सुप्रभात। राम राम जो । आज का दिन सबों के लिए मंगलमय हो । खुशियों से भरा हो। प्रभु से ऐसी प्रार्थना । ,🙏🙏🙏💐💐💐💐

सुप्रभात। राम राम जो । आज का दिन सबों के लिए मंगलमय हो । खुशियों से भरा हो। प्रभु से ऐसी प्रार्थना । ,🙏🙏🙏💐💐💐💐
सुप्रभात। राम राम जो । आज का दिन सबों के लिए मंगलमय हो । खुशियों से भरा हो। प्रभु से ऐसी प्रार्थना । ,🙏🙏🙏💐💐💐💐

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कामेंट्स

Mamta Chauhan Apr 20, 2019
Ram ram ji Subh Prabhat vandan ji 🙏 aapka har pal Subh v Mangalmya ho 🙏🌷🙏

आकाश May 24, 2019

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Nupurbala Sharma May 23, 2019

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Manoj manu May 23, 2019

🚩🌿🙏जय श्री हरि जी 🌺🌿🙏 🌿🌼🌿"सत्संग में बहुत लोग बैठते हैं -- पर सत्संग - - बहुत कम लोगौं में बैठता है, "🌼 बिनु सतसंग न हरि कथा तेहि बिनु मोह न भाग । मोह गएँ बिनु राम पद होइ न दृढ़ अनुराग ।। सत्संग के बिना हरि की कथा सुनने को नहीं मिलती, उसके बिना मोह नहीं भागता और मोह के गये बिना श्रीरामचन्द्र जी के चरणों में दृढ़ [अचल] प्रेम नहीं होता । जीव की उन्नति सत्संग से ही होती है. सत्संग से उसका स्वभाव परिवर्तित हो जाता है। सत्संग उसे नया जन्म देता है। जैसे, कचरे में चल रही चींटी यदि गुलाब के फूल तक पहुँच जाय तो वह देवताओं के मुकुट तक भी पहुँच जाती है। ऐसे ही महापुरूषों के संग से नीच व्यक्ति भी उत्तम गति को पा लेता है। परमात्मा की प्राप्ति और प्रभु के प्रति प्रेम उत्पन्न करने एवं बढ़ाने के लिए साधु पुरूष का संग करना और उनके उपदेशों को श्रद्धा व प्रेम से सुनकर तदनुसार आचरण करना, यह सत्संग है। जैसा संग, वैसा रंग। संग से ही मनुष्य की पहचान की जाती है। अतः अपनी उन्नति एवं वास्तविक सुख की प्राप्ति के लिए सदैव सत्संग करना चाहिए। शास्त्र कहते हैं कि मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है। मन शुद्ध कैसे होता है ? मन शुद्ध होता है विवेक से और विवेक कहाँ से मिलता है ?❓ बिनु सत्संग विवेक न होई। रामकृपा बिनु सुलभ न सोई।। सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और भगवान की कृपा के बिना सच्चे संत नहीं मिलते। तोते की तरह रट-रटकर बोलने वाले तो बहुत मिलते हैं, परंतु उस 'सत्' तत्त्व का अनुभव करने वाले महापुरूष विरले ही मिलते हैं। आत्मज्ञान को पाने के लिए रामकृपा, सत्संग और सदगुरू की कृपा आवश्यक है। जीवन में इन तीन बातों का होना अनिवार्य हैः-- सत्संग, भगवद् भजन और परोपकार। इनमें भी सत्संग की बड़ी भारी महिमा है। सत्संग का अर्थ है, सत् वस्तु का ज्ञान। परमात्मा की प्राप्ति और प्रभु के प्रति प्रेम उत्पन्न करने तथा बढ़ाने के लिए सत्पुरूषों को श्रद्धा एवं प्रेम से सुनना – यही सत्संग है। तुलसीदास जी ने कहा हैः जाहि बड़ाई चाहिए, तजे न उत्तम साथ। ज्यों पलास संग पान के, पहुँचे राजा हाथ।। जैसे, पलाश के फूल में सुगंध नहीं होने से उसे कोई पूछता नही है, परंतु वह भी जब पान का संग करता है तो राजा के हाथ तक भी पहुँच जाता है। इसी प्रकार जो उन्नति करना चाहता हो उसे महापुरूषों का संग करना चाहिए। 🌿🌿जय जय श्री राधे जी 🌿🌿🙏

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Sherest Rai May 23, 2019

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Devendra Angira May 23, 2019

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आकाश May 22, 2019

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