Bharat Jhunjhunwala
Bharat Jhunjhunwala May 22, 2018

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम ।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम ।।

 

  हनुमानजी ने मैनाक पर्वत को हाथों से छू दिया, फिर प्रणाम करके कहा – भाई ! श्रीरामचन्द्रजी का काम किये बिना मुझे विश्राम कहाँ?

तो जिस प्रकार श्री राम के कार्य को पूर्ण किये बिना हनुमान जी को विश्राम भाता नहीं, उसी तरह हम साधकों का भी यही दृड़ निश्चय होना चाहिए कि गुरुदेव हमें जिस परम लक्ष्य तक पहुँचना चाहते हैं, हम उसे पाए बिना रुके नहीं और कहीं विश्राम के लिए रुके नहीं ! हनुमान जी के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेते हुए हमें भी इसी तरह नित-निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए !


ॐ हनुमतये नमः
ॐ अंजनी सुताय नमः
ॐ वायुपुत्राय नमः
ॐ महाबलाय नमः
ॐ रामेष्ठाय नमः
ॐ फाल्गुन सखाय नमः
ॐ पिंगाक्षाय नमः
ॐ अमित विक्रमाय नमः
ॐ उदधिक्रमणाय नमः
ॐ सीताशोक विनाशकाय नमः
ॐ लक्ष्मण प्राणदात्रे नमः
ॐ दशग्रीवस्य दर्पाय नमः

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Virtual Temple Mar 27, 2020

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sheela sharma Mar 27, 2020

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Virtual Temple Mar 27, 2020

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Virtual Temple Mar 27, 2020

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dharampal singh Mar 27, 2020

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Girraj Gupta Mar 27, 2020

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