🌹गायत्री उपासना का विधि-विधान।

🌹गायत्री उपासना का विधि-विधान।

🌹गायत्री उपासना का विधि-विधान
🌹 गायत्री उपासना कभी भी, किसी भी स्थिति में की जा सकती है।
🌹 हर स्थिति में यह लाभदायी है, परन्तु विधिपूर्वक भावना से जुड़े न्यूनतम कर्मकाण्डों के साथ की गयी उपासना अति फलदायी मानी गयी है।
🌹 तीन माला गायत्री मंत्र का जप आवश्यक माना गया है।
🌹 स्नान आदि से निवृत्त होकर नियत स्थान, नियत समय पर, सुखासन में बैठकर नित्य गायत्री उपासना की जानी चाहिए।
उपासना का विधि-विधान इस प्रकार है...
🌹(१) ब्रह्म सन्ध्या - जो शरीर व मन को पवित्र बनाने के लिए की जाती है। इसके अंतर्गत पाँच कृत्य करने होते हैं।

⛳️(अ) पवित्रीकरण - बाएँ हाथ में जल लेकर उसे दाहिने हाथ से ढँक लें एवं मंत्रोच्चारण के बाद जल को सिर तथा शरीर पर छिड़क लें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा, सर्वावस्थांगतोऽपि वा।
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
ॐ पुनातु पुण्डरीकाक्षः पुनातु पुण्डरीकाक्षः पुनातु।

⛳️(ब) आचमन - वाणी, मन व अंतःकरण की शुद्धि के लिए चम्मच से तीन बार जल का आचमन करें। हर मंत्र के साथ एक आचमन किया जाए।
ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा।
ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा।
ॐ सत्यं यशः श्रीर्मयि श्रीः श्रयतां स्वाहा।
⛳️ (स) शिखा स्पर्श एवं वंदन - शिखा के स्थान को स्पर्श करते हुए भावना करें कि गायत्री के इस प्रतीक के माध्यम से सदा सद्विचार ही यहाँ स्थापित रहेंगे। निम्न मंत्र का उच्चारण करें।
ॐ चिद्रूपिणि महामाये, दिव्यतेजः समन्विते।
तिष्ठ देवि शिखामध्ये, तेजोवृद्धिं कुरुष्व मे॥

⛳️ (द) प्राणायाम - श्वास को धीमी गति से गहरी खींचकर रोकना व बाहर निकालना प्राणायाम के क्रम में आता है। श्वास खींचने के साथ भावना करें कि प्राण शक्ति, श्रेष्ठता श्वास के द्वारा अंदर खींची जा रही है, छोड़ते समय यह भावना करें कि हमारे दुर्गुण, दुष्प्रवृत्तियाँ, बुरे विचार प्रश्वास के साथ बाहर निकल रहे हैं। प्राणायाम निम्न मंत्र के उच्चारण के साथ किया जाए।
ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः, ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम्। ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। ॐ आपोज्योतीरसोऽमृतं, ब्रह्म भूर्भुवः स्वः ॐ।

⛳️ ( य) न्यास - इसका प्रयोजन है-शरीर के सभी महत्त्वपूर्ण अंगों में पवित्रता का समावेश तथा अंतः की चेतना को जगाना ताकि देव-पूजन जैसा श्रेष्ठ कृत्य किया जा सके। बाएँ हाथ की हथेली में जल लेकर दाहिने हाथ की पाँचों उँगलियों को उनमें भिगोकर बताए गए स्थान को मंत्रोच्चार के साथ स्पर्श करें।
ॐ वाङ् मे आस्येऽस्तु। (मुख को)
ॐ नसोर्मे प्राणोऽस्तु। (नासिका के दोनों छिद्रों को)
ॐ अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु। (दोनों नेत्रों को)
ॐ कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु। (दोनों कानों को)
ॐ बाह्वोर्मे बलमस्तु। (दोनों भुजाओं को)
ॐ ऊर्वोमे ओजोऽस्तु। (दोनों जंघाओं को)
ॐ अरिष्टानि मेऽङ्गानि, तनूस्तन्वा मे सह सन्तु। (समस्त शरीर पर)

आत्मशोधन की ब्रह्म संध्या के उपरोक्त पाँचों कृत्यों का भाव यह है कि साधक में पवित्रता एवं प्रखरता की अभिवृद्धि हो तथा मलिनता-अवांछनीयता की निवृत्ति हो। पवित्र-प्रखर व्यक्ति ही भगवान के दरबार में प्रवेश के अधिकारी होते हैं।

🌹 (२) देवपूजन - गायत्री उपासना का आधार केन्द्र महाप्रज्ञा-ऋतम्भरा गायत्री है। उनका प्रतीक चित्र सुसज्जित पूजा की वेदी पर स्थापित कर उनका निम्न मंत्र के माध्यम से आवाहन करें। भावना करें कि साधक की प्रार्थना के अनुरूप माँ गायत्री की शक्ति वहाँ अवतरित हो, स्थापित हो रही है।
ॐ आयातु वरदे देवि त्र्यक्षरे ब्रह्मवादिनि।
गायत्रिच्छन्दसां मातः! ब्रह्मयोने नमोऽस्तु ते॥
ॐ श्री गायत्र्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि,
ततो नमस्कारं करोमि।

🙏 (ख) गुरु - गुरु परमात्मा की दिव्य चेतना का वह अंश है, जो साधक का मार्गदर्शन करता है। सद्गुरु के रूप में पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीया माताजी का अभिवंदन करते हुए उपासना की सफलता हेतु गुरु आवाहन निम्न मंत्रोच्चारण के साथ करें।
ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः, गुरुरेव महेश्वरः।
गुरुरेव परब्रह्म, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
अखण्डमंडलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
ॐ श्रीगुरवे नमः, आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि।

🙏 (ग) माँ गायत्री व गुरु सत्ता के आवाहन व नमन के पश्चात् देवपूजन में घनिष्ठता स्थापित करने हेतु पंचोपचार द्वारा पूजन किया जाता है। इन्हें विधिवत् संपन्न करें।
🌹 जल, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप तथा नैवेद्य प्रतीक के रूप में आराध्य के समक्ष प्रस्तुत किये जाते हैं।
🌹 एक-एक करके छोटी तश्तरी में इन पाँचों को समर्पित करते चलें।
🌹 जल का अर्थ है - नम्रता-सहृदयता।
🌹 अक्षत का अर्थ है – समयदान, अंशदान।
🌹 पुष्प का अर्थ है - प्रसन्नता-आंतरिक उल्लास।
🌹 धूप-दीप का अर्थ है - सुगंध व प्रकाश का वितरण, पुण्य-परमार्थ, तथा
🌹 नैवेद्य का अर्थ है - स्वभाव व व्यवहार में मधुरता-शालीनता का समावेश।
ये पाँचों उपचार व्यक्तित्व को सत्प्रवृत्तियों से संपन्न करने के लिए किये जाते हैं। कर्मकाण्ड के पीछे भावना महत्त्वपूर्ण है।

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(२) जप - गायत्री मंत्र का जप न्यूनतम तीन माला अर्थात् घड़ी से प्रायः पंद्रह मिनट नियमित रूप से किया जाए।
🌹अधिक बन पड़े, तो अधिक उत्तम।
🌹 होठ हिलते रहें, किन्तु आवाज इतनी मंद हो कि पास बैठे व्यक्ति भी सुन न सकें।
🌹 जप प्रक्रिया कषाय-कल्मषों-कुसंस्कारों को धोने के लिए की जाती है।
🌹 ।। ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।🌹
इस प्रकार मंत्र का उच्चारण करते हुए माला की जाय एवं भावना की जाय कि हम निरन्तर पवित्र हो रहे हैं। दुर्बुद्धि की जगह सद्बुद्धि की स्थापना हो रही है।
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(३) ध्यान - जप तो अंग-अवयव करते हैं, मन को ध्यान में नियोजित करना होता है।
🌹 साकार ध्यान में गायत्री माता के अंचल की छाया में बैठने तथा उनका दुलार भरा प्यार अनवरत रूप से प्राप्त होने की भावना की जाती है।
🌹 निराकार ध्यान में गायत्री के देवता सविता की प्रभातकालीन स्वर्णिम किरणों को शरीर पर बरसने व शरीर में श्रद्धा-प्रज्ञा-निष्ठा रूपी अनुदान उतरने की भावना की जाती है,
🌹 जप और ध्यान के समन्वय से ही चित्त एकाग्र होता है और आत्मसत्ता पर उस क्रिया का महत्त्वपूर्ण प्रभाव भी पड़ता है।
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(५) सूर्यार्घ्यदान - विसर्जन-जप समाप्ति के पश्चात् पूजा वेदी पर रखे छोटे कलश का जल सूर्य की दिशा में र्अघ्य रूप में निम्न मंत्र के उच्चारण के साथ चढ़ाया जाता है।
🌹 ॐ सूर्यदेव! सहस्रांशो, तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
ॐ सूर्याय नमः, आदित्याय नमः, भास्कराय नमः॥🌹
🌹 भावना यह करें कि जल आत्म सत्ता का प्रतीक है एवं सूर्य विराट् ब्रह्म का तथा हमारी सत्ता-सम्पदा समष्टि के लिए समर्पित-विसर्जित हो रही है।

🌹 इतना सब करने के बाद पूजा स्थल पर देवताओं को करबद्ध नतमस्तक हो नमस्कार किया जाए व सब वस्तुओं को समेटकर यथास्थान रख दिया जाए।
🌹 जप के लिए माला तुलसी या चंदन की ही लेनी चाहिए।
🌹 सूर्योदय से दो घण्टे पूर्व से सूर्यास्त के एक घंटे बाद तक कभी भी गायत्री उपासना की जा सकती है। 🌹 मौन-मानसिक जप चौबीस घण्टे किया जा सकता है।
🌹 माला जपते समय तर्जनी उंगली का उपयोग न करें तथा सुमेरु का उल्लंघन न करें।
🌹 जय माँ गायत्री ।
🌹 जय गुरुदेव ।
🌹⛳️🙏🌻🚩🌹⛳️🙏🌻🚩🌹

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कामेंट्स

Ramji lal yadav Sep 23, 2017
कृपया आप से निवेदन है शांति कुज हरिद्वार में स्थापित मंदिर

Ramji lal yadav Sep 23, 2017
गायत्री माता की फ़ोटो माय मंदिर में पोस्ट कर धन्यबाद

🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *🚩🅿Jai Shree Ganesh🅿🚩* 🌺🙏 *महर्षि पाराशर पंचांग* 🙏🌺 🙏🌺🙏 *अथ पंचांगम्* 🙏🌺🙏 *********ll जय श्री राधे ll********* 🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *दिनाँक -: 26/01/2020,रविवार* द्वितीया, शुक्ल पक्ष माघ """"""""""""""""""(समाप्ति काल) तिथि --------द्वितीया 30:14:58 तक पक्ष ---------------------------शुक्ल नक्षत्र ---------धनिष्ठा 30:47:42 योग --------व्यतापता 26:23:19 करण ----------बालव 17:19:50 करण ---------कौलव 30:14:58 वार -------------------------रविवार माह ---------------------------- माघ चन्द्र राशि -----मकर 17:38:17 चन्द्र राशि --------------------कुम्भ सूर्य राशि --------------------- मकर रितु --------------------------शिशिर आयन --------------------उत्तरायण संवत्सर -------------------- विकारी संवत्सर (उत्तर) ----------परिधावी विक्रम संवत ----------------2076 विक्रम संवत (कर्तक) ----2076 शाका संवत -----------------1941 वृन्दावन सूर्योदय -----------------07:10:00 सूर्यास्त -----------------17:53:31 दिन काल ---------------10:43:30 रात्री काल -------------13:16:07 चंद्रास्त -----------------19:15:55 चंद्रोदय -----------------31:29:12 लग्न ----मकर 11°25' , 281°25' सूर्य नक्षत्र -------------------श्रवण चन्द्र नक्षत्र ------------------धनिष्ठा नक्षत्र पाया ---------------------ताम्र *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* गा ----धनिष्ठा 11:05:41 गी ----धनिष्ठा 17:38:17 गु ----धनिष्ठा 24:12:18 गे ----धनिष्ठा 30:47:42 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================= सूर्य=मकर 11°22 ' श्रवण, 1 खी चन्द्र =मकर 24°23 ' धनिष्ठा' 1 गा बुध = मकर 21°10 ' श्रवण' 4 खो शुक्र= कुम्भ 20°55, पू o भा o ' 1 से मंगल=वृश्चिक 21°30' ज्येष्ठा ' 2 या गुरु=धनु 18°50 ' पू oषाo , 2 धा शनि=धनु 26°43' उ oषा o ' 1 भे राहू=मिथुन 12 °52 ' आर्द्रा , 2 घ केतु=धनु 12 ° 52 ' मूल , 4 भी *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 16:33 - 17:54 अशुभ यम घंटा 12:32 - 13:52 अशुभ गुली काल 15:13 - 16:33 अशुभ अभिजित 12:10 -12:53 शुभ दूर मुहूर्त 16:28 - 17:11 अशुभ 🚩पंचक 17:38 - अहोरात्र अशुभ 💮चोघडिया, दिन उद्वेग 07:10 - 08:30 अशुभ चर 08:30 - 09:51 शुभ लाभ 09:51 - 11:11 शुभ अमृत 11:11 - 12:32 शुभ काल 12:32 - 13:52 अशुभ शुभ 13:52 - 15:13 शुभ रोग 15:13 - 16:33 अशुभ उद्वेग 16:33 - 17:54 अशुभ 🚩चोघडिया, रात शुभ 17:54 - 19:33 शुभ अमृत 19:33 - 21:13 शुभ चर 21:13 - 22:52 शुभ रोग 22:52 - 24:32* अशुभ काल 24:32* - 26:11* अशुभ लाभ 26:11* - 27:51* शुभ उद्वेग 27:51* - 29:30* अशुभ शुभ 29:30* - 31:10* शुभ 💮होरा, दिन सूर्य 07:10 - 08:04 शुक्र 08:04 - 08:57 बुध 08:57 - 09:51 चन्द्र 09:51 - 10:45 शनि 10:45 - 11:38 बृहस्पति 11:38 - 12:32 मंगल 12:32 - 13:25 सूर्य 13:25 - 14:19 शुक्र 14:19 - 15:13 बुध 15:13 - 16:06 चन्द्र 16:06 - 16:59 शनि 16:59 - 17:54 🚩होरा, रात बृहस्पति 17:54 - 18:59 मंगल 18:59 - 20:06 सूर्य 20:06 - 21:13 शुक्र 21:13 - 22:19 बुध 22:19 - 23:25 चन्द्र 23:25 - 24:32 शनि 24:32* - 25:38 बृहस्पति 25:38* - 26:44 मंगल 26:44* - 27:51 सूर्य 27:51* - 28:57 शुक्र 28:57* - 30:03 बुध 30:03* - 31:10 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान-------------पश्चिम* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा चिरौजी खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 2 + 1 + 1 = 4 ÷ 4 = 0 शेष मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 2 + 2 + 5 = 9 ÷ 7 = 2 शेष गौरि सन्निधौ = शुभ कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* * मोहन का भोग ,टोपा,दुशाला धारण राधाबल्लभ जी वृन्दावन * 71 वॉ गणतंत्र दिवस *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* अहो वत ! विचित्राणि चरितानि महात्मनाम् । लक्ष्मी तृणाय मन्यन्ते तद्भारेण नमन्ति च ।। ।चा o नी o।। देखिये क्या आश्चर्य है? बड़े लोग अनोखी बाते करते है. वे पैसे को तो तिनके की तरह मामूली समझते है लेकिन जब वे उसे प्राप्त करते है तो उसके भार से और विनम्र होकर झुक जाते है. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: श्रद्धात्रयविभागयोग अo-17 तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपः क्रियाः।, प्रवर्तन्ते विधानोक्तः सततं ब्रह्मवादिनाम्‌॥, इसलिए वेद-मन्त्रों का उच्चारण करने वाले श्रेष्ठ पुरुषों की शास्त्र विधि से नियत यज्ञ, दान और तपरूप क्रियाएँ सदा 'ॐ' इस परमात्मा के नाम को उच्चारण करके ही आरम्भ होती हैं॥,24॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा लाभदायक रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति हो सकती है। कारोबार फायदेमंद रहेगा। घर-परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। किसी के व्यवहार से हृदय को ठेस पहुंच सकती है। ऐश्वर्य के साधन प्राप्त होंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। 🐂वृष बनते कामों में अवरोध उत्पन्न होगा। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। क्रोध पर नियंत्रण रखें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। घर-परिवार की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। आय बनी रहेगी। दूसरों पर भरोसा न करें। जोखिम न उठाएं। 👫मिथुन व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। बेरोजगारी दूर करने की योजना बनेगी। प्रतिष्ठित व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा। लेनदारी वसूल करने के प्रयास सफल रहेंगे। घर-परिवार की चिंता रहेगी। भाग्य का भरपूर साथ प्राप्त होगा। आय बनी रहेगी। विवाद से बचें। 🦀कर्क किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। व्यवसाय में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। कोई बड़ा काम करने का मन बन सकता है। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। थकान महसूस होगी। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। 🐅सिंह चोट व रोग से बाधा संभव है। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। समाज में मान-सम्मान मिलेगा। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। सुख के साधन प्राप्त होंगे। लभा के अवसर हाथ आएंगे। लेन-देन में सावधानी रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। 🙎कन्या तीर्थयात्रा की योजना बनेगी। अध्यात्म में रुचि बढ़ेगी। कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। विरोध होगा। स्वास्थ्य पर खर्च हो सकता है। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। वस्तुएं संभालकर रखें। ⚖तुला रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। परिवार तथा नजदीकी लोगों के साथ मनोरंजन का समय मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। मनपसंद भोजन का आनंद मिलेगा। जल्दबाजी से बचें। लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। आलस्य हावी रहेगा। 🦂वृश्चिक विवाद से क्लेश संभव है। बुरी खबर मिल सकती है। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। आय में कमी रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। अपेक्षित कार्य समय पर न होने से तनाव रहेगा। खर्च की अधिकता रहेगी। आर्थिक नुकसान हो सकता है। 🏹धनु मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मित्र व संबंधियों का सहयोग मिलेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। किसी बड़ी बाधा का निवारण होगा। काम समय पर पूर्ण होंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। निवेश शुभ रहेगा। 🐊मकर शोक समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। पारिवारिक उलझनें बढ़ सकती हैं। किसी अपने का व्यवहार दिल को ठेस पहुंचा सकता है। दौड़धूप अधिक रहेगी। किसी बड़े निर्णय को लेने में जल्दबाजी न करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। लेन-देन में सावधानी रखें। धैर्य रखें। लाभ होगा। 🍯कुंभ सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मेहनत का फल मिलेगा। पार्टनरों से सहयोग प्राप्त होगा। कार्यसिद्धि होगी। आय में वृद्धि होगी। भाग्य का साथ मिलेगा। कोई बड़ा काम करने की हिम्मत जुटा पाएंगे। बाहर जाने की योजना बनेगी। व्यवसाय में लाभ होगा। जल्दबाजी से बचें। 🐟मीन व्यवसाय लाभदायक रहेगा। घर में मेहमानों का आगमन होगा। उन पर स्वागत-सत्कार में व्यय होगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। कार्यवृद्धि की योजना बनेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। पार्टनरों में मतभेद हो सकता है। संयम बनाए रखें। *🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏* 🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

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