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*हर हर महादेव*

*हर हर महादेव*

🌹* *कभी कैलाश यात्रा पथ का प्रथम पड़ाव था ऋषेश्वर*
*🌹रमाकान्त पन्त*🌹 *चम्पावत/अलाैंकिक विरासत को समेटे कुर्मांचल पर्वत पर विराजमान देवालयों की महिमा का वर्णन बड़ा ही मनोहारी है। रामायण, महाभारतकाल व उससे पूर्व से भी ऋषि-मुनियों की यह तपःस्थली कभी * *🌹कैलाश मानसरोवर यात्रा पथ का प्रथम पड़ाव थी। इसी भूमि पर महाबली कुंभकर्ण, महावीर घटोत्कच व उनकी माता हिडिम्बा को परम शांति प्राप्त हुई थी। वानरराज बाली ने यहां के पर्वतों में भगवान शिव की घोर आराधना के पश्चात उनसे वरदान स्वरूप अपार बल प्राप्त किया। ऐतिहासिक तपस्या की गवाह देता बालेश्वर मंदिर के प्रति आज भी लोगों में अगाध श्रद्धा है* कुर्मांचल नामक पर्वत श्रेणियां जनपद चम्पावत के धार्मिक महत्व की गाथा को उनके तीर्थों के रूप में प्रकट करती हैं। इन्हीं पावन तीर्थों में एक है ऋषेश्वर महादेव का मंदिर।
ऋषेश्वर महादेव जी का मंदिर भगवान शिव की ओर से अपने भक्तों के लिए अनुपम भेंट है ऐसी मान्यता है कि जो मनुष्य एक बार इस पावन मंदिर के दर्शन कर लेता है वह अश्वमेघ यज्ञ के समान फल का भागी बनता है। * *🌹प्राचीन समय में शिव भक्त जब कैलाश यात्रा पर जाते थे तो सर्वप्रथम ऋषेश्वर के चरणों में ही अपनी आराधना के श्रद्धापुष्प अर्पित करते थे। मन्दिर के समीपस्थ ही बहती लोहावती नदी में स्नान करने के पश्चात आगे की यात्रा सम्पन्न होती थी*। ऋषेश्वर के रूप में भगवान शिव की आराधना करके ही भीम ने अपने पुत्र घटोत्कच का उद्धार किया। इस संबंध में कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में घटोत्कच के मारे जाने के पश्चात उसकी आत्मा भटक गयी। स्वप्न में प्रकट होकर अपने पिता भीम को उसने यह व्यथा सुनायी तथा कुर्मांचल की पहाड़ी को अपने लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान बताया। तब भीम ने यहां पहुंच कर ऋषेश्वर महादेव की घोर आराधना के पश्चात उनकी कृपा से अखिल ब्रह्माण्ड की नायिका मां अखिलतारिणी को प्रकट किया। कहा जाता है कि ऋषेश्वर महादेव की कृपा से योगमाया रूपिणी भगवान शंकर को प्रिय लगने वाली संसार का उद्धार करने वाली भगवती पृथ्वी का भेदन कर प्रकट हुई तब भीम ने शिव कृपा से देवी से ‘कुंभकर्ण’ के सिर को तोड़कर इस क्षेत्र के वन में परिणित होने का वर मांगा, तब भीम ने अपनी गदा से कुंभकर्ण के गण्डस्थल को तोड़कर गण्डकी नदी प्रवाहित की और साथ में लोहावती नदी भी प्रवाहित की। इन दोनों के संगम पर अपने पुत्र घटोत्कच को स्थान दिलाया। चम्पावत मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर शिव कृपा से स्थापित घटोत्कच मंदिर भक्तों की मनौती पूर्ण करने में सहायक माना जाता है। यहीं पास में हिडिम्बा का मंदिर भी है।
*🌹शिव कृपा से किस प्रकार महाबली कुंभकर्ण को यहां स्थान प्राप्त हुआ, इस विषय में स्कंद पुराण के मानस खण्ड में वर्णन मिलता है* कि ऋषि पुलस्त्य के पुत्र व लंकापति रावण के लघु भ्राता कुंभकर्ण ने बाल्यकाल से ही महाबलशाली शरीर को प्राप्त किया तथा सत्रह वर्ष तक भगवान शिव की घोर आराधना के पश्चात अनेक वर प्राप्त किये। जिनमें से एक वर यह था कि मेरी मृत्यु के समय *🌹मेरा सिर लंका में न गिरकर ऐसे पवित्र स्थान पर गिरे जहां साक्षात शिव का वास हो* तथा वह स्थान जलमग्न हो। चिरकाल के बाद दशरथ पुत्र श्री रामचन्द्र जी ने जब सुग्रीव की सहायता से लंका पहुंच कर उसका सिरोभेदन कर दिया तब भगवान शंकर के वरदान का स्मरण कर रामचन्द्र ने वानरश्रेष्ठ हनुमान से कुंभकर्ण के सिर को कुर्मांचल ले जाने को कहा। यहां सिर पड़ते ही उसने परम गति को प्राप्त किया और यह स्थान सरोवर में तब्दील हो गया। बाद में भगवान ऋषेश्वर की कृपा व माता अखिलतारिणी से वरदान प्राप्त करने के पश्चात भीम ने इसके टुकड़े-टुकड़े कर इसे अपने पुत्र घटोत्कच के लिए समर्पित कर दिया।
भगवान विष्णु के कुर्मू अवतार व उनके चरणों से चिन्हित होने के कारण इस नगर का नाम कुर्मांचल पड़ा। यह भूमि सप्तऋषियों की आराधना स्थली भी कही जाती है। *इसी पावन भूमि पर महर्षि वशिष्ठ मुनि ने अनेक ऋषियों सहित भगवान शिव की लंबे समय तक तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ऋषेश्वर में भगवान शिव ने वशिष्ठ मुनि को दर्शन दिए और शिवलिंग के रूप में जगत के कल्याण के लिए यहीं पर स्थित हो गये, यह मंदिर चम्पावत जनपद के लोहाघाट नगर में लोहावती नदी के किनारे स्थित है। प्राचीन काल में जंगल के बीच इस शिवलिंग की पूजा बारह गांव के लोग करते थे। सन् 1960 के लगभग 108 श्री बालक बाबा जी ने इस मंदिर से नदी पर उतरने के लिए सीढ़ियां बनवाई। इसके बाद सन् 1970 श्री श्री 108 बाबा हीरानंद ने भक्तजनों का सहयोग लेकर धर्मशाला का निर्माण करवाया। इन्हीं की प्रेरणा से इस समय यहां पर अनेक मंदिर बने हैं, *🌹🌹🌹🌹🌹जिनमें राम मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, काली मंदिर, हनुमान मंदिर, देवी मंदिर, गणेश मंदिर एवं भैरव मंदिर स्थापित हैं। वर्ष भर इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है*

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Sajjan Singhal Jul 19, 2019

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🕉🔔🕉🔔🕉🔔🕉🔔 *शिव-मानस-पूजा स्तोत्रं :-* 🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥 *रत्नै: कल्पितमासनं हिम-जलै: स्नानं च दिव्याम्बरं* *नाना-रत्न-विभूषितं मृगमदामोदांकितं चन्दनं ।* *जाती-चम्पक-बिल्व-पत्र-रचितं पुष्पं च धूपं तथा*, *दीपं देव दयानिधे पशुपते हृत-कल्पितं गृह्यताम् ..||१||* 🌷🎄🌷🎄🌷🎄🌷🎄 *सौवर्णे नव-रत्न-खंड-रचिते पात्रे घृतं पायसं,* *भक्ष्यं पञ्च-विधं पयो-दधि-युतं रम्भाफलं पानकं ।* *शाकानामयुतं जलं रुचिकरं कर्पूर- खंडोज्ज्वलं ,* *ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्या प्रभो स्वीकुरु !..||२|* 🌲🌹🌲🌹🌲🌹🌲🌹 *छत्रं चामरयो:युगं व्यजनकं चादर्शकं निर्मलं ,* *वीणा-भेरि-मृदंग-काहलकला गीतं च नृत्यं तथा ।* *साष्ट-अंगं प्रणति: स्तुति: बहुविधा ह्येतत्समस्तं मया,* *संकल्पेन समर्पितं तव विभो पूजां गृहाण प्रभो ! ..||३||* 🌴🦚🌴🦚🌴🦚🌴🦚 *आत्मा त्वं गिरिजा मति: सहचरा: प्राणा: शरीरं गृहं ,* *पूजा ते विषयोपभोग-रचना निद्रा समाधि-स्थिति: ।* *संचार: पदयो: प्रदक्षिणविधि: स्तोत्रानि सर्वागिरो ,* *यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनं ..||४||* 🎈🌸🎈🌸🎈🌸🎈🌸 *कर-चरण-कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा,* *श्रवण-नयनजं वा मानसं वापराधं ।* *विहितमविहितं वा सर्वमेतत्-क्षमस्व ,* *जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ! ..|*|५!! 🌻☔🌻☔🌻☔🌻☔ *इति श्रीमत् शंकराचार्य-विरचिता शिव-मानस-पूजा समाप्त* 🚥🕉🚥🕉🚥🕉🚥🕉

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आप भी शिवजी को प्रसन्न में करना चाहते हैं तो यह विशेष वस्तु का प्रयोग करे... माना जाता है कि श्रावण मास में शिव की पूजा करने से सारे कष्ट खत्म हो जाते हैं। महादेव शिव सर्व समर्थ हैं। वे मनुष्य के समस्त पापों का क्षय करके मुक्ति दिलाते हैं। इनकी पूजा से ग्रह बाधा भी दूर होती है। 1. प्रथम सोमवार को कच्चे चावल एक मुट्ठी, 2. दूसरे सोमवार को सफेद तिल् एक मुट्ठी, 3. तीसरे सोमवार को खड़े मूँग एक मुट्ठी, 4. चौथे सोमवार को जौ एक मुट्ठी और 5. यदि जिस मॉस में पांच सोमवार हो तो पांचवें सोमवार को सतुआ चढ़ाने जाते हैं। यदि पांच सोमवार न हो तो आखरी सोमवार को दो मुट्ठी भोग अर्पित करते है। माना जाता है कि श्रावण मास में शिव की पूजा करने से सारे कष्ट खत्म हो जाते हैं। महादेव शिव सर्व समर्थ हैं। वे मनुष्य के समस्त पापों का क्षय करके मुक्ति दिलाते हैं। इनकी पूजा से ग्रह बाधा भी दूर होती है। 1. *सूर्य* से संबंधित बाधा है, तो विधिवत या पंचोपचार के बाद लाल { बैगनी } आक के पुष्प एवं पत्तों से शिव की पूजा करनी चाहिए। 2. *चंद्रमा* से परेशान हैं, तो प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर गाय का दूध अर्पित करें। साथ ही सोमवार का व्रत भी करें। 3. *मंगल* से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गिलोय की जड़ी-बूटी के रस से शिव का अभिषेक करना लाभप्रद रहेगा। 4. *बुध* से संबंधित परेशानी दूर करने के लिए विधारा की जड़ी के रस से शिव का अभिषेक करना ठीक रहेगा। 5. *बृहस्पति* से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को हल्दी मिश्रित दूध शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए। 6. *शुक्र* ग्रह को अनुकूल बनाना चाहते हैं, तो पंचामृत एवं घृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। 7. *शनि* से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गन्ने के रस एवं छाछ से शिवलिंग का अभिषेक करें। 8 . *राहु-केतु* से मुक्ति के लिए कुश और दूर्वा को जल में मिलाकर शिव का अभिषेक करने से लाभ होगा। शास्त्रों में मनोरथ पूर्ति व संकट मुक्ति के लिए अलग-अलग तरह की धारा से शिव का अभिषेक करना शुभ बताया गया है। अलग-अलग धाराओं से शिव अभिषेक का फल- जब किसी का मन बेचैन हो, निराशा से भरा हो, परिवार में कलह हो रहा हो, अनचाहे दु:ख और कष्ट मिल रहे हो तब शिव लिंग पर दूध की धारा चढ़ाना सबसे अच्छा उपाय है। *इसमें भी शिव मंत्रों का उच्चारण करते रहना चाहिए।* 1. *वंश की वृद्धि के लिए* शिवलिंग पर शिव सहस्त्रनाम बोलकर घी की धारा अर्पित करें। 2. शिव पर जलधारा से अभिषेक *मन की शांति के लिए* श्रेष्ठ मानी गई है। 3. *भौतिक सुखों को पाने के लिए* इत्र की धारा से शिवलिंग का अभिषेक करें। 4. *बीमारियों से छुटकारे के लिए* शहद की धारा से शिव पूजा करें। 5. गन्ने के रस की धारा से अभिषेक करने पर हर *सुख और आनंद मिलता है*। 6. सभी धाराओं से श्रेष्ठ है गंगाजल की धारा। शिव को गंगाधर कहा जाता है। शिव को गंगा की धार बहुत प्रिय है। गंगा जल से शिव अभिषेक करने पर *चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।* इससे अभिषेक करते समय महामृत्युंजय मन्त्र जरुर बोलना चाहिए। कार्य सिद्धि के लिए:-- 1. हर ‍इच्छा पूर्ति के लिए हैं अलग शिवलिंग पार्थिव शिवलिंग हर कार्य सिद्धि के लिए। 2. गुड़ के शिवलिंग प्रेम पाने के लिए। 3. भस्म से बने शिवलिंग सर्वसुख की प्राप्ति के लिए। 4. जौ या चावल या आटे के शिवलिंग दाम्पत्य सुख, संतान प्राप्ति के लिए। 5. दही से बने शिवलिंग ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए। 6. पीतल, कांसी के शिवलिंग मोक्ष प्राप्ति के लिए। 7. सीसा इत्यादि के शिवलिंग शत्रु संहार के लिए। 8. पारे के शिवलिंग अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष के लिए। पूजन में रखे इन बातों का ध्यान:-- 1. सावन के महीने में शिवलिंग की करें | शिवलिंग जहां स्थापित हो पूरव् दिशा की ओर मुख करके ही बैठें। 2. शिवलिंग के दक्षिण दिशा में बैठकर पूजन न करें। ये होता है अभिषेक का फल:-- 1. दूध से अभिषेक करने पर परिवार में कलह, मानसिक पीड़ा में शांति मिलती है। 2. घी से अभिषेक करने पर वंशवृद्धि होती है। 3. इत्र से अभिषेक करने पर भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। 4. जलधारा से अभिषेक करने पर मानसिक शान्ति मिलती है। 5. शहद से अभिषेक करने पर परिवार में बीमारियों का अधिक प्रकोप नहीं रहता। 6. गन्ने के रस की धारा डालते हुये अभिषेक करने से आर्थिक समृद्धि व परिवार में सुखद माहौल बना रहता है। 7. गंगा जल से अभिषेक करने पर चारो पुरूषार्थ की प्राप्ति होती है। 8. अभिषेक करते समय महामृत्युंजय का जाप करने से फल की प्राप्ति कई गुना अधिक हो जाती है। 9. सरसों के तेल से अभिषेक करने से शत्रुओं का शमन होता। ये भी मिलते हैं फल:-- 9. बिल्वपत्र चढ़ाने से जन्मान्तर के पापों व रोग से मुक्ति मिलती है। 10. कमल पुष्प चढ़ाने से शान्ति व धन की प्राप्ति होती है। 11. कुशा चढ़ाने से मुक्ति की प्राप्ति होती है। 12. दूर्वा चढ़ाने से आयु में वृद्धि होती है। 13. धतूरा अर्पित करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति व पुत्र का सुख मिलता है। 14. कनेर का पुष्प चढ़ाने से परिवार में कलह व रोग से निवृत्ति मिलती हैं। 15. शमी पत्र चढ़ाने से पापों का नाश होता, शत्रुओं का शमन व भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है। हर हर महादेव

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MasterJi Jul 19, 2019

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Ritu Sen Jul 17, 2019

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