SAYAJI DUS
SAYAJI DUS Dec 20, 2016

NARSINGH MANDIR TAMBAVE(NARSINGPUR)DISTRICT SANGLI,MAHARASHTRA

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Mahesh Malhotra Sep 25, 2020

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हीरा Sep 25, 2020

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Daksha Vaishya Sep 25, 2020

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गारी खायगो अरे गंवार ? ऐसी कौन सिखाई तोहे,पकरत आप पराई नार? जा जा गोरस ले पिवैया,कौन है तू मग रोकनहार? एती बरजोरी न कीजै,मोहन सीख दई सत बार।। खीजि मटुकिया झटकी सुपटकी,गोरस बहि-बहि चल्यो पनार। "रसखान"के प्रभु आज जान दैं,कल आऊंगी यहै करार।। कोई गोपी दही बेचने के लिए जा रही थी, रास्ते में कृष्ण मिल गये और छेड़खानी करने लगे।इस पर गोपी ने कहा कि हे धूर्त कृष्ण! तुम मुझसे छेड़खानी क्यों करते हो? क्या तुम मुझसे गाली खाना चाहते हो? तुम्हें पराई स्त्री को छेड़ने की शिक्षा किसने दी? जाओ यहां से चले जाओ, तुम जैसे दही खाने वाले अनेक देखे हैं।मेरा रास्ता रोकने वाले होते कौन हो।हे मोहन! मैं तुमको सैकड़ों बार समझा चुकी हूं कि तुम्हारी ऐसी छीना-झपटी करना ठीक नहीं है। यह सुनकर कृष्ण को क्रोध आ गया और उन्होंने उस गोपी की दही की मटकी झटक कर पृथ्वी पर फेंक दी जिससे वह फूट गयी और दही नाली में बह-बहकर चलने लगी। तब गोपी ने उनसे प्रार्थना की,कि हे रसखान के प्रभु!आज तो मुझे जाने दो। मैं वचन देती हूं कि कल अवश्य आऊंगी।

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manoj sawlani Sep 25, 2020

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हीरा Sep 25, 2020

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Mahaveer Sep 25, 2020

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