Om namo namah sivay 🌺 मंदिर के दर्शन #🙏 भक्ति #🙏 भक्त नंबर-वन #🕍 भारत के तीर्थस्थल #🌞सुबह की पूजा

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🕉🕉नमः शिवाए🌹🌹🙏 🌹हर हर महादेव🌹🌹 ✍✍✍✍✍✍✍✍ किसी￰ बाजार में एक *चिड़ीमार* तीतर बेच रहा था! उसके पास एक बड़ी सी जाली वाली बक्से में बहुत सारे तीतर थे ..और *एक छोटे से बक्से में सिर्फ एक तीतर* किसी ग्राहक ने उससे पूछा *एक तीतर कितने का है??* तो उसने जवाब दिया, *एक तीतर की कीमत 40 रूपये है!* ग्राहक ने दूसरे बक्से में जो *तन्हा तीतर* था उसकी कीमत पूछी तो तीतर वाले ने जवाब दिया! *अव्वल तो मैं इसे बेचना ही नहीं चाहूंगा, लेकिन अगर आप लेने की जिद करोगे तो इसकी कीमत 500 रूपये होगी.* ग्राहक ने आश्चर्य से पूछा, *इसकी कीमत 500 रुपया क्यों??* इस पर तीतर वाले का जवाब था, *ये मेरा अपना पालतू तीतर है! और दूसरे तीतरो को जाल में फसाने का काम करता है और दूसरे सभी फंसे हुए तीतर है! ये चीख पुकार करके दूसरे तीतरो को बुलाता है और दूसरे तीतर बिना सोचे समझे एक जगह जमा हो जाते है और फिर मैं आसानी से शिकार कर पाता हूँ! इसके बाद फंसाने वाले तीतर को उसके मन पसंद की खुराक दे देता हूँ, जिससे ये खुश हो जाता है बस इस वजह से इसकी कीमत ज्यादा है!* बाजार में एक *समझदार आदमी* ने उस तीतर वाले को 500 रूपये देकर उस तीतर की *सरे बाजार गर्दन मरोड़ दी!* किसी ने पूछा, *आपने ऐसा क्यों किया...* उसका जवाब था, *ऐसे दगाबाज को जिन्दा रहने का कोई हक़ नहीं जो अपने मुनाफे के लिए अपने समाज को फंसाने का काम करे और अपने ही लोगो को धोखा देता है...!* *_समझो और समझाओ !_* ✍🏻

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एक अमीर व्यक्ति ने किसी जगह पर सुना कि संसार में सबसे लाभदायक काम ईश्वर की कृपा प्राप्त करना है। दुनिया की सारी संपदाएं, तमाम सुविधाएं उसके इशारे पर चलती हैं। यदि ईश्वर की कृपा हो जाए तो व्यक्ति पल में रंक से राजा बन जाए । वहीं भगवान की कृपा का एक कण यदि हमारे विरुद्ध हो जाए तो हमारा सब कुछ चौपट हो जाए। यह जानने के बाद उस व्यक्ति के मन में भी ईश्वर की कृपा पाने की आकांक्षा बलवती हो उठी।वह इस हेतु किसी योग्य गुरु की तलाश में निकल पड़ा। एक जगह पर उसे एक संत मिले, जिन्हें अनेक सिद्धियां प्राप्त थीं। उस व्यक्ति ने संत के पास पहुंचकर उन्हें प्रणाम किया और कहा - 'महात्मन्, मुझे कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे मैं भगवान की कृपा प्राप्त कर सकूं, उनके अनुग्रह का भागी बनूं?" यह सुनकर संत मुस्कराए और बोले - 'वत्स, आज मैं बहुत व्यस्त हूं। तुम कल मेरे पास आना। तब मैं तुम्हें कुछ मार्गदर्शन प्रदान कर सकूंगा।" अगले दिन सुबह-सुबह वह व्यक्ति पुन: संत के पास पहुंच गया। संत ने मिट्टी का एक कच्चा घड़ा पहले से मंगवाकर रखा था। उन्होंने उस व्यक्ति को वह कच्चा घड़ा थमाते हुए कहा - 'वत्स, तुम पहले मेरे लिए कुएं से एक घड़ा पानी ले आओ। मैं स्नान कर लूं, ठंडा पानी पी लूं। उसके बाद तुम्हारे प्रश्न का समाधान कर दूंगा।" वह व्यक्ति घड़ा लेकर कुएं पर चला गया। वहां पहुंचकर उसने जैसे ही उस घड़े में पानी डाला, कच्चा होने की वजह से वह वहीं दरक गया और सारा पानी बाहर बह गया। यह देखकर वह व्यक्ति दु:खी हो गया और खाली हाथ वापस संत के पास पहुंचा। संत ने उसे देखकर पूछा - 'क्या हुआ, घड़े में पानी भरकर नहीं लाए?" यह सुनकर वह व्यक्ति बोला - 'मुझे क्षमा करें महात्मन्, लेकिन वह घड़ा तो कच्चा था, जो जरा-सी जलराशि को भी अपने भीतर धारण नहीं कर सका और पानी पड़ते ही दरक गया।" यह सुनकर संत बोले - 'ठीक यही बात ईश्वर की कृपा या अनुग्रह प्राप्त करने के लिए भी लागू होती है। किसी चीज को पाने के लिए हमें पहले उसके लायक बनना पड़ता है। जिस तरह पानी को धारण करने के लिए घड़े का पक्का होना जरूरी है, उसी तरह भगवान की कृपा पाने के लिए हमें चरित्रवान, त्यागी, निष्ठावान और सत्कर्मी बनना होगा, तभी हम उनके अनुग्रह के पात्र बन सकेंगे।" यह सुनकर उस व्यक्ति की शंका का समाधान हो गया। #ऊं नमः शिवाय् 🌿🔱🙏

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simran Dec 9, 2019

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Shanti pathak Dec 9, 2019

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N. K. Mishra Dec 9, 2019

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