Narsingh  Rajput 🚩
Narsingh Rajput 🚩 Mar 26, 2020

🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏 जय माता दी 🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹👣👋❤️🚩

+396 प्रतिक्रिया 106 कॉमेंट्स • 113 शेयर

कामेंट्स

अंजू जोशी Mar 26, 2020
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🙏जय माता दी 🙏 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 शुभ संध्या का सादर नमन मेरे भाई जी 🌹🌹🙏 माता रानी आपका सदा कल्याण करे।

Sumitra Soni Mar 26, 2020
जय माता दी🌹🙏🏻 भाई माता रानी आपकी आपके परिवार की रक्षा करें आपको aapke priwar koस्वस्थ रखे खुश रखें आपका आने वाला हर पल शुभ और मंगलमय हो भाई🙏🏻🌹

Vijay Pandey Mar 26, 2020
🙏🌷🌷 जय माता दी ‌🌷🌷🙏 शुभ संध्या की शुभ मंगल कामनाएं भाई , मां भगवती जी की कृपा दृष्टि आप और आपके परिवार पर सदैव बना रहे, आप और आपका परिवार सदा स्वस्थ एवं सुखी रहे भाई ‌🌷🙌🌷🙌🌷🙌🌷🙌🌷🙌🌷🙌

राजेश अग्रवाल Mar 26, 2020
*बड़े दौर गुजरे हैं जिंदगी के 🚦* *यह दौर भी गुजर जायेगा..!!* *थाम लो अपने पांव को घरों में 👣* *कोरोना भी थम जाएगा..!!* *माँ से प्रार्थना है हमारी🙏🙏 माँ की मेहर हम सभी पर बनी रहे मातारानी सभी का कल्याण करो, 🙏🌹जय माता दी🌹🙏

Vanita Kale Mar 26, 2020
🙏🌺👣🌺जय माता दी माता रानी की कृपा दृष्टि आप और आपके पुरे परिवार पर सदा ही बनी रहे मेरे आदरणीय भाईजी आप का आने वाला पल ढेर सारी खुशियाे लेकर आए भाईजी 🙏

Brajesh Sharma Mar 26, 2020
जय माता दी... जय माता दी🙏 जय जय श्री राधे कृष्णा जी....🙏

Narsingh Rajput 🚩 Mar 26, 2020
@sumitrasoni2 जय माता दी शुभ प्रभात जी आपका दिन शुभ हो बहना जी माता रानी जी आप की हर मनोकामना पूरी करें जी 🌹🙏🚩

Narsingh Rajput 🚩 Mar 26, 2020
@vijaypandey51 जय माता दी शुभ प्रभात जी आपका दिन शुभ हो भाई जी माता रानी जी आप की हर मनोकामना पूरी करें जी 🌹🙏🚩

Narsingh Rajput 🚩 Mar 26, 2020
@हरेकृष्णा जय माता दी शुभ संध्या जी आपका दिन शुभ हो भाई जी माता रानी जी आप की हर मनोकामना पूरी करें भाई जी हां भाई जी सावधानी बहुत जरूरी है 🙏🌹🚩

Narsingh Rajput 🚩 Mar 26, 2020
@vanitakale जय माता दी शुभ संध्या वंदन जी सादर नमस्कार जी माता रानी जी आप की हर मनोकामना पूरी करें बहना जी 🙏🌹🚩

Narsingh Rajput 🚩 Mar 26, 2020
@brajeshsharma1 जय माता दी शुभ प्रभात जी आपका दिन शुभ हो भाई जी माता रानी जी आप की हर मनोकामना पूरी करें भाई जी 🙏🌹🚩

🌼कृष्णा🌼 Mar 26, 2020
🌷🏵️जय प्रभु श्री राम की जय श्री हरि जय श्रीमाता ब्रम्हचारिणी की भाई जी,सादर नमस्कार करता हूँ, श्रीहरि और श्रीमाता आपको सदा सुखी रखें स्वस्थ रखें प्रसन्न रखें भाई जी,आपका हर पल शुभ और मंगलमय हो, नूतन वर्ष और नवरात्रि पर्व की मंगल शुभकामनाएं जी,शुभसंध्या वन्दन जी🌹🙏

अंजू जोशी Mar 26, 2020
@narsinghsingh3 मै बहना हूँ मेरे भाई जी 💐💐💐💐💐💐💐 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🙏जय माता दी 🙏 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 शुभ रात्रि का सादर नमन मेरे भाई जी 🌹🌹🙏 माता रानी आपका सदा कल्याण करे।

कुसुम।सेन Mar 26, 2020
⛳🙏🕉️🙏🥀🌹राम राम भाई जी शुभ रात्रि वंदन भाई जी जयमातादी जयमातादी आपका हर दिन हरपल शुभ मंगलमय होशुभकामनाएं भाई जी🌹🕉️🌹⛳⛳⛳

Poonam Aggarwal Mar 26, 2020
🚩 जय मां ब्रह्मचारिणी जय माता दी 🚩🙏✡️ माता रानी सदैव आपकी रक्षा एवं मंगल करे आप का हर पल शुभ मंगलमय हो शुभ रात्रि नमन भाई जी राधे कृष्णा जी ‼️👏🌹🌹👣👣👣👣👣👌👌

Narsingh Rajput 🚩 Mar 27, 2020
@कुसुम2 जय माता दी शुभ प्रभात जी आपका दिन शुभ हो बहना जी माता रानी जी आप की हर मनोकामना पूरी करें जी 🙏🌹🚩

Narsingh Rajput 🚩 Mar 27, 2020
@poonamaggarwal जय माता दी शुभ प्रभात जी आपका दिन शुभ हो बहना जी माता रानी जी आप की हर मनोकामना पूरी करें जी 🙏🌹🚩

Neetu koshik Mar 26, 2020

+219 प्रतिक्रिया 39 कॉमेंट्स • 67 शेयर

+38 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 67 शेयर
Neetu koshik Mar 25, 2020

+83 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 10 शेयर

🙏🏽🌷माँ दुर्गा का द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी हैं।🙏🏽🌷 नवरात्र पर्व के द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी हैं। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती हैं। जो दोनो कर-कमलो मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करती हैं। वे सर्वश्रेष्ठ माँ भगवती ब्रह्मचारिणी मुझसे पर अति प्रसन्न हों। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती हैं एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती हैं। देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला हैं। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती हैं, तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता हैं। देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय हैं। मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से द्वितीय शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी का हैं। ब्रह्म का अर्थ हैं तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी। यह देवी शांत और निमग्न होकर तप में लीन हैं। मुख पर कठोर तपस्या के कारण अद्भुत तेज और कांति का ऐसा अनूठा संगम हैं जो तीनों लोको को उजागर कर रहा हैं। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला हैं और बायें हाथ में कमण्डल होता हैं। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप हैं। इस देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में स्थित होता हैं। इस चक्र में अवस्थित साधक मां ब्रह्मचारिणी जी की कृपा और भक्ति को प्राप्त करता हैं। माँ ब्रहम चारिणी की पूजा में आप मटमैले रंग के वस्त्रों का प्रयोग कर सकते हैं यह दिन “राहु शांति पूजा के लिए” सर्वोत्तम दिन हैं। द्वितीय नवरात्र के दिन माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाएँ।इससे आयु वृद्धि होती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा : - सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया हैं उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारीभेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें। इनकी पूजा के पश्चात मॉ ब्रह्मचारिणी की पूज माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र!!!!!! या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम हैं। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। माँ ब्रह्मचारिणी श्लोक!!!!! दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। माँ ब्रह्मचारिणी ध्यान,,,, वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ ब्रह्मचारिणी स्तोत्र पाठ,,,, तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥ मां ब्रह्मचारिणी कवच,,,,,,, त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी। अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥ पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥ षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो। अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी। नवरात्री में दुर्गा सप्तशती पाठ किया जाता हैं माँ ब्रह्मचारिणी कथा!!!!!!! माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता हैं। देवी का दूसरा स्वरूप योग साधक को साधना के केन्द्र के उस सूक्ष्मतम अंश से साक्षात्कार करा देता हैं जिसके पश्चात व्यक्ति की ऐन्द्रियां अपने नियंत्रण में रहती हैं और साधक मोक्ष का भागी बनता हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा की पंचोपचार सहित पूजा करके जो साधक स्वाधिष्ठान चक्र में मन को स्थापित करता हैं उसकी साधना सफल हो जाती हैं और व्यक्ति की कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाती हैं। जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती हैं और प्रसन्न रहता हैं, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता हैं। माँ दुर्गा की आरती!!!!! जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ ॐ जय अंबे गौरी,,,

+112 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 140 शेयर

नवरात्रि द्वितीय दिवस माँ दुर्गा के दूसरे स्वरूप श्री ब्रह्मचारिणी जी की उपासना विधि एवं फल 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ माँ दुर्गा का द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। जो दोनो कर-कमलो मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करती है। वे सर्वश्रेष्ठ माँ भगवती ब्रह्मचारिणी मुझसे पर अति प्रसन्न हों। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती है एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती है। देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है. देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है. माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है, तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता है। देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय है। मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से द्वितीय शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी का है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी. यह देवी शांत और निमग्न होकर तप में लीन हैं. मुख पर कठोर तपस्या के कारण अद्भुत तेज और कांति का ऐसा अनूठा संगम है जो तीनों लोको को उजागर कर रहा है। देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला है और बायें हाथ में कमण्डल होता है. देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप हैं. इस देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में स्थित होता है। इस चक्र में अवस्थित साधक मां ब्रह्मचारिणी जी की कृपा और भक्ति को प्राप्त करता है। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया है उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारीभेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें। इनकी पूजा के पश्चात मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें “दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा” इसके पश्चात् देवी को पंचामृत स्नान करायें और फिर भांति भांति से फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें देवी को अरूहूल का फूल (लाल रंग का एकविशेष फूल) व कमल काफी पसंद है उनकी माला पहनायें. प्रसाद और आचमन के पश्चात् पान सुपारी भेंट कर प्रदक्षिणा करें और घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें. अंत में क्षमा प्रार्थना करें “आवाहनं न जानामि न जानामि वसर्जनं। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरी।। माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। माँ ब्रह्मचारिणी ध्यान 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ ब्रह्मचारिणी स्तोत्र पाठ 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥ मां ब्रह्मचारिणी कवच 〰️〰️🌼🌼🌼〰️〰️ त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी। अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥ पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥ षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो। अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी। नवरात्री में दुर्गा सप्तशती पाठ किया जाता हैं माँ ब्रह्मचारिणी कथा 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।  कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।  कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा -हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं।  जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता है. देवी का दूसरा स्वरूप योग साधक को साधना के केन्द्र के उस सूक्ष्मतम अंश से साक्षात्कार करा देता है जिसके पश्चात व्यक्ति की ऐन्द्रियां अपने नियंत्रण में रहती है और साधक मोक्ष का भागी बनता है। माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा की पंचोपचार सहित पूजा करके जो साधक स्वाधिष्ठान चक्र में मन को स्थापित करता है उसकी साधना सफल हो जाती है और व्यक्ति की कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाती है। जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है। शिक्षा में सफलता हेतु उपाय 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ यदि विद्यार्थी को शिक्षा में परेशानी आ रही हो, स्मरण शक्ति कमजोर हो, पाठ याद नहीं होते हो तो यह उपाय करके देंखे। गुरुवार के दिन 5 पीले पेड़े अपने ऊपर से 7 बार उसार कर और 7 बार ॐ ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं। मंत्र का जाप करके गाय को खिला दें। अपने अध्ययन कक्ष में पीले कपड़े में 9 हल्दी की गांठ ॐ ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं। मंत्र का जाप करते हुए बांध कर पोटली बना दें और अपने कक्ष में रख दें। शिक्षा में सफलता मिलेगी। आरती माँ ब्रह्माचारिणी जी की  〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।  जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।  ब्रह्मा जी के मन भाती हो।  ज्ञान सभी को सिखलाती हो।  ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।  जिसको जपे सकल संसारा।  जय गायत्री वेद की माता।  जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।  कमी कोई रहने न पाए।  कोई भी दुख सहने न पाए।  उसकी विरति रहे ठिकाने।  जो ​तेरी महिमा को जाने।  रुद्राक्ष की माला ले कर।  जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।  आलस छोड़ करे गुणगाना।  मां तुम उसको सुख पहुंचाना।  ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।  पूर्ण करो सब मेरे काम।  भक्त तेरे चरणों का पुजारी।  रखना लाज मेरी महतारी।  माँ दुर्गा की आरती 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय… मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय… कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय… केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय… कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय… शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय… चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय… ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय… चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय… तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय… भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । >मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय… कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय… श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय… 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

+23 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 29 शेयर
Sanjana Rawal Mar 25, 2020

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB