hariom
hariom Apr 8, 2021

ओम नमो भगवती वासुदेवा

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संक्षिप्त योगवशिष्ठ (निर्वाण-प्रकरण-पूर्वार्ध) (नवां दिन) 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ श्री गणेशाय नमः ॐ श्रीपरमात्मनेनमः अज्ञान की महिमा और विभूतियों का सविस्तर वर्णन...(भाग 2) 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ संसाररूपी स्वल्प जलाशय में स्फुरित होने वाली सृष्टि रूपी क्षुद्र मछली को शठ कृतान्तरूपी वृद्ध गीव जो पकड़ लेता है, उसमें भी माया की ही महिमा है । परमपदरूप अचल ब्रह्मा संकल्प से उत्पन्न असंख्य जगदरूप जंगलों के जाल युगान्तरूपी अग्नी से जो दग्ध हो जाते हैं, उसमें भी अविद्या ही कारण है । निरन्तर उत्पत्ति और विनाश से तथा दुःख और सुख की सैकड़ों दशाओं से, इस प्रकार जगत्स्थिति जो पुनः पुन: बदलती रहती है, उसमें भी अविद्या ही कारण है । वासनारूपी जंजीरों से बँधी हुई अज्ञानियों की दृढ़ धारणा क्षुभित युगों के आवागमन तथा कठोर वज्रों के आघातों से भी जो विदीर्ण नहीं होती, इसमें उनकी अविद्या ही कारण है । राग-द्वेष से होने वाले उत्पत्ति-विनाश से तथा जरा मरण रूपी रोग से समस्त जंगम जाति जीर्ण-शीर्ण हो गयी है, इसमें उनका अज्ञान ही कारण है। कभी लक्ष्य में न आने वाले बिल में रहने के कारण अदृश्य और अपरिमिति भोजन करने वाला कालरूपी सर्प निर्भय होकर इस समस्त जगत् को जो क्षणभर में ही निगल जाता है, यह सब माया की ही महिमा है । प्रत्येक कल्परूप क्षण में क्षीण हो जाने- वाले ब्रह्माण्डरूप प्रस्फुट बुद्बुद, जो भयंकर कालरूपी महासमुद्र में उत्पन्न और विनष्ट हो जाते हैं, यह भी माया की महिमा है । उत्पन्न हो-होकर नष्ट हो जाने वाली प्रतप्त सृष्टिरूपी ये बिजलियाँ, जिन्हें चिन्मय परमात्मा के सकाश से प्रकाश-शक्ति प्राप्त हुई है, जो प्रकट होती हैं, वह भी माया की महिमा है । अनन्त संकल्पों वाली समस्त विकल्पों से शून्य विज्ञानानन्दधन ब्रह्मरूप पद में आश्चर्यों की पूर्ति करने वाली ऐसी कौन-सी शक्तियाँ नहीं हैं ! अर्थात् सभी शक्तियाँ उसमें विद्यमान हैं। उस प्रकार सुदृढ़ संकल्पों से प्राप्त अर्थसमूह से देदीप्यमान जगत् की ब्रह्म में जो यह कल्पना है, उसमें भी अज्ञान ही हेतु है। इसलिये श्रीराम ! जो कुछ बारंबार प्राप्त होने वाली सम्पत्तियाँ या आपत्तियाँ हैं, जो बाल्य यौचन-जरा-मरणरूपी महान् संताप हैं, जो सुख-दुःख की परम्परारूप संसार-सागर में गोता लगाना है, वह सब अज्ञानरूपी गाढ़ अन्धकार की विभूतियाँ हैं। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय क्रमशः... शेष अलगे लेख में... 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️

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