Santosh Hariharan
Santosh Hariharan Aug 16, 2017

संस्कारों का मानव जीवन मे महत्व।🎎

संस्कारों का मानव जीवन मे महत्व।🎎

जन्म लिए हुए हर इंसान के लिए संस्कार बड़े आवश्यक हैं। उनका किसी भी उपासना पद्धति से कोई संबंध नहीं है। संस्कार करने के पीछे प्रमुख कारण है, हर इंसान को प्रकृति के नियमों से परिचित कराना और जिस समाज में हम रहते हैं, उस समाज के सामाजिक नियमों से परिचित कराना। मानव और प्राणी इनमें बहुत बड़ा फर्क है। प्राणी के सृष्टि में जन्म लेते समय ही परमेश्वर उसे ज्ञान देता है। इसलिए प्राणियों को सिखाने की जरूरत नहीं होती। जन्म लेते समय ही प्राणी को ज्ञान की देन मिलती है। इसके संदर्भ में मधुमक्खी का उदाहरण लिया जा सकता है। जन्म लेते ही मधुमक्खी अपने काम में जुट जाती है। उसे यह सिखाना नहीं पड़ता कि मधुमक्खी का छत्ता कैसे बनाया जाता है। पीढ़ी दर पीढ़ी, सालों-साल मधुमक्खियां एक ही प्रकार का छत्ता बनाती रहती हैं। छत्ता बनाने का ज्ञान चाहे उसके पास जन्म से ही हो, किंतु उसे बनाते समय उसमें कुछ बदलाव भी जरूरी है, यह जानने की क्षमता मधुमक्खी में नहीं होती।

मानव में जन्म से जो ज्ञान होता है, वह सुप्त रूप में होता है। यह ज्ञान प्रत्यक्ष रूप में बाहर से दिखाई नहीं देता। अपने शरीर की सफाई का ज्ञान मानव में जन्म से नहीं होता। गाय का बछड़ा जन्म लेते ही कूदने लगता है। शरीर की सफाई कैसे की जाए, उस बछड़े को सिखाना नहीं पड़ता। उसके शरीर की रचना ही ऐसी होती है कि मलमूत्र उसके शरीर पर नहीं गिरता। मानव शरीर में यह बात नहीं होती। यही कारण है कि बच्चे का शरीर साफ करना, उसे खाना खिलाना, कोई दूसरा करता है। बच्चा जैसे जैसे बड़ा होता है, उसे इन बातों का ज्ञान होता जाता है। इस प्रकार का जो ज्ञान दिया जाता है, उसे संस्कार कहते हैं। इन्ही संस्कारों के कारण बच्चों को ज्ञान प्राप्त होता है। मानव को सबसे पहले उसके शरीर से संबंधित ज्ञान देना पड़ता है। इसी प्रकार उसकी बुद्धि का परिचय भी कोई दूसरा ही उसे देता है। हर इंसान को जन्म से ही बुद्धि होती है, किंतु उसे उसका परिचय नहीं होता या ज्ञान नहीं होता। यह ज्ञान उसे अनुकरण से और मार्गदर्शन से ही प्राप्त होता है।

इन दोनों तरीकों से जैसे जैसे ज्ञान प्राप्त होता है, वैसे वैसे मानव को प्राकृतिक तथा सामाजिक नियमों का परिचय होता जाता है। दोनों तरह के नियमों का परिचय सही तरीके से ना हो, तो इंसान पशुवत् ही रह जाएगा। यही कारण है कि इन बातों का ज्ञान होने के लिए संस्कारों की जरुरत होती है। यहां रामभक्त हनुमान का उदाहरण दिया जा सकता है। हनुमान प्रखर शक्तिशाली थे। किंतु अपनी इस शक्ति का ज्ञान उन्हें नहीं था। कोई दूसरा कहे, तभी उन्हें अपनी शक्ति का ज्ञान होता था। इसलिए सागर लांघकर लंका जाने का काम उन्हें दिया गया, तब वे शंकित हो गए कि वे यह काम कैसे कर सकेंगे। तभी जाम्बुवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों का एहसास दिलाया और कहा, ‘आप ही समुद्र लांघ सकते हैं। किसी और के बस की यह बात नहीं है।’ यही बात हर एक इंसान में देखी जाती है। कोई दूसरा एहसास दिलाता है, तभी इंसान अपनी शारीरिक या बौद्धिक क्षमता को पहचान पाता है।


ऐसा नहीं है कि यह ज्ञान इंसान को नहीं होता, किंतु वह सुप्त रूप में होने के कारण बाहर से दिखाई नहीं देता। सुप्त रूप में होने वाले इस ज्ञान को प्रकट करने का काम संस्कार करते हैं। संस्कारों की आवश्यकता पर विचार करते समय हम जो अन्न सेवन करते हैं, उस अन्न का विचार किया जा सकता है। हम चावल, सब्जियां आदि चीजें पकाते हैं। इसे ही संस्कार करना कहते हैं। बिना पकाए, अन्न का सेवन करें तो उससे नुकसान होने की संभावना होती है। इसलिए उस पर पकाने का संस्कार करने की आवश्यकता होती है। उसे केवल पकाने से काम नहीं होता, वरन् उसमें जरुरत के अनुसार नमक, मिर्च, मसाले डालकर उसे स्वादिष्ट बनाने की भी आवश्यकता होती है। नमक-मिर्च सही मात्रा में मिलाया जाए, तो हम कहते हैं कि उसपर सही रूप में संस्कार हुए हैं। नमक-मिर्च की मात्रा कम या ज्यादा हो जाए तो हम कहते हैं कि खाना अच्छा नहीं बना। इसे ही उचित या अनुचित संस्कार कहा जा सकता है।

यही बात इंसान के लिए भी कही जा सकती है। चोरी करना अनुचित संस्कार है। जन्म लेते समय इंसान को चोरी करने की बुद्धि नहीं होती। चोरी करने की क्रिया कोई उसे सिखाता है। हो सकता है कि पूर्वजन्म के सुप्त संस्कारों का भी वह एक हिस्सा हो। बात चाहे कुछ भी हो, चोरी करना सामाजिक नियमों के खिलाफ है और इसलिए यह एक अनुचित संस्कार है। जिसपर संस्कार करने हो, वह इंसान या चीज, योग्य होना जरूरी है। साथ ही संस्कार करनेवाला भी योग्य होना जरूरी है। इंसान का स्वभाव अनुकरण करने का है।

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कामेंट्स

Sachin Dayma Dadhich Aug 16, 2017
जन्म से ज्ञान होता है तो स्कूल क्यो भेजते हो राम के भी गुरु थे कृष्ण के भी जब की वे स्वयं परमावतार थे पर कुछ तो ज्ञान पाने के लिए गुरु के पास गए ही , छत्ता बनाने और मनुष्य के कर्म में बड़ा अंतर है और इसी अज्ञान के कारण कई आधुनिक शिक्षा नही लेते जो अकर्म का कारण और राष्ट्र का पतन बनरहा है ।

अमन मिश्रा Aug 16, 2017
@sachin.dayma.dadhich आपने पूरा लेख नही पढ़ा शायद यह ज्ञान की बारे में बात कर रहें हैं कि ज्ञान कैसे मिलता है मानव को। यह ये नही कह रहे कि स्कूल मत जाओ। वैसे भी गुरु बिन ज्ञान कहा, अब चाहे वो गुरु आपके माता पिता हो या फिर स्कूल के कोई शिक्षक।

Akash Salhotra Aug 17, 2017
sir ji janwar mein koodarti sanskar hain insan mein to pad likh kar bi sanskar nahi aate matlabi hain insan

Akash Salhotra Aug 17, 2017
jiske ghar mein Dane uske kamale bhi sayane all depends on circumstance jase halat honge bandha wasi batien kare GA koodhart ke niyam par to koin bi nahi chalta

Govindpirshad Tiwari Jan 23, 2018
वंदेमातरम,जय हिंद जय हिंदू धर्म

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neeru gupta Aug 18, 2018

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Anju Mishra Aug 18, 2018

🍃एक बात बताते हैं संतलोग बहुत ही रहस्यमय है।🍃
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
कहते हैं कि जब कोई रसिक भक्त,कृष्ण विरह में रोते हैं, तब हमारी आँख से निकले एक-एक आंसू रुपी मोती की श्री जी माला बनाती है और उस माला को कृष्ण जी को पहनात...

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पत्नी क्या होती है।
एक बार जरूर पड़े।

🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔

"रामलाल तुम अपनी बीबी से इतना क्यों डरते हो?
"मैने अपने नौकर से पुछा।।

"मै डरता नही साहब उसकी कद्र करता हूँ
उसका सम्मान करता हूँ।"उसने जबाव दिया।

मैं हंसा और बोला-" ऐसा क्या है उसमें।

न...

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Anju Mishra Aug 18, 2018

जय श्री राधे कृष्णा

अंधेरा चाहे कितना भी घना हो लेकिन एक छोटा सा दीपक अंधेरे को चीरकर प्रकाश फैला देता है वैसे ही जीवन में चाहे कितना भी अंधेरा हो जाए विवेक रूपी प्रकाश अंधकार को मिटा देता है

शत्रु को सदैव भ्रम में रखना चाहिए जो उसका अप्रिय करना...

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geeta rathi Aug 18, 2018

हिंदू धर्म की सबसे बड़ी गाथा, महाभारत(Mahabharat) उन कहानियों से भरी है जिनके पास एक व्यक्ति का जीवन उजागर करने की क्षमता है। अपने आंतरिक अर्थ से और प्रथाओं में इसके मूल्य से, महाभारत ने समाज के बीच अपनी संस्कृति विकसित की है। हालांकि, महाभारत में...

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