🥀 Preeti Jain 🥀
🥀 Preeti Jain 🥀 Jul 4, 2022

*जिन्दगी हंसाये तो समझना अच्छे कर्मो का फल है,* *जब रुलाये तो समझना अच्छे कर्म करने का समय आ गया।* *आत्म_संतुष्टी* पुराने समय की बात है, एक गाँव में दो किसान रहते थे। दोनों ही बहुत गरीब थे, दोनों के पास थोड़ी थोड़ी ज़मीन थी, दोनों उसमें ही मेहनत करके अपना और अपने परिवार का गुजारा चलाते थे। अकस्मात कुछ समय पश्चात दोनों की एक ही दिन एक ही समय पे मृत्यु हो गयी। यमराज दोनों को एक साथ भगवान के पास ले गए। उन दोनों को भगवान के पास लाया गया। भगवान ने उन्हें देख के उनसे पूछा, ”अब_तुम्हे_क्या_चाहिये, तुम्हारे इस जीवन में क्या कमी थी, और अब तुम्हें क्या बना के मैं पुनः संसार में भेजूं।” भगवान की बात सुनकर उनमे से एक किसान बड़े गुस्से से बोला, ” हे भगवान! आपने इस जन्म में मुझे बहुत कष्टमय ज़िन्दगी दी थी। आपने कुछ भी नहीं दिया था मुझे। पूरी ज़िन्दगी मैंने बैल की तरह खेतो में काम किया है, जो कुछ भी कमाया वह बस पेट भरने में लगा दिया, ना ही मैं कभी अच्छे कपड़े पहन पाया और ना ही कभी अपने परिवार को अच्छा खाना खिला पाया। जो भी पैसे कमाता था, कोई आकर के मुझसे लेकर चला जाता था और मेरे हाथ में कुछ भी नहीं आया। देखो कैसी जानवरों जैसी ज़िन्दगी जी है मैंने।” उसकी बात सुनकर भगवान कुछ समय मौन रहे और पुनः उस किसान से पूछा, ”तो_अब_क्या_चाहते_हो तुम, इस जन्म में मैं_तुम्हे_क्या_बनाऊँ।” भगवान का प्रश्न सुनकर वह किसान पुनः बोला, ”*भगवन आप कुछ ऐसा कर दीजिये, कि मुझे कभी किसी को कुछ भी देना ना पड़े। मुझे_तो_केवल_चारो_तरफ_से_पैसा_ही_पैसा_मिले।”* अपनी बात कहकर वह किसान चुप हो गया। भगवान से उसकी बात सुनी और कहा, *”तथास्तु,* तुम अब जा सकते हो मैं तुम्हे ऐसा ही जीवन दूँगा जैसा तुमने मुझसे माँगा है।” उसके जाने पर भगवान ने पुनः दूसरे किसान से पूछा, ”तुम_बताओ_तुम्हे_क्या_बनना_है, तुम्हारे जीवन में क्या कमी थी, *तुम_क्या_चाहते_हो?”* उस किसान ने भगवान के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा, ”हे_भगवन_आपने_मुझे_सबकुछ_दिया_है मैं_आपसे_क्या_मांगू। आपने मुझे एक अच्छा परिवार दिया, मुझे कुछ जमीन दी जिसपे मेहनत से काम करके मैंने अपना परिवार को एक अच्छा जीवन दिया। खाने के लिए आपने मुझे और मेरे परिवार को भरपेट खाना दिया। मैं और मेरा परिवार कभी भूखे पेट नहीं सोया। बस एक ही कमी थी मेरे जीवन में, जिसका मुझे अपनी पूरी ज़िन्दगी अफ़सोस रहा और आज भी हैं। मेरे दरवाजे पे कभी कुछ भूखे और प्यासे लोग आते थे। भोजन माँगने के लिए, परन्तु कभी कभी मैं भोजन न होने के कारण उन्हें खाना नहीं दे पाता था, और वो मेरे द्वार से भूखे ही लौट जाते थे। ऐसा कहकर वह चुप हो गया।” प्रभुजी_इतना_दीजिये जा_में_कुटुम्ब_समाय ! मैं भी_भूखा_न_रहूँ साधू_भी_भूखा_न_जाये !! भगवान ने उसकी बात सुनकर उससे पूछा, ”तो_अब_क्या_चाहते_हो_तुम, इस जन्म में मैं_तुम्हें_क्या_बनाऊँ।” किसान भगवान से हाथ जोड़ते हुए विनती की, ” हे प्रभु! आप कुछ ऐसा कर दो कि मेरे द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा ना जाये। ”भगवान_ने_कहा, “तथास्तु, तुम_जाओ_तुम्हारे_द्वार_से_कभी_कोई_भूखा_प्यासा_नहीं_जायेगा।” अब दोनों का पुनः उसी गाँव में एक साथ जन्म हुआ। दोनों बड़े हुए। पहला व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था, कि उसे चारो तरफ से केवल धन मिले और मुझे कभी किसी को कुछ देना ना पड़े, वह व्यक्ति उस गाँव का सबसे बड़ा भिखारी बना। अब उसे किसी को कुछ देना नहीं पड़ता था, और जो कोई भी आता उसकी झोली में पैसे डालके ही जाता था। और दूसरा व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था कि उसे कुछ नहीं चाहिए, केवल इतना हो जाये की उसके द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा ना जाये, वह उस गाँव का सबसे अमीर आदमी बना। *कथा_सार👉* मित्रो_ईश्वर_ने_जो_भी_दिया_है_उसी_में_संतुष्ट_होना_बहुत_जरुरी_है। अक्सर देखा जाता है कि सभी लोगों को हमेशा दूसरे की चीज़ें ज्यादा पसंद आती हैं और इसके चक्कर में वो अपना जीवन भी अच्छे से नहीं जी पाते। मित्रों हर बात के दो पहलू होते हैं – सकारात्मक_और_नकारात्मक, अब ये आपकी सोच पर निर्भर करता है कि आप चीज़ों को नकारत्मक रूप से देखते हैं या सकारात्मक रूप से। अच्छा जीवन जीना है तो अपनी सोच को अच्छा बनाइये, चीज़ों में कमियाँ मत निकालिये बल्कि जो भगवान ने दिया है उसका आनंद लीजिये और हमेशा दूसरों के प्रति सेवा भाव रखिये !! मित्रो सब कुछ इकट्ठा भी उन्हीं के पास होता है जो बाँटनां जानते हैं वह चाहे भोजन हो धन हो या मान सम्मान हो !! 🙏🙏 *जो प्राप्त है-पर्याप्त है* *जिसका मन मस्त है* *उसके पास समस्त है!!*

+148 प्रतिक्रिया 75 कॉमेंट्स • 232 शेयर

कामेंट्स

Manoj Gupta AGRA Jul 5, 2022
jai shree radhe krishna ji 🙏🙏🙏🌷🌸💐 shubh prabhat vandan ji 🙏🙏🌷🌸💐🌀 bajrang bali aapko sada prasann rakkhe 🙏🌷🌸💐

pappu jha Jul 5, 2022
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 श्री राम जय हनुमान 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 शुभ प्रभात प्यारी बहना 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹आप का हर पल मंगलमय हो 🌹🌹🌹🌹🌹बजरंगबली की कृपा सदैव आप पर बनी रहे 🌹🌹आप सदा ऐसे ही हंसते मुस्कुराते रहे🌹🌹🌹🌹 आपने बहुत अच्छा पोस्ट किया इस पोस्ट के लिए आपको कोटि-कोटि प्रणाम🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Rama Devi Sahu Jul 5, 2022
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 Jai Bajrangbali Hanuman 🙏 Suprabhat Vandan Jii 🙏 Bahut hi Sundar Bhajan 👌👌🙏🙏🙏🙏

dayaram birla Jul 5, 2022
Jay shri ram Jay bala g maharaj ki shubh prabhat preeti g shubh mangalwar pratah naman 💮💐🌼🌸🌻🏵🌺🌹❤🌹

Ravi Kumar Taneja Jul 5, 2022
*🌹☆राम राम जी ☆🌹* ♧जय जय जय बजरंग बली♧🙏🌺🙏 *🌻मन का शांत रहना 'भाग्य '* *🌻मन का वश में रहना 'सौभाग्य' '* *🌻मन से किसी को याद करना 'अहोभाग्य '* और *🌻मन से कोई याद करे वो है* *' परम सौभाग्य '* *🙏सुप्रभात स्नेह वंदन जी 🙏* *आपका दिन मंगलमय हो👏* 🦚आप हमेशा खुश रहो, स्वस्थ रहो, न केवल अपने लिए बल्कि अपनो के लिए !!!🙏⚘🙏 🦚भूल होना प्रकृति है, मान लेना संस्कृति है, और उसे सोच कर सुधार लेना प्रगति है🙏🌼🙏 *🙏🚩☆जय श्री राम ☆🚩🙏* *सदैव प्रसन्न रहिये!* *जो प्राप्त है,पर्याप्त है!!* 🕉🏹🙏💐🙏🏹🕉

Kanta Jul 5, 2022
jai shree ram jai hanuman 🌹🌹🌹 good morning ji 🌹 bajrangbali ki kripa bni rhe aap pr or aapke pariwar pr 🌹 God bless you Ji 🌹

kamlesh goyal Jul 5, 2022
जय श्री राम जी जय वीर हनुमान जी शुभ प्रभात वंदन जी मेरे राघव की कृपा हनुमान जी का आशीर्वाद आप सभी भाई बहनो पर बना रहे वाकेबिहारी आपके परिवार को सदा खुश रखे आपका दिन मंगलमय हों 💐🌹💐🌹💐🙏💐🌹💐🌹💐

kamlesh goyal Jul 5, 2022
सुबह की राम राम बहन🙏

🙏🙏🌹Sushil Kumar Sharma 🙏🌹 Jul 5, 2022
Good Morning My Sweet Sister ji 🙏🙏 Jay Shree Ram 🙏🙏🌹🌹🌹 Jay Veer Hanuman 🌹🌹 Jay Bhajanvali 🌹🌹 Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🌹🌹🌹 Aapka Har Pal Har Din Shub Mangalmay Ho ji 🌹🌹 Aap Hamesha Khush Rahe ji 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐.

🙏🙏🌹Sushil Kumar Sharma 🙏🌹 Jul 5, 2022
Very Beautiful Line ji 👌👌🙏🙏🌹🌹🌹 Very Beautiful Post ji 👌👌🙏🙏👌👌👌👌👌👌👌💐💐💐💐💐💐My Sweet Sister ji Thanks 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

Gd Bansal Jul 5, 2022
🙏🙏🌹🌹।। जय श्री राम ।।🌹🌹🙏🙏 🙏🙏🌹🌹।। जय श्री हनुमान ।।🌹🌹🙏🙏

Sudha Mishra Jul 5, 2022
Jai Shri Ram Jai Hanuman ji 🙏🌹 Shubh dophar vandan pyari sister ji 🌹 Bhagwan Shri Ram v Rambhakt Hanuman ji ki kripa sada aap v aapke pariwar par bani rahe 🌹 Aapka har pal shubh v mangalmay ho pyari sister ji 🙏🌹

Ashwinrchauhan Jul 5, 2022
जय श्री राम जय बजरंग बली शुभ मंगलवार राम भक्त हनुमान जी की कृपा आप पर आप के पुरे परिवार पर सदेव बनी रहे आप का हर पल मंगल एवं शुभ रहे भगवान श्री राम और सीता माता आप की हर मनोकामना पूरी करे आप का आने वाला दिन शुभ रहे शुभ संध्या वंदन जी जय जिनेन्द जय महावीर जय श्री कृष्ण

Suman Dhaka Jul 5, 2022
*🙏🚩जय श्रीराम 🙏 🚩* *🙏🚩जय श्रीराम 🙏 🚩* जय श्री हनुमान जी*

🥀 Preeti Jain 🥀 Jul 5, 2022
@sumandhaka1 *इस संसार में*🚩🚩 *भूलों को माफ करने की क्षमता*👌🥀🥀 *सिर्फ तीन में है*👌👌🥀🥀 *माँ... महात्मा...और परमात्मा...*🥀🥀 राधे राधे जय श्री कृष्णा कान्हा जी का असीम कृपा हर पल आप पर बना रहे शुभ रात्रि वंदन जय जिनेंद्र जी🌹🥀🙏🙏🍨

*जीवन की खोज-वास्तविक या परछाई* ~~~~~~~~~~~~~ *एक रानी नहाकर अपने महल की छत पर* *बाल सुखाने के लिए गई। उसके गले में एक हीरों का हार था,* *जिसे उतार कर वहीं आले पर रख दिया और बाल संवारने लगी।* *इतने में एक कौवा आया।* *उसने देखा कि कोई चमकीली चीज है, तो उसे लेकर उड़ गया।* *एक पेड़ पर बैठ कर उसे खाने की कोशिश की, पर खा न सका।* *कठोर हीरों पर मारते-मारते चोंच दुखने लगी।* *अंतत: हार को उसी पेड़ पर लटकता छोड़ कर वह उड़ गया।* *जब रानी के बाल सूख गए तो उसका ध्यान अपने हार पर गया,* *पर वह तो वहां था ही नहीं।* *इधर-उधर ढूंढा, परन्तु हार गायब।* *रोती-धोती वह राजा के पास पहुंची,* *बोली कि हार चोरी हो गई है, उसका पता लगाइए।* *राजा ने कहा, चिंता क्यों करती हो,* *दूसरा बनवा देंगे।* *लेकिन रानी मानी नहीं,* *उसे उसी हार की रट थी।* *कहने लगी,नहीं मुझे तो वही हार चाहिए।* *अब सब ढूंढने लगे, पर किसी को हार मिले ही नहीं।* *राजा ने कोतवाल को कहा,* *मुझ को वह गायब हुआ हार लाकर दो।* *कोतवाल बड़ा परेशान*, *कहां मिलेगा?* *सिपाही*, *प्रजा, कोतवाल-* *सब खोजने में लग गए।* *राजा ने ऐलान किया,* *जो कोई हार लाकर मुझे देगा,* *उसको मैं आधा राज्य पुरस्कार में दे दूंगा।* *अब तो होड़ लग गई प्रजा में।* *सभी लोग हार ढूंढने लगे आधा राज्य पाने के लालच में।* *ढूंढते-* *ढूंढते अचानक वह हार किसी को एक गंदे नाले में दिखा।* *हार तो दिखाई दे रहा था,* *पर उसमें से बदबू आ रही थी।* *पानी काला था। परन्तु एक सिपाही कूदा*।*इधर* *उधर* *बहुत हाथ मारा* *पर कुछ नहीं मिला। पता नहीं कहां गायब हो गया।* *फिर कोतवाल ने देखा,* *तो वह भी कूद गया।* *दो को कूदते देखा तो कुछ उत्साही प्रजाजन भी कूद गए।* *फिर मंत्री कूदा।* *तो इस तरह उस नाले में भीड़ लग गई।* *लोग आते रहे और अपने कपडे़ निकाल-निकाल कर कूदते रहे।* *लेकिन हार मिला किसी को नहीं- कोई भी कूदता,* *तो वह गायब हो जाता।* *जब कुछ नहीं मिलता,* *तो वह निकल कर दूसरी तरफ खड़ा हो जाता*। *सारे* *शरीर पर बदबूदार गंदगी,* *भीगे हुए खडे़ हैं।* *दूसरी ओर दूसरा तमाशा, बडे़-बडे़ जाने-माने ज्ञानी, मंत्री सब में होड़ लगी है, मैं जाऊंगा पहले, नहीं मैं तेरा सुपीरियर हूं, मैं जाऊंगा पहले हार लाने के लिए।* *इतने में राजा को खबर लगी। उसने सोचा, क्यों न मैं ही कूद जाऊं उसमें?* *आधे राज्य से हाथ तो नहीं धोना पडे़गा। तो राजा भी कूद गया।* *इतने में एक संत गुजरे उधर से। उन्होंने देखा तो हंसनेलगे, यह क्या तमाशा है?* *राजा, प्रजा,मंत्री, सिपाही - *सब कीचड़ मे लथपथ,* *क्यों कूद रहे हो इसमें?* *लोगों ने कहा, महाराज! बात यह है कि रानी का हार चोरी हो गई है। वहां नाले में दिखाई दे रहा है। लेकिन जैसे ही लोग कूदते हैं तो वह गायब हो जाता है। किसी के हाथ नहीं आता।* *संत हंसने लगे, भाई! *किसी ने ऊपर भी देखा?* *ऊपर देखो, वह टहनी पर लटका हुआ है। नीचे जो तुम देख रहे हो, वह तो उसकी परछाई है। *इस कहानी का क्या मतलब हुआ?* *जिस चीज की हम को जरूरत है,* *जिस परमात्मा को हम पाना चाहते हैं, जिसके लिए हमारा हृदय व्याकुल होता है -वह सुख शांति और आनन्द रूपी हार क्षणिक सुखों के रूप में परछाई की तरह दिखाई देता है और* *यह महसूस होता है कि इस को हम पूरा कर लेंगे। अगर हमारी यह इच्छा पूरी हो जाएगी तो हमें शांति मिल जाएगी, हम सुखी हो जाएंगे। परन्तु जब हम उसमें कूदते हैं, तो वह सुख और शांति प्राप्त नहीं हो पाती* *इसलिए सभी संत-महात्मा हमें यही संदेश देते हैं कि वह शांति, सुख और आनन्द रूपी हीरों का हार, जिसे हम संसार में परछाई की तरह पाने की कोशिश कर रहे हैं, वह हमारे अंदर ही मिलेगा, बाहर नहीं* 🙏🙏 जाग्रत रहें जाग्रत करें

+223 प्रतिक्रिया 82 कॉमेंट्स • 378 शेयर

*आदमी का लालच😜* ----------------------- *एक ट्रक गेंहू के बोरे भरकर मंडी जा रहा था। जंगल का रास्ता उबड़-खाबड़ होने के कारण एक बोरा खिसक कर रास्ते में गिर गया। कुछ ही देर में कुछ चीटियां आई दस बीस दाने ले गयी, फिर कुछ चूहे आये पाव आधा किलो गेहूं खाये और चले गये। कुछ ही देर में पक्षी आये दो चार मुट्ठी दाने चुगे और उड़ गये। कुछ गायें और बकरियां आयी पांच दस किलो गेहूं खाकर चली गयीं। आख़री में एक आदमी आया और वह पूरा बोरा ही उठाकर ले गया। गौर करने वाली बात ये है कि दूसरे प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य कभी न खत्म होने वाली इच्छाओं के लिए जीता है। इसीलिए आदमी के पास सब कुछ होते हुए भी वह सबसे ज्यादा दुखी है। इसलिए जरूरत पुरी हो जाने के बाद इच्छाओं को रोकें, अन्यथा यह बढ़ती ही जायेगी, और आपके दुखों का कारण बनेगी।* *🙏।।सुप्रभात।।🙏 ओम शांति*

+173 प्रतिक्रिया 51 कॉमेंट्स • 78 शेयर

हरि शरणम् ,,,,,,,,,, . क्षीरसागर में एक त्रिकूट नामक एक प्रसिद्ध एवं श्रेष्ठ पर्वत था। . उसकी ऊँचाई आसमान छूती थी। उसकी लम्बाई-चौड़ाई भी चारों ओर काफी विस्तृत थी। . उसके तीन शिखर थे। पहला सोने का। दूसरा चाँदी का तीसरा लोहे का। . इनकी चमक से समुद्र, आकाश और दिशाएँ जगमगाती रहती थीं। इनके अलावा उसकी और कई छोटी चोटियाँ थीं जो रत्नों और कीमती धातुओं से बनी हुई थीं। . पर्वत की तलहटी में तरह-तरह के जंगली जानवर बसेरा बनाए हुए थे। . इसके ऊपर बहुत-सी नदियाँ और सरोवर भी थे। . इस पर्वतराज त्रिकूट की तराई में एक तपस्वी महात्मा रहते थे जिनका नाम वरुण था। . महात्मा वरुण ने एक अत्यन्त सुन्दर उद्यान में अपनी कुटी बनाई थी। इस उद्यान का नाम ऋतुमान था। . इसमें सब ओर अत्यन्त ही दिव्य वृक्ष शोभा पा रहे थे, जो सदा फलों-फूलों से लदे रहते थे। . इस उद्यान में एक बड़ा-सा सरोवर भी था जिसमें सुनहले कमल भी खिले रहते थे . क्षीरसागर से त्रिकूट पर्वत पर एक बार एक दर्दनाक घटना घट गई। . इस पर्वत के घोर जंगल में एक विशाल मतवाला हाथी रहता था। एक—गजराज। वह कई शक्तिशाली हाथियों का सरदार था। . उसके पीछे बड़े-बड़े हाथियों के झुण्ड के झुण्ड चलते थे। . इस गजराज से, उसके महान् बल के कारण बड़े-से-बड़े हिंसक जानवर भी डरते थे , छोटे जीव निर्भय होकर घूमा करते थे क्योंकि उसके रहते कोई भी हिंसक जानवर उस पर आक्रमण करने का साहस नहीं कर सकता था। . गजराज मदमस्त था। उसके सिर के पास से टपकते मद का पान करने के लिए भँवरे उसके साथ गूँजते जाते थे। . एक दिन बड़े जोर की धूप थी। वह प्यास से व्याकुल हो गया। अपने झुण्ड के साथ वह उसी सरोवर में उतर पड़ा जो त्रिकूट की तराई में स्थित था। . जल उस समय अत्यन्त शीतल एवं अमृत के समान मधुर था। . पहले तो उस गजराज ने अपनी सूँड़ से उठा-उठा जी भरकर इस अमृत-सदृश्य जल का पान किया। फिर उसमें स्नान करके अपनी थकान मिटाई। . इसके पश्चात उसका ध्यान जलक्रीड़ा की ओर गया। वह सूँड़ से पानी भर-भर अन्य हाथियों पर फेंकने लगा और दूसरे भी वही करने लगे। . मदमस्त गजराज सब कुछ भूलकर जल-क्रीड़ा का आनन्द उठाता रहा। उसे पता नहीं था कि उस सरोवर में एक बहुत बलवान ग्राह भी रहता था। . उस ग्राह ने क्रोधित होकर उस गजराज के पैर को जोरों से पकड़ लिया और उसे खींचकर सरोवर के अन्दर ले जाने लगा। . उसके पैने दातों के गड़ने से गजराज के पैर से रक्त का प्रवाह निकल पड़ा जिससे वहाँ का पानी लाल हो आया। . उसके साथ के हाथियों और हथिनियों को गजराज की इस स्थिति पर बहुत चिंता हुई। . उन्होंने एक साथ मिलकर गजराज को जल के बाहर खींचने का प्रयास किया किंतु वे इसमें सफल नहीं हुए . वे घबराकर ज़ोर-ज़ोर से चिंघाड़ने लगे। इस पर दूर-दूर से आकर हाथियों के कई झुण्डों ने गजराज के झुण्डों से मिलकर उसे बाहर खींचना चाहा किन्तु यह सम्मिलित प्रयास भी विफल रहा। . सभी हाथी शान्त होकर अलग हो गए। अब ग्राह और गजराज में घोर युद्ध चलने लगा दोनों अपने रूप में काफी बलशाली थे और हार मानने वाले नहीं थे। . कभी गजराज ग्राह को खींचकर पानी से बाहर लाता तो कभी ग्राह गजराज को खींचकर पानी के अन्दर ले जाता . किन्तु गजराज का पैर किसी तरह ग्राह के मुँह से नहीं छूट रहा था बल्कि उसके दाँत गजराज के पैर में और गड़ते ही जा रहे थे और सरोवर का पानी जैसे पूरी तरह लाल हो आया था। . गज और ग्राह के बीच युद्ध कई दिनों तक चला। अन्त में अधिक रक्त बह जाने के कारण गजराज शिथिल पड़ने लगा। उसे लगा कि अब वह ग्राह के हाथों परास्त हो जाएगा। . उसको इस समय कोई उपाय नहीं सूझा और अपनी मृत्यु को समीप पाकर उसे भगवान नारायण की याद आयी। . उसने एक कमल का फूल तोड़ा और उसे आसमान की ओर इस तरह उठाया जैसे वह उसे भगवान को अर्पित कर रहा हो। . अब तक वह ग्राह द्वारा खींचे जाने से सरोवर के मध्य गहरे जल में चला गया था और उसकी सूड़ का मात्र वह भाग ही ऊपर बचा था जिसमें उसने लाल कमल-पुष्प पकड़ रखा था। . उसने अपनी शक्ति को पूरी तरह से भूलकर और अपने को पूरी तरह असहाय घोषित कर नारायण को पुकारा। . भगवान समझ गए कि इसे अपनी शक्ति का मद जाता रहा और वह पूरी तरह से मेरा शरणागत है। . जब नारायण ने देखा कि मेरे अतिरिक्त यह किसी को अपना रक्षक नहीं मानता तो नारायण के ‘ना’ के उच्चारण के साथ ही वह गरुड़ पर सवार होकर चक्र धारण किए हुए सरोवर के किनारे पहुँच गए। . उन्होंने देखा कि गजेन्द्र डूबने ही वाला है। वह शीघ्रता से गरुड से कूद पड़े। . इस समय तक बहुत से देवी-देवता भी भगवान के आगमन को समझकर वहाँ उपस्थित हो गए थे। . सभी के देखते-देखते भगवान ने गजराज और गजेन्द्र को एक क्षण में सरोवर से खींचकर बाहर निकाला। . देवताओं ने आश्चर्य से देखा, उन्होंने सुदर्शन से इस तरह ग्राह का मुँह फाड़ दिया कि गजराज के पैर को कोई क्षति नहीं पहुँची। . ग्राह देखते-देखते तड़प कर मर गया और गजराज भगवान की कृपा-दृष्टि से पहले की तरह स्वस्थ हो गया। . जिस समय गजेन्द्र श्रीनारायण की स्तुति कर रहा था, सरोवर किनारे उपस्थित देवता आपस में भगवान के कृपालु स्वभाव के सम्बन्ध में वार्तालाप कर रहे थे। भगवान विष्णु ने गजेन्द्र का उद्धार कर उसे अपना पार्षद बना लिया। गन्धर्व,सिद्ध और देवगण उनकी लीला का गान करने लगे। गजेन्द्र की स्तुति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने सबके समक्ष कहा- “प्यारे गजेन्द्र ! जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तुम्हारी की हुई स्तुति से मेरा स्तवन करेंगे, उन्हें मैं मृत्यु के समय निर्मल बुद्धि का दान करूँगा।” . उनमें से एक ने ठीक ही कहा— ‘जब तक अपनी शक्ति पर विश्वास करते रहो, ईश्वर की सहायता नहीं मिलती। जब अपने को सर्वथा तुच्छ समझ भगवान की शरण में जाओ तभी वह तत्काल तुम्हारी रक्षा करता है। जीवन में अहंकार को मत आने दो और हमेशा याद रखो प्राणी के महतत्व में उत्पन्न देवत्व और उसके अनुसार आचरण करने वालों को ही देवों की सहायता प्राप्त होती है ! अतः परोपकार का मार्ग अपना कर अपने प्रारब्ध में दूसरों की सहायता का पुण्य संचित करे ! यही असली पूंजी है ! **** हरी शरणम **** 🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷

+230 प्रतिक्रिया 119 कॉमेंट्स • 237 शेयर

+20 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 109 शेयर

+29 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 87 शेयर
Anup Kumar Sinha Jul 31, 2022

+123 प्रतिक्रिया 21 कॉमेंट्स • 44 शेयर

+13 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 63 शेयर
Ravi Kumar Taneja Jul 30, 2022

🌞शुभ प्रभात स्नेह वंदना जी🌞 आपका जीवन मंगलमय हो 🙏 🌼ॐ भास्कराय नमः🙏 🌼ॐ आदित्याय नमः🙏 🌼ॐ भानवे नमः🙏 🌼ॐ प्रभाकराय नमः🙏 🌼ॐ दिवाकराय नमः🙏 🌼ॐ सुर्याय नमः🙏 🌼ॐ दिनेशाय नमः🙏 🌼ॐ अर्काय नमः🙏 🌼ॐ सुर्यदैवाय नमः🙏 🌼ॐ सविताय नमः🙏 🌹☘️🌹☘️🌹☘️🌹 प्रभु सूर्य देव की कृपा से आप स्वस्थ रहे, मस्त रहे, मुस्कुराते रहें, तथा प्रसन्न: रहे🕉🌞🙏🌻🙏🌞🕉 *🌈सबंध को ज्ञान एवं पैसे से भी बड़ा बताया गया है क्योकि,* *🌈जब ज्ञान और पैसा विफल हो जाता है* *🌈तब सबंध से स्थिति सम्भाली जा सकती है मधुर सबंध बनाकर जीवन सार्थक कीजिये!* *🌈लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है!!!* *🌈हीरा बनाया है ईश्वर ने हर किसी को पर चमकता वही है जो तराशने की हद से गुज़रता है!* *🌈मंजिल दूर ही सही पर घबराना मत क्योंकि नदी कभी नहीं पूछती कि समुन्दर अभी कितना दूर है!!!* *आपका दिन मंगलमय हो👏* अपना ध्यान रखें, सुरक्षित रहें,और खुश रहें ना केवल अपने लिए बल्कि अपनो के लिए !!!😊 *सदैव प्रसन्न रहिये!* *जो प्राप्त है,पर्याप्त है!!* 🕉🏹🙏💐🙏🏹🕉

+167 प्रतिक्रिया 46 कॉमेंट्स • 155 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB