zala. Hanubha
zala. Hanubha Jan 21, 2020

Jay shree ganesh ji

Jay shree ganesh ji

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Rk Soni(Ganesh Mandir) Jan 23, 2020
शुभ गुरुवार जी🌹🌹 🙏🏻जय गणेश देवा जी 🙏🏼जय नारायण हरि आप व आपके परिवार की सभी मनोकामना पूर्ण करे व स्वस्थ २खे जी🌹🌹🌹🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Renu Singh Jan 23, 2020
🙏🌹Om Namo Bhagwate Vasdevay Namah 🙏 Shubh Dophar Vandan Bhai ji 🙏🌹 Shree Hari ji Ka Aashirwad Aap aur Aàpke Pariwar pr Sadaiv Bna rhe 🙏 Aàpka Din Shubh V Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏

Queen Jan 23, 2020
🌷🌼Radhe Radhe Jai Shree krishna Good Afternoon Bhai Ji 🌼🌷

सुधा Jan 23, 2020
राधे राधे जी 🌹🙏🌹 शुभदोपहर वन्दन जी 🙏🌹🙏

simran Feb 18, 2020

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SHANTI PATHAK Feb 18, 2020

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Sweta Saxena Feb 18, 2020

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Amit Kumar Feb 18, 2020

प्रसंगवश - ( कतिपय अतिउत्साही जिज्ञासुओं (?) की अधीरता और अवज्ञापूर्ण व्यवहार अथवा प्रश्न के रूप में उनके दिखावे से असंतुष्ट होकर यह पोस्ट लिख रहे हैं) पूज्यपाद गुरुदेव की व्यस्तता और अपने स्वभाव को देखते हुये हमने उनसे निवेदन किया कि कोई #एक #उपनिषद आपके श्रीमुखसे सुनना चाहता हूँ। उससे पहले हम सभी 11 मुख्य उपनिषदों सहित #सभी 108 उपनिषद पुस्तक से पढ़ चुके थे। गुरुदेव ने कहा - ठीक है , #चातुर्मास्य में हो जायेगा। चातुर्मास्य आने में अभी सात मास शेष थे। चातुर्मास्य हरिद्वार में हुआ और गुरुदेव ने सबको #बृहदारण्यक उपनिषद पढा़ना आरम्भ किया। चातुर्मास्य बीत गया , बृहदारण्यकका लगभग छठवां भाग पूरा हो पाया। इस विधिसे कम से कम #छः #वर्ष लगते एक उपनिषद पूर्ण होने में। फिर गुरुजीका अगला चातुर्मास्य द्वारका में हुआ और हमको मेरठ में चातुर्मास्य करने का आदेश हो गया क्योंकि उस समय की ऐसी परिस्थितियां थीं कि गुरुसेवा हेतु हमारा दिल्ली और जोशीमठ के बीच में रहना अपेक्षित था। बृहदारण्यक का क्रम टूट गया। फिर हमको लगा कि उसके पूरा होने में संदेह है अतः अगले चातुर्मास्य की प्रतीक्षा किये विना कोई #छोटा उपनिषद गुरुजीसे पढ़ लेना चाहिये। जिससे कम से कम एक उपनिषद तो पूरा हो जाय ! फिर बहुत प्रयास करके और वरिष्ठ गुरुभाइयों के असंतोष का सामना करते हुये भी किसी प्रकार हमने अवसर ढूंढकर गुरुदेव से निवेदन किया कि मैं आपसे #माण्डूक्य उपनिषद पढ़ना चाहता हूँ। हमने सोचा, माण्डूक्य सबसे छोटा उपनिषद है, अतः इसको संपूर्ण पढ़ना अधिक संभव होगा। ध्यातव्य है कि माण्डूक्य में कुल मात्र 12 मन्त्र हैं और मूल रूपमें यह मात्र एक पृष्ठका है। उस पर आचार्य गौड़पाद की कारिका (व्याख्या) भी है। गुरुदेवका साथ में रहने का आदेश हो गया। उसके एक मास बाद उन्होने पढा़ना आरम्भ किया और लगभग एक घंटे प्रतिदिन पढा़ते हुये 6 मास में पूर्ण किया। उसमें भी अनेकानेक आसुरी व्यवधान आये। अनेक लोगोंने यह भी प्रयास किया कि गुरुजी के भ्रमण और प्रस्थान समय की हमको जानकारी ही न हो पाये और उनसे हमारा साथ छूट जाय। जब मूल का भाष्य पूर्ण हुआ तो हमने संतोष की सांस लिया और सोचा कि अब कारिका न भी पूरी हो तो कोई बात नहीं। मूल पूरा होने पर हमने गुरुजी से अपना यह भाव प्रकट भी किया। उन्होने पूछा- ऐसा क्यों कह रहे हो ? हमने कोई शाब्दिक उत्तर न देना ठीक समझा। केवल इतना कहा कि क्या-क्या बताये! इस प्रकार गुरुमुखसे सबसे छोटा उपनिषद पढ़ने में हमको #चार #वर्ष लगे। यहां लोग चाहते हैं कि चार मिनट में मुफ्त की #घुट्टी पिला दें। लौकिक शिक्षा में भी हमने #तीन-तीन #विश्वविद्यालयों में देखा और सामना किया है कि कितनी बाधायें आती हैं और एक-एक वाक्य जानने के लिये #धैर्य तथा #निष्ठा की कितनी परीक्षा होती है। किसीने कहा है- "यह ईश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजे, इक आग का दरिया है और तैर के जाना है।" यह तो साधारण इश्क की बात है । फिर ज्ञान और परमात्मप्राप्ति का ईश्क कितना कठिन होगा, अनुमान करना संभव नहीं। मुफ्त के ज्ञान का तो अपार भण्डार इन्टरनेट पर उपलब्ध ही है। किन्तु उससे कल्याण की लेशमात्र भी अपेक्षा नहीं की जानी चाहिये।

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Shivani Feb 18, 2020

🌹🙏जय श्री राम 🙏🌹सुप्रभात आपका दिन मंगलमय हो 👉ॐ का रहस्य क्या है? 💥💥💥💥🚩🚩✍️ मन पर नियन्त्रण करके शब्दों का उच्चारण करने की क्रिया को मन्त्र कहते है। मन्त्र विज्ञान का सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे मन व तन पर पड़ता है। मन्त्र का जाप एक मानसिक क्रिया है। कहा जाता है कि जैसा रहेगा मन वैसा रहेगा तन। यानि यदि हम मानसिक रूप से स्वस्थ्य है तो हमारा शरीर भी स्वस्थ्य रहेगा। मन को स्वस्थ्य रखने के लिए मन्त्र का जाप करना आवश्यक है। ओम् तीन अक्षरों से बना है। अ, उ और म से निर्मित यह शब्द सर्व शक्तिमान है। जीवन जीने की शक्ति और संसार की चुनौतियों का सामना करने का अदम्य साहस देने वाले ओम् के उच्चारण करने मात्र से विभिन्न प्रकार की समस्याओं व व्याधियों का नाश होता है। सृष्टि के आरंभ में एक ध्वनि गूंजी ओम और पूरे ब्रह्माण्ड में इसकी गूंज फैल गयी। पुराणों में ऐसी कथा मिलती है कि इसी शब्द से भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा प्रकट हुए। इसलिए ओम को सभी मंत्रों का बीज मंत्र और ध्वनियों एवं शब्दों की जननी कहा जाता है। इस मंत्र के विषय में कहा जाता है कि, ओम शब्द के नियमित उच्चारण मात्र से शरीर में मौजूद आत्मा जागृत हो जाती है और रोग एवं तनाव से मुक्ति मिलती है। इसलिए धर्म गुरू ओम का जप करने की सलाह देते हैं। जबकि वास्तुविदों का मानना है कि ओम के प्रयोग से घर में मौजूद वास्तु दोषों को भी दूर किया जा सकता है। ओम मंत्र को ब्रह्माण्ड का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि ओम में त्रिदेवों का वास होता है इसलिए सभी मंत्रों से पहले इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है जैसे ओम नमो भगवते वासुदेव, ओम नमः शिवाय। आध्यात्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि नियमित ओम मंत्र का जप किया जाए तो व्यक्ति का तन मन शुद्घ रहता है और मानसिक शांति मिलती है। ओम मंत्र के जप से मनुष्य ईश्वर के करीब पहुंचता है और मुक्ति पाने का अधिकारी बन जाता है। : वैदिक साहित्य इस बात पर एकमत है कि ओ३म् ईश्वर का मुख्य नाम है. योग दर्शन में यह स्पष्ट है. यह ओ३म् शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है- अ, उ, म. प्रत्येक अक्षर ईश्वर के अलग अलग नामों को अपने में समेटे हुए है. जैसे “अ” से व्यापक, सर्वदेशीय, और उपासना करने योग्य है. “उ” से बुद्धिमान, सूक्ष्म, सब अच्छाइयों का मूल, और नियम करने वाला है। “म” से अनंत, अमर, ज्ञानवान, और पालन करने वाला है. ये तो बहुत थोड़े से उदाहरण हैं जो ओ३म् के प्रत्येक अक्षर से समझे जा सकते हैं. वास्तव में अनंत ईश्वर के अनगिनत नाम केवल इस ओ३म् शब्द में ही आ सकते हैं, और किसी में नहीं. १. अनेक बार ओ३म् का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनावरहित हो जाता है। २. अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ओ३म् के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं! ३. यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है। ४. यह हृदय और खून के प्रवाह को संतुलित रखता है। ५. इससे पाचन शक्ति तेज होती है। ६. इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है। ७. थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं। ८. नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है. रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चित नींद आएगी। ९ कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मजबूती आती है. इत्यादि! ॐ के उच्चारण का रहस्य? ॐ है एक मात्र मंत्र, यही है आत्मा का संगीत ओम का यह चिन्ह 'ॐ' अद्भुत है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है। बहुत-सी आकाश गंगाएँ इसी तरह फैली हुई है। ब्रह्म का अर्थ होता है विस्तार, फैलाव और फैलना। ओंकार ध्वनि के 100 से भी अधिक अर्थ दिए गए हैं। यह अनादि और अनंत तथा निर्वाण की अवस्था का प्रतीक है। ॐ को ओम कहा जाता है। उसमें भी बोलते वक्त 'ओ' पर ज्यादा जोर होता है। इसे प्रणव मंत्र भी कहते हैं। यही है √ मंत्र बाकी सभी × है। इस मंत्र का प्रारंभ है अंत नहीं। यह ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है। अनाहत अर्थात किसी भी प्रकार की टकराहट या दो चीजों या हाथों के संयोग के उत्पन्न ध्वनि नहीं। इसे अनहद भी कहते हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड में यह अनवरत जारी है। तपस्वी और ध्यानियों ने जब ध्यान की गहरी अवस्था में सुना की कोई एक ऐसी ध्वनि है जो लगातार सुनाई देती रहती है शरीर के भीतर भी और बाहर भी। हर कहीं, वही ध्वनि निरंतर जारी है और उसे सुनते रहने से मन और आत्मा शांती महसूस करती है तो उन्होंने उस ध्वनि को नाम दिया ओम। साधारण मनुष्य उस ध्वनि को सुन नहीं सकता, लेकिन जो भी ओम का उच्चारण करता रहता है उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है। फिर भी उस ध्वनि को सुनने के लिए तो पूर्णत: मौन और ध्यान में होना जरूरी है। जो भी उस ध्वनि को सुनने लगता है वह परमात्मा से सीधा जुड़ने लगता है। परमात्मा से जुड़ने का साधारण तरीका है ॐ का उच्चारण करते रहना। *त्रिदेव और त्रेलोक्य का प्रतीक : ॐ शब्द तीन ध्वनियों से बना हुआ है- अ, उ, म इन तीनों ध्वनियों का अर्थ उपनिषद में भी आता है। यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक भी है और यह भू: लोक, भूव: लोक और स्वर्ग लोग का प्रतीक है। *बीमारी दूर भगाएँ : तंत्र योग में एकाक्षर मंत्रों का भी विशेष महत्व है। देवनागरी लिपि के प्रत्येक शब्द में अनुस्वार लगाकर उन्हें मंत्र का स्वरूप दिया गया है। उदाहरण के तौर पर कं, खं, गं, घं आदि। इसी तरह श्रीं, क्लीं, ह्रीं, हूं, फट् आदि भी एकाक्षरी मंत्रों में गिने जाते हैं। सभी मंत्रों का उच्चारण जीभ, होंठ, तालू, दाँत, कंठ और फेफड़ों से निकलने वाली वायु के सम्मिलित प्रभाव से संभव होता है। इससे निकलने वाली ध्वनि शरीर के सभी चक्रों और हारमोन स्राव करने वाली ग्रंथियों से टकराती है। इन ग्रंथिंयों के स्राव को नियंत्रित करके बीमारियों को दूर भगाया जा सकता है। *उच्चारण की विधि : प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं। *इसके लाभ : इससे शरीर और मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी। दिल की धड़कन और रक्तसंचार व्यवस्थित होगा। इससे मानसिक बीमारियाँ दूर होती हैं। काम करने की शक्ति बढ़ जाती है। इसका उच्चारण करने वाला और इसे सुनने वाला दोनों ही लाभांवित होते हैं। इसके उच्चारण में पवित्रता का ध्यान रखा जाता है। *शरीर में आवेगों का उतार-चढ़ाव : प्रिय या अप्रिय शब्दों की ध्वनि से श्रोता और वक्ता दोनों हर्ष, विषाद, क्रोध, घृणा, भय तथा कामेच्छा के आवेगों को महसूस करते हैं। अप्रिय शब्दों से निकलने वाली ध्वनि से मस्तिष्क में उत्पन्न काम, क्रोध, मोह, भय लोभ आदि की भावना से दिल की धड़कन तेज हो जाती है जिससे रक्त में 'टॉक्सिक'पदार्थ पैदा होने लगते हैं। इसी तरह प्रिय और मंगलमय शब्दों की ध्वनि मस्तिष्क, हृदय और रक्त पर अमृत की तरहआल्हादकारी रसायन की वर्षा करती है। कम से कम 108 बार ओम् का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव रहित हो जाता है। कुछ ही दिनों पश्चात शरीर में एक नई उर्जा का संचरण होने लगता है। । ओम् का उच्चारण करने से प्रकृति के साथ बेहतर तालमेल और नियन्त्रण स्थापित होता है। जिसके कारण हमें प्राकृतिक उर्जा मिलती रहती है। ओम् का उच्चारण करने से परिस्थितियों का पूर्वानुमान होने लगता है। ओम् का उच्चारण करने से आपके व्यवहार में शालीनता आयेगी जिससे आपके शत्रु भी मित्र बन जाते है। ओम् का उच्चारण करने से आपके मन में निराशा के भाव उत्पन्न नहीं होते है। आत्म हत्या जैसे विचार भी मन में नहीं आते है। जो बच्चे पढ़ाई में मन नहीं लगाते है या फिर उनकी स्मरण शक्ति कमजोर है। उन्हें यदि नियमित ओम् का उच्चारण कराया जाये तो उनकी स्मरण शक्ति भी अच्छी हो जायेगी और पढ़ाई में मन भी लगने लगेगा 🌹🙏🌹जय श्री राम🌹🙏🌹

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