gopi kishan
gopi kishan Nov 10, 2017

🌷 ​कालभैरवाष्टमी​ 🌷

जय श्री काल भैरवाय नमः

भगवान् शंकर के अवतारों मे भैरव जी का अपना ही एक विशिष्ट स्थान है| भ – से विशव का भरण, र – से रमेश, व् – व् से वमन , अर्थात सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और सहांर करने वाले शिव ही भैरव हैं| भैरव यंत्र की बहुत विशेषता मानी गई है, भैरव साधना अकाल मौत से बचाती है, तथा भूत प्रेत, काले जादू से भी हमारी रक्षा करता है|

शिव पुराण की शतरूद्र संहिता के अनुसार परमेश्वर सदाशिव ने मार्गशीष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भैरव रूप में अवतार लिया था। अतः उन्हें साक्षात् भगवान शंकर ही मानना चाहिए। पुराणों के अनुसार भैरव भगवान शिव का दूसरा रूप हैं, भैरव का अर्थ भयानक तथा पोषक दोनों हैं, इनसे काल भी सहमा रहता है। इसलिए इन्हें 'काल भैरव' कहा जाता है।

क्या समस्या दूर होती है
श्री भैरव जी की पूजा दर्शन से
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काल भैरव को उनके तेज एवं गुस्सैल रूप के लिए भी जाना जाता है। उन्हें तंत्र का देवता भी माना जाता है। यदि आप काल भैरव की पूजा करते हैं तो आप पर किसी की ओर से की गई तांत्रिक क्रियाएं सफल नहीं होंगी।

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कोई दुश्मन आप पर किसी भी टोने-टोटके का प्रयोग नही कर सकता एवं कोई गलत प्रयोग का आप पर असर नहीं होगा। इसके अलावा यदि आपके शरीर में किसी प्रेत आत्मा या नकारात्मक ऊर्जा का वास है तो काल भैरव की पूजा से इस समस्या से भी छुटकारा मिलता है।

राहू केतु शनि की दशा मैं
कोई परेशानी नही आयेगी
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जब इंसान पर शनि, राहू केतु की नकारात्मक दशा आती है तो ऐसी स्थिति मे बुद्धि भृष्ट हो जाती,साथ ही नुकसान से लेकर बुराई तक घेर लेती हैं, भैरवनाथ भगवान की पूजा से ये समस्त समस्या दूर होती है ।

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यदि आप नियमित तौर पर काल भैरव की पूजा करते हैं या काल भैरव अष्टमी को उनकी आराधना करते हैं तो आपके शत्रु कभी आपको हरा नहीं सकते। उनकी ओर से उत्पन्न की गई बाधाए

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