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कामेंट्स

varsha lohar Nov 29, 2021
shubh prabhat vandan jai shree krishna radhey radhey.🙏

R.K.SONI (Ganesh Mandir) Nov 29, 2021
Her Her Mahadav Ji🙏 Aap her pl Khush Rhe Ji V. nice Post Ji👌👌🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌈🌈🌈🌹🌹🙏

💖Poonam Sharma💖 Nov 29, 2021
Jay shree mahakal Jay shree Radhe Krishna jii Good morning have a nice day 🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻

varsha lohar Nov 29, 2021
shubh dopahar vandan jai shree krishna radhey radhey.🙏

संजीव 9779584243 Nov 29, 2021
@poonam *जिंदगी की आधी शिकायतें ऐसे ही ठीक हो जाएं अगर लोग...* *एक दूसरे के बारे में "बोलने" की जगह* *एक दूसरे से "बोलना" सीख जाएं...!* *सुप्रभात*

Kanta Kamra Nov 29, 2021
Jai shree radhe krishna ji 🌹🌹 aapka din mangalmay ho 🌹

संजीव 9779584243 Dec 1, 2021
@varshalohar क्या पता, क्या-क्या कहा ,श्री कृष्ण ने? "मौन,,? कितना खूबसूरत हो गया? "जय श्री कृष्ण,,

k s Jan 27, 2022

⛳🙏🕉️🙏🥀🌹ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमो नमः 🙏जय गायत्री माता जी जय गुरुदेव 🙏ओम नमः शिवाय हर हर महादेव 🙏राम राम जी सबको राम राम शुभ रात्रि वंदन जी सभी पर 🙏अपने-अपने गुरुदेव महाराज जी की कृपा दृष्टि बनी रहे मंगलकामनाएं 🙏 शुभकामनाएंजी🌷🌷,✍️.........🙏जय गुरुदेव 🙏😌 गीता📙 ज्ञान की सुना दो गुरुदेव....... दर्द मेरी नस नस में 4 महीने आए 🌨️सर्दी के सर्दी ⛈️सर्दी 🌨️हो रही कंबल 🧕🙏ज्ञान का उड़ा दो गुरुदेव...... दर्द मेरी नस नस में गंगा ज्ञान की बहा दोगुरुदेव...... दर्द मेरी नस नस में दीपक🪔 ज्ञान 🪔का जला दो गुरुदेव ,.........दर्द मेरी नस नस में जय हो ✍️विद्या की देवी गायत्री माताजी जय गुरुदेव 🙏🌹🌹🕉️🌹🌹⛳⛳⛳

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snehalata Mishra Jan 27, 2022

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Mohit Sharma Jan 27, 2022

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Mohit Sharma Jan 27, 2022

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Vandana Singh Jan 27, 2022

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vinod Kumar Singh Jan 27, 2022

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*🌹षटतिला एकादशी महिमा व कथा* ➡ *28 जनवरी 2021 रात्रि 02:17 AM से 28 जनवरी रात्रि 11:35 PM तक (यानी 28 जनवरी, शुक्रवार को पुरा दिन) एकादशी है ।* 💥 *विशेष - 28 जनवरी, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।* ➖➖➖➖➖➖➖➖ *🌹इस दिन तिल से स्नान-होम करे, तिल का उबटन लगाये, तिल मिलाया हुआ जल पीये, तिल का दान करे और तिल को भोजन के काम में ले ।’* *🌹इस प्रकार छ: कामों में तिल का उपयोग करने के कारण यह एकादशी ‘षटतिला’ कहलाती है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है ।* *🌹युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा: भगवन् ! माघ मास के कृष्णपक्ष में कौन सी एकादशी होती है? उसके लिए कैसी विधि है तथा उसका फल क्या है ? कृपा करके ये सब बातें हमें बताइये ।* *🌹श्रीभगवान बोले: नृपश्रेष्ठ ! माघ (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार पौष) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी ‘षटतिला’ के नाम से विख्यात है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है । मुनिश्रेष्ठ पुलस्त्य ने इसकी जो पापहारिणी कथा दाल्भ्य से कही थी, उसे सुनो ।* *🌹दाल्भ्य ने पूछा: ब्रह्मन्! मृत्युलोक में आये हुए प्राणी प्राय: पापकर्म करते रहते हैं । उन्हें नरक में न जाना पड़े इसके लिए कौन सा उपाय है? बताने की कृपा करें ।* *🌹पुलस्त्यजी बोले: महाभाग ! माघ मास आने पर मनुष्य को चाहिए कि वह नहा धोकर पवित्र हो इन्द्रियसंयम रखते हुए काम, क्रोध, अहंकार ,लोभ और चुगली आदि बुराइयों को त्याग दे । देवाधिदेव भगवान का स्मरण करके जल से पैर धोकर भूमि पर पड़े हुए गोबर का संग्रह करे । उसमें तिल और कपास मिलाकर एक सौ आठ पिंडिकाएँ बनाये । फिर माघ में जब आर्द्रा या मूल नक्षत्र आये, तब कृष्णपक्ष की एकादशी करने के लिए नियम ग्रहण करें । भली भाँति स्नान करके पवित्र हो शुद्ध भाव से देवाधिदेव श्रीविष्णु की पूजा करें । कोई भूल हो जाने पर श्रीकृष्ण का नामोच्चारण करें । रात को जागरण और होम करें । चन्दन, अरगजा, कपूर, नैवेघ आदि सामग्री से शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले देवदेवेश्वर श्रीहरि की पूजा करें । तत्पश्चात् भगवान का स्मरण करके बारंबार श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़े, नारियल अथवा बिजौरे के फल से भगवान को विधिपूर्वक पूजकर अर्ध्य दें । अन्य सब सामग्रियों के अभाव में सौ सुपारियों के द्वारा भी पूजन और अर्ध्यदान किया जा सकता है । अर्ध्य का मंत्र इस प्रकार है:* *कृष्ण कृष्ण कृपालुस्त्वमगतीनां गतिर्भव ।* *संसारार्णवमग्नानां प्रसीद पुरुषोत्तम ॥* *नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते विश्वभावन ।* *सुब्रह्मण्य नमस्तेSस्तु महापुरुष पूर्वज ॥* *गृहाणार्ध्यं मया दत्तं लक्ष्म्या सह जगत्पते ।* *🌹‘सच्चिदानन्दस्वरुप श्रीकृष्ण ! आप बड़े दयालु हैं । हम आश्रयहीन जीवों के आप आश्रयदाता होइये । हम संसार समुद्र में डूब रहे हैं, आप हम पर प्रसन्न होइये । कमलनयन ! विश्वभावन ! सुब्रह्मण्य ! महापुरुष ! सबके पूर्वज ! आपको नमस्कार है ! जगत्पते ! मेरा दिया हुआ अर्ध्य आप लक्ष्मीजी के साथ स्वीकार करें ।’* *🌹तत्पश्चात् ब्राह्मण की पूजा करें । उसे जल का घड़ा, छाता, जूता और वस्त्र दान करें । दान करते समय ऐसा कहें : ‘इस दान के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण मुझ पर प्रसन्न हों ।’ अपनी शक्ति के अनुसार श्रेष्ठ ब्राह्मण को काली गौ का दान करें । द्विजश्रेष्ठ ! विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह तिल से भरा हुआ पात्र भी दान करे । उन तिलों के बोने पर उनसे जितनी शाखाएँ पैदा हो सकती हैं, उतने हजार वर्षों तक वह स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है । तिल से स्नान होम करे, तिल का उबटन लगाये, तिल मिलाया हुआ जल पीये, तिल का दान करे और तिल को भोजन के काम में ले ।’* *🌹इस प्रकार हे नृपश्रेष्ठ ! छ: कामों में तिल का उपयोग करने के कारण यह एकादशी ‘षटतिला’ कहलाती है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है ।* *🌹व्रत खोलने की विधि : द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए । ‘मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए’ - यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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