rajeev kumar
rajeev kumar Dec 31, 2016

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parmila Apr 17, 2021

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sanjay Awasthi Apr 17, 2021

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kamala Maheshwari Apr 17, 2021

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Shuchi Arora Apr 17, 2021

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Uma shankar Pandey Apr 17, 2021

🌹🙏🌹🚩🕉पंचमं स्कंधमातेति ।षंष्टं कात्यायनीति च।। नवरात्र के पाँचवे स्वरुप में ,,माँ,,,स्कंधमाता की आराधना मे भक्त अपने ब्यवहारिक ज्ञान को कर्म मे परिवर्तित करते हैं। मान्यता है कि देबी इच्छा शक्ति ,,ज्ञान शक्ति,, और क्रियाशक्ति का समागम हैं। जब ब्रह्रमाण्ड मे ब्याप्त ,,शिव,, तत्व का मिलन इस त्रिशक्ति के साथ होता है तब स्कंध(कार्तिकेय) का जन्म होता है।स्कंधमाता ज्ञान व क्रिया के श्रोत का प्रतीक मानी गयी हैं। योगीजन इस दिन बिशुध्द चक्र में अपना मन एकाग्र करते हैं । स्कंन्धमाता का विग्रह चार भुजाओंवाला है। वे अपनी गोंद मेंभगवान स्कंध को बिठाये रखती हैं। वे अपनी दोदो भुजाओं मे छः मुखों वाले बालरुप स्कंध(कार्तिकेय) को सभाँले रखती हैं । इनका वर्ण पूरी तरह निर्मल काँन्तिवाला सफेद है। वे कमल के आसन पर बिराजती हैं ।सिंह इनका बाहन है। यह माँ का बात्सल्य बिग्रह है वे कोई शस्त्र धारण नहीं करती ।भक्त इन्हें केले का भोग लगाते हैं। मन्त्र---🕉ह्रीं क्लीं स्वमिन्यैः नमः । आज का बिचार---सही दिशा न होने के कारण ज्ञान व पुरुषार्थ भी बिफल हो जाते हैं।

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Shefali Sharma Apr 17, 2021

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