हिंदी दिवस पर

हिंदी दिवस पर

हिंदी दिवस पर

बचपन से जाना है हिंदी
भारत के भाल की बिंदी है।


राष्ट्र की खास पहचान
हिंदी भाषी अपना नाम
गोरो ने जो छोड़ी धरोहर
उसके आगे हुई चिंदी है।


हिंदी भाषा नहीं भाव है
संस्कृति हमारी चाव है
सबको एक सूत्र में जोड़े
कश्मीरी हो या सिंधी है।


न रोटी न मान है मिलता
शर्म से शीश नवाये छिपता
सभ्य असभ्य के बीच दीवार
खींचे जो रेखा अपनी हिंदी है


बूढ़ी हो गयी है राष्ट्रभाषा
पूछ रहे अंतिम अभिलाषा
पुण्य तिथि पर करेंगें याद
सबसे प्यारी अपनी हिंदी थी।


न जाने अंग्रेजी तो अपमान है
देश में हिंदी की कैसी  शान है
न लौटेगें दिन वो सुनहरे फिर
जब कभी गर्व से कह पाये हम
हिंदी भारत के भाल की बिंदी है।

      जय श्री राधे

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कामेंट्स

Ratan Verma Apr 4, 2020

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ssntosh kumar Apr 4, 2020

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gopal jalan Apr 4, 2020

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namrta chhbra Apr 4, 2020

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