कपिल देव
कपिल देव Jul 23, 2019

शुभ प्रभात

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🙏🌹राजकुमार राठोड🌹🙏 Jul 23, 2019
🌻🌻सुप्रभात बहन जी 🙏 🌷🌷मंगलमय मंगलवार 🌷🌷जय श्री राम 🌷🌷जय बजरंग आप तथा आपके परिवार को 👨‍👩‍👧‍👦👭सदा सहाय हो 🌾🌾🌾

*🌷॥ॐ॥🌷* *जय श्री राधे...👏* *जय हिन्द🇮🇳जय नमो🙏* ************************** *🔱शुभ शनिवार🌞* हम सबका हर पल मंगलमय हो ************************** *॥ॐ श्री हनुमंते नमः॥👏* *हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन....🙏* ************************** हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार पवनसुत विनती बारम्बार हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार पवनसुत विनती बारम्बार अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता दुखियों के तुम भाग्यविधाता। सियाराम के काज संवारे, मेरा कर उद्धार॥ पवनसुत विनती बारम्बार पवनसुत विनती बारम्बार हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार पवनसुत विनती बारम्बार पवनसुत विनती बारम्बार अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी, तुम पर रीझे अवधबिहारी। भक्ति भाव से ध्याऊं तोहे, कर दुखों से पार॥ पवनसुत विनती बारम्बार पवनसुत विनती बारम्बार हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार पवनसुत विनती बारम्बार पवनसुत विनती बारम्बार जपूँ निरंतर नाम तिहारा, अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा। राम भक्त मोहे शरण मे लीजे भाव सागर से तार॥ पवनसुत विनती बारम्बार पवनसुत विनती बारम्बार हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार पवनसुत विनती बारम्बार पवनसुत विनती बारम्बार हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार पवनसुत विनती बारम्बार पवनसुत विनती बारम्बार 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🙏🔱🌺👏🌺🔱🙏

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Sanjay Singh Jan 26, 2020

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golu Kumar Jan 26, 2020

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Renu yadav Jan 26, 2020

यूं तो भगवान हनुमान जी को अनेक नामों से पुकारा जाता है, जिसमें से उनका एक नाम वायु पुत्र भी है। जिसका शास्त्रों में सबसे ज्यादा उल्लेख मिलता है। शास्त्रों में इन्हें वातात्मज कहा गया है अर्थात् वायु से उत्पन्न होने वाला।कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म पुराणों की कथानुसार हनुमान की माता अंजना संतान सुख से वंचित थी। कई जतन करने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस दुःख से पीड़ित अंजना मतंग ऋषि के पास गईं, तब मंतग ऋषि ने उनसे कहा-पप्पा सरोवर के पूर्व में एक नरसिंहा आश्रम है, उसकी दक्षिण दिशा में नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ है वहां जाकर उसमें स्नान करके, बारह वर्ष तक तप एवं उपवास करना पड़ेगा तब जाकर तुम्हें पुत्र सुख की प्राप्ति होगी। अंजना ने मतंग ऋषि एवं अपने पति केसरी से आज्ञा लेकर तप किया था बारह वर्ष तक केवल वायु का ही भक्षण किया तब वायु देवता ने अंजना की तपस्या से खुश होकर उसे वरदान दिया जिसके परिणामस्वरूप चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा को अंजना को पुत्र की प्राप्ति हुई। वायु के द्वारा उत्पन्न इस पुत्र को ऋषियों ने वायु पुत्र नाम दिया। market://details?id=com.tuneonn.hindistories

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Minakshi Tiwari Jan 25, 2020

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Dharam Pal Summi Jan 26, 2020

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