परिवार अब नही रहा .🙏👇पढ़ो

परिवार अब नही रहा .🙏👇पढ़ो

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परिवार अब कहाँ ,परिवार तो कब के मर गए।
आज जो है,वह उसका केवल
टुकड़ा भर रह गए ।

पहले होता था दादा का ,
बेटों पोतों सहित,भरा पूरा परिवार,
एक ही छत के नीचे ।
एक ही चूल्हे पर ,
पलता था उनके मध्य ,
अगाध स्नेह और प्यार।

अब तो रिश्तों के आईने ,
तड़क कर हो गए हैं कच्चे,
केवल मैं और मेरे बच्चे।
माँ बाप भी नहीं रहे
परिवार का हिस्सा,
तो समझिये खत्म ही हो गया किस्सा।

होगा भी क्यों नहीं,
माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में,
बेटों को घर से दूर
ठूंस देते हैं किसी होस्टल में,
पढ़ने के बहाने।
वंचित कर देते हैं प्रेम से
जाने अनजाने।

आज की शिक्षा
हुनर तो सिखाती है ।
पर संस्कार कहाँ दे पाती है।

पढ़ लिख कर बेटा डॉलर की
चकाचोंध में,
आस्ट्रेलिया, यूरोप या अमेरिका
बस जाता है।
बाप को कंधा देने भी कहाँ पहुंच पाता है।

बाकी बस जाते हैं बंगलोर ,
हैदराबाद, मुम्बई,
नोएडा या गुड़गांव में।
फिर लौट कर नहीं आते
माँ बाप की छांव में।

पिछले वर्ष का है किस्सा ,
ऐसा ही एक बेटा ,देकर घिस्सा
पुस्तैनी घर बेचकर ,
माँ के विश्वास को तोड़ गया ।
उसको यतीमों की तरह ,
दिल्ली के एयर पोर्ट पर छोड़ गया।

अभी अभी एक नालायक ने
माँ से बात नहीं की ,पूरे एक साल।
आया तो देखा माँ का आठ माह पुराना कंकाल ।
माँ से मिलने का तो केवल एक बहाना था ।
असली मकसद फ्लैट बेचकर खाना था।

आपसी प्रेम का खत्म होने को है पेटा ।
लड़ रहे हैं बाप और बेटा ।
*करोड़पति सिंघानियां को लाले पड़ *
गये हैं खाने के ।
बेटे ने घर से निकाल दिया ,
चक्कर काट रहा है कोर्ट कचहरी थाने के।

परिवार को तोड़ने में अब तो
कानून ने भी बो दिए हैं बीज ।
जायज है लिवइन रिलेशनशिप
और कॉन्ट्रैक्ट मैरिज ।

ना मुर्गी ना अंडा ना सास ससुर का फंडा ।
जब पति पत्नी ही नहीं तो परिवार कहाँ से बसते ।
*कॉन्ट्रैक्ट खत्म ,चल दिये
अपने अपने रस्ते ।
इस दौरान जो बच्चे हुए,
पलते हैं यतीमों की तरह ।
पीते हैं तिरस्कार का जहर ।

*अर्थ की भागम भाग में *
मीलों पीछे छूट गए हैं ,
रिश्ते नातेदार ।
टूट रहे हैं घर परिवार ।
सूख रहा है प्रेम और प्यार ।
परिवारों का इस पीढ़ी ने ऐसा सत्यानाश किया कि ,
*आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी *
"वन्स अपॉन अ टाइम ,
* देयर वाज लिवींग
ज्वाइंट फैमिली इन इंडिया•
* दैट इज कॉल्ड परिवार"

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कामेंट्स

om Prakash Singh Dec 1, 2017
जय श्री राम*****सोलह आने सच है । 👌 💐

कंग अ सिंह Dec 1, 2017
आप जी ने बहुत ही सुन्दर भाव परिवार की परिभाषा का नाम बताया है भगवान से आपकी लम्बी उम्र की दुआ की कामना करता हूँ

abc Dec 1, 2017
bahut khoob...bde hi sunder shabdo main itni bdi schchayi btaayi h aapne ... vry emotional too...

Puneet Malik Dec 2, 2017
आधुनिक परिवार की सच्चाई है ये,आप ने बहुत सही लिखा।

Dev Raj Dec 2, 2017
सवा सोलह आन्ने सच सै , राधे राधे

Neha Sharma,Haryana Dec 14, 2019

+211 प्रतिक्रिया 27 कॉमेंट्स • 82 शेयर
Neha Sharma,Haryana Dec 14, 2019

*जय श्री शनिदेव की जय वीर बजरंग बली की* 🌹🙏🌹*शुभ प्रभात् वंदन*🌹🙏🌹 🌹🙏🌹*शुभ शनिवार*🌹🙏🌹 *शास्त्रों में वर्णन है कि एक बार हनुमान जी को भी शनि का प्रकोप सहना पड़ा था। जब किसी को शनि की साढ़ेसाती लगती है या जन्म कुंडली में शनि देव प्रताडि़त करते हैं तो अक्सर ज्योतिषाचार्य उस व्यक्ति को हनुमान जी की शरण में जाने को कहते हैं ताकि वह उपाय द्वारा शनि का प्रकोप शांत कर सके, परन्तु एक बार संयोग से हनुमान जी शनि के काबू आ गए।* *भ्रमण करते शनि की हनुमान जी से भेंट हो गई। दोनों के मध्य भागवत चर्चा होने लगी। उस समय बात पाप-पुण्य की होने लगी। तब शनि देव हनुमान जी से कहने लगे, ‘‘मैं सब प्राणियों को उनके द्वारा किए गए कर्मों का शुभ-अशुभ फल तोल कर बराबर कर देता हूं। जीवन में प्रत्येक प्राणी पर कभी न कभी अपना प्रभाव अवश्य डालता हूं क्योंकि सृष्टि में प्राणी से कई बार जाने-अनजाने ही कुछ पाप हो जाते हैं जिसका उसे फल भोगना पड़ता है।’’* *शनि देव की यह बात सुनकर हनुमान जी कहने लगे, ‘‘शनिदेव कहीं अनजाने में मेरे द्वारा कोई पाप तो नहीं हो गया जिसके लिए मुझे उसका प्रायश्चित करना पड़े।’’* *शनि देव तुरन्त बोले, ‘‘अवश्य मारुति नंदन पवन पुत्र। मैं आपके पास इसी प्रयोजन से आया हूं क्योंकि मैं आपकी राशि में प्रवेश करने जा रहा हूं। आप सावधान रहें, मैं आपको शीघ्र ही पीड़ित करूंगा।’’* *शनि के ये वाक्य सुनकर हनुमान जी आश्चर्य में पड़ गए तथा बोले, ‘‘मैंने तो अपना सारा जीवन ब्रह्मचारी रहते हुए भगवान श्रीराम की सेवा में अर्पित कर दिया है। उनके भजन के अलावा कोई काम ही नहीं किया तो आप मेरी राशि में क्यों प्रवेश करना चाहते हैं। कृपया मेरे द्वारा किए गए बुरे कर्म या अपराध के बारे में अवश्य बतलाएं।’’* *तब शनि देव कहने लगे, ‘‘हनुमान जी आपने राम-रावण युद्ध में मेघनाद द्वारा किए जा रहे यज्ञ को भंग किया था, आपने धर्म कार्य किए हैं इसीलिए मैं आपकी राशि पर अढ़ाई या 7 वर्ष के लिए नहीं मात्र एक दिन के लिए आऊंगा।’’* *इतना सुनकर हनुमान जी ने शनि को एक दिन आने के लिए अनुमति दे दी तथा शनि को सावधान किया कि आपने आना ही है तो अपनी पूर्ण तैयारी करके आना।* *अगले दिन हनुमान जी ने अपने ईष्ट प्रभु भगवान श्री राम का स्मरण किया तथा विशाल पहाड़ उठा कर शनि के आने की प्रतीक्षा करने लगे तथा मन ही मन विचार करने लगे कि जब शनि देव आएंगे तो विशाल पहाड़ ही उन पर दे मारूंगा। पूरा दिन विशाल पहाड़ उठाकर हनुमान जी शनि की प्रतीक्षा करने लगे पर शाम तक शनि नहीं आए। शाम होने पर हनुमान जी ने विशाल पहाड़ को रख दिया तभी अचानक शनि देव प्रकट हुए। उन्हें देखकर हनुमान जी ने शनि से कहा, ‘‘सुबह से ही मैं आपकी प्रतीक्षा कर रहा था परन्तु आप आए नहीं।’’* *तभी शनि देव बोले, ‘‘हे पवन पुत्र रुद्रावतार हनुमान जी मैं तो सुबह ही आ गया था अब तो मैं लौट रहा हूं। मेरा प्रयोजन सफल रहा।’’* *तब हनुमान जी बोले, ‘‘आपके दर्शन तो अब हो रहे हैं शनि देव। आपके प्रकोप का क्या हुआ। तभी शनि देव मुस्करा कर बोले-मेरे प्रभाव के कारण ही तो आप सुबह से विशाल पहाड़ उठा कर खड़े रहे। मेरी वक्र दृष्टि के कारण ही आप आज सारा दिन पीड़ित रहे हैं। मैंने सुबह ही आपको विशाल पहाड़ उठवा दिया तथा शाम तक आपको दंडित किया इसलिए मेरा प्रयोजन सफल रहा। आप राम भक्त हैं, सदैव राम नाम का जाप करते हैं इसीलिए आपको दंड का कष्ट कम महसूस हुआ। आपको सुबह से शाम तक पहाड़ तो मेरे प्रकोप के कारण ही उठाना पड़ा है।’’* *शनि देव की ये बातें सुन कर हनुमान जी मुस्करा उठे। शनिदेव अपना कार्य समाप्त करके हनुमान जी से विदा लेकर शनि लोक रवाना हो गए। शनि के जन्म के समय पिता सूर्य को ग्रहण लगा था तभी उसकी शक्ति का सूर्य देव को ज्ञान हो गया था।*

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kamlesh sharma Dec 14, 2019

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Neha Sharma,Haryana Dec 14, 2019

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