R.G.P.Bhardwaj
R.G.P.Bhardwaj Apr 10, 2020

🍃मेथी एक गुणकारी औषधि🍃 🌼🌼〰🌼🌼〰🌼🌼〰🌼🌼 हमारे देश में सभी स्थानों पर मेथी का साग रुचि पूर्वक खाया जाता है।। मेथी के अंकुरित बीजों की स्वास्थ्यवर्धक सब्जी बनाकर भी सेवन करते हैं।। मेथी एक एंटी आक्सीडेंट,, प्राकृतिक एंटीबायोटिक एवं रक्तशोधक औषधि है।। मेथी ८० प्रकार के वातरोगों को नष्ट करने वाली प्रभावी औषधि है।। मधुमेह में भी इसकी बड़ी उपयोगिता है।। आम इत्यादि के अचार जो खट्टे होने से अम्लीयता के दोष से भरे होने के कारण वात का दर्द बढ़ाने वाले होते हैं,, उस दोष को कम करने के लिए अचार में मेथी का प्रयोग परंपरागत ढंग से करते आ रहे हैं।। मेथी में प्रोटीन,, विटामिन तथा आयरन,, पोटैशियम,, फास्फोरस,, कैल्शियम आदि खनिज लवणों का भंडार है।। दूध पिलाने वाली माताओं के लिए दुग्ध वर्धक,, स्तन््यग्रंथि विकासक है ।। हृदय रोग एवं रक्तचाप को नियंत्रित करने का गुण है।। बड़ी आंत के कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक है।। सौंदर्यवर्धक है।। हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को नष्ट करती है।। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।। वायु नाशक,, पौष्टिक तथा मंद जठराग्नि को तीव्र करती है । मोटापा नियंत्रित करती है।। पाचन संबंधी दोष जैसे-- गैस,, अफरा,, अजीर्ण को दूर करने वाला है।। मेथी में मृदुविरेचक गुण है।। इसके बीजों को पानी में भिगोकर उसके पानी को चेचक के रोगी को शांतिदायक पेय के रूप में पिलाया जाता है।। यह कृमि नाशक तथा कफरोग निवारक है।। 🍃उपयोग🍃 गठिया संधिवात में👉 (१) ५ ग्राम मेथी दाना पानी के साथ सुबह शाम निगल लें।। (२) मेथी के पत्तों को पीसकर आटा में मिलाकर बिना तेल के पराठे बनाकर खाएं।। (३) मेथी के लड्डू बनाकर शीतकाल में नवंबर से फरवरी माह तक नियमित सेवन करें।। (४) मेथी के पत्तों का साग या मेथी दाना अंकुरित कर उसकी सब्जी बनाकर खाना चाहिए।। (५) ३० ग्राम अंकुरित मेथी नित्य प्रातः सेवन करें।। शीत स्थल से बचें।। सुबह शाम १-१ घंटा अपनी स्थिति के अनुसार यथाशक्ति टहलना चाहिए।। नित्य तेल मालिस करना,, यथाशक्ति आसन प्राणायाम करें।। अनाज की अपेक्षा फलों का रस,, फल एवं हरी सब्जियाें का अधिक सेवन करें।। इससे रक्तशोधन होगा।। जोड़ों की चिकनाई बढ़ेगी।। अस्थि क्षरण रुकेगा।। नए ऊतकों का निर्माण होगा।। गठिया संधिवात जटिल रोग हैं,, इनके लिए लंबे समय तक पथ्य परहेज करना चाहिए।। खटाई से बचें।। गरम पानी से स्नान करें।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 माता को दूध की कमी में👉 स्तनपान कराने वाली माताओं को मेथी का लड्डू खिलाने के बाद गोदुग्ध पिलाने से तथा शतावरी चूर्ण एवं सफेद जीरा ३-३ ग्राम सेवन करने से मां का दूध बढ़ने लगता है।। मेथी में डावोस्जेनिन नामक तत्व होता है जो दूध का उत्पादन बढ़ाने वाला होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 हाथ पेेैरों के दर्द में👉 मेथी को घी में भूनकर पीस कर गुड़ की चासनी में थोड़ा घी मिलाकर घोंट कर छोटे छोटे लड्डू बनाकर सुबह-शाम १५-२० दिनों तक १-१ लड्डू सेवन करें।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 ️जीर्ण अतिसार में👉 (१) ५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण तथा १ ग्राम सोंठ,, १० ग्राम गुड़ तथा २०० ग्राम मथी हुई दही मिलाकर पीने से लाभ होता है।। (२) १० ग्राम मेथी दाना पीसकर १५० ग्राम दही में मिलाकर दिन में २-३ बार सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।। पथ्य के रूप में उबालकर ठंडा पानी,, नींबू पानी,, अच्छी तरह पका हुआ केला,, दही,, ईसबगोल की भूसी,, विल्ब चूर्ण तथा पुराने चावल का भात दें।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 प्रदर रोग में👉 ५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण थोड़े गुड़ एवं घी मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिन चबा चबाकर खाने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 कब्ज में👉 (१) एक चम्मच मेथी दाना प्रति दिन सुबह शाम पानी के साथ निगल लें।। (२) ३ ग्राम मेथी दाना चूर्ण गुड़ या पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।। मेथी के पत्तों का साग बना कर खाने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 बहुमूत्र में👉 मेथी के पत्तों का ताजा रस एक कप,, २ ग्राम कत्था,, ४ ग्राम देशी खाँड मिलाकर नित्य पीने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 लू लगने पर👉 गरमी के दिनों में पर्याप्त पानी न पीने से लू जानलेवा हो जाती है।। मेथी के सूखे ५ ग्राम पत्तों को एक गिलास पानी में भिगोकर २ घंटे बाद मसलकर छान लें,, थोड़ा शहद मिलाकर शरबत बना कर पीने से लू का असर मिटता है।। सहायक उपचार में कच्चे आम का पन्ना बनाकर पीना चाहिए।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 मधुमेह में👉 (१) २० ग्राम मेथी दाना रात को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें।। प्रात: मसलकर व छानकर पी लें।। यह क्रम नित्य बनाए रखें।। (२) मेथी दाना अंकुरित कर ३० ग्राम नित्य सेवन करें।। (३) मेथी का साग,, मेथी दाना की सब्जी सप्ताह में ३-४ दिन सेवन करें।। सावधानी👉 मधुमेह के रोगी चावल,, आलू,, शकरकंद,, मैदा,, चीनी,, गुड़,, केला से परहेज करें।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 जोड़ों की सूजन में👉 मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर थोड़ा गुण करके पुल्टिस बनाकर बांधने से सूजन मिटती है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 खूनी बवासीर में👉 (१) मेथी के बीज पीसकर १५ ग्राम चूर्ण २५० ग्राम पानी में उबालकर जब आधा शेष बचे तब उतारकर ठंढ़ा करके पिलाने से खून गिरना बंद हो जाता है।। (२) १५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण को २५० ग्राम दूध में उबाल कर पीने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 बुखार,, सरदी,, जुकाम,, खांसी में👉 (१) मेथी का साग बना कर खाने से लाभ होता है।। (२) १० मेथी दाना चूर्ण एक चम्मच शहद तथा दो ग्राम नींबू रस के साथ चाटने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 हृदय रोग में👉 मेथी दाना नियमित सेवन करने से हानि कारक कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है।। मेथी में मौजूद पोटैशियम तत्व रक्तचाप तथा हृदय गति को नियंत्रित,, संतुलित रखने का काम करता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 कील मुंहासों के दाग धब्बों में👉 मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लेप करने से दाग धब्बे मिटते हैं।। त्वचा में निखार आता है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 बालों के रोग में👉 बालों का झड़ना,, सफेद होना,, बालों का न बढ़ना,, रूसी होना आदि बालों की स्वास्थ्य समस्याओं में मेथी के पत्तों को नारियल के दूध में मिलाकर पेस्ट बना कर बालों की त्वचा में लगाने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 मासिक धर्म की अनियमितता में👉 मेथी दाने का नियमित सेवन करने से अनियमितता दूर होती है।। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में अनेक समस्याएं जैसे -- गुमी लगना,, डिप्रेशन,, चिड़चिड़ापन,, तनाव,, चिंता,, अनिद्रा आदि होती हैं,, इन्हें कम करने के में मेथी दाना लाभदायक होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 प्रसव के बाद👉 गर्भाशय की शुद्धि एवं संकुचन को बढ़ाने के लिए मेथी के लड्डू का सेवन करना चाहिए।। प्रसव के बाद ज्वर आदि में👉 प्रसव के बाद प्रसूति का ज्वर आदि रोग होने पर एक किलो मेथी को महीन पीस कर उतना ही घी मिलाकर ३ किलो दूध में धीमी आँच पर पकाएं,, जब गाढ़ा हो जाए तब ३ किलो देशी खाँड की चासनी बनाकर उसमें मिलाकर २० ग्राम प्रति दिन खाने से प्रसूति रोगों से बचाव होता है।। बल वृद्धि होती है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 मेथी की स्वास्थ्यवर्धक रोटियां👉 (१) मेथी के ताजे पत्तों का रस आटे में मिलाकर रोटी बनाकर खाएं।। (२) मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर,, पेस्ट बना कर आटे में मिलाकर पौष्टिक एवं स्वादिष्ट रोटी का सेवन करें।। स्वाद के लिए उचित मात्रा में अजवाइन,, जीरा,, धनिया,, सेंधा नमक,, काली मिर्च आटे में मिला लेना चाहिए।। मेथी की रोटी में रक्तशोधक,, वात विकार नाशक तथा कब्ज निवारक गुण होते हैं।। ✏✏✏ 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰

🍃मेथी एक गुणकारी औषधि🍃
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हमारे देश में सभी स्थानों पर मेथी का साग रुचि पूर्वक खाया जाता है।। मेथी के अंकुरित बीजों की स्वास्थ्यवर्धक सब्जी बनाकर भी सेवन करते हैं।। मेथी एक एंटी आक्सीडेंट,, प्राकृतिक एंटीबायोटिक एवं रक्तशोधक औषधि है।। मेथी ८० प्रकार के वातरोगों को नष्ट करने वाली प्रभावी औषधि है।। मधुमेह में भी इसकी बड़ी उपयोगिता है।। आम इत्यादि के अचार जो खट्टे होने से अम्लीयता के दोष से भरे होने के कारण वात का दर्द बढ़ाने वाले होते हैं,, उस दोष को कम करने के लिए अचार में मेथी का प्रयोग परंपरागत ढंग से करते आ रहे हैं।। मेथी में प्रोटीन,, विटामिन तथा आयरन,, पोटैशियम,, फास्फोरस,, कैल्शियम आदि खनिज लवणों का भंडार है।। दूध पिलाने वाली माताओं के लिए दुग्ध वर्धक,, स्तन््यग्रंथि विकासक है ।। हृदय रोग एवं रक्तचाप को नियंत्रित करने का गुण है।। बड़ी आंत के कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक है।। सौंदर्यवर्धक है।। हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को नष्ट करती है।। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।। वायु नाशक,, पौष्टिक तथा मंद जठराग्नि को तीव्र करती है । मोटापा नियंत्रित करती है।। पाचन संबंधी दोष जैसे-- गैस,, अफरा,, अजीर्ण को दूर करने वाला है।। मेथी में मृदुविरेचक गुण है।। इसके बीजों को पानी में भिगोकर उसके पानी को चेचक के रोगी को शांतिदायक पेय के रूप में पिलाया जाता है।। यह कृमि नाशक तथा कफरोग निवारक है।।

                  🍃उपयोग🍃

गठिया संधिवात में👉  (१) ५ ग्राम मेथी दाना पानी के साथ सुबह शाम निगल लें।।

(२) मेथी के पत्तों को पीसकर आटा में मिलाकर बिना तेल के पराठे बनाकर खाएं।।

(३) मेथी के लड्डू बनाकर शीतकाल में नवंबर से फरवरी माह तक नियमित सेवन करें।।

(४) मेथी के पत्तों का साग या मेथी दाना अंकुरित कर उसकी सब्जी बनाकर खाना चाहिए।।

(५) ३० ग्राम अंकुरित मेथी नित्य प्रातः सेवन करें।।

शीत स्थल से बचें।। सुबह शाम १-१ घंटा अपनी स्थिति के अनुसार यथाशक्ति टहलना चाहिए।। नित्य तेल मालिस करना,, यथाशक्ति आसन प्राणायाम करें।। अनाज की अपेक्षा फलों का रस,, फल एवं हरी सब्जियाें का अधिक सेवन करें।। इससे रक्तशोधन होगा।। जोड़ों की चिकनाई बढ़ेगी।। अस्थि क्षरण रुकेगा।। नए ऊतकों का निर्माण होगा।। गठिया संधिवात जटिल रोग हैं,, इनके लिए लंबे समय तक पथ्य परहेज करना चाहिए।। खटाई से बचें।। गरम पानी से स्नान करें।।
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माता को दूध की कमी में👉  स्तनपान कराने वाली माताओं को मेथी का लड्डू खिलाने के बाद गोदुग्ध पिलाने से तथा शतावरी चूर्ण एवं सफेद जीरा ३-३ ग्राम सेवन करने से मां का दूध बढ़ने लगता है।। मेथी में डावोस्जेनिन नामक तत्व होता है जो दूध का उत्पादन बढ़ाने वाला होता है।।
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हाथ पेेैरों के दर्द में👉  मेथी को घी में भूनकर पीस कर गुड़ की चासनी में थोड़ा घी मिलाकर घोंट कर छोटे छोटे लड्डू बनाकर सुबह-शाम १५-२० दिनों तक १-१ लड्डू सेवन करें।।
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️जीर्ण अतिसार में👉 (१) ५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण तथा १ ग्राम सोंठ,, १० ग्राम गुड़ तथा २०० ग्राम मथी हुई दही मिलाकर पीने से लाभ होता है।।

(२) १० ग्राम मेथी दाना पीसकर १५० ग्राम दही में मिलाकर दिन में २-३ बार सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।।
पथ्य के रूप में उबालकर ठंडा पानी,, नींबू पानी,, अच्छी तरह पका हुआ केला,, दही,, ईसबगोल की भूसी,, विल्ब चूर्ण तथा पुराने चावल का भात दें।। 
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प्रदर रोग में👉  ५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण थोड़े गुड़ एवं घी मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिन चबा चबाकर खाने से लाभ होता है।।
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कब्ज में👉  (१) एक चम्मच मेथी दाना प्रति दिन सुबह शाम पानी के साथ निगल लें।।

(२) ३ ग्राम मेथी दाना चूर्ण गुड़ या पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।। मेथी के पत्तों का साग बना कर खाने से लाभ होता है।।
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बहुमूत्र में👉  मेथी के पत्तों का ताजा रस एक कप,, २ ग्राम कत्था,, ४ ग्राम देशी खाँड मिलाकर नित्य पीने से लाभ होता है।।
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लू लगने पर👉  गरमी के दिनों में पर्याप्त पानी न पीने से लू जानलेवा हो जाती है।। मेथी के सूखे ५ ग्राम पत्तों को एक गिलास पानी में भिगोकर २ घंटे बाद मसलकर छान लें,, थोड़ा शहद मिलाकर शरबत बना कर पीने से लू का असर मिटता है।। सहायक उपचार में कच्चे आम का पन्ना बनाकर पीना चाहिए।।
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मधुमेह में👉  (१) २० ग्राम मेथी दाना रात को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें।। प्रात: मसलकर व छानकर पी लें।। यह क्रम नित्य बनाए रखें।।

(२) मेथी दाना अंकुरित कर ३० ग्राम नित्य सेवन करें।।

(३) मेथी का साग,, मेथी दाना की सब्जी सप्ताह में ३-४ दिन सेवन करें।।

सावधानी👉  मधुमेह के रोगी चावल,, आलू,, शकरकंद,, मैदा,, चीनी,, गुड़,, केला से परहेज करें।।
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जोड़ों की सूजन में👉 मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर थोड़ा गुण करके पुल्टिस बनाकर बांधने से सूजन मिटती है।।
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खूनी बवासीर में👉  (१) मेथी के बीज पीसकर १५ ग्राम चूर्ण २५० ग्राम पानी में उबालकर जब आधा शेष बचे तब उतारकर ठंढ़ा करके पिलाने से खून गिरना बंद हो जाता है।।
(२) १५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण को २५० ग्राम दूध में उबाल कर पीने से लाभ होता है।।
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बुखार,, सरदी,, जुकाम,, खांसी में👉  (१)  मेथी का साग बना कर खाने से लाभ होता है।।
(२) १० मेथी दाना चूर्ण एक चम्मच शहद तथा दो ग्राम नींबू रस के साथ चाटने से लाभ होता है।।
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हृदय रोग में👉  मेथी दाना नियमित सेवन करने से हानि कारक कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है।। मेथी में मौजूद पोटैशियम तत्व रक्तचाप तथा हृदय गति को नियंत्रित,, संतुलित रखने का काम करता है।।
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कील मुंहासों के दाग धब्बों में👉  मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लेप करने से दाग धब्बे मिटते हैं।। त्वचा में निखार आता है।
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बालों के रोग में👉 बालों का झड़ना,, सफेद होना,, बालों का न बढ़ना,, रूसी होना आदि बालों की स्वास्थ्य समस्याओं में मेथी के पत्तों को नारियल के दूध में मिलाकर पेस्ट बना कर बालों की त्वचा में लगाने से लाभ होता है।।
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मासिक धर्म की अनियमितता में👉  मेथी दाने का नियमित सेवन करने से अनियमितता दूर होती है।। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में अनेक समस्याएं जैसे -- गुमी लगना,, डिप्रेशन,, चिड़चिड़ापन,, तनाव,, चिंता,, अनिद्रा आदि होती हैं,, इन्हें कम करने के में मेथी दाना लाभदायक होता है।।
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प्रसव के बाद👉 गर्भाशय की शुद्धि एवं संकुचन को बढ़ाने के लिए मेथी के लड्डू का सेवन करना चाहिए।।

प्रसव के बाद ज्वर आदि में👉 प्रसव के बाद प्रसूति का ज्वर आदि रोग होने पर एक किलो मेथी को महीन पीस कर उतना ही घी मिलाकर ३ किलो दूध में धीमी आँच पर पकाएं,, जब गाढ़ा हो जाए तब ३ किलो देशी खाँड की चासनी बनाकर उसमें मिलाकर २० ग्राम प्रति दिन खाने से प्रसूति रोगों से बचाव होता है।। बल वृद्धि होती है।
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मेथी की स्वास्थ्यवर्धक रोटियां👉 (१) मेथी के ताजे पत्तों का रस आटे में मिलाकर रोटी बनाकर खाएं।।

(२) मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर,, पेस्ट बना कर आटे में मिलाकर पौष्टिक एवं स्वादिष्ट रोटी का सेवन करें।। स्वाद के लिए उचित मात्रा में अजवाइन,, जीरा,, धनिया,, सेंधा नमक,, काली मिर्च आटे में मिला लेना चाहिए।। मेथी की रोटी में रक्तशोधक,, वात विकार नाशक तथा कब्ज निवारक गुण होते हैं।।
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Shuchi Singhal May 10, 2020

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Shuchi Singhal May 10, 2020

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Vinod Kumar May 9, 2020

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Shree Radhey May 9, 2020

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शाकाहार उत्तम आहार 🍋 🌿🍑🍎🍏🍒🍅🍐🍊🍋🍍🌿 (1)-केला: ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्षा करता है,अतिसार में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है। (2)-जामुन: केन्सर की रोक थाम,हृदय की सुरक्षा,कब्ज मिटाता है,स्मरण शक्ति बढाता है,रक्त शर्करा नियंत्रित करता है।डायबीटीज में अति लाभदायक। (3)-सेवफ़ल: हृदय की सुरक्षा करता है, दस्त रोकता है,कब्ज में फ़ायदेमंद है,फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है. (4)-चुकंदर:- वजन घटाता है,ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,अस्थिक्छरण रोकता है,केंसर के विरुद्ध लडता है,हृदय की सुरक्षा करता है। (5)-पत्ता गोभी: बवासीर में हितकारी है,हृदय रोगों में लाभदायक है,कब्ज मिटाता है,वजन घटाने में सहायक है। केंसर में फ़ायदेमंद है। (6)-गाजर:- नेत्र ज्योति वर्धक है, केंसर प्रतिरोधक है, वजन घटाने मेँ सहायक है, कब्ज मिटाता है, हृदय की सुरक्षा करता है। (7)- फ़ूल गोभी:- हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट,खरोंच ठीक करता है। (8)-लहसुन:- कोलेस्टरोल घटाती है, रक्त चाप घटाती है, कीटाणुनाशक है,केंसर से लडती है (9)-नींबू:- त्वचा को मुलायम बनाता है,केंसर अवरोधक है, हृदय की सुरक्षा करता है,,ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, स्कर्वी रोग नाशक है। (10)-अंगूर: रक्त प्रवाह वर्धक है, हृदय की सुरक्षा करता है, केंसर से लडता है, गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, नेत्र ज्योति वर्धक है। (11)-आम:🍋 केंसर से बचाव करता है,थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है। (12)-प्याज: - फ़ंगस रोधी गुण हैं, हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है। जीवाणु नाशक है,केंसर विरोधी है खराब कोलेस्टरोल को घटाता है। (14)-अलसी के बीज:- मानसिक शक्ति वर्धक है, रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबीटीज में उपकारी है, हृदय की सुरक्षा करता है, पाचन शक्ति को ठीक करता है। (15)-संतरा: हृदय की सुरक्षा करता है, रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है,, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है (16)-टमाटर: कोलेस्टरोल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है,केंसर से बचाव करता है, हृदय की सुरक्षा । (17)-पानी: ☔ गुर्दे की पथरी नाशक है, वजन घटाने में सहायक है, केसर के विरुद्ध लडता है, त्वचा के चमक बढाता है। (18)-अखरोट: मूड उन्नत करन में सहायक है, मेमोरी पावर बढाता है,केंसर से लड सकता है, हृदय रोगों से बचाव करता है, कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है। (19)-तरबूज: स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लियेओ हितकारी है, रक्तचाप घटाता है, वजन कम करने में सहायक है। (20)-अंकुरित गेहूं: बडी आंत की केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्षा करता है, कोलेस्टरोल कम करता है, पाचन सुधारता है। (21)-चावल: किडनी स्टोन में हितकारी है, डायबीटीज में लाभदायक है,स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है, हृदय की सुरक्षा करता है। (22)-आलू बुखारा: हृदय रोगों से बचाव करता है, बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है। (23)-पाईनएपल: अतिसार(दस्त) रोकता है, वार्ट्स(मस्से) ठीक करता है, सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थि क्छरण रोकता है। पाचन सुधारता है। (24)-जौ,जई:- कोलेस्टरोल घटाता है,केंसर से लडता है, डायबीटीज में उपकारी है,,कब्ज प्रतिकारक् है ,त्वचा पर शाईनिंग लाता है। (25)-अंजीर:- रक्त चाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है, कोलेस्टरोल कम करता है, केंसर से लडता है,वजन घटाने में सहायक है। (26)-शकरकंद:- आंखों की रोशनी बढाता है,मूड उन्नत करता है, हड्डिया बलवान बनाता है, केंसर से लडता है । जीवन में शाकाहार अपनाएं और जीव हिंसा से बचें , रोगों से दूर और स्वस्थ रहें । 🌷🌷🌷🌹🌷🌷🌷🌹🌷🌷🌷🌹🌷🌷🌷

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पीलिया के प्रकार और उपचार 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ दोस्तों पिछले दो माह से मैंने सबसे ज्यादा केसेस अगर देखे है तो वह है पीलिया के। यह बीमारी शरीर पे धीरे धीरे अपना कब्ज़ा जमाती है। हमारे शरीर में रक्त के लाल कण अगर कम हो जाते है तो पीलिया हो जाता है। हमारे रक्त में बिलीरुबिन नाम का एक पिला पदार्थ होता है जो लाल कणो के नष्ट होने पर निकलता है तो शरीर में पीलापन आने लगता है। दूसरा कारन यह है की हमारा जिगर ठीक से कार्य नहीं करता एक यह भी पीलिया होने का संकेत है। कुछ दिनों तक जी मिचलाता है, शरीर सुस्त बेजान सा लगता है, आँखे और त्वचा जैसे नाख़ून पिले हो जाते है, बुखार रहता है, पेशाब पिला और मल बदबूदार होता है। पीलिया के रोग प्रकार 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 🔹वातज : इस पीलिया में आँखे और पेशाब में रुक्षता, कालापन तथा लाली दिखाई देती है, शरीर में सुई चुभने जैसी पीड़ा तथा कम्प, भ्रम के लक्षण दिखाई देते है। 🔹पित्तज : इस पीलिया में मलमूत्र और आँखों का रंग पिला हो जाता है। शरीर की कांति भी पिली हो जाती है। मल पतला होता है एवं जलन, प्यास और बुखार के लक्षण भी दिखाई पड़ते है। 🔹कफज : इस पीलिया में रोगी के मुख से कफ गिरता है, आलस्य, शरीर में भारीपन, सूजन और आँख, मुंह, त्वचा एवं पेशाब में सफेदी के लक्षण दिखते है। 🔹सन्निपतज : इस पीलिया में ऊपर के तीनो लक्षण दिखाई देते है और यह अत्यन्त कष्टदायक भी होता है। नाभि, मुंह और पाँव सूज जाते है। पेट के कीड़े, कफ तथा रकयुक्त मल निकलता है। आँखों पे, गालो पे और भोवो पे सूजन आती है। 🔋क्यों होता है पीलिया? खटाई, गर्म चटपटे और पित्त बढ़ाने वाले पदार्थ अधिक खाना, शराब अधिक पीना, दिन में ज्यादा सोना, खून की कमी तथा संक्रमण के कारन, खट्टे पदार्थो का अधिक सेवन, वात, कफ और पित्त कुपित होने से भी पीलिया होता है। 🍒भोजन तथा परहेज🍶 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ आराम करना, फलाहार, रसाहार, जूस का सेवन, चोकर के साथ आटे की रोटी, पुराने चावल, निम्बू पानी, ताजे एवं पके फल, अंजीर, किशमिश, गन्ने का रस, जौ चना का सत्तू, छाछ, मूंग की दाल, बैगन की सब्जी, मूली, खीरा आदि खाना चाहिए। पेट भर खाना, मैदे से बने पदार्थ, खटाई, उड़द की दाल, ठन्डे पानी से नहाना, लालमिर्च, मसाले, ताली हुयी चीजे, घी, मछली, मांस आदि से दुर रहे और रोगी को पूर्ण रूप से आराम करने दे तथा मानसिक कष्ट ना हो इस बात का ध्यान रखे। 🌿आयुर्वेद से उपचार🌿 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 🔘3 चम्मच नीम के ताजे पत्तो का रस, आधा चम्मच सोंठ का पावडर और 4 चम्मच शहद इन सब को साथ में मिलाकर सुबह खली पेट 5 दिन तक लेने से कैसा भी पीलिया हो ठीक हो जाता है है। 🔘गिलोय का 5 ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर देने से पीलिया रोग मीट जाता है। अगर गिलोय ना हो तो कालीमिर्च या त्रिफला का चूर्ण भी आप रोगी को दे सकते है। 🔘 100 ग्राम बड़ी हरड़ के छिलके और 100 ग्राम मिश्री को मिलकर चूर्ण बनकर 6-6 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम खाली पेट ताजे पानी के साथ खाने से पीलिया रोग मीट जाता है। 🔘 20 मिली तजा निम्बू का रस सुबह शाम रोगी को पिलाने से और 2-3 बुँदे आँखों में डालने से पीलिया रोग जड़ से खत्म हो जाता है। 🔘पुनर्नवा की जड़ को साफ करके छोटे छोटे टुकड़े काटकर गले में 21 टुकड़ो की माला बनाकर रोगी के गले में पहना दे और जब पीलिया का प्रकोप चला उतर जाये तब माला को उतार कर किसी पेड़ पे लटका कर रख दे। 🔘मूली में विटामिन सी, लोह, कैल्सियम, सोडियम, म्याग्नेसियम और क्लोरीन आदि खनिज होते है जो जिगर की क्रिया को ठीक करते है इसलिए पीलिया के रोगी को 100 मिली मूली के रस को गुड मिलाकर दिन में 3-4 बार देने से बहोत लाभ मिलाता है। 🔘 4 कलि लसुन को पीसकर आधा कप गर्म दूध में मिलाकर पिने से ऊपर से दूध पि ले। यह प्रयोग 4 दिन तक करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। ✏नोट : यह बीमारी साधारण बीमारी नहीं है। आप इसे जितना नजरअंदाज करोगे उतना ये आप के लिए घातक होगा। इस का जल्द से जल्द इलाज करे और रोगी को इस बीमारी से बचाए।

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P. Tiwari May 9, 2020

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