दर्शन राम भक्त हनुमान जी के

मंगलवार मंगलमय हो आपके लिए.... Jai Shri Krishna Radhe Radhe Shubh Savera

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🌹🌾 Suraj Singh Rajput 🌹🌾 Jun 5, 2018
राजेश यादव जी का सधन्यवाद जय श्री कृष्णा राधे राधे शुभ सवेरा

Dr.ratan Singh Jun 5, 2018
aap par shri RAM bhakt hanuman ji ki kripa sada bani rahe. apka ratri shantimay ho. namaskar ji 🌷jai shri RAM🌷

🌞 🤔~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🕉🌞 *।। श्री हरि : ।।* ⛅ *दिनांक - 02 जून 2020* ⛅ *दिन - मंगलवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - ग्रीष्म* ⛅ *मास - ज्येष्ठ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - दोपहर 12:04 तक एकादशी* ⛅ *नक्षत्र - रात्रि 10:55 तक चित्रा* ⛅ *योग - सुबह 09:53 तक व्यतिपात* ⛅ *राहुकाल - शाम 03:45 से 05:25* ⛅ *सूर्योदय - 05:57* ⛅ *सूर्यास्त - 19:15* ⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - निर्जला-भीम एकादशी* 💥 *विशेष - हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l* *राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।।* *सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।* 💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l* 💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।* 💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है, एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।* 💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।* 🌷 *निर्जला एकादशी* 🌷 ➡ *01 जून 2020 सोमवार को दोपहर 02:58 से 02 जून मंगलवार को दोपहर 12:04 तक एकादशी है ।* 💥 *विशेष - 02 जून मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।* 🙏🏻 *निर्जला एकादशी व्रत से अधिक मास सहित २६ एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है, इस दिन किया गया स्नान, दान जप, होम आदि अक्षय होता है ।* 🌷 *प्रदोष व्रत* 🌷 🙏🏻 *हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है, ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है, इस बार 03 जून, बुधवार को प्रदोष व्रत है, इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है, प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…* 👉🏻 *ऐसे करें व्रत व पूजा* 🙏🏻 *- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।* 🙏🏻 *- इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।* 🙏🏻 *- पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।* 🙏🏻 *- भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं, आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।* 🙏🏻 *- भगवान शिवजी की आरती करें, भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें, उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।* 🙏🏻🌷🍀🌹🌻🌸🌺💐🍁🙏🏻

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monika Jun 2, 2020

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Uday Singh Naruka Jun 2, 2020

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D N SINGH RATHORE Jun 2, 2020

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Malti Gaur Jun 2, 2020

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शुभ प्रभात वंदन । जय श्री हरि विष्णुदेव जी। जय श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव । जय श्री जगन्नाथ महाराज जी। *🌹कर्मा बाई का खिचड़ी भोग🌹* एक बहुत सुंदर भजन और बहुत अच्छी कहानी के साथ आपको निर्जला एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं जी। *🌺भगवान श्रीकृष्ण की परम उपासक कर्मा बाई जी जगन्नाथ पुरी में रहती थी और भगवान को बचपन से ही पुत्र रुप में भजती थीं । ठाकुर जी के बाल रुप से वह रोज ऐसे बातें करतीं जैसे ठाकुर जी उनके पुत्र हों और उनके घर में ही वास करते हों। 🌺* *🌺एक दिन कर्मा बाई की इच्छा हुई कि ठाकुर जी को फल-मेवे की जगह अपने हाथ से कुछ बनाकर खिलाऊँ । उन्होंने जगन्नाथ प्रभु को अपनी इच्छा बतलायी । भगवान तो भक्तों के लिए सर्वथा प्रस्तुत हैं । प्रभु जी बोले - "माँ ! जो भी बनाया हो वही खिला दो, बहुत भूख लगी है ।"🌺* *🌺कर्मा बाई ने खिचड़ी बनाई थी । ठाकुर जी को खिचड़ी खाने को दे दी । प्रभु बड़े चाव से खिचड़ी खाने लगे और कर्मा बाई ये सोचकर भगवान को पंखा झलने लगीं कि कहीं गर्म खिचड़ी से मेरे ठाकुर जी का मुँह ना जल जाये । संसार को अपने मुख में समाने वाले भगवान को कर्मा बाई एक माता की तरह पंखा कर रही हैं और भगवान भक्त की भावना में भाव विभोर हो रहे हैं ।🌺* *🌺भक्त वत्सल भगवान ने कहा - "माँ ! मुझे तो खिचड़ी बहुत अच्छी लगी । मेरे लिए आप रोज खिचड़ी ही पकाया करें । मैं तो यही आकर खाऊँगा ।"🌺* *अब तो कर्मा बाई जी रोज सुबह उठतीं और सबसे पहले खिचड़ी बनातीं, बाकि सब कुछ बाद में करती थी । भगवान भी सुबह-सवेरे दौड़े आते । आते ही कहते - माँ ! जल्दी से मेरी प्रिय खिचड़ी लाओ ।" प्रतिदिन का यही क्रम बन गया । भगवान सुबह-सुबह आते, भोग लगाते और फिर चले जाते ।🌺* *🌺एक बार एक महात्मा कर्मा बाई के पास आया । महात्मा ने उन्हें सुबह-सुबह खिचड़ी बनाते देखा तो नाराज होकर कहा - "माता जी, आप यह क्या कर रही हो ? सबसे पहले नहा धोकर पूजा-पाठ करनी चाहिए । लेकिन आपको तो पेट की चिन्ता सताने लगती है ।"🌺* *🌺कर्मा बाई बोलीं - "क्या करुँ ? महाराज जी ! संसार जिस भगवान की पूजा-अर्चना कर रहा होता है, वही सुबह-सुबह भूखे आ जाते हैं । उनके लिए ही तो सब काम छोड़कर पहले खिचड़ी बनाती हूँ ।"🌺* *🌺महात्मा ने सोचा कि शायद कर्मा बाई की बुद्धि फिर गई है । यह तो ऐसे बोल रही है जैसे भगवान इसकी बनाई खिचड़ी के ही भूखे बैठे हुए हों ।🌺* *🌺 महात्मा कर्मा बाई को समझाने लगे - "माता जी, तुम भगवान को अशुद्ध कर रही हो। सुबह स्नान के बाद पहले रसोई की सफाई करो। फिर भगवान के लिए भोग बनाओ "। 🌺* *🌺अगले दिन कर्मा बाई ने ऐसा ही किया । जैसे ही सुबह हुई भगवान आये और बोले - "माँ ! मैं आ गया हूँ, खिचड़ी लाओ ।"🌺* *🌺कर्मा बाई ने कहा - "प्रभु ! अभी में स्नान कर रही हूँ, थोड़ा रुको । थोड़ी देर बाद भगवान ने फिर आवाज लगाई । जल्दी करो, माँ ! मेरे मन्दिर के पट खुल जायेंगे, मुझे जाना है ।"🌺* *🌺वह फिर बोलीं - "अभी मैं रसोई की सफाई कर रही हूँ, प्रभु !" भगवान सोचने लगे कि आज माँ को क्या हो गया है ? ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ । फिर जब कर्मा बाई ने खिचड़ी परोसी तब भगवान ने झटपट करके जल्दी-जल्दी खिचड़ी खायी ।🌺* *🌺 परंतु आज खिचड़ी में भी रोज वाले भाव का स्वाद भगवान को नहीं लगा था । फिर जल्दी-जल्दी में भगवान बिना पानी पिये ही मंदिर में भागे ।🌺* *🌺भगवान ने बाहर महात्मा को देखा तो समझ गये - "अच्छा, तो यह बात है । मेरी माँ को यह पट्टी इसी ने पढ़ायी है ।"🌺* *🌺अब यहां ठाकुर जी के मन्दिर के पुजारी ने जैसे ही मंदिर के पट खोले तो देखा भगवान के मुख पर खिचड़ी लगी हुई है । पुजारी बोले - "प्रभु जी ! ये खिचड़ी आप के मुख पर कैसे लग गयी है ?"🌺* *🌺भगवान ने कहा - "पुजारी जी, मैं रोज मेरी कर्मा बाई के घर पर खिचड़ी खाकर आता हूँ। आप माँ कर्मा बाई जी के घर जाओ और जो महात्मा उनके यहाँ ठहरे हुए हैं, उनको समझाओ । उसने मेरी माँ को गलत कैसी पट्टी पढाई है ?"🌺* *🌺पुजारी ने महात्मा जी से जाकर सारी बात कही कि भगवान भाव के भुखे है । यह सुनकर महात्मा जी घबराए और तुरन्त कर्मा बाई के पास जाकर कहा - "माता जी ! माफ़ करो, ये नियम धर्म तो हम सन्तों के लिये हैं । आप तो जैसे पहले खिचड़ी बनाती हो, वैसे ही बनायें । आपके भाव से ही ठाकुर जी खिचड़ी खाते रहेंगे ।"🌺* *🌺फिर एक दिन आया , जब कर्मा बाई के प्राण छूट गए । उस दिन पुजारी ने मंदिर के पट खोले तो देखा - भगवान की आँखों में आँसूं हैं ।और प्रभु रो रहे हैं ।🌺* *🌺 पुजारी ने रोने का कारण पूछा तो भगवान बोले - "पुजारी जी, आज मेरी माँ कर्मा बाई इस लोक को छोड़कर मेरे निज लोक को विदा हो गई है । अब मुझे कौन खिचड़ी बनाकर खिलाएगा ?"🌺* *🌺पुजारी ने कहा - "प्रभु जी ! आपको माँ की कमी महसूस नहीं होने देंगे । आज के बाद आपको सबसे पहले खिचड़ी का भोग ही लगेगा ।" इस तरह आज भी जगन्नाथ भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है ।🌺* *🌹भगवान और उनके भक्तों की ये अमर कथायें अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक हैं । ये कथायें प्रभु प्रेम के स्नेह को दरसाने के लिए अस्तित्व में आयीं हैं कि प्रभु सिर्फ सच्चे और पवित्र भाव के भुखे है । आप भी इन कथाओं के माध्यम से भक्ति के रस को चखते हुए आनन्द के सरोवर में डुबकी लगाएं । ईश्वर की शक्ति के आगे तर्कशीलता भी नतमस्तक हो जाती है । तभी तो चिकित्सा विज्ञान के लोग भी कहते हैं - "दवा से ज्यादा, दुआ काम आएगी ।"🌹* *🌹प्रेम से बोलिये जय जगन्नाथ जी🌹*

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