TR Madhavan
TR Madhavan Jan 6, 2018

सादर प्रणाम - हृदय पुर्वक धन्यवाद ।

सादर प्रणाम - हृदय पुर्वक धन्यवाद ।

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pragneshtrivedi0432 Jan 6, 2018
CONGRATULATIONS SAR ABHINANDAN GOOD EVENING RADHE RADHE JI HAR HAR MAHADEV 🌹💐💐💐💐🌹👍🙏

TR Madhavan Jan 6, 2018
इस पोस्ट को फीचर लिकं मे पेश करने के लिए "टीम मय मंदिर" को मेरा सादर प्रणाम - हृदय पुर्वक धन्यवाद ।

dheeraj patel Jan 6, 2018
सर जी यह पोट को केसे डाउनलोड करना चाहिये 🌹🙏🌹

TR Madhavan Jan 6, 2018
@dheerajpatel11 आप डाउनलोड नहीं कर सकते । आप के फोन पर स्क्रीन शाठ का सूविदा हैं थो 3 अलग अलग शाठ लीजिए और एडिटिंग कर पोस्ट कीजिए ।

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Rammurti Gond Mar 27, 2020

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Naresh Jain Mar 27, 2020

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Neha Sharma, Haryana Mar 27, 2020

☘️🌹🙏🚩*जय माता दी* 🚩🙏🌹☘️ 🙏🌹👣👣👣👣👣👣👣👣👣🌹🙏 *स्मरण करो तो मन संवर जाए, *सेवा करो तो तन संवर जाए, *भक्ति करो तो जीवन सफल हो जाये, *कितनी दिलकश है ईश्वर की बातें, *अमल करो तो जिंदगी संवर जाए। ☘️💫🙏*शुभ प्रभात् नमन*🙏💫☘️ 🌹🙏🚩*शुभ शुक्रवार* 🚩🙏🌹 *आप सभी भाई-बहनों का दिन शुभ व मंगलमय हो* ♻️💨♻️💨♻️💨♻️💨♻️💨♻️ चैत्र नवरात्रि के तृतीय दिन माँ चंद्रघंटा पूजन की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ *🚩 जानिए क्यों मनाई जाती है नवरात्रि और कैसे करें शक्ति की उपासना*🌹🌹 *🚩नवरात्रि के नौ दिनों में देवीतत्त्व अन्य दिनों की तुलना में एक सहस्र गुना अधिक सक्रिय रहता है । इस कालावधि में देवीतत्त्व की अतिसूक्ष्म तरंगें धीरे-धीरे क्रियाशील होती हैं और पूरे ब्रह्मांड में संचारित होती हैं । उस समय ब्रह्मांड में शक्ति के स्तर पर विद्यमान अनिष्ट शक्तियां नष्ट होती हैं और ब्रह्मांड की शुद्धि होने लगती है । देवीतत्त्व की शक्ति का स्तर प्रथम तीन दिनों में सगुण-निर्गुण होता है । उसके उपरांत उसमें निर्गुण तत्त्वकी मात्रा बढ़ती है और नवरात्रि के अंतिम दिन इस निर्गुण तत्त्वकी मात्रा सर्वाधिक होती है । निर्गुण स्तर की शक्ति के साथ सूक्ष्म स्तर पर युद्ध करने के लिए छठे एवं सातवें पाताल की बलवान आसुरी शक्तियों को अर्थात मांत्रिकों को इस युद्ध में प्रत्यक्ष सहभागी होना पड़ता है । उस समय ये शक्तियां उनके पूरे सामर्थ्य के साथ युद्ध करती हैं ।* *इस वर्ष चैत्री नवरात्रि25 मार्च से 2 अप्रैल तक हैं।* *🚩नवरात्रि की कालावधि में महाबलशाली दैत्यों का वध कर देवी दुर्गा महाशक्ति बनी । देवताओं ने उनकी स्तुति की । उस समय देवीमां ने सर्व देवताओं एवं मानवों को अभय का आशीर्वाद देते हुए वचन दिया कि* *इत्थं यदा यदा बाधा दानवोत्था भविष्यति ।* *तदा तदाऽवतीर्याहं करिष्याम्यरिसंक्षयम् ।।* *– मार्कंडेयपुराण 91.51* *🚩इसका अर्थ है, जब-जब दानवोंद्वारा जगत्को बाधा पहुचेगी, तब-तब मैं अवतार धारण कर शत्रुओं का नाश करूंगी ।* *🚩नवरात्र का उत्सव श्रद्धा और सबुरी के रंग में सराबाेर होता है। नवरात्र के दिनों में भक्त देवी माँ के प्रति विशेष उपासना प्रकट करते हैं। नवरात्र के दिनों में लोग कई तरह से माँ की उपासना करते हैं। माता के इस पावन पर्व हर कोई उनकी अनुकंपा पाना चाहता है। नवरात्र का यह पावन त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है। इसका भी एक खास महत्व है। वैसे तो माँ दुर्गा की उपासना के लिए सभी समय एक जैसे हैं और दोनों नवरात्रि का प्रताप भी एक जैसा है। साथ ही दोनों नवरात्र में माँ की पूजा करने वाले भक्तों को उनकी विशेष अनुकंपा भी प्राप्त होती है।* *● एक वर्ष में कितनी बार पड़ते हैं नवरात्रि*🌹🌹 *🚩कम लोगों को ज्ञात होगा कि एक साल में नवरात्र के 4 बार पड़ते हैं। साल के प्रथम मास चैत्र में पहली नवरात्र होती है, फिर चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्र पड़ती है। इसके बाद अश्विन माह में में प्रमुख शारदीय नवरात्र होती है। साल के अंत में माघ माह में गुप्त नवरात्र होते हैं। इन सभी नवरात्रों का जिक्र देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है। हिंदी कैलेंडर के हिसाब से चैत्र माह से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है, और इसी दिन से नवरात्र भी शुरू होते हैं, लेकिन सर्वविदित है कि चारों में चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रमुख माने जाते हैं। एक साल में यह दो नवरात्र मनाए जाने के पीछे की वजह भी अलग-अलग तरह की है। आइए हम आपको नवरात्र का उत्सव साल में दो बार मनाने के पीछे आध्यात्मिक, प्राकृतिक और पौराणिक कारणों के बारे में बताते हैं।* *● क्या है प्राकृतिक कारण*🌹🌹 *🚩नवरात्रि का पर्व दो बार मनाने के पीछे अगर प्राकृतिक कारणों की बात की जाए तो हम पाएंगे कि दोनों नवरात्र के समय ही ऋतु परिवर्तन होता है। गर्मी और शीत के मौसम के प्रारंभ से पूर्व प्रकृति में एक बड़ा परिवर्तन होता है। माना जाता है कि प्रकृति माता की इसी शक्ति के उत्सव को आधार मानते हुए नवरात्रि का पर्व हर्ष, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं ही इन दोनों समय काल पर ही नवरात्रि के उत्सव के लिए तैयार रहती है तभी तो उस समय न मौसम अधिक गर्म न अधिक ठंडा होता है। खुशनुमा मौसम इस पर्व की महत्ता को और बढ़ाता है।* *● ये है भौगोलिक तथ्य*🌹🌹 *🚩अगर भौगोलिक आधार पर गौर किया जाए तो मार्च और अप्रैल के जैसे ही, सितंबर और अक्टूबर के बीच भी दिन और रात की लंबाई के समान होती है। तो इस भौगोलिक समानता की वजह से भी एक साल में इन दोनों नवरात्रि को मनाया जाता है। प्रकृति में आए इन बदलाव के चलते मन तो मन हमारे दिमाग में भी परिवर्तन होते हैं। इस प्रकार नवरात्र के दौरान व्रत रखकर शक्ति की पूजा करने से शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है।* *● यह है पौराणिक मान्यता*🌹🌹 *🚩नवरात्रि का त्योहार साल में दो बार मनाए जाने के पीछे प्राचीन कथाओं का उल्लेख भी पुराणों में मिलता है। माना जाता है कि पहले नवरात्रि सिर्फ चैत्र नवरात्र होते थे जो कि ग्रीष्मकाल के प्रारंभ से पहले मनाए जाते थे, लेकिन जब श्रीराम ने रावण से युद्ध किया और उनकी विजय हुई। विजयी होने के बाद वो माँ का आशीर्वाद लेने के लिए नवरात्रि की प्रतीक्षा नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने एक विशाल दुर्गा पूजा आयोजित की थी। इसके बाद से नवरात्रि का पर्व दो बार मनाते हैं।* *● अध्यात्म कहता है*🌹🌹 *🚩अगर एक साल में दो नवरात्र मनाने के पीछे के आध्यात्मिक पहलू पर प्रकाश डालें तो जहाँ एक नवरात्रि चैत्र मास में गर्मी की शुरुआत में आती है तो वहीं दूसरी सर्दी के प्रारंभ में आती है। गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में आने वाली सौर-ऊर्जा से हम सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि यह फसल पकने की अवधि होती है। मनुष्य को वर्षा, जल, और ठंड से राहत मिलती है। ऐसे जीवनोपयोगी कार्य पूरे होने के कारण दैवीय शक्तियों की आराधना करने के लिए यह समय सबसे अच्छा माना जाता है।* ● रामनवमी से है संबंध*🌹🌹 *🚩मान्यता है कि रावण से युद्ध से पहले भगवान श्रीराम ने माता शक्ति की पूजा रखवाई थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीराम ने रावण के साथ युद्ध पर जाने से पूर्व अपनी विजय की मनोकामना मानते हुए माँ के आशीर्वाद लेने के लिए विशाल पूजा का आयोजन करवाया था। कहा जाता है कि राम देवी के आर्शीवाद के लिए इतना इतंजार नहीं करना चाहते थे और तब से ही प्रतिवर्ष दो बार नवरात्रि का आयोजन होता है। जहाँ शारदीय नवरात्र में यह सत्य की असत्य पर व धर्म की अधर्म पर जीत का स्वरूप माना जाता है, वहीं चैत्रीय नवरात्र में इसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव या रामनवमी के नाम से जानते हैं।* *🚩नवरात्रि का व्रत धन-धान्य प्रदान करनेवाला, आयु एवं आरोग्यवर्धक है। शत्रुओं का दमन व बल की वृद्धि करनेवाला है ।* *🚩इस साल कोरोना वायरस का जिस तरह पूरे देश में प्रकोप चल रहा है, उसको शांत करने के लिए भी माँ आद्यशक्ति जगदंबा की नौ दिन की उपासना सहायता करेगी।* 🌹🌹जय माता दी ,जय मां चन्द्रघंटा🌹🌹 🌹🌹शुभ शुक्रवार, सुप्रभात जी।🌹🌹 🙏🏼 मां चन्द्रघंटा की कृपादृष्टि आप एवं आपके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहे।आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼 मां चंद्रघंटा का स्वरूप सौम्यता एवं शांति से भरा-पूरा है, मां चंद्रघंटा और इनकी सवारी शेर दोनों का शरीर सदैव ही सोने की तरह चमकता है मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा परम शांतिदायक और कल्याणकारी हैं। इस रूप से माता देवगण, संतों एवं भक्त जन के मन को संतोष प्रदान करती हैं। : चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है। नौ दिनों तक चलने वाली नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा राक्षसों का वध करने के लिए जानी जाती हैं। मान्यता है कि वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं इसलिए उनके हाथों में धनुष, त्रिशूल, तलवार और गदा होता है। देवी चंद्रघंटा के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र नजर आता है। इसी वजह से श्रद्धालु उन्हें चंद्रघंटा कहकर बुलाते हैं। जानिए नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा विधि, व्रत कथा, आरती, मंत्र, मुहूर्त… पूजा विधि: नवरात्रि के तीसरे दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की​ विधि विधान से इस मंत्र ” ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः ” का जाप कर आराधना करनी चाहिए। इसके बाद मां चंद्रघंटा को सिंदूर, अक्षत्, गंध, धूप, पुष्प आदि अर्पित करें। आप देवी मां को चमेली का पुष्प अथवा कोई भी लाल फूल अर्पित कर सकते हैं। साथ ही साथ, दूध से बनी किसी मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा का पाठ और दुर्गा आरती का गान करें। ध्यान: वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्। सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥ मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥ प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्। कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥ स्तोत्र पाठ: आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्। अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥ चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्। धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥ नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्। सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥ मां चंद्रघंटा की कथा: मां चन्द्रघण्टा असुरों के विनाश हेतु मां दुर्गा के तृतीय रूप में अवतरित होती है। जो भयंकर दैत्य सेनाओं का संहार करके देवताओं को उनका भाग दिलाती है। भक्तों को वांछित फल दिलाने वाली हैं। आप सम्पूर्ण जगत की पीड़ा का नाश करने वाली है। जिससे समस्त शात्रों का ज्ञान होता है, वह मेधा शक्ति आप ही हैं। दुर्गा भव सागर से उतारने वाली भी आप ही है। आपका मुख मंद मुस्कान से सुशोभित, निर्मल, पूर्ण चन्द्रमा के बिम्ब का अनुकरण करने वाला और उत्तम सुवर्ण की मनोहर कान्ति से कमनीय है, तो भी उसे देखकर महिषासुर को क्रोध हुआ और सहसा उसने उस पर प्रहार कर दिया। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि जब देवी का वही मुख क्रोध से युक्त होने पर उदयकाल के चन्द्रमा की भांति लाल और तनी हुई भौहों के कारण विकराल हो उठा, तब उसे देखकर जो महिषासुर के प्राण तुरंत निकल गये, यह उससे भी बढ़कर आश्चर्य की बात है, क्योंकि क्रोध में भरे हुए यमराज को देखकर भला कौन जीवित रह सकता है। देवी आप प्रसन्न हों। परमात्मस्वरूपा आपके प्रसन्न होने पर जगत् का अभ्युदय होता है और क्रोध में भर जाने पर आप तत्काल ही कितने कुलों का सर्वनाश कर डालती हैं, यह बात अभी अनुभव में आयी है, क्योंकि महिषासुर की यह विशाल सेना क्षण भर में आपके कोप से नष्ट हो गयी है। कहते है कि देवी चन्द्रघण्टा ने राक्षस समूहों का संहार करने के लिए जैसे ही धनुष की टंकार को धरा व गगन में गुजा दिया वैसे ही मां के वाहन सिंह ने भी दहाड़ना आरम्भ कर दिया और माता फिर घण्टे के शब्द से उस ध्वनि को और बढ़ा दिया, जिससे धनुष की टंकार, सिंह की दहाड़ और घण्टे की ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाएं गूंज उठी। उस भयंकर शब्द व अपने प्रताप से वह दैत्य समूहों का संहार कर विजय हुई। मां चंद्रघंटा की आरती:  नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा का ध्यान। मस्तक पर है अर्ध चन्द्र, मंद मंद मुस्कान॥ दस हाथों में अस्त्र शस्त्र रखे खडग संग बांद। घंटे के शब्द से हरती दुष्ट के प्राण॥ सिंह वाहिनी दुर्गा का चमके सवर्ण शरीर। करती विपदा शान्ति हरे भक्त की पीर॥ मधुर वाणी को बोल कर सब को देती ग्यान। जितने देवी देवता सभी करें सम्मान॥ अपने शांत सवभाव से सबका करती ध्यान। भव सागर में फंसा हूं मैं, करो मेरा कल्याण॥ नवरात्रों की मां, कृपा कर दो मां। जय मां चंद्रघंटा, जय मां चंद्रघंटा॥ मां चंद्रघंटा के मंत्र:  पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥ या देवी सर्वभू‍तेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ ☘️🌹🙏🚩*जय माता दी*🚩🙏🌹☘️ *स्मरण करो तो मन संवर जाए, *सेवा करो तो तन संवर जाए, *भक्ति करो तो जीवन सफल हो जाये, *कितनी दिलकश है ईश्वर की बातें, *अमल करो तो जिंदगी संवर जाए। ☘️💫🙏*शुभ प्रभात् नमन*🙏💫☘️ 🌹🙏🚩*शुभ शुक्रवार*🚩🙏🌹 *आप सभी भाई-बहनों का दिन शुभ व मंगलमय हो* ♻️💨♻️💨♻️💨♻️💨♻️💨♻️

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