shyam Singh tanwal
shyam Singh tanwal Mar 27, 2020

कहानी----- #तिरस्कार_या_मजबूरी ................................. गोपाल किशन जी एक सेवानिवृत अध्यापक हैं । सुबह दस बजे तक ये एकदम स्वस्थ प्रतीत हो रहे थे । शाम के सात बजते-बजते तेज बुखार के साथ-साथ वे सारे लक्षण दिखायी देने लगे जो एक कोरोना पॉजीटिव मरीज के अंदर दिखाई देते हैं । परिवार के सदस्यों के चेहरों पर खौफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था । उनकी चारपाई घर के एक पुराने बड़े से बाहरी कमरे में डाल दी गयी जिसमें इनके पालतू कुत्ते *मार्शल* का बसेरा है । गोपाल किशन जी कुछ साल पहले एक छोटा सा घायल पिल्ला सड़क से उठाकर लाये थे और अपने बच्चे की तरह पालकर इसको नाम दिया *मार्शल* । इस कमरे में अब गोपाल किशन जी , उनकी चारपाई और उनका प्यारा मार्शल हैं ।दोनों बेटों -बहुओं ने दूरी बना ली और बच्चों को भी पास ना जानें के निर्देश दे दिए गये । सरकार द्वारा जारी किये गये नंबर पर फोन करके सूचना दे दी गयी । खबर मुहल्ले भर में फैल चुकी थी लेकिन मिलने कोई नहीं आया । साड़ी के पल्ले से मुँह लपेटे हुए, हाथ में छड़ी लिये पड़ोस की कोई एक बूढी अम्मा आई और गोपाल किशन जी की पत्नी से बोली -"अरे कोई इसके पास दूर से खाना भी सरका दो , वे अस्पताल वाले तो इसे भूखे को ही ले जाएँगे उठा के" । अब प्रश्न ये था कि उनको खाना देनें के लिये कौन जाए । बहुओं ने खाना अपनी सास को पकड़ा दिया अब गोपाल किशन जी की पत्नी के हाथ , थाली पकड़ते ही काँपने लगे , पैर मानो खूँटे से बाँध दिये गए हों । इतना देखकर वह पड़ोसन बूढ़ी अम्मा बोली "अरी तेरा तो पति है तू भी ........। मुँह बाँध के चली जा और दूर से थाली सरका दे वो अपने आप उठाकर खा लेगा" । सारा वार्तालाप गोपाल किशन जी चुपचाप सुन रहे थे , उनकी आँखें नम थी और काँपते होठों से उन्होंने कहा कि "कोई मेरे पास ना आये तो बेहतर है , मुझे भूख भी नहीं है" । इसी बीच एम्बुलेंस आ जाती है और गोपाल किशन जी को एम्बुलेंस में बैठने के लिये बोला जाता है । गोपाल किशन जी घर के दरवाजे पर आकर एक बार पलटकर अपने घर की तरफ देखते हैं । पोती -पोते First floor की खिड़की से मास्क लगाए दादा को निहारते हुए और उन बच्चों के पीछे सर पर पल्लू रखे उनकी दोनों बहुएँ दिखाई पड़ती हैं । Ground floor पर, दोनों बेटे काफी दूर, अपनी माँ के साथ खड़े थे । विचारों का तूफान गोपाल किशन जी के अंदर उमड़ रहा था । उनकी पोती ने उनकी तरफ देखकर उसने bye bye कहा। एक क्षण को उन्हें लगा कि 'जिंदगी ने अलविदा कह दिया' गोपाल किशन जी की आँखें लबलबा उठी । उन्होंने बैठकर अपने घर की देहरी को चूमा और एम्बुलेंस में जाकर बैठ गये । उनकी पत्नी ने तुरंत पानी से भरी बाल्टी घर की उस देहरी पर उलेड दी जिसको गोपाल किशन चूमकर एम्बुलेंस में बैठे थे । इसे तिरस्कार कहो या मजबूरी , लेकिन ये दृश्य देखकर कुत्ता भी रो पड़ा और उसी एम्बुलेंस के पीछे - पीछे हो लिया जो गोपाल किशन जी को अस्पताल लेकर जा रही थी । गोपाल किशन जी अस्पताल में 14 दिनों के अब्ज़र्वेशन पीरियड में रहे । उनकी सभी जाँच सामान्य थी । उन्हें पूर्णतः स्वस्थ घोषित करके छुट्टी दे दी गयी । जब वह अस्पताल से बाहर निकले तो उनको अस्पताल के गेट पर उनका कुत्ता मार्शल बैठा दिखाई दिया । दोनों एक दूसरे से लिपट गये । एक की आँखों से गंगा तो एक की आँखों से यमुना बहे जा रही थी । जब तक उनके बेटों की लम्बी गाड़ी उन्हें लेने पहुँचती तब तक वो अपने कुत्ते को लेकर किसी दूसरी दिशा की ओर निकल चुके थे । उसके बाद वो कभी दिखाई नहीं दिये । आज उनके फोटो के साथ उनकी गुमशुदगी की खबर छपी है अखबार में लिखा है कि सूचना देने वाले को 40 हजार का ईनाम दिया जायेगा । 40 हजार - हाँ पढ़कर ध्यान आया कि इतनी ही तो मासिक पेंशन आती थी उनकी जिसको वो परिवार के ऊपर हँसते गाते उड़ा दिया करते थे । ...........................................🌹🌹shubh ratri 🌹🌹

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Gopal Chandra Porwal May 10, 2020

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vinodkumar mahajan May 8, 2020

माय मंदिर के सभी मान्यवर भक्तों के लिए एक जरूरी एवं अत्यावश्यक सुचना : - पत्रकार विनोदकुमार महाजन। *कोरोना विशेष* *_अच्छे से समझ लीजिए कम से कम 6 महीना बहुत सावधानी की जरूरत है।_* 1 *सैलून में बाल दाढ़ी बिल्कुल नही बनवाना है, जाना ही नही है उधर।* 2 *ब्यूटी पार्लर भूल जाइए।* 3 *किसी भी शादी विवाह में जाना भूल जाइए।* 4 *किसी भी ऐसी जगह नही जाएं जहाँ 4 से ज्यादा लोग हों। अगर जाना ही पड़े तो मास्क पहनें, और कम से कम किसी से भी 6 फिट की दूरी रखें।* 5 *रेल, बस, टेम्पो की यात्रा भूल जाइए। जाना पड़े तो मास्क पहन कर, 6 फुट दूरी के नियम के साथ।* 6 *नोट रेजकी छू कर साबुन से अच्छे से हाँथ धोएँ।* 7 *सब्जी, फल कच्चा बिल्कुल नही। सलाद भूल जाइए। बाज़ार से कोई भी कटा फल नही लाएं।* 8 *बाज़ार में कुछ भी खाना बिल्कुल बन्द। घर का बना रोटी सब्जी साथ रखना सीख लीजिये।* 9 *किसी भी प्रकार के जुलूस में बिल्कुल नही जाएं।* 10 *हाँथ मिलाना, गले मिलना बिल्कुल बन्द। दूर से नमस्ते।* 11 *किसी का मोबाइल छुएँ भी नही।* *_मुझे आपकी बहुत चिंता है। अपना बहुत बहुत खयाल रखिये। प्रकृति एक नई दुनिया का निर्माण कर रही है। आइये खुशी खुशी इसका स्वागत करें। सावधानी की जरूरत है। भयभीत होने की कोई जरूरत नहीं।_* *कृपया इसे नोट कर लें और अपने सभी परिचितों को भेजें.......*

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Vitthal Pacholi May 9, 2020

*कृपया ध्यान दीजिए* सरकार एक निश्चित समय तक हीं lockdown रख सकती है । धीरे धीरे lockdown खत्म हो जाएगा । सरकार भी इतनी सख्ती नहीं दिखाएगी क्योंकि सरकार ने आपको कोरोना बीमारी के बारे में अवगत करा दिया है, सोशल डिस्टैंसिंग, हैण्ड सेनिटाइजेशन इत्यादि सब समझा दिया है । बीमार होने के बाद की स्थिति भी आप लोग देश में देख हीं रहे हैं । अब जो समझदार है वह आगे लंबे समय तक अपनी दिनचर्या, काम करने का तरीका समझ लें । सरकार 24 घंटे 365 दिन आपकी चौकीदारी नहीं करेगी और न कर सकेगी । इलाज भी अपने खर्च से कराना होगा। निजी चिकित्सक आपका इलाज करेगा अथवा आपसे डरेगा? सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इसकी दवा नही है आपके एवं आपके परिवार का भविष्य आपके हाथ में है । लाॅकडाउन खुलने के बाद सोच समझ कर घर से निकलें एवं काम पर जायें व नियत नियमानुसार हीं अपना कार्य करें । क्या लगता है आपको, 17 मई के बाद एकाएक कोरोना चला जायेगा, हम पहले की तरह जीवन जीने लगेंगे ? नहीं, कदापि नहीं । ये वायरस अब हमारे देश में जड़ें जमा चुका है,हमें इसके साथ रहना सीखना पड़ेगा। कैसे ? सरकार कब तक लॉकडाउन रखेगी ? कब तक बाहर निकलने में पाबंदी रहेगी ? अब हमें स्वयं इस वायरस से लड़ना पड़ेगा, अपनी जीवन शैली में बदलाव करके, अपनी इम्युनिटी स्ट्रांग करके । हमें सैकड़ों साल पुरानी जीवन शैली अपनानी पड़ेगी । शुद्ध आहार लें, शुद्ध मसाले खाएं । आंवला, एलोवेरा, गिलोय, काली मिर्च, लौंग आदि पर निर्भर हों । एन्टी बाइटिक्स के चंगुल से खुद को आज़ाद करें । अपने भोजन में पौष्टिक आहार की मात्रा बढ़ानी होगी, फ़ास्ट फ़ूड, पिज़्ज़ा , बर्गर, कोल्ड्रिंक की भूल जाएं । अपने बर्तनों को बदलना होगा, अल्युमिनियम, स्टील आदि से हमें भारी बर्तन जैसे पीतल, कांसा, तांबा को अपनाना होगा जो प्राकर्तिक रूप से वायरस को भी खत्म करते हैं । अपने आहार में दूध, दही, घी की मात्रा बढ़ानी होगी । भूल जाइए जीभ का स्वाद, तला-भुना मसालेदार, होटल वाला कचरा । कम से कम अगले 7-8 महीनों तक तो ये करना हीं पड़ेगा । तभी हम सरवाइव कर पाएंगे । और जो नहीं बदलेंगे वो मुश्किल मे पड़ जाएंगे । इस बात को मान कर इन पर अमल करना शुरू कर दें । . . . *जिंदगी हमारी फैसला हमारा* jay RCM

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Vitthal Pacholi May 9, 2020

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Akhil Gupta May 10, 2020

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