Shambhu Gupta
Shambhu Gupta Dec 28, 2016

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Sumitra Soni Aug 10, 2020

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Sumitra Soni Aug 10, 2020

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🌹kriti 🌹 Aug 10, 2020

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🙏🌹जय गंगा मैया की 🌹🙏आज अगस्त 10 प्रातःकाल के शुभ दर्शन माँ गंगा जी के ऋषिकेश हरिद्वार से 🌹🙏 क्या आप जानते हैं महामृत्युंजय मंत्र की रचना क्यों और किसने की । ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ देवाधिदेव महादेव ही एक मात्र ऐसे भगवान हैं, जिनकी भक्ति हर कोई करता है, चाहे वह इंसान हो, राक्षस हो, भूत-प्रेत हो अथवा देवता हो, यहां तक कि पशु-पक्षी, जलचर, नभचर, पाताललोक वासी हो अथवा बैकुण्ठवासी हो, शिव की भक्ति हर जगह हुई और जब तक दुनिया कायम है, शिव की महिमा गाई जाती रहेगी। शिव पुराण कथा के अनुसार शिव ही ऐसे भगवान हैं, जो शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों को मनचाहा वर दे देते हैं, वे सिर्फ अपने भक्तों का कल्याण करना चाहते हैं, वे यह नहीं देखते कि उनकी भक्ति करने वाला इंसान है, राक्षस है, भूत-प्रेत है या फिर किसी और योनि का जीव है, शिव को प्रसन्न करना सबसे आसान है। शिवलिंग की महिमा अपरम्पार है, शिवलिंग में मात्र जल चढ़ाकर या बेलपत्र अर्पित करके भी शिव को प्रसन्न किया जा सकता है, इसके लिए किसी विशेष पूजन विधि की आवश्यकता नहीं है, एक कथा के अनुसार वृत्तासुर के आतंक से देवता भयभीत थे, वृत्तासुर को श्राप था कि वह शिव पुत्र के हाथों ही मारा जायेगा। इसलिए पार्वती के साथ शिवजी का विवाह कराने के लिए सभी देवता चिंतित थे, क्योंकि भगवान शिव समाधिस्थ थे और जब तक समाधि से उठ नहीं जाते, विवाह कैसे होता? देवताओं ने विचार करके रति व कामदेव से शिव की समाधि भंग करने का निवेदन किया, कामदेव ने शिवजी को जगाया तो क्रोध में शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया, रति विलाप करने लगी तो शिव ने वरदान दिया कि द्वापर में कामदेव भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लेंगे। इस बात में तो सभी यकीन करते होंगे, कि वक़्त से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता, पर यह सभी जानते है कि वक़्त और किस्मत पर भी विजयी हो सकते हैं, अगर आप भगवान् भोलेनाथ की असीम शक्ति में विश्वास रखते है, इसके उदाहरण स्वरुप मैं एक कथा बताना चाहूंगा। भगवान शिव यानि देवाधिदेव महादेव को तो सब जानते हैं जो परमपिता परमेश्वर, जगत के स्वामी और सब देवो के देव है, कथा से पहले आपको यह बता दूँ की यह वह समय हैं, जब महादेव की अर्धांगिनी देवी पार्वती, बाल्यवस्था में अपनी माता मैना देवी के साथ मार्कंडय ऋषि के आश्रम में रहती थी, और पार्वती देवी एक दिन असुरो के कारण संकट में पड़ गयी और महादेव ने उनके प्राणों की रक्षा की। मैना ने जब अपनी पुत्रि की जान पर आई आपदा के बारे में सुना तो वह अत्यंत दुखी और भयभीत हो गयी, पर ऋषि मार्कंडय ने उन्हें जब बताया कि कैसे महादेव ने देवी पार्वती की रक्षा की, पर वह तब भी संतोष न कर सकी, मैना देवी विष्णु भगवान की उपासक थी, जिस वजह से शिव की महिमा में ज़रा भी विश्वास नहीं रखती थी, शिवजी ठहरे वैरागी और श्मशान में रहने वाले तो भला वह कैसे उनकी पूजा करे। तत्पश्चात ऋषि मार्कंडय ने मैना को शिव भगवान की महिमा के बारे में बताने का विचार किया, और उनको यह कथा विस्तार से बताई- जब मार्कंडय ऋषि केवल ग्यारह वर्ष के थे, तब उनके पिता ऋषि मृकण्डु को गुरुकूल आश्रम के गुरु से यह ज्ञात हुआ की मार्कंडय की सारी शिक्षा-दीक्षा पूर्ण हो चुकी है और अब वह उन्हें अपने साथ ले जा सकते है। क्योंकि उन्होंने सारा ज्ञान इतने कम समय में ही अर्जित कर लिया और अब उनको और ज्ञान देने के लिए कुछ शेष नहीं था, यह जानने के बाद भी की उनका पुत्र मार्कंडय इतना बुद्धिमान और ज्ञानवान है, उनके माता पिता खुश नहीं हुयें, मार्कंडय ने जब पूछा की उनके दुःख का कारण क्या है? तब उनके पिता ने उनके जन्म की कहानी बताई कि पुत्र की प्राप्ति हेतु उन्होंने और उनकी माता ने कई वर्षो तक कठिन और घोर तप किया है। तब भगवान् महादेव प्रसन्न होकर प्रकट हुयें, और उनको इस बात से अवगत कराया की उनके भाग में संतान सुख नहीं है, परन्तु उनके तप से प्रसन्न होकर उनको पुत्र का वरदान दिया, और उनसे पूछा की वह कैसा पुत्र चाहते है, जो बुद्धिवान ना हो पर उसकी आयु बहुत ज्यादा हो या ऐसा पुत्र जो बहुत बुद्धिमान हो परन्तु जिसकी आयु बहुत कम हो। मृकण्डु और उनकी पत्नी ने कम आयु वाला पर बुद्धिमान पुत्र का वरदान माँगा, महादेवजी ने उनको बताया की यह पुत्र केवल बारह वर्ष तक ही जीवित रहेगा, वह फिर विचार कर ले, पर उन्होंने वही माँगा और महादेव उनको वरदान देकर भोलेनाथ अंतर्ध्यान हो गये, ऋषि मृकंदु ने यह सब अपने पुत्र को बताया, जिसको सुनने के बाद वह बहुत दुःखी हुआ, यह सोचकर की वह अपने माता -पिता की सेवा नहीं कर सकेगा। परन्तु बालक मार्कंडय ने उसी समय यह निर्णय किया की वह अपनी मृत्यू पर विजय प्राप्त करेंगे और भगवान शिव की पूजा से यह हासिल करेंगे, बालक मार्कंडय ग्यारह वर्ष की आयु में वन को चले गयें, लगभग एक वर्ष के कठिन तप के दौरान उन्होंने एक नए मंत्र की रचना की जो मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सके, वह है- "ॐ त्रियम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं, उर्वारुकमिव बन्धनात मृत्योर्मोक्षिय मामृतात्" जब वह 12 वर्ष के हुए तब यमराज उनके सामने, प्राण हरण के लिये प्रकट हो गये, बालक मार्कंडय ने यमराज को बहुत समझया और याचना की, कि वह उनके प्राण बक्श दे, परन्तु यमराज ने एक ना सुनी और और वह यमपाश के साथ उनके पीछे भागे बालक मार्कंडय भागते-भागते वन में एक शिवलिंग तक पहुचे जिसे देख कर वह उनसे लिपट गये, और भगवान् शिव का मंत्र बोलने लगे जिसकी रचना उन्होंने स्वयं की थी। यमराज ने बालक मार्कंडय की तरफ फिर से अपना यमपाश फेका परन्तु शिवजी तभी प्रकट हुए और उनका यमपाश अपने त्रिशूल से काट दिया, बालक मार्कंडय शिवजी के चरणों में याचना करने लगे की वह उनको प्राणों का वरदान दे, परन्तु महादेव ने उनको कहा की उन्होंने ही यह वरदान उनके माता-पिता को दिया था, इस पर बालक मार्कंडय कहते है कि यह वरदान तो उनके माता पिता के लिये था ना कि उनके लिये? यह सुनकर महादेव बालक मार्कंडय से अत्यंत प्रसन्न होते है और उनको जीवन का वरदान देते है, भगवान् भोलेनाथ ने यमराज को आदेश देते है की वह इस बालक के प्राण ना ले, कथा से क्या इस बात पर पुन: विचार करने का मन होता है की भक्ति में बहुत शक्ति है, ऐसा क्या नहीं है जो इस संसार में ईश्वर की भक्ति करने से प्राप्त ना किया जा सके, भगवान् भोलेनाथ की भक्ति और शक्ति की महिमा का बहुत बड़ा महात्म्य है। जय महादेव!

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🌹kriti 🌹 Aug 10, 2020

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Dheeraj Shukla Aug 10, 2020

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Ajit Kumar Sharma Aug 10, 2020

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Smt Neelam Sharma Aug 10, 2020

*परब्रह्रा* : _ ___ *आदि अनंत शिव* हर हर महादेव 🙏🙏🌹🌹🔱🔱🚩🚩Om NAmah Shivaye 🌹🌹 🙏🙏सभी भगवानों की पूजा मूर्ति के रूप में की जाती है, लेकिन भगवान शिव ही है जिनकी पूजा लिंग के रूप में होती है। शिवलिंग की पूजा के महत्व का गुण-गान कई पुराणों और ग्रंथों में पाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग पूजा की परम्परा कैसे शुरू हुई। सबसे पहले किसने भगवान शिव की लिंग रूप मे पूजा की थी और किस प्रकार शिवलिंग की पूजा की परम्परा शुरू हुई, इससे संबंधित एक कथा लिंग महापुराण में है। 🍃 ऐसे हुई थी शिवलिंग की स्थापना.🍃 लिंग महापुराण के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और विष्णु के बीच अपनी-अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। स्वयं को श्रेष्ठ बताने के लिए दोनों देव एक-दूसरे का अपमान करने लगे। जब उनका विवाद बहुत अधिक बढ़ गया, तब एक अग्नि से ज्वालाओं के लिपटा हुआ लिंग भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच आकर स्थापित हो गया। दोनों देव उस लिंग का रहस्य समझ नहीं पा रहे थे। उस अग्नियुक्त लिंग का मुख्य स्रोत का पता लगाने के लिए भगवान ब्रह्मा ने उस लिंग के ऊपर और भगवान विष्णु ने लिंग के नीचे की ओर जाना शुरू किया। हजारों सालों तक खोज करने पर भी उन्हें उस लिंग का स्त्रोत नहीं मिला। हार कर वे दोनों देव फिर से वहीं आ गए जहां उन्होंने लिंग को देखा था। वहां आने पर उन्हें ओम का स्वर सुनाई देने लगा🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉वह सुनकर दोनों देव समझ गए कि यह कोई शक्ति है और उस ओम के स्वर की 🕉🕉🕉🕉🕉🕉आराधना करने लगे। भगवान ब्रहमा और भगवान विष्णु की आराधना से खुश होकर उस लिंग से भगवान शिव 🔱🔱🔱🔱प्रकट हुए और दोनों देवों को सद्बुद्धि का वरदान भी दिया। देवों को वरदान देकर भगवान शिव अंतर्धान हो गए और एक शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए।🙏🙏 लिंग महापुराण के अनुसार वह भगवान शिव का पहला शिवलिंग माना जाता था। जब भगवान शिव वहां से चले गए और वहां शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए, तब सबसे पहले भगवान ब्रह्मा और विष्णु ने शिव के उस लिंग की 🌿🌿पूजा-अर्चना की थी। उसी समय से भगवान शिव की लिंग के रूप में पूजा करने की परम्परा की शुरुआत मानी जाती है।🌿🌿 🍃 विश्वकर्मा ने किया था विभिन्न शिवलिंगों का निर्माण.🍃 लिंग महापुराण के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने देव शिल्पी विश्वकर्मा को सभी देवताओं के लिए अलग-अलग शिवलिंग का निर्माण करने को कहा था। भगवान ब्रह्मा के कहने पर भगवान विश्वकर्मा ने अलग-अलग शिवलिंग बना कर देवताओं को प्रदान किए।🙏🙏 1. भगवान विष्णु के लिए नीलकान्तमणि का शिवलिंग बनाया गया।🙏🙏 2. भगवान कुबेर के पुत्र विश्रवा के लिए सोने का शिवलिंग बनाया गया।🙏🙏 3. इन्द्रलोक के सभी देवतोओं के लिए चांदी के शिवलिंग बनाए गए।🙏🙏 4. वसुओं को चंद्रकान्तमणि से बने शिवलिंग प्रदान किए।🙏🙏 5. वायु देव को पीलत से बने और भगवान वरुण को स्फटिक से बने शिवलिंग दिए गए।🙏🙏 6. आदित्यों को तांबे और अश्विनीकुमारों को मिट्टी से निर्मित शिवलिंग प्रदान किए गए।🌿🌿 7. दैत्यों और राक्षसों को लोहे से बने शिवलिंग दिए गए।🌿🌿 8. सभी देवियों को बालू से बने शिवलिंग दिए गए।🌿🌿 9. देवी लक्ष्मी ने लक्ष्मीवृक्ष (बेल) से बने शिवलिंग की पूजा की।🌿🌿 10. देवी सरस्वती को रत्नों से बने और रुद्रों को जल से बने शिवलिंग दिए गए। हर हर महादेव 🙏🙏🌹🌹🔱🔱🚩🚩

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