Shalu Kumar
Shalu Kumar Oct 21, 2017

गीता ज्ञान

*Ⓜ कर्म - भोग Ⓜ*

Ⓜ पूर्व जन्मों के कर्मों से ही हमें इस जन्म में माता - पिता , भाई - बहन , पति - पत्नि , प्रेमी - प्रेमिका , मित्र - शत्रु , सगे - सम्बन्धी इत्यादि संसार के जितने भी रिश्ते नाते हैं , सब मिलते हैं । क्योंकि इन सबको हमें या तो कुछ देना होता है या इनसे कुछ लेना होता है ।

Ⓜ *सन्तान के रुप में कौन आता है ?*

Ⓜ वेसे ही सन्तान के रुप में हमारा कोई पूर्वजन्म का 'सम्बन्धी' ही आकर जन्म लेता है । जिसे शास्त्रों में चार प्रकार से बताया गया है --

Ⓜ *ऋणानुबन्ध :-* पूर्व जन्म का कोई ऐसा जीव जिससे आपने ऋण लिया हो या उसका किसी भी प्रकार से धन नष्ट किया हो , वह आपके घर में सन्तान बनकर जन्म लेगा और आपका धन बीमारी में या व्यर्थ के कार्यों में तब तक नष्ट करेगा , जब तक उसका हिसाब पूरा ना हो जाये ।

Ⓜ *शत्रु पुत्र :-* पूर्व जन्म का कोई दुश्मन आपसे बदला लेने के लिये आपके घर में सन्तान बनकर आयेगा और बड़ा होने पर माता - पिता से मारपीट , झगड़ा या उन्हें सारी जिन्दगी किसी भी प्रकार से सताता ही रहेगा । हमेशा कड़वा बोलकर उनकी बेइज्जती करेगा व उन्हें दुःखी रखकर खुश होगा ।

Ⓜ *उदासीन पुत्र :-* इस प्रकार की सन्तान ना तो माता - पिता की सेवा करती है और ना ही कोई सुख देती है । बस , उनको उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ देती है । विवाह होने पर यह माता - पिता से अलग हो जाते हैं ।

Ⓜ *सेवक पुत्र :-* पूर्व जन्म में यदि आपने किसी की खूब सेवा की है तो वह अपनी की हुई सेवा का ऋण उतारने के लिए आपका पुत्र या पुत्री बनकर आता है और आपकी सेवा करता है । जो बोया है , वही तो काटोगे । अपने माँ - बाप की सेवा की है तो ही आपकी औलाद बुढ़ापे में आपकी सेवा करेगी , वर्ना कोई पानी पिलाने वाला भी पास नहीं होगा ।

Ⓜ आप यह ना समझें कि यह सब बातें केवल मनुष्य पर ही लागू होती हैं । इन चार प्रकार में कोई सा भी जीव आ सकता है । जैसे आपने किसी गाय कि निःस्वार्थ भाव से सेवा की है तो वह भी पुत्र या पुत्री बनकर आ सकती है । यदि आपने गाय को स्वार्थ वश पालकर उसको दूध देना बन्द करने के पश्चात घर से निकाल दिया तो वह ऋणानुबन्ध पुत्र या पुत्री बनकर जन्म लेगी । यदि आपने किसी निरपराध जीव को सताया है तो वह आपके जीवन में शत्रु बनकर आयेगा और आपसे बदला लेगा ।

Ⓜ इसलिये जीवन में कभी किसी का बुरा ना करें । क्योंकि प्रकृति का नियम है कि आप जो भी करोगे , उसे वह आपको इस जन्म में या अगले जन्म में सौ गुना वापिस करके देगी । यदि आपने किसी को एक रुपया दिया है तो समझो आपके खाते में सौ रुपये जमा हो गये हैं । यदि आपने किसी का एक रुपया छीना है तो समझो आपकी जमा राशि से सौ रुपये निकल गये ।

Ⓜ ज़रा सोचिये , "आप कौन सा धन साथ लेकर आये थे और कितना साथ लेकर जाओगे ? जो चले गये , वो कितना सोना - चाँदी साथ ले गये ? मरने पर जो सोना - चाँदी , धन - दौलत बैंक में पड़ा रह गया , समझो वो व्यर्थ ही कमाया । औलाद अगर अच्छी और लायक है तो उसके लिए कुछ भी छोड़कर जाने की जरुरत नहीं है , खुद ही खा - कमा लेगी और औलाद अगर बिगड़ी या नालायक है तो उसके लिए जितना मर्ज़ी धन छोड़कर जाओ , वह चंद दिनों में सब बरबाद करके ही चैन लेगी ।"

Ⓜ मैं , मेरा , तेरा और सारा धन यहीं का यहीं धरा रह जायेगा , कुछ भी साथ नहीं जायेगा । साथ यदि कुछ जायेगा भी तो सिर्फ *नेकियाँ* ही साथ जायेंगी । इसलिए जितना हो सके *नेकी* करो *सतकर्म* करो ।

*📙 श्रीमद्भभगवतगीता।*

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कामेंट्स

Abi Dhiman Nov 1, 2017
जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे

kavita sharma Dec 9, 2018

Pranam Like Belpatra +138 प्रतिक्रिया 126 कॉमेंट्स • 357 शेयर

🚩🙏 ॐ आपके हमारे द्वारा वे कर्म अतीत में किये गए हो अथवा किसी पूर्वजन्म में , जिसका आपको स्मरण न हो , पर जीवन की कोई भी परिस्थितियों विना पूर्वकृत कर्म के निर्मित नहीं होती ।इतना ही नही कभी हम भी देखते व सोचते हैं कि बुराई की राह पर चलन...

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vikash yadav Dec 9, 2018

Radhe radhe
यह पुरुष शरीर की (बुद्धि, अहंकार और मन तथा पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच भूत, पाँच इन्द्रियों के विषय- इस प्रकार इन तेईस तत्त्वों का पिण्ड रूप यह स्थूल शरीर प्रकृति से उत्पन्न होने वाले गुणों का ही कार्य है, इसलिए इन...

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अध्याय 08 , श्लोक 14

श्लोक का हिंदी अनुवाद - 
अनन्‍य चित्‍तवाला जो मनुष्य मेरा नित्य-निरंतर स्मरण करता है, मैं उसको सुलभता से प्राप्त हो जाता हूँ । 

श्लोक में व्यक्त भाव एवं श्लोक से प्रेरणा - उपरोक्त वचन प्रभु ने श्री अर्जुनजी को कहे । 

प्रभु ...

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VANITA Dec 9, 2018

☜☆☞☜☆☞🙏🌼Jai shree Krishna Radhe Radhe my Dear sister and brother app Sabhi ko Happy Sunday 🌼🙏

Pranam Lotus Dhoop +114 प्रतिक्रिया 24 कॉमेंट्स • 182 शेयर

अध्याय 08 , श्लोक 08

श्लोक का हिंदी अनुवाद - 
जो मेरा स्मरण करने में अपना मन निरंतर लगाये रखकर मेरा ध्यान करता है, वह मुझको अवश्य ही प्राप्त होता है । 

श्लोक में व्यक्त भाव एवं श्लोक से प्रेरणा - उपरोक्त वचन प्रभु ने श्री अर्जुनजी को कहे । 

इस ...

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pawan wankhade Dec 8, 2018

🙏गीताजी भावार्थ🙏
अध्धाय ९ श्लोक २७
🌲हरे कृष्ण🌲
भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कहा कि तो जो भी करता है, खाता पीता है, चलता फिरता है, कोई तप करता है, तपस्या करता है कोई भी कर्म करता है वह मुझे अर्पण करके कर।सब कुछ भगवान को अर्पण करके कर...

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Naresh Yadav Dec 9, 2018

Pranam Jyot Bell +15 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 15 शेयर

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