 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण जय श्री भोलेनाथ जय श्री पार्वती माता की जय हो आप सभी भारतवासी मित्रों को मेरा सुबह नमस्कार शुभप्रभात वंदन जय हो 🌹👏🚩🐚🎪👪👬🙏🚩 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷

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HEMANT JOSHI Feb 25, 2021

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शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ हिंदू ग्रंथों के अनुसार देवी काली को महाकाली भी कहा जाता है, शास्त्रों में बताया गया है काली का अर्थ होता है समय और काल। काल, जो हर किसी को अपने अंदर निगल जाए। जिस तरह महाकाल को काल का देवता कहा जाता है ठीक उसी तरह देवी काली को अंधकार और श्मशान की देवी माना जाता है। ग्रंथों में लिखा है कि मां कालिका की उत्पत्ति धर्म की रक्षा तथा पापियों और राक्षसों के विनाश के लिए हुआ था। बता दें दशमहाविद्याओं में सबसे पहले माता इन्हें कहा जाता है। शास्त्रों में इन्हें यानि देवी काली को माता जगदम्बा की महामाया भी कहा जाता है। इनकी उपासना अधिक लाभकारी मानी जाती हैं, यहां जानें इनसे जुड़े वैदिक, पौराणिक तथा साबर मंत्र- पहला साबर मंत्र- ॐ नमो काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिह्वा वाली, चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई, अब बोलो काली की दुहाई। इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करना चाहिए, इससे जाप करने वाले को आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। धन संबंधित परेशानी दूर हो जाती हैं। ध्यान रहें 15 दिन में एक बार किसी भी मंगलवार या शुक्रवार के दिन काली माता को मीठा पान व मिठाई का भोग लगाते रहें। दूसरा साबर मंत्र- ॐ कालिका खडग खप्पर लिए ठाड़ी ज्योति तेरी है निराली पीती भर भर रक्त की प्याली कर भक्तों की रखवाली ना करे रक्षा तो महाबली भैरव की दुहाई।। इस मंत्र के जप से शत्रु भय और भूत-प्रेत भय निवारण होता है, मंत्र हर तरह के तांत्रिक प्रभाव आदि को दूर करता है। साथ ही साथ रोग-शोक के साथ साथ शारीरिक और मानसिक संताप दूक होते हैं।  जय श्री महाकाल जी जय माता महाकाली की जय हो 🌹👏🚩शुभ 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी माता की जय श्री वैश्नवी माता की जय श्री जगदंबे माता की जय श्री जय श्री भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता महाकाली की जय हो आप सभी भारतवासी मित्रों को मेरा सुबह नमस्कार शुभप्रभात 🌅 👣 👏 🌹 🚩

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HEMANT JOSHI Feb 25, 2021

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