Kuldeep Singh
Kuldeep Singh Dec 26, 2016

आज का श्रृंगार दर्शन माँ गायत्री देवी का शांतिकुंज हरिद्वार से

आज का श्रृंगार दर्शन माँ गायत्री देवी का शांतिकुंज हरिद्वार से

आज का श्रृंगार दर्शन माँ गायत्री देवी का शांतिकुंज हरिद्वार से

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sita Aug 11, 2020

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gajendrasingh kaviya Aug 11, 2020

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Shuchi Singhal Aug 11, 2020

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uma prem singh verma Aug 11, 2020

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💜💫💦💖🌲🌞🌲💖💦💫💜 ╔═════ஜ۩۞۩ஜ═════╗ ║ *।। भक्तों का संसार ।।* ╚═════ஜ۩۞۩ஜ═════╝ *╥─।। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी ,हे नाथ नारायण वासुदेवा ।।─━❥* ╰─❀⊰╮ 🌹🍃🌹 *श्रीकृष्ण जन्माष्टमी* 12/08/2020 सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाता है इस दिन व्रत रखना, जानिये जन्माष्टमी का महत्व और इतिहास माना जाता है कि श्री कृष्ण के अवतार का एक बहुत महत्वपूर्ण कारण कंस का वध करना था श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष के रोहिणी नक्षत्र में हुआ था श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष के रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। जन्माष्टमी 2020 में 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। प्राचीन काल से ही हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के त्योहार को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि श्री कृष्ण भगवान विष्णु के ही अवतार हैं। जिन्होंने द्वापर युग में अनेकों राक्षसों का वध किया था। साथ ही यह वही परम पुरुषोत्तम भगवान हैं जिन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। आज पूरी दुनिया गीता के ज्ञान का लाभ ले रही है। हिंदू धर्म में भगवान श्री कृष्ण को मोक्ष देने वाला माना गया है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का इतिहास माना जाता है कि श्री कृष्ण के अवतार का एक बहुत महत्वपूर्ण कारण कंस का वध करना था। कंस की एक बहन थी देवकी। देवकी कंस को अत्यंत प्रिय थी। कंस जब अपनी बहन का विवाह करवाकर वापस महल लौट रहा था। तब ही आकाशवाणी हुई कि हे कंस, तेरी इस प्रिय बहन के गर्भ से जो आठवीं संतान होगी वही तेरी मृत्यु का कारण बनेगी। इसलिए कंस ने अपनी बहन को कारागार में डाल दिया। जैसे ही देवकी किसी बच्चे को जन्म देती कंस उसे तुरंत जान से मार देता था। मनोज अहिरवार जब आठवें बालक यानी श्री कृष्ण को देवकी जी ने जन्म दिया। तब भगवान विष्णु की माया से कारागार के सभी ताले टूट गए और भगवान श्री कृष्ण के पिता वासुदेव उन्हें मथुरा नन्द बाबा के महल में छोड़ कर चले गए। वहां एक कन्या ने जन्म लिया था। वह कन्या माया का अवतार थी। वासुदेव उस कन्या को लेकर वापस कंस के कारागार में आ गए। कंस ने उस कन्या को देखा और गोद में लेकर उसे मारने की इच्छा से जमीन पर फेंका। नीचे फेंकते ही वो कन्या हवा में उछल गई और बोली कि कंस तेरा काल यहां से जा चुका है। वही कुछ समय बाद तेरा अंत भी करेगा। मैं तो केवल माया हूं। कुछ समय बाद ऐसा ही हुआ भगवान श्रीकृष्ण ने कंस के महल आकर वहीं उसका अंत किया। जन्माष्टमी का महत्व बहुत अधिक है। सभी वैष्णव जन्माष्टमी का व्रत करते हैं। शास्त्रों में जन्माष्टमी को व्रतराज कहा गया है यानी यह व्रतों में सबसे श्रेष्ठ व्रत माना गया है। इस दिन लोग पुत्र, संतान, मोक्ष और भगवद् प्राप्ति के लिए व्रत करते हैं। माना जाता है कि जन्माष्टमी का व्रत करने से सुख-समृद्धि और दीर्घायु का वरदान मिलता है। साथ ही भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति भी बढ़ती है। जन्माष्टमी का व्रत करने से अनेकों व्रतों का फल मिलता है। *क्या है शुभ मुहूर्त* अष्टमी तिथि 11 अगस्त मंगलवार सुबह 9:06 बजे से शुरू हो जाएगी। यह तिथि 12 अगस्त सुबह 11:16 मिनट तक रहेगी। वैष्णव जन्माष्टमी के लिए 12 अगस्त का शुभ मुहूर्त बताया जा रहा है। बुधवार की रात 12.05 बजे से 12.47 बजे तक बाल-गोपाल की पूजा-अर्चना की जा सकती है। बता दें कि इस वर्ष कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं। 11 अगस्त 2020 को सूर्योदय के बाद ही अष्टमी तिथि शुरू होगी। इस दिन यह तिथि पूरे दिन और रात में रहेगी। भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ऐसे में नक्षत्र और तिथि का यह संयोग इस बार एक दिन पर नहीं बन रहा है। पूजा के दौरान इस बात का रखें ख्याल पूजा से पहले स्नान जरूर करें. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा का विधान है. पूजा करने से पहले भगवान को पंचामृत और गंगाजल से स्नान जरूर करवाएं. स्नान के बाद भगवान को वस्त्र पहनाएं. ध्यान रहें कि वस्त्र नए हो. इसके बाद उनका श्रृंगार करें. भगवान को फिर भोग लगाएं और कृष्ण आरती गाएं कान्हा के जन्मोत्सव पर गाएं उनकी आरती आरती कुंजबिहारी की, गिरिधर कृष्ण मुरारी की । गले में बैजन्तीमाला, बजावैं मुरली मधुर बाला ॥ श्रवण में कुंडल झलकाता, नंद के आनंद नन्दलाला की ।।आरती...।। गगन सम अंगकान्ति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर-सी अलक कस्तूरी तिलक।। चंद्र-सी झलक, ललित छबि श्यामा प्यारी की ।।आरती...।। कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं। गगन से सुमन राशि बरसै, बजै मुरचंग, मधुर मृदंग।। ग्वालिनी संग-अतुल रति गोपकुमारी की।।आरती...।। जहां से प्रगट भई गंगा, कलुष कलिहारिणी श्री गंगा। स्मरण से होत मोहभंगा, बसी शिव शीश, जटा के बीच।। हरै अघ-कीच चरण छवि श्री बनवारी की।।आरती...।। चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू। चहुं दिशि गोपी ग्वालधेनु, हंसत मृदुमन्द चांदनी चंद।। कटत भवफन्द टेर सुनु दीन भिखारी की।।आरती...।। देवकी और यशोदा नंदन हैं श्री कृष्ण कंस ने देवकी के कृष्ण से पहले के 7 बच्चों को मार डाला। जब देवकी ने श्रीकृष्ण को जन्म दिया, तब भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि वे श्रीकृष्ण को गोकुल में यशोदा माता और नंद बाबा के पास पहुंचा आएं, जहां वह अपने मामा कंस से सुरक्षित रह सकेगा। श्रीकृष्ण का पालन-पोषण यशोदा माता और नंद बाबा की देखरेख में हुआ। बस, उनके जन्म की खुशी में तभी से प्रतिवर्ष जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। 11 और 12 अगस्त को है जन्माष्टमी... जन्माष्टमी वो दिन है जिस दिन श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। इस दिन की तैयारियों हर जगह चल रही हैं। इस दिन श्रीकृष्ण को बाल-गोपाल रूप में पूजा जाता है। कृष्ण भक्तों को इस दिन का इंताजर पूरे वर्ष रहता है। खासतौर से मथुरा और द्वारिका नगरी में इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस बार लोग इस बात को लेकर उलझन में हैं कि जन्माष्टमी 11 अगस्त को है या 12 अगस्त को। अनेकों व्रत का मिलता है फल जन्माष्टमी का महत्व बहुत अधिक है। सभी वैष्णव जन्माष्टमी का व्रत करते हैं। शास्त्रों में जन्माष्टमी को व्रतराज कहा गया है यानी यह व्रतों में सबसे श्रेष्ठ व्रत माना गया है। इस दिन लोग पुत्र, संतान, मोक्ष और भगवद् प्राप्ति के लिए व्रत करते हैं। माना जाता है कि जन्माष्टमी का व्रत करने से सुख-समृद्धि और दीर्घायु का वरदान मिलता है। साथ ही भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति भी बढ़ती है। जन्माष्टमी का व्रत करने से अनेकों व्रतों का फल मिलता है। सभी व्रतों में है श्रेष्ठ श्रावण (अमान्त) कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी या जन्माष्टमी व्रत एवं उत्सव प्रचलित है, जो भारत में सर्वत्र मनाया जाता है और सभी व्रतों एवं उत्सवों में श्रेष्ठ माना जाता है। कुछ पुराणों में ऐसा आया है कि यह भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इसकी व्याख्या इस प्रकार है कि 'पौराणक वचनों में मास पूर्णिमान्त है तथा इन मासों में कृष्ण पक्ष प्रथम पक्ष है।' पद्म पुराण [1] , मत्स्य पुराण [2] , अग्नि पुराण [3] में कृष्ण जन्माष्टमी के माहात्म्य का विशिष्ट उल्लेख है। आकाशवाणी सुनकर देवकी-वसुदेव को कंस ने किया था काल कोठरी में बंद श्रीकृष्ण देवकी और वासुदेव के 8वें पुत्र थे। मथुरा नगरी का राजा कंस था, जो कि बहुत अत्याचारी था। उसके अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे। एक समय आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी का 8वां पुत्र उसका वध करेगा। यह सुनकर कंस ने अपनी बहन देवकी को उसके पति वासुदेव सहित काल-कोठारी में डाल दिया। कृष्ण और कंस-वध... कृष्ण जन्म के समय घनघोर वर्षा हो रही थी। चारों तरफ़ घना अंधकार छाया हुआ था। श्रीकृष्ण का अवतरण होते ही वसुदेव–देवकी की बेड़ियाँ खुल गईं, कारागार के द्वार स्वयं ही खुल गए, पहरेदार गहरी निद्रा में सो गए। वसुदेव किसी तरह श्रीकृष्ण को उफनती यमुना के पार गोकुल में अपने मित्र नन्दगोप के घर ले गए। वहाँ पर नन्द की पत्नी यशोदा को भी एक कन्या उत्पन्न हुई थी। वसुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को ले गए। कंस ने उस कन्या को पटककर मार डालना चाहा। किन्तु वह इस कार्य में असफल ही रहा। श्रीकृष्ण का लालन–पालन यशोदा व नन्द ने किया। बाल्यकाल में ही श्रीकृष्ण ने अपने मामा के द्वारा भेजे गए अनेक राक्षसों को मार डाला और उसके सभी कुप्रयासों को विफल कर दिया। अन्त में श्रीकृष्ण ने आतातायी कंस को ही मार दिया। जन्माष्टमी व्रत का महत्व... कहा जाता है कि जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से व्यक्ति का जीवन सुखमय हो जाता है। वहीं, जनमाष्टमी का व्रत व्यक्ति को कई दुखों से मुक्त करता है। इस दिन लोग व्रत करते हैं और पूजापाठ करते हैं। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत करने पर भक्तों की मनोकामना पूरी होती हैं। भगवान श्रीकृष्ण विष्णुजी के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण विष्णुजी के आठवें अवतार माने जाते हैं। यह श्री विष्णु का सोलह कलाओं से पूर्ण भव्यतम अवतार है। श्रीराम तो राजा दशरथ के यहाँ एक राजकुमार के रूप में अवतरित हुए थे, जबकि श्रीकृष्ण का प्राकट्य आततायी कंस के कारागार में हुआ था। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है खास... भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का दिन बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। जन्माष्टमी पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जो रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। रात 12 बजे मन्दिरों में होता है पर इस बार माहवारी के चलते ऐसा होने की संभावना कम है अभिषेक पूरे दिन व्रत रखकर नर-नारी तथा बच्चे रात्रि 12 बजे मन्दिरों में अभिषेक होने पर पंचामृत ग्रहण कर व्रत खोलते हैं। कृष्ण जन्मभूमि के अलावा द्वारकाधीश, बिहारीजी एवं अन्य सभी मन्दिरों में इसका भव्य आयोजन होता है, जिनमें भारी भीड़ होती है। पूरी दुनिया में आस्था का केंद्र हैं कान्हा... जन्माष्टमी पर्व को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व पूरी दुनिया में पूर्ण आस्था एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी को भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण युगों-युगों से हमारी आस्था के केंद्र रहे हैं। वे कभी यशोदा मैया के लाल होते हैं, तो कभी ब्रज के नटखट कान्हा। श्री कृष्ण का जन्म... श्री कृष्ण का जन्म देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में मथुरा में हुआ था। उन्होंने मथुरावासियों को निर्दयी कंस के शासन से मुक्ति दिलाई इतना ही नहीं महाभारत के युद्ध में पांडवों को जीत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई थी।🌹🌹🙏🙏 *🌹🍃🌹* *╭─❀⊰╯* *╨─📲─━* ╔═════════════════╗ ║ 🌹🌹आपका दिन खुशियों भरा रहे🌹🌹 ╚═════════════════╝

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Anju Sharma Aug 11, 2020

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laltesh kumar sharma Aug 11, 2020

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uma prem singh verma Aug 11, 2020

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Sushma Bhatnagar Aug 11, 2020

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