Charu Malhotra
Charu Malhotra Sep 1, 2017

इंद्रदेव का सदाचार ज्ञान।

इंद्रदेव का सदाचार ज्ञान।

राजा हरिश्चन्द्र के कोई संतान न थी| उन्होंने पर्वत और नारद- इन दो ऋषियों से इसका उपाय पूछा| देवर्षि नारद ने उन्हें वरुणदेव की आराधना करने की सलाह दी| राजा ने वरुण की आराधना की और पुत्र-प्राप्ति कर उससे उनके यजन की भी प्रतिज्ञा की| इससे उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ और उसका नाम रोहित रखा| कुछ दिन बाद जब वरुण ने हरिश्चन्द्र को अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण कराया तो उन्होंने उत्तर दिया- ‘जब तक शिशु के दाँत नही उत्पन्न होते, वह शिशु अमेध्य रहता है, अतः दाँत निकलने पर यज्ञ करना उचित होगा|’ 
वरुण ने बच्चे के दाँत निकलने पर जब उन्हें पुनः स्मरण दिलाया, हरिश्चन्द्र ने कहा- ‘अभी तो इसके दूध के दाँत के ही दाँत निकले है, यह अभी निरा बच्चा ही है| दूध के दाँत गिरकर नए दाँत आ जाने दीजिए, तब यज्ञ करूँगा|’ फिर दाँत निकले पर वरुण ने कहा- ‘अब तो बालक के स्थायी दाँत भी निकल आये; अब तो यज्ञ करो|’ इस पर हरिश्चन्द्र ने कहा- ‘यह क्षत्रियकुलोत्पन्न बालक है| क्षत्रिय जब तक कवच धारण नही करता, तब तक किसी यज्ञिय कार्य के लिए उपयुक्त नही होता| बस, इसे कवच-शस्त्र धारण करने योग्य हो जाने दीजिए, फिर आपके आदेशानुसार यज्ञ करूँगा|’ वरुण ने उत्तर दिया- ‘बहुत ठीक|’ इस प्रकार रोहित सोलह-सत्ररह वर्षों का हो गया और शस्त्र-कवच भी धारण करने लगा| तब वरुण ने फिर टोका| हरिश्चन्द्र ने कहा- ‘अच्छी बात है| आप कल पधारे| सब यज्ञिय व्यवस्था हो जाएगी|’
हरिश्चंद्र ने रोहित को बुलाकर कहा- ‘तुम वरुण देव की कृपा से मुझे प्राप्त हुए हो, इसलिए मैं तुम्हारे द्वारा उनका यजन करूँगा|’ किंतु रोहित ने यह बात स्वीकार नही की और अपना धनुष-बाण लेकर वन चला गया| अब वरुण देव की शक्तियों ने हरिश्चंद्र को पकड़ा और वे जलोदर रोग से ग्रस्त हो गए| पिता की व्याधि का समाचार जब रोहित ने अरण्य में सुना, तब वह नगर की ओर चल पड़ा| परंतु बीच मार्ग में इंद्र पुरुष का वेश धारण कर उसके समक्ष प्रकट हुए और प्रतिवर्ष उसे एक-एक श्लोक द्वारा उपदेश देते रहे| यह उपदेश पाँच वर्षों में पूरा हुआ और तब तक रोहित अरण्य में ही निवास करते हुए उनके उपदेश का लाभ उठाता रहा| 

‘रोहित! हमने विद्वानों से सुना है कि श्रम से थककर चूर हुए बिना किसी को धन-संपदा प्राप्त नही होती| बैठे-ठाले पुरुष को पाप धर दबाता है| इंद्र उसी का मित्र है, जो बराबर चलता रहता है- थककर, निराश होकर बैठ नही जाता| इसलिए चलते रहो|’
‘जो व्यक्ति चलता रहता है, उसकी पिंडलियाँ (जाँघें) फूल देती है (अन्यों द्वारा सेवा होती है)| उसकी आत्मा वृद्धिगंत होकर आरोग्यादि फल की भागी होती है तथा धर्मार्थ प्रभासादि तीर्थों में सतत चलने वाले के अपराध और पाप थककर सो जाते है| अतः चलते ही रहो|’
‘बैठने वाले की किस्मत बैठ जाती है, उठने वाले की उठती, सोने वाले की सो जाती है और चलने वाले का भाग्य प्रतिदिन उतरोतर चमकने लगता है| अतः चलते ही रहो|’
‘सोने वाला पुरुष मानो कलियुग में रहता है, अंगडाई लेने वाला व्यक्ति द्वापर में पहुँच जाता है और उठकर खड़ा हुआ व्यक्ति त्रेता में आ जाता है तथा आशा और उत्साह से भरपूर होकर अपने निश्चित मार्ग पर चलने वाले के सामने सतयुग उपस्थित हो जाता है| अतः चलते ही रहो|’
‘उठकर कमर कसकर चल पड़ने वाले पुरुष को ही मधु मिलता है| निरंतर चलता हुआ पुरुष ही स्वादिष्ट फलों का आनंद प्राप्त करता है; सूर्यदेव को देखो तो सतत चलते रहते है, क्षणभर भी आलस्य नही करते| इसलिए जीवन में भौतिक और आध्यात्मिक मार्ग के पथिक को चाहिए कि बाधाओं से संघर्ष करता हुआ चलता ही रहे, आगे बढ़ता ही रहे|

इस सुंदर उपदेश में रोहित को इंद्र ने बराबर चलते रहने की शिक्षा दी है, जो उन्हें किसी ब्रह्मवेता से प्राप्त हुई थी| गीता का मूल उद्देश्य आत्मा का उद्बोधन है, जिसमें बताया गया है कि क्या अभ्युदय और क्या निःश्रेयस- दोनों की उन्नति के पथिक को बिना थके आगे बढ़ते रहना चाहिए; क्योंकि चलते रहने का नाम ही जीवन है| ठहरा हुआ जल, रुका हुआ वायु गंदा हो जाता है| बहते हुए झरने के जल में ताजगी और जिंदगी रहती है, प्रवाहशील पवन में प्राणों का भंडार रहता है| कोटि-कोटि वर्षों से अनंत आकाश में निरंतर चलते हुए सूर्यदेव पर द्रष्टि डालिए, वह असंख्य लोक-लोकांतरों का भ्रमण करते हुए हमारे द्वार पर आकर हमें निरंतर उपदेश दे रहे है| जो अपने मार्ग में आगे कदम उठाते बढ़ते जाते है, भगवान् उनका कल्याण निश्चित-रुप से स्वयं करते है|
अंत में रोहित को वन में ही अजीगर्त मुनि अपने तीन पुत्रों के साथ भूख से संतप्त दृष्टिगोचर हुए| रोहित ने उन्हें सौ गायें देकर उनके एक पुत्र शुनः शेप को यज्ञ के लिए मोल ले लिया| हरिश्चन्द्र  का यज्ञ आरंभ हुआ| उनके यज्ञ में विश्वामित्र होता, जमदग्नि अध्वर्यु, वशिष्ठ ब्रह्मा और अयास्य उद्गाता बने| शुनः शेप ने विश्वामित्र के निर्देश से प्रजापति, अग्नि, सविता और वरुण आदि देवों की स्तुति-प्रार्थना की| इससे वह समस्त बन्धनों से मुक्त हो गया| वरुणदेव ने भी संतुष्ट होकर राजा हरिश्चन्द्र को रोग से मुक्ति प्रदान की| इस प्रकार इंद्र के उपदेश से देवों की स्तुति, प्रार्थना और उपासना तथा यज्ञ की सफलता से रोहित का जीवन भी सफल एवं आनंद से परिपूर्ण हो गया|’

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कामेंट्स

Gajrajg Dec 10, 2017
सुप्रभातम

uncle Dec 13, 2017
जय श्री कृष्णा मित्रों शुभ प्रभात

Gajrajg Jan 24, 2018
सकारात्मक सोच आपके जिवन को, सही दिशा देती है सही सोचें, सही समझे सही दिशा मे बढें, 👏शुभदिन सुप्रभात!!

Gajrajg Jan 26, 2018
देश भक्तों के बलिदान से , स्वतंत्र हुए है हम .. कोई पूछे कौन हो, तो गर्व से कहेंगे . भारतीय है हम … गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं।

Gajrajg Mar 12, 2018
ईश्वर का संदेश : तुम सोने से पहले सब को माफ कर दिया करो, तुम्हारे जागने से पहले मैं तुम्हें माफ कर दूंगा " - शुभ रात्रि - * - good night -

Gajrajg Mar 31, 2018
" जय राधे कृष्ण " 🙏जो शेष है वही विशेष है 🙏 - शुभ रात्रि - * - good night -

Gajrajg May 5, 2018
🙏जय श्री कृष्ण🙏 स्वभाव भी इंसान की अपनी कमाई हुयी सबसे बड़ी दौलत है.* *कितना भी किसी से दूर हों, पर अच्छे स्वभाव के कारण आप किसी न किसी पल यादों में आ ही जाते हो। 🌞🙏🏼शुभ दिन 🙏🏼🌞

Gajrajg May 9, 2018
🙏जय श्री कृष्ण🙏 मुस्कुराते रहिए... 🌹🙏🙏🌹 कभी अपने लिये कभी अपनों के लिये 🌷शुभ दिन🌷

Gajrajg May 9, 2018
🙏जय श्री कृष्ण🙏 मुस्कुराते रहिए... 🌹🙏🙏🌹 कभी अपने लिये कभी अपनों के लिये 🌷शुभ दिन🌷

Gajrajg May 10, 2018
🙏माँ🙏 मोहब्बत की बात भले ही करता हो जमाना मगर प्यार आज भी "माँ "से शुरू होता है 🌷शुभ दिन🌷

Gajrajg May 11, 2018
🙏जय श्री कृष्ण🙏 भरोसा और आशीर्वाद* *कभी दिखाई नही देते ....* *लेकिन* *असम्भव को सम्भव* *बना देते है.....!!* 🌷आपका दिन मंगलमय हो*🌷

shivani Oct 20, 2018

jai shree ram

Pranam Jyot Flower +150 प्रतिक्रिया 67 कॉमेंट्स • 805 शेयर
Dhanraj Maurya Oct 20, 2018

Om Jai Jai Om

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harshita malhotra Oct 20, 2018

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Aechana Mishra Oct 20, 2018

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Sunil Jhunjhunwala Oct 20, 2018

Sunil Jhunjhunwala
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^

Jyot Pranam Flower +14 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 236 शेयर

*🌷🙏तलाश जिंदगी की थी*
*दूर तक निकल पड़े,,,,*

*जिंदगी मिली नही*
*तज़ुर्बे बहुत मिले,;;*

*किसी ने मुझसे कहा कि...*
*तुम इतना *ख़ुश* *कैसे रह लेते हो?*
*तो मैंने कहा कि...*.
*मैंने जिंदगी की गाड़ी से...*
*वो साइड ग्लास ही हटा दिये...*
*जिसमेँ पीछे...

(पूरा पढ़ें)
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Krishna Rai Oct 21, 2018

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shivani Oct 20, 2018

radhe radhe

Pranam Like Bell +100 प्रतिक्रिया 36 कॉमेंट्स • 250 शेयर

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