RaM DeeWaNa
RaM DeeWaNa May 10, 2020

❤Mother's Day Shubhratri status❤❤Apni Mother ko jaroor Bheje ❤ Swami narayan apka mangal he mangal Kare jai shri RaM ji 🙏🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹 Maa jagdmbey bhawani apki HaR. Manokamna poori Kare. 🍫🌹🌺🍫🌹🌺🍫🌹🌺🍫🌹🌺 💕shubhratri ji😎 🍫❤Happy Mother's Day ❤🍫

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कामेंट्स

Brajesh Sharma May 10, 2020
आप सभी को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ और मंगल मय बधाई यूँ ही नही गूंजती किलकारियां, घर आंगन के हर कोनें में.! जान हथेली पर रखनी पड़ती है, "माँ" को "माँ" होने में.!! जय श्री राधे कृष्णा जी... राधे राधे जी.... शुभ रात्रि वंदन जी🙏🌼

Mamta Chauhan May 10, 2020
Radhe Radhe ji 🙏shubh ratri vabdan bhai ji happy mother's day ki hardik shubhkamnaye Bhai ji 👌👌🌿🌷🙏🌷🌷🙏

Rk Soni(Ganesh Mandir) May 10, 2020
good night ji💓💓💓 radhe krishna ji🙏🙏🙏 v.nice post ji👌👌👌👌👌🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Rk Soni(Ganesh Mandir) May 10, 2020
good night ji💓💓💓 radhe krishna ji🙏🙏🙏 v.nice post ji👌👌👌👌👌🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Rk Soni(Ganesh Mandir) May 10, 2020
good night ji💓💓💓 radhe krishna ji🙏🙏🙏 v.nice post ji👌👌👌👌👌🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Vinod Agrawal May 10, 2020
🌷Jai Shree Ram Jai Siyaram Jai Shree Radhe Krishna🌷

Preeti jain May 10, 2020
🌾🍂🍃🥀🌹🙏jai shree krishna ji radhe radhe Kanha ji ka Aseem kripa sada aap aur aap ke family pe bani rahe 🐾💐🌼🍁🍃🥀🙏aap ka har pal Shubh aur mangalmay Ho shubh ratri vandan Aap ka har pal khushiyon bhara Ho Radhe Radhe 🌹🙏🌿🌿🌹🐾🐾💐🌼🍁🍃🍃🥀🙏🙏🙏🌹🌹🌹

Vijay Pandey May 10, 2020
जय श्री स्वामी नारायण ‌🌷🙏 शुभ रात्रि की शुभ मंगल कामनाएं भाई माता पिता के आशीर्वाद से आपके घर परिवार में सुख शांति समृद्धि और आरोग्यता हमेशा बनी रहे, मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ‌🌷🙌

Anju Mishra May 10, 2020
जय श्री राम 🙏 शुभ रात्रि भाई

🙏🅰️NJ🅰️LI🌹Ⓜ️ISH®️🅰️🙋 May 10, 2020
🙏 जय श्री राधे कृष्णा राधे राधे भाई जी👏 🌹🌹🙏🌹🌹 जिंदगी में ऊपर वाले से इतना जरूर मांग लेना.. कि ''माँ के बिना कोई घर ना हो और कोई माँ बेघर ना हो''🙏 💅💅💅💅💅💅💅💅 मातृ दिवस पर सभी माताओं को हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🌹👏 🙏ॐ सूर्याय नमः🚩 🌞 भगवान सूर्य नारायण की कृपा से आपके घर परिवार में सुख शांति, आरोग्यता हमेशा बनी रहे इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि वंदन आदरणीय भाई जी 💐👏👏

rAj May 11, 2020
!!जय स्वामीनारायण!!

RaM DeeWaNa May 9, 2020

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🎎🌺🕯️महाराणा प्रताप की जयन्ती🕯️🌺🎎 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🙏🕯️⛲शुभरात्रि⛲🕯️🙏 🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️ 🏵️🌲🌹शुभ शनिवार🌹🌲🏵️ 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 *महाराणा प्रताप की जयन्ती पर शत नमन* नाम - कुँवर प्रताप सिंह जी {श्री महाराणा प्रतापसिंह जी} जन्म - 9 मई, 1540 ई. जन्म भूमि - राजस्थान कुम्भलगढ़ पुन्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई. पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी माता - राणी जीवत कँवर जी राज्य सीमा - मेवाड़ शासन काल - 1568–1597ई. शा. अवधि - 29 वर्ष वंश - सुर्यवंश राजवंश - सिसोदिया राजघराना - राजपूताना धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध राजधानी - उदयपुर पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह जी उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह जी अन्य जानकारी - श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था, जिसका नाम 'चेतक' था। "राजपूत शिरोमणि श्री महाराणा प्रतापसिंह जी" उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि परमेवाड़-मुकुट मणि राणा प्रताप जी का जन्म हुआ। श्री प्रताप जी का नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। श्री महाराणा प्रतापजी की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। 🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️ 🌹श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के बारे में कुछरोचक जानकारी :- 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 1... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी एकही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे। 2.... जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थेतब उन्होने अपनी माँ सेपूछा कि हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर आए| तब माँ का जवाब मिला ” उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकरआना जहाँ का राजा अपनी प्रजा केप्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ” बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था | “बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु एस ए ‘किताब में आप ये बात पढ़ सकते है | 3.... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के भाले का वजन 80 किलो था और कवच का वजन 80 किलो कवच , भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाये तो 207 किलो था। 4.... आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं | 5.... अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी पर श्री महाराणा प्रताप जी ने किसी की भी आधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया | 6.... हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए | 7.... श्री महाराणा प्रताप जी के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुवा हैं जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है | 8.... श्री महाराणा प्रताप जी ने जब महलो का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगो ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा जी कि फौज के लिए तलवारे बनायीं इसी समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गड़लिया लोहार कहा जाता है मै नमन करता हूँ एसे लोगो को | 9.... हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें पायी गयी। आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला | 10..... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी अस्त्र शस्त्र की शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी जो 8000 राजपूत वीरो को लेकर 60000 से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे | 11.... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था | 12.... मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था वो श्री महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा जी बिना भेद भाव के उन के साथ रहते थे आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत है तो दूसरी तरफ भील | 13..... राणा जी का घोडा चेतक महाराणा जी को 26 फीट का दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहा वो घायल हुआ वहीं आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है जहाँ पर चेतक की म्रत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है | 14..... राणा जी का घोडा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमीत करने के लिए हाथी की सूंड लगाई जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे | 15..... मरने से पहले श्री महाराणाप्रताप जी ने अपना खोया हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और महलो को छोड़ वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में घूमे | 16.... श्री महाराणा प्रताप जी का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5” थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ मे। 🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀 🎎 महाराणा प्रताप के हाथी की कहानी।:--- *********************************** मित्रो आप सभी ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन उनका एक हाथी भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हूं रामप्रसाद हाथी का उल्लेख अल- बदायुनी ने जो मुगलों की ओर से हल्दीघाटी के युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है। वो लिखता है की जब महाराणा प्रताप पर अकबर ने चढाई की थी तब उसने दो चीजो को ही बंदी बनाने की मांग की थी एक तो खुद महाराणा और दूसरा उनका हाथी रामप्रसाद। आगे अल बदायुनी लिखता है की वो हाथी इतना समझदार व ताकतवर था की उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था और वो लिखता है की: उस हाथी को पकड़ने के लिए हमने 7 बड़े हाथियों का एक चक्रव्यूह बनाया और उन पर 14 महावतों को बिठाया तब कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये। अब सुनिए एक भारतीय जानवर की स्वामी भक्ति। उस हाथी को अकबर के समक्ष पेश किया गया जहां अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा। रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने और पानी दिया। पर उस स्वामिभक्त हाथी ने 18 दिन तक मुगलों का नही तो दाना खाया और ना ही पानी पीया और वो शहीद हो गया। तब अकबर ने कहा था कि;- जिसके हाथी को मै मेरे सामने नहीं झुका पाया उस महाराणा प्रताप को क्या झुका पाउँगा। ऐसे ऐसे देशभक्त चेतक व रामप्रसाद जैसे तो यहाँ जानवर थे। इसलिए मित्रो हमेशा अपने भारतीय होने पर गर्व करो। फीका पड़ता था तेज सूरज का, जब तू माथा ऊचा करता था, थी तुझमे कोई बात राणा, अकबर भी तुझसे डरता था ।। 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

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*प्राचीनकाल में गोदावरी नदी के किनारे वेदधर्म मुनि का आश्रम था। एक दिन गुरुजी ने अपने शिष्यों से कहा की- शिष्यों! अब मुझे कोढ़ निकलेगा और मैं अंधा भी हो जाऊँगा, इसिलिए काशी में जाकर रहूँगा। है कोई शिष्य जो मेरे साथ रह कर सेवा करने के लिए तैयार हो ? सब चुप हो गये। उनमें संदीपनी ने कहा- गुरुदेव! मैं आपकी सेवा में रहूँगा। गुरुदेव ने कहा इक्कीस वर्ष तक सेवा के लिए रहना होगा। संदीपनी बोले इक्कीस वर्ष तो क्या मेरा पूरा जीवन ही अर्पित है आपको। वेदधर्म मुनि एवं संदीपन काशी में रहने लगे । कुछ दिन बाद गुरु के पूरे शरीर में कोढ़ निकला और अंधत्व भी आ गया । शरीर कुरूप और स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया । संदीपनी के मन में लेशमात्र भी क्षोभ नहीं हुआ । वह दिन रात गुरु जी की सेवा में तत्पर रहने लगा । गुरु को नहलाता, कपड़े धोता, भिक्षा माँगकर लाता और गुरुजी को भोजन कराता । गुरुजी डाँटते, तमाचा मार देते... किंतु संदीपनी की गुरुसेवा में तत्परता व गुरु के प्रति भक्तिभाव और प्रगाढ़ होता गया।* *गुरु निष्ठा देख काशी के अधिष्ठाता देव विश्वनाथ संदीपनी के समक्ष प्रकट होकर बोले- तेरी गुरुभक्ति देख कर हम प्रसन्न हैं । कुछ भी वर माँग लो । संदीपनी गुरु से आज्ञा लेने गया और बोला भगवान शिवजी वरदान देना चाहते हैं, आप आज्ञा दें तो आपका रोग एवं अंधेपन ठीक होने का वरदान मांग लूँ ? गुरुजी ने डाँटा,बोले- मैं अच्छा हो जाऊँ और मेरी सेवा से तेरी जान छूटे यही चाहता है तु ? अरे मूर्ख ! मेरा कर्म कभी-न-कभी तो मुझे भोगना ही पड़ेगा । संदीपनी ने भगवान शिवजी को वरदान के लिए मना कर दिया। शिवजी आश्चर्यचकित हो गये और गोलोकधाम पहुंच के श्रीकृष्ण से पूरा वृत्तान्त कहा। श्रीकृष्ण भी संदीपनी के पास वर देने आये। संदीपनी ने कहा- प्रभु! मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप मुझे यही वर दें कि गुरुसेवा में मेरी अटल श्रद्धा बनी रहे।* *एक दिन गुरुजी ने संदीपनी को कहा कि- मेरा अंत समय आ गया है। सभी शिष्यों से मिलने की इच्छा है । संदीपनी ने सब शिष्यों को सन्देश भेज दिया। सारे शिष्य उनके दर्शन के लिए आये। गुरुजी ने सभी शिष्यों कुछ न कुछ दिया । किसी को पंचपात्र, किसी को आचमनी , किसी को आसन किसी को माला दे दी । जब संदीपनी का आये तो सभी वस्तुएं समाप्त हो चुकी थी । गुरुजी चुप हो गए,फिर बोले कि मैं तुम्हे क्या दूँ ? तुम्हारी गुरूभक्ति के समान मेरे पास देने के लिए कुछ भी नहीं है । मैं तुम्हें यह वर देता हूँ कि- त्रिलोकी नाथ का अवतार होने वाला है, वह तुम्हारे शिष्य बनेंगे । संदीपनी के लिए इससे बड़ी भेंट और क्या होती । उन्होंने गुरूजी की अंत समय तक सेवा की। जब श्रीकृष्ण अवतार हुआ तो गुरुजी के दिए उस वरदान को फलीभूत करने के लिए स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दूर उज्जैन में स्थित संदीपनी ऋषि के आश्रम में भ्राता बलराम जी के साथ आए और संदीपनी ऋषि के शिष्य बने... ऐसी है गुरुभक्ति की शक्ति। इसिलिए गुरुभक्ति ही सार है... राधे राधे...संगृहीत कथा*🙏🚩

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Anju Mishra May 10, 2020

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Poonam Aggarwal May 10, 2020

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