Krishna Singh
Krishna Singh Dec 6, 2017

जानते महाप्रभु चैतन्य जी के बारे में

जानते  महाप्रभु चैतन्य जी के बारे में

एक बार चैतन्य महाप्रभु दक्षिण भारत की यात्रा पर थे। वहां उन्होंने एक स्थान पर देखा कि एक ब्राह्मण बैठा हुआ गीता का पाठ कर रहा था और रो रहा था। कम पढ़ा-लिखा होने से वह गीता का अशुद्ध पाठ कर रहा था। चैतन्य महाप्रभु के साथ नित्यानन्दजी भी थे, उन्हें अपने पांडित्य पर गर्व था; परन्तु चैतन्य महाप्रभु ने भगवान के प्रेम में अपनी विद्वता को भुला दिया था।
नित्यानन्दजी ने उस पंडित का अशुद्ध गीतापाठ सुना तो उन्हें अशुद्ध पाठ सहन नहीं हुआ। उन्होंने चैतन्य महाप्रभु से कहा—‘यह ब्राह्मण अशुद्ध पाठ करता है, आप इसे समझा दीजिए कि अशुद्ध पाठ न करे।’ चैतन्य महाप्रभु ने नित्यानन्दजी से कहा—‘करता है तो करने दीजिए, आपका क्या लेता है?’ पर नित्यानन्दजी नहीं माने और कहने लगे कि अशुद्ध पाठ नहीं होना चाहिए। चैतन्य महाप्रभु ने कहा—‘तब आप जाकर समझा दीजिए।’
नित्यानन्दजी ने ध्यानमग्न उस पंडित को हाथ से हिला-डुलाकर जगाया और कहा—‘तुम ये अशुद्ध पाठ क्यों कर रहे हो?’ ब्राह्मण ने कहा—‘महाराज! मै पढ़ा-लिखा नहीं हूँ।’ नित्यानन्दजी ने कहा—‘तो फिर रो क्यों रहे हो?’
ब्राह्मण ने थोड़ा सकुचाते हुए उत्तर दिया—‘कुरुक्षेत्र के मैदान में ये जो श्रीकृष्ण अर्जुन को उपदेश दे रहे हैं, उनकी भाव-भंगिमा को देखकर मेरे आंसू बहने लगते हैं।’
नित्यानन्दजी बहुत बड़े भगवद्भक्त थे परन्तु वे भगवान की लीला न समझ सके। नित्यानन्दजी चैतन्य महाप्रभु से बोले—‘यह ब्राह्मण गीता का केवल अशुद्ध पाठ ही नहीं कर रहा बल्कि दम्भी-पाखण्डी भी मालूम होता है। मैंने उससे रोने का कारण पूछा तो बोला कि कुरुक्षेत्र के मैदान में मुझे श्रीकृष्ण और अर्जुन दिख रहे हैं।’
चैतन्य महाप्रभु ने कहा—‘दीखते होंगें।’ परन्तु नित्यानन्दजी को महाप्रभु की बातों पर विश्वास नहीं हुआ। तब चैतन्य महाप्रभु ने नित्यानन्दजी से कहा—‘आप एक काम करें, जाकर ब्राह्मण के चरणस्पर्श करें।’ नित्यानन्दजी को महाप्रभुजी की आज्ञा का पालन करना ही था सो उन्होंने जाकर ब्राह्मण का चरणस्पर्श किया। चरणस्पर्श करते ही ब्राह्मण ने कुरुक्षेत्र के जिस दृश्य का वर्णन किया था वह नित्यान्दजी की आंखों के सामने वैसा-का-वैसा दिखाई देने लगा। नित्यानन्दजी आश्चर्यचकित रह गए। तब महाप्रभुजी ने कहा—‘असली पाठ तो ये ब्राह्मणदेवता ही करते हैं।’

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कामेंट्स

Ajnabi Dec 6, 2017
very nice krishna g jay shree Radhe krishna veeruda

Jitendra Tagore Dec 6, 2017
bhakti ki yeh awastha Hari ki kripa se hi prapt Hoti jai. thanks Hari sarnam

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Bell Dhoop Like +20 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 91 शेयर

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Amar Jeet Mishra Dec 11, 2018

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Lotus Jyot Pranam +11 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 3 शेयर

*ऊँ🙏शुभ पंचांग🌹शुभ गर्ग राशिफल🙏ऊँ*

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Mahesh Bhargava Dec 11, 2018

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Anjana Gupta Dec 11, 2018

Pranam Water Lotus +311 प्रतिक्रिया 97 कॉमेंट्स • 61 शेयर
Manju Pathak Dec 11, 2018

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