Bhagat Ram
Bhagat Ram Mar 26, 2020

🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन🙏🙏🌹🌹

🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन🙏🙏🌹🌹

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Sumitra Soni Mar 26, 2020
जय माता दी🌹🙏🏻 भाई माता रानी आपकी आपके परिवार की रक्षा करें आपको aapke priwar koस्वस्थ रखे खुश रखें आपका आने वाला हर पल शुभ और मंगलमय हो भाई🙏🏻🌹

🙏🏻Meena Sharma Mar 27, 2020

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Mita Vadiwala Mar 27, 2020

🌷Jai Mata Di🌷Jai Maa Kushmanda Devi 🌷🌻Good Morning Ji....🌞 🌻🌸 Have a Great Saturday 🌹🌹 Maa Kushmanda Devi Ki Aseem Krupa Aap aur Aapke Pariwar Par Sadaiv Bani Rahe.🌹 Maa Kushmanda Devi Hum Sabki Raksha Karein 🌹🙏🙏🌷 माँ कूष्मांडा मंत्र – या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्॥ भगवती माँ दुर्गा जी के चौथे स्वरुप का नाम कूष्मांडा है ! अपनी मंद हल्की हसीं द्वारा अंड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कुष्मांडा देवी के नाम से अभिहित किया गया है ! जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था , चारों ओर अन्धकार ही अंधकार व्याप्त था, तब माँ कुष्मांडा ने ही अपनी हास्य से ब्रह्माण्ड कि रचना की थी ! अतः यही सृष्टि की आदि-स्वरूपा आदि शक्ति है ! अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करना चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है। विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त को कम समय में ही कृपा का सूक्ष्म भाव अनुभव होने लगता है। ये देवी आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और उसे सुख-समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। अंततः इस देवी की उपासना में भक्तों को सदैव तत्पर रहना चाहिए। 🌷🌷🌹🌹🙏🙏⛳⛳

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🙏🏻Meena Sharma Mar 27, 2020

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Hirdesh Sharma Mar 27, 2020

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना की जाती है। इनकी उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है। देवी कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। कूष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़े। मां को बलियों में कुम्हड़े की बलि सबसे ज्यादा प्रिय है। इसलिए इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है। ऐसा है मां का स्वरुप: कूष्मांडा देवी की आठ भुजाएं हैं, जिनमें कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, शंख, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। मां के पास इन सभी चीजों के अलावा हाथ में अमृत कलश भी है। इनका वाहन सिंह है और इनकी भक्ति से आयु, यश और आरोग्य की वृद्धि होती है। ऐसे करें पूजा माता कूष्मांडा के दिव्य रूप को मालपुए का भोग लगाकर किसी भी दुर्गा मंदिर में ब्राह्मणों को इसका प्रसाद देना चाहिए। इससे माता की कृपा स्वरूप उनके भक्तों को ज्ञान की प्राप्ति होती है, बुद्धि और कौशल का विकास होता है। देवी को लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चूड़ी भी अर्पित करना चाहिए। मां कूष्मांडा पूजन विधि नवरात्र में इस दिन भी रोज की भांति सबसे पहले कलश की पूजा कर माता कूष्मांडा को नमन करें। इस दिन पूजा में बैठने के लिए हरे रंग के आसन का प्रयोग करना बेहतर होता है। मां कूष्मांडा को इस निवेदन के साथ जल पुष्प अर्पित करें कि, उनके आशीर्वाद से आपका और आपके स्वजनों का स्वास्थ्य अच्छा रहे। अगर आपके घर में कोई लंबे समय से बीमार है तो इस दिन मां से खास निवेदन कर उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करनी चाहिए। देवी को पूरे मन से फूल, धूप, गंध, भोग चढ़ाएं। मां कूष्मांडा को विविध प्रकार के फलों का भोग अपनी क्षमतानुसार लगाएं। पूजा के बाद अपने से बड़ों को प्रणाम कर प्रसाद वितरित करें। देवी योग-ध्यान की देवी भी हैं। देवी का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का भी है। उदराग्नि को शांत करती हैं। इसलिए, देवी का मानसिक जाप करें। देवी कवच को पांच बार पढ़ना चाहिए।

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Shanti Pathak Mar 27, 2020

🌹🌹जय माता दी ,जय मां कुष्मांडा 🌹🌹 🌹🌹शुभ शनिवार ,सुप्रभात जी 🌹🌹 बीमारियों से बचने के लिए नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है देवी कूष्मांडा की पूजा मां दुर्गा का चौथा स्वरूप है देवी कूष्मांडा इनको प्रिय है कुम्हड़े की बलि . नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना की जाती है। इनकी उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है। देवी कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। कूष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़ा यानी कद्दू। देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप को कुम्हड़े की बलि ज्यादा प्रिय है। इसलिए इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है। देवी कूष्मांडा का स्वरुप कूष्मांडा देवी की आठ भुजाएं हैं, जिनमें कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, शंख, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। मां के पास इन सभी चीजों के अलावा हाथ में कलश भी है। जो सूरा से भरा हुआ है और रक्त से लथपथ है। इनका वाहन सिंह है और इनके इस स्वरूप की पूजा करने पर भय से मुक्ति मिलती है। इनकी भक्ति से आयु, यश और आरोग्य की वृद्धि होती है। पूजन विधि चौकी (बाजोट) पर माता कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर कलश स्थापना करें। वहीं पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें। इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां कूष्मांडा सहित समस्त स्थापित देवताओं की पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। फिर प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें। ध्यान मंत्र सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधानाहस्तपद्याभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥ अर्थआठ भुजाओं वाली कूष्मांडा देवी अष्टभुजा देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमलपुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा रहते हैं। देवी कूष्मांडा का वाहन सिंह है। पूजा का मंत्र या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। पूजा का महत्व देवी कूष्मांडा भय दूर करती हैं। जीवन में सभी तरह के भय से मुक्त होकर सुख से जीवन बीताने के लिए ही देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है। देवी कूष्मांडा की पूजा से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। इनकी पूजा से हर तरह के रोग, शोक और दोष दूर हो जाते हैं। किसी तरह का क्लेश भी नहीं होता है। देवी कूष्मांडा को कुष्मांड यानी कुम्हड़े की बली दी जाती है। इसकी बली से हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती है। कूष्मांडा देवी की पूजा से समृद्धि और तेज प्राप्त होता है। इनकी पूजा से जीवन में भी अंधकार नहीं रहता है

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Pawan Saini Mar 27, 2020

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🌹🌹🙏🙏जय माता दी 🌹🌹🙏🙏 नवरात्र का चौथा दिन जगत जननी के चतुर्थ स्वरूप को समर्पित होता है। श्रीमद देवीभागवत पुराण में बताया गया है कि इस दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप कूष्मांडा स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। पुराण में बताया गया है कि प्रलय से लेकर सृष्टि के आरंभ तक चारों ओर अंधकार ही अंधकार था और सृष्टि एकदम शून्य थी। तब आदिशक्ति के कूष्मांडा रूप ने अंडाकार रूप में ब्रह्मांड की रचना की। देवीभाग्वत पुराण में माता के इस रूप का वर्णन इस तरह किया गया है, मां कूष्मांडा शेर पर सवार रहती हैं, इनकी 8 भुजाएं हैं। इनकी सात भुजाओं में क्रमश: कमल पुष्प, बाण, धनुष, कमंडल, चक्र और गदा सुशोभित हैं। इनके आठवें हाथ में माला है। जिसमें सभी प्रकार की सिद्धियां हैं। मां कूष्मांडा का निवास स्थान सूर्यलोक के मध्य में माना जाता है। पुराण के अनुसार केवल मां कूष्मांडा का तेज ही ऐसा है, जो वह सूर्यलोक में निवास कर सकती हैं। आदिशक्ति को ही सूर्य के तेज का कारण भी कहा जाता है। धार्मिक आस्था है कि मां कूष्मांडा के तेज के कारण ही दशों दिशाओं में प्रकाश फैला हुआ है। इनकी उपासना से सभी प्रकार की सिद्धियां और शक्तियां प्राप्त होती हैं। सच्चे मन से माता के इस रूप की उपासना करने पर सभी रोगों का नाश होता है। कहते हैं, मां के इस रूप की उपासना भक्तों के तेज में वृद्धि करती है, मां के तेज के समान उनके भक्त की ख्याति भी दशों दिशाओं में पहुंचती है। मां की उपासना के लिए ध्यान मंत्र… वन्दे वांछित कामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्। सिंहरूढाअष्टभुजा कुष्माण्डायशस्वनीम्॥ 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 माता की उपासना में पेठा यानि कुम्हड़े की बलि का खास महत्व है। इनकी बलि से माता प्रसन्न होती हैं। माता को प्रसाद स्वरूप सूखे मेवे का भोग लगाएं।

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