Meena dhiman
Meena dhiman Nov 11, 2017

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Vanita Kale Apr 2, 2020

🚩🔔राम नवमी और दुगाँ नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🚩जय माता दी 🚩जय श्री राम जय राम जय राम जय राम जय राम जय राम जय राम जय हनुमान 🚩🚩🙏 *आप सभी को रामनवमी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ!* *मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि आप व आपका परिवार सदैव सुख समृद्ध खुशहाल रहे!*माता रानी और मर्यादा पुरुषोत्तम जी की करो ना वायरस जड़ से खत्म कर दो और सभी को स्वस्थ जीवन प्रदान करो श्री रामचंद्र भगवान की जय🚩🚩🚩🚩🚩🚩जय माता दी जय श्री राम जय हनुमान जी 👏🙏🔔🔔🚩🚩🔔🔔🔔🚩🚩 *सुख, शान्ति एवम समृध्दि की मंगलमयी कामनाओं के साथ* *रामनवमी पर्व #🙏राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं !!* 🚩🎈🎂🎂🎈Happy Birthday Bagvaan Ram ji 🎈🎈🎂🎂🎂🎈🎈🎂 *आपका दिन शुभ व मंगलमय हो*🙏🔔मेरे सभी भाइयों आैर बहनाे काे दुगाँ नवमी और राम नवमी की ढेर सारी शुभकामनाएं 🔔🚩👣👣जय श्री राम 👏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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sheela sharma Apr 2, 2020

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krishanlal Apr 2, 2020

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Manoj Pant Apr 2, 2020

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🚩राम नवमी कथा प्रभु राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां थीं। किन्तु किसी रानी से संतान की प्राप्ति नही हुई। तत्पश्चात, राजा दशरथ ने पुत्र पाने की इच्छा अपने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ से बताई। महर्षि वशिष्ठ ने विचार कर ऋषि श्रृंगी को आमंत्रित किया। ऋषि श्रृंगी ने राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करने का प्रावधान बताया। ऋषि श्रृंगी के निर्देशानुसार राजा दशरथ ने यज्ञ करवाया जब यज्ञ में पूर्णाहुति दी जा रही थी उस समय अग्नि कुण्ड से अग्नि देव मनुष्य रूप में प्रकट हुए तथा अग्नि देव ने राजा दशरथ को खीर से भरा कटोरा प्रदान किया। तत्पश्चात ऋषि श्रृंगी ने बताया हे राजन, अग्नि देव द्वारा प्रदान किये गए खीर को अपनी सभी रानियों को प्रसाद रूप में दीजियेगा। राजा दशरथ ने वह खीर अपनी तीनो रानियों कौशल्या, कैकेयी एवम सुमित्रा में बांट दी। प्रसाद ग्रहण के पश्चात निश्चित अवधि में अर्थात चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की नवमी को राजा दशरथ के घर में माता कौशल्या के गर्भ से राम जी का जन्म हुआ तथा कैकेयी के गर्भ से भरत एवं सुमित्रा के गर्भ से लक्ष्मण तथा शत्रुधन का जन्म हुआ। राजा दशरथ के घर में चारो राजकुमार एक साथ समान वातावरण में पलने लगे। राम जन्म की ख़ुशी में उसी समय से राम भक्त रामनवमी पर्व मनाते है। राम नवमी पौराणिक मान्यताएं, कथा श्री रामनवमी की कहानी लंकाधिराज रावण से शुरू होती है। रावण अपने राज्यकाल में बहुत अत्याचार करता था। उसके अत्याचार से पूरी जनता त्रस्त थी, यहां तक की देवतागण भी, क्योंकि रावण ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान ले लिया था। उसके अत्याचार से तंग होकर देवतागण भगवान विष्णु के पास गए और प्रार्थना करने लगे। फलस्वरूप प्रतापी राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या की कोख से भगवान विष्णु ने राम के रूप में रावण को परास्त करने हेतु जन्म लिया। तब से चैत्र की नवमी तिथि को रामनवमी के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। ऐसा भी कहा जाता है कि नवमी के दिन ही स्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना शुरू की थी।

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Sanjay Singh Apr 2, 2020

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Sidhartha Shukla Apr 2, 2020

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