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Mita Vadiwala
Mita Vadiwala Apr 14, 2019

🌿Shri Shiv Chalisa🌿🌷Om Namah Shivay🌷Om Gaurishankaray Namah🌷Om Shri Ganeshay Namah🌷Har Har Mahadev🌷🙏🙏 🌹Good Morning 🌞 🌻🌹Have A Great n Blessed Monday🌹💐Best wishes for a brilliant week ahead. Take care ! 💐May Bholenath, shower blessings, power, love and strength to you and your family. 💐🙏

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कामेंट्स

Mita Vadiwala Apr 15, 2019
@knpadshala Om Namah Shivay Har Har Mahadev Om Gaurishankaray Namah Shubh Prabhat Sneh Vandan Bhai ji pranamBholenath ji ki krupa aapke pariwar par sada bani rahe esii Shiv ji ko prarthna 🌹Dhanyawad ji🙏🙏

vagaram malviya Patel Apr 15, 2019
ऊं नमः शिवाय हर हर महादेव जी जय श्री भगवान भोलेनाथ जी की 🙏 शुभ वंदनजी सुप्रभात जी 🙏

Mita Vadiwala Apr 15, 2019
@भारतराठौर Om Namah Shivay🌿Har Har Mahadev ji 🙏Shubh Prabhat Bhai Aapka din shubh, mangalmay aur khushiyon se bhara ho. Bhagwan Bholenath ki aseem krupa aap aur aapke pariwar par bani rahe bhai sada sukhi, khush raho. 🌻🌼🌸🏵💐💐

🌲राजकुमार राठोड🌲 Apr 15, 2019
🙏जय श्री हरि 🙏 🙏जय भोलेनाथ🙏 🙏💙जय माता दी💙🙏 #Զเधे_Զเधे ..जी.🌹🌹🌹 ❇️ 🚩जय_श्री_कृष्णा🚩❇️ 🅹

Mita Vadiwala Apr 15, 2019
@rrathod 🙏Om Namo Narayan🙏🙏Jay Bholenath🙏Jay Mata Di🙏Radhe Radhe ji Jay Shri Krishna🌹🌹Shubh Prabhat ji Aapka har pal mangalmay rahe.

Mahendra umraniya Apr 15, 2019
Jay sri Krishna Good morning ji have a beautiful day radhe radhe🌹

Mita Vadiwala Apr 15, 2019
@mahendra1919 Om Namah Shivay Jay Shri Radhe Krishna Good morning ji have a nice Monday God bless you and your family 🙏

Alka Mehta Apr 15, 2019
Har Har mahadev ji God Bless you Good afternoon sister ji 🙏🌹🌹

harpal Bhanot Apr 15, 2019
har har mahadev ji 🌷🌷🌷 very Nice good morning ji my Sister 🙏🏼🙏🏼🙏🏼 have a wanderfull day ji my Sister 😑🌻🙏🏼

Mita Vadiwala Apr 15, 2019
@harpalbhanot Om Namah Shivay🌿Har Har Mahadev ji 🌷🌷Good Night ji Sweet Dreams ji Brother 🌛⭐🌟⭐🌻🌸💐🏵🙏🙏

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Babita Sharma Jul 18, 2019

ॐ नमः शिवाय 🔱 क्यों करते हैं भगवान की आरती? आरती का अर्थ होता है – व्याकुल होकर भगवान को याद करना, उनका स्तवन करना। आरती, पूजा के अंत में धूप, दीप, कर्पूर से की जाती है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। हिंदू धर्म में अग्नि को शुद्ध माना गया है। आरती एक विज्ञान है। आरती के साथ – साथ ढोल – नगाड़े, तुरही, शंख, घंटा आदि वाद्य भी बजते हैं। इन वाद्यों की ध्वनि से रोगाणुओं का नाश होता है। वातावरण पवित्र होता है। दीपक और धूप की सुगंध से चारों ओर सुगंध का फैलाव होता है। पर्यावरण सुगंध से भर जाता है। पूजा में आरती का इतना महत्व क्यों हैं इसका जवाब स्कंद पुराण में मिलता है। इस पुराण में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता, पूजा की विधि नहीं जानता लेकिन सिर्फ आरती कर लेता है तो भगवान उसकी पूजा को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेते हैं। आरती करते हुए भक्त के मान में ऐसी भावना होनी चाहिए, मानो वह पंच-प्राणों की सहायता से ईश्वर की आरती उतार रहा हो। घी की ज्योति जीव के आत्मा की ज्योति का प्रतीक मानी जाती है। यदि भक्त अंतर्मन से ईश्वर को पुकारते हैं, तो यह पंचारती कहलाती है। आरती प्रायः दिन में एक से पांच बार की जाती है। इसे हर प्रकार के धामिक समारोह एवं त्यौहारों में पूजा के अंत में करते हैं। आरती करने का समय 1-मंगला आरती-यह आरती भगवान् को सूर्योदय से पहले उठाते समय करनी चाहिए. 2 श्रृगार आरती-यह आरती भगवान् जी के श्रृंगार,पूजन आदि करने के बाद करनी चाहिए. 3- राजभोग आरती-यह आरती दोपहर को भोग लगाते समय करनी चाहिए,और भगवान् जी की आराम की व्यवस्था कर देनी चाहिए. 4-संध्या आरती-यह आरती शाम को भगवान् जी को उठाते समय करनी चाहिए. 5-शयन आरती -यह आरती भगवान् जी को रात्री में सुलाते समय करनी चाहिए. एक पात्र में शुद्ध घी लेकर उसमें विषम संख्या (जैसे ३, ५ या ७) में बत्तियां जलाकर आरती की जाती है। इसके अलावा कपूर से भी आरती कर सकते हैं। मान्यता अनुसार ईश्वर की शक्ति उस आरती में समा जाती है, जिसका अंश भक्त मिल कर अपने अपने मस्तक पर ले लेते हैं। आरती से वातावरण में मौजूद नकारत्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। आरती के पूर्ण होते ही इस दिव्य व अलौकिक मंत्र को विशेष रूप से बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।। इसका अर्थ इस प्रकार है- कर्पूरगौरं- कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले। करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं। संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं। भुजगेंद्रहारम्- इसका अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं। सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभवानी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है। मंत्र का पूरा अर्थ- जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है। भगवान शिव की ये स्तुति शिव-पार्वती विवाह के समय विष्णुजी द्वारा गाई हुई मानी गई है। अमूमन ये माना जाता है कि शिव शमशान वासी हैं, उनका स्वरुप बहुत भयंकर और अघोरी वाला है। लेकिन, ये स्तुति बताती है कि उनका स्वरुप बहुत दिव्य है। शिव को सृष्टि का अधिपति माना गया है, वे मृत्युलोक के देवता हैं। उन्हें पशुपतिनाथ भी कहा जाता है, पशुपति का अर्थ है संसार के जितने भी जीव हैं (मनुष्य सहित) उन सब का अधिपति। ये स्तुति इसी कारण से गाई जाती है कि जो इस समस्त संसार का अधिपति है, वो हमारे मन में वास करे। शिव श्मशान वासी हैं, जो मृत्यु के भय को दूर करते हैं। हमारे मन में शिव वास करें, मृत्यु का भय दूर हो। ॐ नमः शिवाय 🔱 हर हर महादेव 🌿🌿

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Dalsinghmeena Jul 18, 2019

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Anchal Devi Jul 18, 2019

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Lalan Singh Jul 18, 2019

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neetu mishra Jul 18, 2019

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neetu mishra Jul 18, 2019

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Sanjay Singh Jul 18, 2019

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neetu mishra Jul 18, 2019

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radheshyam das Jul 18, 2019

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