Ravi joshi Ravi joshi
Ravi joshi Ravi joshi Jan 13, 2021

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🚩 *।।श्री गणेशाय नम:।।🚩* *🍊 -:दैनिक पंचांग:- 🍊* *🍊 24 - 01 - 2021* *🍊 श्रीमाधोपुर-पंचांग* *🍊 तिथि पुत्रदा-एकादशी 22:59:32* *🍊 नक्षत्र रोहिणी 24:01:02* *🍊 करण :* वणिज 10:02:34 विष्टि 22:59:32 *🍊 पक्ष शुक्ल* *🍊 योग ब्रह्म 22:27:50* *🍊 वार रविवार* *🥗 सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ* *🥗 सूर्योदय 07:17:35* *🥗 चन्द्रोदय 14:09:00* *🥗 चन्द्र राशि वृषभ* *🥗 सूर्यास्त 18:02:02* *🥗 चन्द्रास्त 28:15:00* *🥗 ऋतु शिशिर* *🍯 हिन्दू मास एवं वर्ष* *🍯 शक सम्वत 1942 शार्वरी* *🍯 कलि सम्वत 5122* *🍯 दिन काल 10:44:27* *🍯 विक्रम सम्वत 2077* *🍯 मास अमांत पौष* *🍯 मास पूर्णिमांत पौष* *🌀 शुभ और अशुभ समय* *🌀 शुभ समय* *🌀 अभिजित 12:18:20 - 13:01:17* *🛢️ अशुभ समय* *🛢️ दुष्टमुहूर्त 16:36:07 - 17:19:05* *🛢️ कंटक 10:52:24 - 11:35:22* *🛢️ यमघण्ट 13:44:15 - 14:27:13* *🛢️ राहु काल 16:41:29 - 18:02:02* *🛢️ कुलिक 16:36:07 - 17:19:05* *🛢️ कालवेला या अर्द्धयाम 12:18:20 - 13:01:17* *🛢️ यमगण्ड 12:39:48 - 14:00:22* *🛢️ गुलिक काल 15:20:55 - 16:41:29* *🧭 दिशा शूल* *🧭 दिशा शूल पश्चिम* *🛢️ चोघडिया-मुहूर्त 🛢️* *🛢️उद्वेग 07:17:35 - 08:38:08* *🛢️चल 08:38:08 - 09:58:42* *🛢️लाभ 09:58:42 - 11:19:15* *🛢️अमृत 11:19:15 - 12:39:48* *🛢️काल 12:39:48 - 14:00:22* *🛢️शुभ 14:00:22 - 15:20:55* *🛢️रोग 15:20:55 - 16:41:29* *🛢️उद्वेग 16:41:29 - 18:02:02* *🛢️शुभ 18:02:02 - 19:41:26* *🛢️अमृत 19:41:26 - 21:20:50* *🛢️चल 21:20:50 - 23:00:14* *🛢️रोग 23:00:14 - 24:39:38* *🛢️काल 24:39:38 - 26:19:02* *🛢️लाभ 26:19:02 - 27:58:26* *🛢️उद्वेग 27:58:26 - 29:37:50* *🛢️शुभ 29:37:50 - 31:17:14* *🛢️💝 लग्न-तालिका 💝🛢️* *सूर्योदय का समय: 07:17:35* *सूर्योदय के समय लग्न मकर चर* 279°18′09″ *💝 मकर चर* शुरू: 06:43 AM समाप्त: 08:27 AM *💝 कुम्भ स्थिर* शुरू: 08:27 AM समाप्त: 09:55 AM *💝 मीन द्विस्वाभाव* शुरू: 09:55 AM समाप्त: 11:22 AM *💝 मेष चर* शुरू: 11:22 AM समाप्त: 12:58 PM *💝 वृषभ स्थिर* शुरू: 12:58 PM समाप्त: 02:55 PM *💝 मिथुन द्विस्वाभाव* शुरू: 02:55 PM समाप्त: 05:09 PM *💝 कर्क चर* शुरू: 05:09 PM समाप्त: 07:29 PM *💝 सिंह स्थिर* शुरू: 07:29 PM समाप्त: 09:46 PM *💝 कन्या द्विस्वाभाव* शुरू: 09:46 PM समाप्त: अगले दिन 00:01 AM *💝 तुला चर* शुरू: अगले दिन 00:01 AM समाप्त: अगले दिन 02:20 AM *💝 वृश्चिक स्थिर* शुरू: अगले दिन 02:20 AM समाप्त: अगले दिन 04:38 AM *💝 धनु द्विस्वाभाव* शुरू: अगले दिन 04:38 AM समाप्त: अगले दिन 06:43 AM 2️⃣4️⃣💝0️⃣1️⃣💝2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣ *🛑🌾🙏जय श्रीकृष्णा🙏🌾🛑* *ज्योतिषशास्त्री-सुरेन्द्र कुमार चेजारा व्याख्याता राउमावि होल्याकाबास निवास-श्रीमाधोपुर* 🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈

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M.S.Chauhan Jan 23, 2021

*शुभ दिन शनिवार* *भारत माता की जय* *जय हिंद,जय भारत,वन्देमातरम* *आपको सुभाष चंद्र बोस जयन्ती और पराक्रम दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें* *नेताजी सुभाषचन्द्र बोस पर* *गोपालप्रसाद व्यास जी की रचना* है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं। है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं ।। अक्सर दुनियाँ के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं ।। यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है। जो रक्त कणों से लिखी गई, जिसकी जयहिन्द निशानी है।। प्यारा सुभाष, नेता सुभाष, भारत भू का उजियारा था । पैदा होते ही गणिकों ने जिसका भविष्य लिख डाला था।। यह वीर चक्रवर्ती होगा , या त्यागी होगा सन्यासी। जिसके गौरव को याद रखेंगे, युग-युग तक भारतवासी।। सो वही वीर नौकरशाही ने, पकड़ जेल में डाला था । पर क्रुद्ध केहरी कभी नहीं फंदे में टिकने वाला था।। बाँधे जाते इंसान, कभी तूफ़ान न बाँधे जाते हैं। काया ज़रूर बाँधी जाती, बाँधे न इरादे जाते हैं।। वह दृढ़-प्रतिज्ञ सेनानी था, जो मौका पाकर निकल गया। वह पारा था अंग्रेज़ों की मुट्ठी में आकर फिसल गया।। जिस तरह धूर्त दुर्योधन से, बचकर यदुनन्दन आए थे। जिस तरह शिवाजी ने मुग़लों के, पहरेदार छकाए थे ।। बस उसी तरह यह तोड़ पींजरा , तोते-सा बेदाग़ गया। जनवरी माह सन् इकतालिस, मच गया शोर वह भाग गया।। वे कहाँ गए, वे कहाँ रहे, ये धूमिल अभी कहानी है। हमने तो उसकी नयी कथा, आज़ाद फ़ौज से जानी है।। 🌷🌷🌼🙏🌼🌷🌷

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M.S.Chauhan Jan 23, 2021

शुभ दिन रविवार जय श्री लक्ष्मीनारायण आप सभी को पुत्रदा एकदशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें! श्री लक्ष्मीनारायण जी की कृपा से आप सपरिवार स्वस्थ और सुखी जीवन यापन करें! महाराज युधिष्ठिर ने पूछा- हे भगवान! आपने सफला एकादशी का माहात्म्य बताकर बड़ी कृपा की। अब कृपा करके यह बतलाइए कि पौष शुक्ल एकादशी का क्या नाम है उसकी विधि क्या है और उसमें कौन-से देवता का पूजन किया जाता है। भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण बोले- हे राजन! इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इसमें भी नारायण भगवान की पूजा की जाती है। इस चर और अचर संसार में पुत्रदा एकादशी के व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है। इसके पुण्य से मनुष्य तपस्वी, विद्वान और लक्ष्मीवान होता है। इसकी मैं एक कथा कहता हूँ सो तुम ध्यानपूर्वक सुनो। भद्रावती नामक नगरी में सुकेतुमान नाम का एक राजा राज्य करता था। उसके कोई पुत्र नहीं था। उसकी स्त्री का नाम शैव्या था। वह निपुत्री होने के कारण सदैव चिंतित रहा करती थी। राजा के पितर भी रो-रोकर पिंड लिया करते थे और सोचा करते थे कि इसके बाद हमको कौन पिंड देगा। राजा को भाई, बाँधव, धन, हाथी, घोड़े, राज्य और मंत्री इन सबमें से किसी से भी संतोष नहीं होता था। वह सदैव यही विचार करता था कि मेरे मरने के बाद मुझको कौन पिंडदान करेगा। बिना पुत्र के पितरों और देवताओं का ऋण मैं कैसे चुका सकूँगा। जिस घर में पुत्र न हो उस घर में सदैव अँधेरा ही रहता है। इसलिए पुत्र उत्पत्ति के लिए प्रयत्न करना चाहिए। जिस मनुष्य ने पुत्र का मुख देखा है, वह धन्य है। उसको इस लोक में यश और परलोक में शांति मिलती है अर्थात उनके दोनों लोक सुधर जाते हैं। पूर्व जन्म के कर्म से ही इस जन्म में पुत्र, धन आदि प्राप्त होते हैं। राजा इसी प्रकार रात-दिन चिंता में लगा रहता था। एक समय तो राजा ने अपने शरीर को त्याग देने का निश्चय किया परंतु आत्मघात को महान पाप समझकर उसने ऐसा नहीं किया। एक दिन राजा ऐसा ही विचार करता हुआ अपने घोड़े पर चढ़कर वन को चल दिया तथा पक्षियों और वृक्षों को देखने लगा। उसने देखा कि वन में मृग, व्याघ्र, सूअर, सिंह, बंदर, सर्प आदि सब भ्रमण कर रहे हैं। हाथी अपने बच्चों और हथिनियों के बीच घूम रहा है। इस वन में कहीं तो गीदड़ अपने कर्कश स्वर में बोल रहे हैं, कहीं उल्लू ध्वनि कर रहे हैं। वन के दृश्यों को देखकर राजा सोच-विचार में लग गया। इसी प्रकार आधा दिन बीत गया। वह सोचने लगा कि मैंने कई यज्ञ किए, ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन से तृप्त किया फिर भी मुझको दु:ख प्राप्त हुआ, क्यों? राजा प्यास के मारे अत्यंत दु:खी हो गया और पानी की तलाश में इधर-उधर फिरने लगा। थोड़ी दूरी पर राजा ने एक सरोवर देखा। उस सरोवर में कमल खिले थे तथा सारस, हंस, मगरमच्छ आदि विहार कर रहे थे। उस सरोवर के चारों तरफ मुनियों के आश्रम बने हुए थे। उसी समय राजा के दाहिने अंग फड़कने लगे। राजा शुभ शकुन समझकर घोड़े से उतरकर मुनियों को दंडवत प्रणाम करके बैठ गया। राजा को देखकर मुनियों ने कहा- हे राजन! हम तुमसे अत्यंत प्रसन्न हैं। तुम्हारी क्या इच्छा है, सो कहो। राजा ने पूछा- महाराज आप कौन हैं, और किसलिए यहाँ आए हैं। कृपा करके बताइए। मुनि कहने लगे कि हे राजन! आज संतान देने वाली पुत्रदा एकादशी है, हम लोग विश्वदेव हैं और इस सरोवर में स्नान करने के लिए आए हैं। यह सुनकर राजा कहने लगा कि महाराज मेरे भी कोई संतान नहीं है, यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो एक पुत्र का वरदान दीजिए। मुनि बोले- हे राजन! आज पुत्रदा एकादशी है। आप अवश्य ही इसका व्रत करें, भगवान की कृपा से अवश्य ही आपके घर में पुत्र होगा। मुनि के वचनों को सुनकर राजा ने उसी दिन एकादशी का ‍व्रत किया और द्वादशी को उसका पारण किया। इसके पश्चात मुनियों को प्रणाम करके महल में वापस आ गया। कुछ समय बीतने के बाद रानी ने गर्भ धारण किया और नौ महीने के पश्चात उनके एक पुत्र हुआ। वह राजकुमार अत्यंत शूरवीर, यशस्वी और प्रजापालक हुआ। श्रीकृष्ण बोले- हे राजन! पुत्र की प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत करना चाहिए। जो मनुष्य इस माहात्म्य को पढ़ता या सुनता है उसे अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

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Garima Gahlot Rajput Jan 23, 2021

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Garima Gahlot Rajput Jan 23, 2021

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Garima Gahlot Rajput Jan 23, 2021

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