Arun Kumar Sharma
Arun Kumar Sharma Jan 21, 2021

Radhe Krishna राधे कृष्णा 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Radhe Krishna
राधे कृष्णा
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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🚩Krishna🚩 Apr 20, 2021

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sarita devi Apr 20, 2021

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Ramesh Agrawal Apr 21, 2021

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❤Dev❤ Apr 20, 2021

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ARJUN, Mo,9879770109 Apr 20, 2021

⛳ श्री कृष्ण और जामवंत का युद्ध 🇮🇳 🌹🕉️ जामवंती और सत्यभामा का विवाह 🕉️ पौराणिक कथा ओं के अनुसार एक बार सत्राजित ने भगवान सुर्य की उपासना की जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने अपनी"स्यमन्तक"नाम की मणी जामवंत को दे दी। एक दिन जब कृष्ण साथियों के साथ चौसर खेल रहे थे तो सत्राजित स्यमन्तक मणी मस्तक पर धारण कर उनसे भेंट करने पहुंचे।उस स्यमन्तक मणी को देखकर कृष्ण ने सत्राजित से कहा कि तुम्हारे जो यह आलौकिक मणी है, इनका वास्तविक अधिकारी तो राजा होता है इसलिए तुम इस मणी को हमारे राजा उग्रसेन को दे दो।यह बात सुनकर सत्राजित ने स्यमन्तक मणी को अपने घर के मंदिर में स्थापित कर दिया।वह मणि रोजाना (८)आठ भार सोना देती थी, जिस स्थान में वह मणि होती थी, वहां के सारे कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते थे। एक दिन सत्राजित का भाई प्रसनजित उस मणि को पहनकर घोड़े पर सवार हो आरपेट के लिए गया।वन में प्रसनजित पर एक सिंह ने हमला कर दिया। जिससे वह मारा गया।उस सिंह ने अपने साथ मणि भी ले कर चला गया।उस सिंह को रीक्षराज जामवंत ने मारकर वह मणि प्राप्त कर ली और अपनी गुफा में चला गया जामवंत ने उस मणि को अपने बालक को दे दिया जो उसे खिलौना समझ उससे खेलने लगा। जब प्रसेनजित लौट कर नहीं आया तों सत्राजित ने समझा कि उसके भाई को कृष्ण ने मारकर मणि छीन ली है। कृष्ण जी पर चोरी के सन्देह की बात पूरे द्वरिकापूरी में फ़ैल गई। अपनें पर लगे कलंक को धोने के लिए वे नगर के प्रमुख यादवों को साथ ले लेकर रथ पर सवार हो स्यमन्तक की मणि की खोज में निकले।वन में उन्होंने घोड़ा सहित प्रोसेनजीत को मरा हुआ देखा पर मणी का कहीं पता नहीं चला। वहां निकट ही सिंह के पंजों के चिंन्ह थे। सिंह के पदचिन्हों के सहारे आगे बढ़ने पर उन्हें मरे हुए सिंह का शरीर मिला। वहां पर रींछ के पैरो के पद-चिन्ह भी मिले जो कि एक गुफा तक गये थे।जब वे उस भयंकर गुफा के निकट पहुंचे तब श्री कृष्ण ने यादवों से कहा कि तुम लोग यहीं रुको। मैं इस गुफा में प्रवेश कर मणी ले जाने वाले का पता लगाता हूं। इतना कहकर वे सभी यादवों को गुफा के मुख पर छोड़ उस गुफा के भीतर चले गए। वहां जाकर उन्होंने देखा कि वह मणि एक रींछ के बालक के पास है जो उसे हाथ में लिये खेल रहा था। श्री कृष्ण ने उस मणि को उठालिया। यह देखकर जामवंत अत्यंत क्रोधित होकर श्री कृष्ण को मार ने के लिए झपटा। जामवंत और श्री कृष्ण में भयंकर युद्ध होने लगा।जब कृष्ण गुफा से वापस नहीं लौटे तो सारे यादव उन्हे मरा हुआ समझ कर बारह दिन के उपरांत वहां से द्वारिकापूरी वापस आ गए तथा समस्त वृतांत वासुदेव और देवकी से कहा। वासुदेव और देवकी व्याकुल होकर"महामाया दुर्गा"की उपासना करने लगे। उनकी उपासना से प्रसन्न होकर देवी दुर्गा ने प्रकट होकर उन्होंने आशिर्वाद दिया कि तुम्हारा पुत्र तुम्है अवश्य मिलेगा, श्री कृष्ण और जामवंत दोनों ही पराक्रमी थे। युद्ध करते हुए गुफा में (२८)अठ्ठाईस दिन बीत गए। कृष्ण की मारसे महाबली जामवंत की नस टुट गई।वह अति व्याकुल हो उठा और अपने स्वामी श्री रामचन्द्र जी का स्मरण करने लगा। जामवंत के द्वारा श्री रामचन्द्र जी के स्मरण करते ही भगवान श्री कृष्ण ने श्री रामचन्द्र जी के रूप में उसे दर्शन दिए। जामवंत उनके चरणों में गिर गया और बोला"हे भगवान"!अब जाना की अपने यदुवंश में अवतार लिया है,"श्री कृष्ण ने कहा,"हे जामवंत! तुमने मेरे राम अवतार के समय रावण के वध हो जाने के पश्चात मुझसे युद्ध करने की इच्छा व्यक्त की थी और मैंने तुमसे कहा था कि मैं तुम्हारी इच्छा अपने अगले अवतार में अवश्य पूरी करुंगा,अपना वचन सत्य सिद्ध करने के लिए ही मैंने तुमसे यह युद्ध किया है"जामवंत ने भगवान श्री कृष्ण की अनेक प्रकार से स्तुति की और अपनी कन्या का विवाह उनसे (कृष्ण) से कर दिया। कृष्ण जामवंती को साथ लेकर द्वारिकापुरी में पहुंचे। उनके वापस आने से द्वारिकापूरी में चहुं और प्रसन्नता व्याप्त हो गई। श्री कृष्ण ने सत्राजित को बुलाकर उसकी मणि उसे वापस कर दी।सत्राजित अपने द्वारा श्री कृष्ण पर लगाये झुठे कलंक के कारण अती लज्जित हुआ और प्रश्चाताप करने लगा। प्रायश्चित के रूप में उसने अपनी कन्या" "सत्यभामा"का विवाह श्री कृष्ण के साथ कर दिया और वह"मणी" भी उन्हें दहेज में दे दी। किन्तु शरणागत वत्सल श्री कृष्ण ने उस मणि को स्वीकार न करके पु:न सत्राजित को वापस कर दिया। 🌹 धर्म भक्ति 🌹 धार्मिक बौधकथा 🌹 ज्ञानवर्षा 🌹🕉️⛳ जय श्री द्वारिका धीश कृष्ण 🕉️🙏 🌷🌳🌲🌻🌻🌲🌲🌳🌳

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