मोक्ष के लिए पूजा-पाठ नहीं ये काम करें, ईश्वर के भी होंगे दर्शन

मोक्ष के लिए पूजा-पाठ नहीं ये काम करें, ईश्वर के भी होंगे दर्शन

हमारी संस्कृति में कर्म का महत्वपूर्ण स्थान है। एक ही माता-पिता की जुड़वां संतान एक जैसे परिवेश-वातावरण एवं एक समान संसाधनों के उपयोग के बाद भी उनकी स्थिति अलग-अलग देखी जाती है। एक स्वस्थ दूसरा बीमार, एक सुंदर दूसरा कुरूप, एक दयालु दूसरा क्रूर। इन बातों से स्पष्ट होता है कि इन सबके पीछे व्यक्ति के अपने जन्म-जन्मान्त्तर के कर्म होते हैं। कर्म के कारण व्यक्ति अच्छा बनता है और कर्म से ही बुरा।

कर्म से ही मिलता है इंसान को सुख-दुख
भारतीय दर्शनों में कर्म के स्वरूप एवं वैविध्य का विवेचन किया गया है। वेदान्त दर्शन में कर्म को माया या अविद्या कहा गया है। सांख्य दर्शन में इसे क्लेश माना गया है। बौद्ध दर्शन में कर्म को वासना की संज्ञा से अभिहित किया गया है। न्याय-वैशेषिक में कर्म से अदृष्ट एवं मीमांसा में अपूर्व कहा गया है। प्राय: सभी दर्शनों में जगत वैचित्र्य का कारण कर्म को माना गया है। जैन आगम आचारांग सूत्र में कहा गया है कि कर्म से उपाधि अर्थात दुख का जन्म होता है। कर्म से ही मनुष्य अलग-अलग योनियां पाकर सुख-दुख को प्राप्त करता है।

सभी बंधनों का कारण कर्मपाश
भारतीय दार्शनिक आत्मा और शरीर के संयोग को बंधन तथा आत्मा और शरीर के वियोग को मोक्ष कहते हैं। बंधन संसार है और मोक्ष निर्वाण है। संसारी आत्मा कर्मों से जकड़ी होने के कारण परतन्त्र है। संसारी आत्मा को कर्म निरन्तर बांधता है। उमास्वाति कहते हैं, कषाय (क्रोध, मान, माया एवं लोभ) के कारण कर्म आत्मा को बांधता है। उपनिषदों में कहा गया है कि अकुशल पुरुषों द्वारा किया गया कर्म बंधन का कारण है। गीता कहती है कि सकाम कर्म बंधन का कारण है। इसकी गति भयंकर है। इस कर्म के पाश में जकड़ जाने का कारण ही सही मायने में बंधन है।

कर्म और फल का है आपस में गहरा संबंध
कर्मवाद के सिद्धांत के अनुसार जो प्राणी जैसा कर्म करता है उसको उसका फल अवश्य भोगना पड़ता है। कर्म जड़ होने के कारण न तो स्वयं को जानते हैं और न अपने फल को जानते हैं। किस कर्म का फल क्या होगा? कर्म फल उदय में कब आएगा इन सारी बातों की जानकारी ईश्वर को रहती है। वृहदारण्यक उपनिषद के अनुसार मनुष्य अपने कर्मों एवं आचरण से अपना भविष्य बनाता है। जो जैसा आचरण करता है वह वैसा ही कल पाता है। अच्छे कर्मों वाला अच्छा जन्म पाएगा और दुष्कर्मों वाला बुरा जन्म पाएगा। अच्छे कर्मों से पुण्य और बुरे कर्मों से पाप होता है। श्वेताश्वतर उपनिषद के अनुसार शरीर रुपी वृक्ष पर ईश्वर और जीव ये दोनों सदा साथ रहने वाले दो भिन्न पक्षी हैं। इनमें जीवात्म रूप एक पक्षी सुख-दुख का अनुभव करता हुआ कर्म फल को भोगता है, दूसरा ईश्वर रूपी पक्षी कर्मफलों का भोग नहीं करता, केवल उनका साथी बना रहता है।

कामना रहित कर्म है मोक्ष का द्वार
सं सार में आवागमन रोकने के लिए कर्म बीज को नष्ट करना बहुत आवश्यक है। जिसने अपने कर्मों को नष्ट कर लिया है उसका संसार में भ्रमण रुक जाता है। जिस प्रकार दग्धबीजों में पुन: अंकुर फूटने की शक्ति नहीं होती है उसी प्रकार कर्म बीजों के नष्ट हो जाने पर उनमें भव रुपी अंकुर उत्पन्न करने की शक्ति नहीं रहती। जैन दर्शन के अनुसार जब कर्म बीज नष्ट हो जाते हैं तो आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप में स्थित होकर लोकाश में स्थित हो जाता है। गीता में कहा गया है कि जिस व्यक्ति के सारे कर्म कामना और संकल्प से रहित होते हैं, उसी को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पुनर्जन्म भी कर्म पर ही है आधारित
शास्त्रों में कर्म और पुनर्जन्म का अनिवार्य संबंध माना गया है। भगवान महावीर के अनुसार क्रोध, माया और लोभ-ये पुनर्जन्म के मूल को पोषण करने वाले हैं। नवजात शिशु के हर्ष, भय, शोक आदि होते हैं। उसका मूल कारण पुनर्जन्म की स्मृति है। जन्म होते ही बच्चा मां का स्तन-पान करने लगता है, वह पूर्वजन्म में किए हुए आहार के अभ्यास से ही होता है। जैसे युवावस्था का शरीर बाल्यावस्था शरीर की उत्तरवर्ती अवस्था है वैसे ही बालक का शरीर पूर्वजन्म के बाद में होने वाली अवस्था है। जीवन के प्रति मोह और मृत्यु के प्रति भय वह भी पूर्वबद्ध संस्कारों का परिणाम है। भगवान महावीर ने अनेक व्यक्तियों को पूर्व जन्म का स्मरण कराया उनमें से मुनि मेघ कुमार प्रमुख है। कर्म की सत्ता स्वीकार करने पर उसके फलस्वरूप परलोक या पुनर्जन्म की सत्ता की स्वीकृति अनिवार्य है। रामानुज ने पुनर्जन्म के अलावा कर्म को बंधन भी कहा है। उनके अनुसार भक्ति के द्वारा ही कर्म रुपी बंधन को काटा जा सकता है। कई धार्मिक ग्रंथों में भी भक्ति को मोक्ष का कारण बताया है।

भगवान महावीर के अनुसार क्रोध, माया और लोभ-ये पुनर्जन्म के मूल को पोषण करने वाले हैं। नवजात शिशु के हर्ष, भय, शोक आदि होते हैं। उसका मूल कारण पुनर्जन्म की स्मृति है। जन्म होते ही बच्चा मां का स्तन-पान करने लगता है, वह पूर्वजन्म में किए आहार के अभ्यास से ही होता है।

Like Jyot Belpatra +332 प्रतिक्रिया 18 कॉमेंट्स • 114 शेयर

कामेंट्स

Ajnabi Dec 11, 2017
very nice krishna ji jay shree Radhe krishna veeruda

J. JHA Dec 11, 2017
धन्यवाद जी ज्ञान चक्षु खोलने के लिये।

J. JHA Dec 12, 2017
ॐ नम: शिवाय ॐ

T.K Aug 21, 2018

,💝suprabhat💝

Pranam Bell Dhoop +17 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 146 शेयर
pooja yadav Aug 21, 2018

Pranam Like Flower +96 प्रतिक्रिया 27 कॉमेंट्स • 541 शेयर
rakesh gaur Aug 21, 2018

Pranam Like Jyot +30 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 267 शेयर
Rani shrivas Aug 22, 2018

Bell Like Pranam +46 प्रतिक्रिया 15 कॉमेंट्स • 394 शेयर

शुभ बुधवार सुप्रभात 🌻🌼💫
जय श्री गोरी नंदन रिद्धि सिद्धि विनायक ।⚜🌼🙏🏻🌺
मूसे की सवारी तेरी, अजक है तेरी माया ।😪🌺
जय हो तेरी गोरा दुलारे तेरा अंत किसी ने ना पाया ।😪🌺
जय श्री गणपत गणपातए नमोस्तुते ।🙏🏻🙏🏻🙏🏻
जय माता दी जय🙏🏻🌺🙌🔱...

(पूरा पढ़ें)
Jyot Pranam Flower +14 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 58 शेयर
Shashikant shelokar Aug 21, 2018

Pranam Like Flower +59 प्रतिक्रिया 22 कॉमेंट्स • 210 शेयर
Babita m Aug 21, 2018

Like Bell Tulsi +125 प्रतिक्रिया 72 कॉमेंट्स • 292 शेयर

ऊँ🙏 शुभ पंचांग🌹शुभ राशिफल 🙏ऊँ

बुधवार 2⃣2⃣ अगस्त 2⃣0⃣1⃣8⃣

तिथि: एकादशी - ०७:४० तक

#Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)

#Whatsapp no :- 09911020152

*बुधवार 2⃣2⃣ अगस्त 2⃣0⃣1⃣8⃣*

सूर्योदय:।०५:५३
सूर्यास्त: १८:५३
हिन्दु सूर्योदय: ०५:५७
हिन्दु सूर्...

(पूरा पढ़ें)
Pranam Like Flower +16 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 32 शेयर

☀️🌅☀️🌅☀️🌅☀️🌅☀️🌅☀️🌅☀️

Like Pranam Jyot +66 प्रतिक्रिया 28 कॉमेंट्स • 267 शेयर

🙏🌹जय श्री महाकाल 🌹🙏
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का संध्या आरती श्रृंगार दर्शन
🔱21 अगस्त 2018 ( मंगलवार )🔱

Pranam Jyot Dhoop +144 प्रतिक्रिया 13 कॉमेंट्स • 64 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB